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Fatehpur News: फतेहपुर में स्कूल मर्जर को पेयरिंग बता रहीं हैं भारती त्रिपाठी, समझिए क्या है उनका गणित?

Fatehpur News: फतेहपुर में स्कूल मर्जर को पेयरिंग बता रहीं हैं भारती त्रिपाठी, समझिए क्या है उनका गणित?
फतेहपुर में स्कूलों का मर्जर नहीं पेयरिंग हो रही (दाएं BSA भारती त्रिपाठी फाइल फोटो): Image Credit Original Source

Fatehpur News In Hindi

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार ने कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक विद्यालयों की 'पेयरिंग' की प्रक्रिया शुरू की है. फतेहपुर में इस फैसले को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई है, जिसे लेकर BSA भारती त्रिपाठी ने सफाई दी है. उन्होंने कहा कि स्कूल बंद नहीं हो रहे बल्कि छात्रों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए उन्हें नजदीकी बेहतर स्कूलों में भेजा जा रहा है.

UP School Merger News: फतेहपुर जनपद में यूपी सरकार की 'स्कूल पेयरिंग' नीति को लेकर चर्चाओं का दौर गर्म है. कई जगह ग्रामीणों में इसे लेकर असमंजस है कि कहीं उनके गांव का स्कूल बंद तो नहीं हो रहा. इसी बीच बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) भारती त्रिपाठी (Bharti Tripathi) ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों को बंद नहीं किया जा रहा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से कम बच्चों वाले स्कूलों को पास के बड़े अधिक संख्या वाले विद्यालयों में भेजा जा रहा है. बताया जा रहा है इन विद्यालयों में छोटे बच्चों के लिए बाल वाटिका बनेगी

स्कूल बंद नहीं हो रहे, बेहतर शिक्षा की दिशा में कदम

बीएसए भारती त्रिपाठी ने युगान्तर प्रवाह से विशेष बातचीत में स्पष्ट किया कि सरकार स्कूल बंद नहीं कर रही है, बल्कि यह 'पेयरिंग' की प्रक्रिया है. जिन स्कूलों में छात्र संख्या 50 से कम है, वहां के बच्चों को नजदीकी स्कूलों में शिफ्ट किया जा रहा है.

इसका मकसद बच्चों को बेहतर संसाधन और अनुभवी शिक्षकों की देखरेख में पढ़ाई का अवसर देना है. उनका कहना है कि इस पहल से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और बच्चों को एक मजबूत शिक्षण माहौल मिलेगा.

भटपुरवा गांव में फैला भ्रम, BSA ने मौके पर जाकर की बात

भटपुरवा गांव में जब एक प्राथमिक विद्यालय के छात्रों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट किया गया, तो ग्रामीणों में भ्रम की स्थिति बन गई. लोगों को यह लगा कि उनका स्कूल बंद कर दिया गया है. इस पर बीएसए स्वयं मौके पर पहुंचीं और ग्रामीणों को पूरी जानकारी दी.

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उन्होंने बताया कि बच्चों को प्राथमिक विद्यालय नरायणपुर भेजा गया है, जहां अधिक शिक्षक और बेहतर संसाधन हैं. वहां पर बच्चों को और बेहतर शिक्षा मिलेगी. इसके बाद ग्रामीणों की चिंता कुछ हद तक कम हुई.

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जिले के 110 स्कूलों की हो चुकी है पेयरिंग

जिले अब तक कुल 110 ऐसे प्राथमिक विद्यालयों की पेयरिंग की जा चुकी है, जहां छात्रों की संख्या काफी कम थी. बीएसए ने बताया कि इन स्कूलों में कम शिक्षक तैनात थे और संसाधन भी सीमित थे. जबकि पास के बड़े विद्यालयों में शिक्षक और संसाधनों की बेहतर उपलब्धता है.

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ऐसे में यह निर्णय बच्चों के हित में है ताकि वे एक बेहतर माहौल में पढ़ाई कर सकें. सरकार इस पूरे काम को योजना के तहत कर रही है और इसका क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता से किया जा रहा है.

क्या है यूपी सरकार की 'स्कूल पेयरिंग' नीति

यूपी सरकार ने हाल ही में जारी किए गए आदेश में कहा है कि ऐसे सभी प्राइमरी स्कूल जहां बच्चों की संख्या 50 से कम है, उन्हें पास के ऐसे स्कूलों से जोड़ा जाएगा जहां अधिक बच्चे पढ़ते हैं. इस प्रक्रिया को 'पेयरिंग' कहा जा रहा है.

सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि शिक्षा विभाग के संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा. साथ ही, बच्चों को समुचित शिक्षा और माहौल मिलेगा जो एक छोटे और सीमित संसाधनों वाले स्कूल में नहीं मिल सकता. हालांकि इसका बहुत सारे शिक्षक संगठन विरोध कर रहे हैं और हाईकोर्ट से मामला ख़ारिज होकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है.

