UP STF News: यूपी में एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई! फतेहपुर की ARTO, पीटीओ और खनन अधिकारी सहित तीन जिलों में FIR, करोड़ों का सिंडिकेट बेनकाब
उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने ओवरलोड और अवैध खनन के करोड़ों के सिंडिकेट पर बड़ी कार्रवाई की है. रायबरेली, फतेहपुर और उन्नाव में एक साथ मुकदमे दर्ज हुए हैं. फतेहपुर की ARTO, पीटीओ और खनन अधिकारी पर भी बड़ी कार्रवाई की गई है. जांच में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध वसूली और ओवरलोड ट्रकों को पास कराने का खुलासा हुआ है. शासन के निर्देश पर एक साथ हुई बड़ी कार्रवाई से चारों ओर हड़कंप मचा हुआ है.
UP STF News: यूपी एसटीएफ ने शासन के निर्देश पर ओवरलोड और अवैध खनन के संगठित नेटवर्क पर शिकंजा कस दिया है. फतेहपुर, रायबरेली और उन्नाव में एक साथ कार्रवाई करते हुए एसटीएफ ने करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है. फतेहपुर के खनन अधिकारी, ARTO और पीटीओ सहित कई लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है. एसटीएफ ने इस अवैध नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और सरकारी विभागों की संलिप्तता की जांच जारी है. अधिकारियों ने अपने फोन बंद कर अंडरग्राउंड हो गए हैं.
रायबरेली की FIR में फतेहपुर के अधिकारी भी नामजद, बड़ा खुलासा
रायबरेली के लालगंज कोतवाली में दर्ज FIR ने पूरे परिवहन तंत्र को हिला दिया है. एफआईआर एसटीएफ के उपनिरीक्षक अमित कुमार तिवारी की ओर से दर्ज कराई गई, जिसमें न सिर्फ रायबरेली बल्कि फतेहपुर के अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं.

फतेहपुर में एसटीएफ की छापेमारी, दो गिरफ्तार, बबलू पटेल के जरिए होता था ‘पास सिस्टम’
उन्नाव से पांच गिरफ्तार, दो साल से चल रहा था भ्रष्टाचार का धंधा
कानपुर एसटीएफ यूनिट और सदर कोतवाली पुलिस ने उन्नाव के शुक्लागंज क्षेत्र में रात दो बजे घेराबंदी कर पांच लोगों को गिरफ्तार किया. पकड़े गए आरोपियों में मोहम्मद तारिक हुसैन, सुनील सचान, प्रदीप सिंह, नियाज अहमद उर्फ अमन और श्रीकिशन शामिल हैं. पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे दो साल से ओवरलोड ट्रकों को पास कराने का काम कर रहे थे. इसके बदले वाहन चालकों से वसूली की जाती थी, जिसका हिस्सा परिवहन विभाग के अधिकारियों तक पहुंचाया जाता था. मोबाइल, व्हाट्सएप और यूपीआई के जरिए लेनदेन होता था. गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि इसी अवैध आय से उन्होंने “मारुति प्रॉक्स” और “किया क्रेन्स” जैसी महंगी कारें खरीदीं, जिनका इस्तेमाल ट्रक पास कराने के दौरान किया जाता था.
लाखों की वसूली, 141 वाहनों की सूची और बैंक पासबुक से खुला भ्रष्टाचार का जाल
एसटीएफ की जांच में मोहित सिंह नामक दलाल की भूमिका सबसे अहम पाई गई. रायबरेली और फतेहपुर दोनों जिलों के अधिकारी उससे जुड़े हुए थे. मोहित के पास से 141 वाहनों की सूची, सात बैंक कार्ड, एक पासबुक, पैन कार्ड, आधार कार्ड और ₹4270 नकद बरामद हुए. पूछताछ में मोहित ने बताया कि फतेहपुर की एआरटीओ पुष्पांजली के चालक सिकंदर को ₹2500 प्रति गाड़ी, पीटीओ अखिलेश चतुर्वेदी के चालक अशोक तिवारी को ₹2500 प्रति गाड़ी, रायबरेली के एआरटीओ अंबुज के दीवान नौशाद को ₹3500 प्रति गाड़ी, और पीटीओ रेहाना के चालक सुशील को ₹1500 प्रति गाड़ी के हिसाब से देता था. एसटीएफ को कई खातों और मोबाइल लेनदेन के रिकॉर्ड मिले हैं, जो इस संगठित अवैध नेटवर्क का ठोस प्रमाण हैं.
