
Fatehpur News: शिक्षा की हिलती बुनियाद ! यूनिफॉर्म की राह देखते 5000 बच्चे, किताबों की तलाश में खाली बस्ते
Fatehpur News In Hindi
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर (Fatehpur) में शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है. जिले के 5000 से अधिक बच्चों को शैक्षिक सत्र में यूनिफॉर्म की राशि नहीं मिली, वहीं सत्र में अभी भी किताबों की आपूर्ति अधूरी है. शिक्षक खुद किताबें ढोते नज़र आ रहे हैं. जानिए सरकारी सिस्टम के दावे क्या कहते हैं?
Fatehpur News: बेसिक शिक्षा विभाग की योजनाएं कागजों में 'शत-प्रतिशत' सफल नजर आती हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे उलट है. शैक्षिक सत्र 2024-25 में जिले के 5000 से अधिक बच्चों को यूनिफॉर्म की धनराशि नहीं मिली, वहीं नए सत्र 2025-26 की किताबें स्कूलों तक पहुंचाने के दावे भी फेल होते नजर आ रहे हैं.
योजना धरातल पर, लेकिन लाभ अधर में

लेकिन 31 मार्च को वित्तीय वर्ष के समापन के साथ ही यह खुलासा हुआ कि पांच हजार से अधिक बच्चों के खाते अब भी खाली हैं. ड्रेस की आस में पूरा साल बीत गया, लेकिन सरकारी सहायता नहीं पहुंची. सूत्रों की माने तो यह आंकड़ा करीब दस हजार के आसपास पहुंच रहा है.
जिम्मेदारी से बच रहे जिम्मेदार, कारण वही पुराना

ब्लॉकवार आंकड़े – इन इलाकों में सबसे ज्यादा बच्चे वंचित
- हसवां – 1193
- देवमई – 950
- ऐराया – 700
- तेलियानी – 600
- खजुहा – 550
- धाता – 235
- हथगाम – 250
- बहुआ – 190
- विजयीपुर – 150

किताबों का सफर, बीआरसी से बैग तक

शिक्षक खुद रिक्शा, विक्रम और निजी वाहनों से किताबें ढो रहे हैं. बहुआ ब्लॉक में बीआरसी से किताबें ले जाते शिक्षक जब कैमरे में कैद हुए तो सारे आंकड़े खुद बा खुद निकलने लगे. किताबें भले ब्लॉक तक आ गई हों, लेकिन स्कूल तक नहीं पहुंची हैं.

सवालों के घेरे में व्यवस्था
क्या बच्चों को पढ़ाई की बुनियादी जरूरतें देना भी अब चुनौती बन चुका है? जब ड्रेस और किताबों जैसी प्राथमिक सुविधाएं समय पर न मिलें, तो शिक्षा की गुणवत्ता की उम्मीद करना बेमानी हो जाता है.
सरकार की योजनाएं बेहतरीन हैं, लेकिन क्रियान्वयन की सुस्ती इनका मज़ाक बना रही है. ज़रूरत है जवाबदेही की, ईमानदार सिस्टम की और इस सोच की कि बच्चों की शिक्षा से कोई समझौता नहीं होगा.
