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UP Shiksha Mitra News: यूपी के 1.40 लाख शिक्षा मित्रों का बढ़ेगा मानदेय, इलाहाबाद हाईकोर्ट सरकार पर हुआ नाराज

UP Shiksha Mitra News: यूपी के 1.40 लाख शिक्षा मित्रों का बढ़ेगा मानदेय, इलाहाबाद हाईकोर्ट सरकार पर हुआ नाराज
यूपी के शिक्षा मित्रों के मानदेय को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त सरकार से मांगा जवाब (फाइल फोटो): Image Yugantar Pravah

UP News In Hindi

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के 1.40 लाख शिक्षा मित्रों के लिए राहत भरी खबर आई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार को उनके मानदेय बढ़ाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो बेसिक शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारी 18 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हों.

UP Shiksha Mitra News: यूपी के शिक्षा मित्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि शिक्षा मित्रों का सम्मानजनक मानदेय बढ़ाया जाए और अनुपालन का हलफनामा दाखिल किया जाए. यदि आदेश का पालन नहीं होता है तो 18 सितंबर को बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कोर्ट में पेश होना पड़ेगा.

शिक्षा मित्रों की मानदेय वृद्धि पर हाईकोर्ट का सख्त रुख

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की एकल पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मांगे गए बार-बार समय पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि शिक्षा मित्रों का मुद्दा केवल वित्तीय बोझ का नहीं बल्कि उनके सम्मान और आजीविका का सवाल है. वाराणसी निवासी विवेकानंद की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार को 18 सितंबर तक मानदेय वृद्धि पर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया.

18 सितंबर को कोर्ट में तलब होंगे शीर्ष अधिकारी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि मानदेय वृद्धि पर आदेश का पालन नहीं होता है तो बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार, शिक्षा महानिदेशक कंचन वर्मा, निदेशक बेसिक शिक्षा प्रताप सिंह बघेल और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद सुरेंद्र कुमार तिवारी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा. यह आदेश शिक्षा मित्रों की स्थिति को लेकर कोर्ट की गंभीरता को दर्शाता है.

सरकार ने मांगा एक महीने का समय

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि यह मामला लगभग 1.40 लाख शिक्षा मित्रों से जुड़ा है और मानदेय वृद्धि करने पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा. इस कारण विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच बातचीत चल रही है ताकि पूर्व में दिए गए आदेश का समग्र अनुपालन किया जा सके. सरकार ने कोर्ट से एक महीने का और समय मांगा, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर असहमति जताई और सख्त रुख अपनाया.

Read More: Kanpur News: मंदिर के पास प्रतिबंधित जीवों के मिले अवशेष, 4 पुलिसकर्मी निलंबित

जितेंद्र कुमार भारती केस का हवाला

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि जितेंद्र कुमार भारती केस में पारित आदेश का पूरी तरह पालन होना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि यह मामला लंबे समय से लटका हुआ है और सरकार लगातार समय मांग रही है. शिक्षा मित्रों को सम्मानजनक मानदेय मिलना उनका संवैधानिक अधिकार है, इसे टाला नहीं जा सकता.

Read More: Fatehpur News: फतेहपुर में भाजपा नेता पति समेत 23 पर दहेज उत्पीड़न का मुकदमा, परिवारिक विवाद ने लिया गंभीर रूप

क्या है शिक्षा मित्रों के लिए आर्थिक चुनौतियां?

फतेहपुर शिक्षा मित्र संघ के जिला अध्यक्ष सुशील तिवारी कहते हैं कि शिक्षा मित्र लंबे समय से मानदेय बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं. फिलहाल उन्हें मिलने वाला मानदेय इतना कम है कि परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है.

Read More: Fatehpur News: फतेहपुर के मिर्जापुर भिटारी में सैकड़ों लोगों को वितरित किए गए कंबल, बड़ी संख्या में रही लोगों की सहभागिता

ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले कई शिक्षा मित्रों को अतिरिक्त काम करना पड़ता है ताकि परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी हो सकें. कई बार उन्हें बच्चों की पढ़ाई और घर की रोजमर्रा की ज़िम्मेदारियों के बीच कर्ज लेना पड़ता है. कोर्ट के इस आदेश से उनमें नई उम्मीद जगी है कि अब उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का मौका मिलेगा.

24 Aug 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

UP Shiksha Mitra News: यूपी के 1.40 लाख शिक्षा मित्रों का बढ़ेगा मानदेय, इलाहाबाद हाईकोर्ट सरकार पर हुआ नाराज

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UP Shiksha Mitra News: यूपी के शिक्षा मित्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि शिक्षा मित्रों का सम्मानजनक मानदेय बढ़ाया जाए और अनुपालन का हलफनामा दाखिल किया जाए. यदि आदेश का पालन नहीं होता है तो 18 सितंबर को बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कोर्ट में पेश होना पड़ेगा.

शिक्षा मित्रों की मानदेय वृद्धि पर हाईकोर्ट का सख्त रुख

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की एकल पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मांगे गए बार-बार समय पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि शिक्षा मित्रों का मुद्दा केवल वित्तीय बोझ का नहीं बल्कि उनके सम्मान और आजीविका का सवाल है. वाराणसी निवासी विवेकानंद की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार को 18 सितंबर तक मानदेय वृद्धि पर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया.

18 सितंबर को कोर्ट में तलब होंगे शीर्ष अधिकारी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि मानदेय वृद्धि पर आदेश का पालन नहीं होता है तो बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार, शिक्षा महानिदेशक कंचन वर्मा, निदेशक बेसिक शिक्षा प्रताप सिंह बघेल और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद सुरेंद्र कुमार तिवारी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा. यह आदेश शिक्षा मित्रों की स्थिति को लेकर कोर्ट की गंभीरता को दर्शाता है.

सरकार ने मांगा एक महीने का समय

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि यह मामला लगभग 1.40 लाख शिक्षा मित्रों से जुड़ा है और मानदेय वृद्धि करने पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा. इस कारण विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच बातचीत चल रही है ताकि पूर्व में दिए गए आदेश का समग्र अनुपालन किया जा सके. सरकार ने कोर्ट से एक महीने का और समय मांगा, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर असहमति जताई और सख्त रुख अपनाया.

जितेंद्र कुमार भारती केस का हवाला

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि जितेंद्र कुमार भारती केस में पारित आदेश का पूरी तरह पालन होना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि यह मामला लंबे समय से लटका हुआ है और सरकार लगातार समय मांग रही है. शिक्षा मित्रों को सम्मानजनक मानदेय मिलना उनका संवैधानिक अधिकार है, इसे टाला नहीं जा सकता.

क्या है शिक्षा मित्रों के लिए आर्थिक चुनौतियां?

फतेहपुर शिक्षा मित्र संघ के जिला अध्यक्ष सुशील तिवारी कहते हैं कि शिक्षा मित्र लंबे समय से मानदेय बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं. फिलहाल उन्हें मिलने वाला मानदेय इतना कम है कि परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है.

ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले कई शिक्षा मित्रों को अतिरिक्त काम करना पड़ता है ताकि परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी हो सकें. कई बार उन्हें बच्चों की पढ़ाई और घर की रोजमर्रा की ज़िम्मेदारियों के बीच कर्ज लेना पड़ता है. कोर्ट के इस आदेश से उनमें नई उम्मीद जगी है कि अब उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का मौका मिलेगा.

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