शासन के निर्देश पर शुरू हुई तिहरी कार्रवाई, कई अधिकारी रडार पर
एसटीएफ को कई महीनों से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ जिलों में परिवहन और खनन विभाग के अधिकारी ट्रक ऑपरेटरों से सांठगांठ कर रहे हैं. शासन के आदेश पर तीन जिलों रायबरेली, फतेहपुर और उन्नाव में एक साथ कार्रवाई की गई.
तीनों जिलों में कई अफसरों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. सूत्रों का कहना है कि यह नेटवर्क प्रदेश के अन्य जिलों तक फैला हुआ है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं. मुख्यमंत्री कार्यालय ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
UP STF News: यूपी में एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई! फतेहपुर की ARTO, पीटीओ और खनन अधिकारी सहित तीन जिलों में FIR, करोड़ों का सिंडिकेट बेनकाब
UP STF News: यूपी एसटीएफ ने शासन के निर्देश पर ओवरलोड और अवैध खनन के संगठित नेटवर्क पर शिकंजा कस दिया है. फतेहपुर, रायबरेली और उन्नाव में एक साथ कार्रवाई करते हुए एसटीएफ ने करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है. फतेहपुर के खनन अधिकारी, ARTO और पीटीओ सहित कई लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है. एसटीएफ ने इस अवैध नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और सरकारी विभागों की संलिप्तता की जांच जारी है. अधिकारियों ने अपने फोन बंद कर अंडरग्राउंड हो गए हैं.
रायबरेली की FIR में फतेहपुर के अधिकारी भी नामजद, बड़ा खुलासा
रायबरेली के लालगंज कोतवाली में दर्ज FIR ने पूरे परिवहन तंत्र को हिला दिया है. एफआईआर एसटीएफ के उपनिरीक्षक अमित कुमार तिवारी की ओर से दर्ज कराई गई, जिसमें न सिर्फ रायबरेली बल्कि फतेहपुर के अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं.
एफआईआर में फतेहपुर की एआरटीओ प्रवर्तन पुष्पांजली, उनके चालक सिकंदर, पीटीओ अखिलेश चतुर्वेदी, उनके चालक अशोक तिवारी, और खनन अधिकारी के सहयोगियों के नाम दर्ज हैं. इसके अलावा रायबरेली के एआरटीओ अंबुज, उनका दीवान नौशाद, पीटीओ रेहाना और उनका चालक सुशील सहित कुल 11 लोगों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है. जांच में पाया गया कि इन अफसरों की मिलीभगत से ट्रक मालिकों और परिवहनकर्ताओं से हर माह लाखों रुपये की वसूली की जाती थी. यह रकम बैंक खाते और नकद, दोनों माध्यमों से बंटती थी.