ग्रामीणों से अपील भ्रम न फैलाएं, बच्चों के भविष्य की सोचें

BSA भारती त्रिपाठी ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और इस योजना को समझें. उन्होंने कहा कि इस फैसले से बच्चों को नुकसान नहीं बल्कि फायदा होगा. उन्हें बेहतर शिक्षक, पढ़ाई का माहौल और संसाधन मिलेंगे.

शिक्षा विभाग बच्चों के भविष्य को लेकर पूरी तरह से गंभीर है और यही वजह है कि यह कदम उठाया गया है. उन्होंने कहा कि अगर किसी को कोई शंका हो तो वह सीधे बीएसए कार्यालय में संपर्क कर सकता है, पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी.

18 Jul 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

Fatehpur News: फतेहपुर में स्कूल मर्जर को पेयरिंग बता रहीं हैं भारती त्रिपाठी, समझिए क्या है उनका गणित?

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स्कूल बंद नहीं हो रहे, बेहतर शिक्षा की दिशा में कदम

बीएसए भारती त्रिपाठी ने युगान्तर प्रवाह से विशेष बातचीत में स्पष्ट किया कि सरकार स्कूल बंद नहीं कर रही है, बल्कि यह 'पेयरिंग' की प्रक्रिया है. जिन स्कूलों में छात्र संख्या 50 से कम है, वहां के बच्चों को नजदीकी स्कूलों में शिफ्ट किया जा रहा है.

इसका मकसद बच्चों को बेहतर संसाधन और अनुभवी शिक्षकों की देखरेख में पढ़ाई का अवसर देना है. उनका कहना है कि इस पहल से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और बच्चों को एक मजबूत शिक्षण माहौल मिलेगा.

भटपुरवा गांव में फैला भ्रम, BSA ने मौके पर जाकर की बात

भटपुरवा गांव में जब एक प्राथमिक विद्यालय के छात्रों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट किया गया, तो ग्रामीणों में भ्रम की स्थिति बन गई. लोगों को यह लगा कि उनका स्कूल बंद कर दिया गया है. इस पर बीएसए स्वयं मौके पर पहुंचीं और ग्रामीणों को पूरी जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि बच्चों को प्राथमिक विद्यालय नरायणपुर भेजा गया है, जहां अधिक शिक्षक और बेहतर संसाधन हैं. वहां पर बच्चों को और बेहतर शिक्षा मिलेगी. इसके बाद ग्रामीणों की चिंता कुछ हद तक कम हुई.

जिले के 110 स्कूलों की हो चुकी है पेयरिंग

जिले अब तक कुल 110 ऐसे प्राथमिक विद्यालयों की पेयरिंग की जा चुकी है, जहां छात्रों की संख्या काफी कम थी. बीएसए ने बताया कि इन स्कूलों में कम शिक्षक तैनात थे और संसाधन भी सीमित थे. जबकि पास के बड़े विद्यालयों में शिक्षक और संसाधनों की बेहतर उपलब्धता है.

ऐसे में यह निर्णय बच्चों के हित में है ताकि वे एक बेहतर माहौल में पढ़ाई कर सकें. सरकार इस पूरे काम को योजना के तहत कर रही है और इसका क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता से किया जा रहा है.

क्या है यूपी सरकार की 'स्कूल पेयरिंग' नीति

यूपी सरकार ने हाल ही में जारी किए गए आदेश में कहा है कि ऐसे सभी प्राइमरी स्कूल जहां बच्चों की संख्या 50 से कम है, उन्हें पास के ऐसे स्कूलों से जोड़ा जाएगा जहां अधिक बच्चे पढ़ते हैं. इस प्रक्रिया को 'पेयरिंग' कहा जा रहा है.

सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि शिक्षा विभाग के संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा. साथ ही, बच्चों को समुचित शिक्षा और माहौल मिलेगा जो एक छोटे और सीमित संसाधनों वाले स्कूल में नहीं मिल सकता. हालांकि इसका बहुत सारे शिक्षक संगठन विरोध कर रहे हैं और हाईकोर्ट से मामला ख़ारिज होकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है.

ग्रामीणों से अपील भ्रम न फैलाएं, बच्चों के भविष्य की सोचें

BSA भारती त्रिपाठी ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और इस योजना को समझें. उन्होंने कहा कि इस फैसले से बच्चों को नुकसान नहीं बल्कि फायदा होगा. उन्हें बेहतर शिक्षक, पढ़ाई का माहौल और संसाधन मिलेंगे.

शिक्षा विभाग बच्चों के भविष्य को लेकर पूरी तरह से गंभीर है और यही वजह है कि यह कदम उठाया गया है. उन्होंने कहा कि अगर किसी को कोई शंका हो तो वह सीधे बीएसए कार्यालय में संपर्क कर सकता है, पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी.

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