फतेहपुर में एसटीएफ की छापेमारी, दो गिरफ्तार, बबलू पटेल के जरिए होता था ‘पास सिस्टम’
एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ की टीम ने निरीक्षक दीपक सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए थरियांव थाना क्षेत्र में धीरेंद्र सिंह और विक्रम को गिरफ्तार किया. मुखबिर की सूचना पर की गई कार्रवाई में ओवरलोड मोरंग से भरा ट्रक, दो मोबाइल और नकदी बरामद की गई. पूछताछ में धीरेंद्र सिंह ने खुलासा किया कि वह फतेहपुर के एआरटीओ, पीटीओ और खनन अधिकारियों के ड्राइवरों के साथ मिलकर प्रति ट्रक ₹7000 तक वसूलता था. यह रकम बबलू पटेल नामक व्यक्ति के माध्यम से एआरटीओ तक पहुंचाई जाती थी. एसटीएफ ने मोबाइल में व्हाट्सएप चैट, रसीदें और ट्रकों की सूची बरामद की, जिसमें “आरटीओ बबलू पटेल” नाम से संवाद मौजूद था. चैट में ट्रक नंबरों और रकम की विस्तृत जानकारी थी, जिससे पूरे नेटवर्क की पुष्टि हुई. इस कार्रवाई में खनन अधिकारी, खनन अधिकारी का गनर राजू, बबलू पटेल, मुकेश तिवारी, धीरेन्द्र सिंह, विक्रम के नाम शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक हर महीने जिले से करीब 5 करोड़ की वसूली होती थी जिससे सरकार को करोड़ों का नुकसान होता था.
उन्नाव से पांच गिरफ्तार, दो साल से चल रहा था भ्रष्टाचार का धंधा
कानपुर एसटीएफ यूनिट और सदर कोतवाली पुलिस ने उन्नाव के शुक्लागंज क्षेत्र में रात दो बजे घेराबंदी कर पांच लोगों को गिरफ्तार किया. पकड़े गए आरोपियों में मोहम्मद तारिक हुसैन, सुनील सचान, प्रदीप सिंह, नियाज अहमद उर्फ अमन और श्रीकिशन शामिल हैं. पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे दो साल से ओवरलोड ट्रकों को पास कराने का काम कर रहे थे. इसके बदले वाहन चालकों से वसूली की जाती थी, जिसका हिस्सा परिवहन विभाग के अधिकारियों तक पहुंचाया जाता था. मोबाइल, व्हाट्सएप और यूपीआई के जरिए लेनदेन होता था. गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि इसी अवैध आय से उन्होंने “मारुति प्रॉक्स” और “किया क्रेन्स” जैसी महंगी कारें खरीदीं, जिनका इस्तेमाल ट्रक पास कराने के दौरान किया जाता था.
लाखों की वसूली, 141 वाहनों की सूची और बैंक पासबुक से खुला भ्रष्टाचार का जाल
एसटीएफ की जांच में मोहित सिंह नामक दलाल की भूमिका सबसे अहम पाई गई. रायबरेली और फतेहपुर दोनों जिलों के अधिकारी उससे जुड़े हुए थे. मोहित के पास से 141 वाहनों की सूची, सात बैंक कार्ड, एक पासबुक, पैन कार्ड, आधार कार्ड और ₹4270 नकद बरामद हुए. पूछताछ में मोहित ने बताया कि फतेहपुर की एआरटीओ पुष्पांजली के चालक सिकंदर को ₹2500 प्रति गाड़ी, पीटीओ अखिलेश चतुर्वेदी के चालक अशोक तिवारी को ₹2500 प्रति गाड़ी, रायबरेली के एआरटीओ अंबुज के दीवान नौशाद को ₹3500 प्रति गाड़ी, और पीटीओ रेहाना के चालक सुशील को ₹1500 प्रति गाड़ी के हिसाब से देता था. एसटीएफ को कई खातों और मोबाइल लेनदेन के रिकॉर्ड मिले हैं, जो इस संगठित अवैध नेटवर्क का ठोस प्रमाण हैं.
शासन के निर्देश पर शुरू हुई तिहरी कार्रवाई, कई अधिकारी रडार पर
एसटीएफ को कई महीनों से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ जिलों में परिवहन और खनन विभाग के अधिकारी ट्रक ऑपरेटरों से सांठगांठ कर रहे हैं. शासन के आदेश पर तीन जिलों रायबरेली, फतेहपुर और उन्नाव में एक साथ कार्रवाई की गई.
तीनों जिलों में कई अफसरों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. सूत्रों का कहना है कि यह नेटवर्क प्रदेश के अन्य जिलों तक फैला हुआ है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं. मुख्यमंत्री कार्यालय ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.