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Fatehpur News: फतेहपुर में तीन दशक का संघर्ष खत्म ! गाजीपुर-विजयीपुर मार्ग पर फर्राटा भरेंगे वाहन, 90 करोड़ हुए खर्च

Fatehpur News: फतेहपुर में तीन दशक का संघर्ष खत्म ! गाजीपुर-विजयीपुर मार्ग पर फर्राटा भरेंगे वाहन, 90 करोड़ हुए खर्च
फतेहपुर के गाजीपुर विजयीपुर मार्ग में जल्द फर्राटा भरेंगे वाहन (फाइल फोटो): Image Credit Original Source

Fatehpur News In Hindi

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की गाजीपुर-विजयीपुर सड़क का तीन दशक लंबा इंतजार आखिरकार खत्म होने जा रहा है. इस रास्ते पर सफर करना ग्रामीणों के लिए रोज की पीड़ा थी. बरसात में दलदल, मरीजों को समय पर अस्पताल न ले जा पाना और बच्चों की पढ़ाई में अड़चन सब कुछ इस सड़क की जर्जर हालत ने झेलने पर मजबूर किया. अब 90 करोड़ की लागत से बन रही नई सड़क 30 सितंबर तक पूरी तरह तैयार हो जाएगी.

Fatehpur News: यूपी के फतेहपुर जिले की यमुना कटरी के सैकड़ों गांवों के लिए गाजीपुर-विजयीपुर सड़क किसी जीवनरेखा से कम नहीं. लेकिन बीते तीस सालों तक यह रास्ता जख्म बना रहा. बरसात आते ही कीचड़ और गड्ढों से पटी सड़क पर न तो एंबुलेंस निकल पाती थी, न ही मरीज समय पर अस्पताल पहुंच पाते थे.

कई जिंदगियां समय से इलाज न मिलने पर बुझ गईं. ग्रामीण बच्चे शिक्षा से वंचित रहे और किसानों की उपज बाजार तक पहुंचने से पहले खराब हो जाती थी. अब आखिरकार यह दर्द खत्म होने वाला है क्योंकि सड़क का 98 फीसदी काम पूरा हो चुका है और 30 सितंबर तक यह पूरी तरह तैयार हो जाएगी.

तीन दशक की पीड़ा: सड़क के नाम पर दलदल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गाजीपुर-विजयीपुर मार्ग को यमुना कटरी क्षेत्र की रीढ़ माना जाता है, लेकिन इस सड़क ने तीन दशक तक ग्रामीणों को केवल दर्द ही दिया. बारिश आते ही यह दलदल बन जाता था. बीमार पड़ने पर लोग मरीज को खाट पर डालकर कई किलोमीटर तक पैदल लाने पर मजबूर होते थे. कई बार एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती और मरीजों को देर हो जाती थी. गांववालों की मानें तो सड़क की खस्ता हालत ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को बोझिल बना दिया था.

मरीजों की सांसों से जुड़ा रहा संघर्ष

गांव की महिलाएं और बुजुर्ग इस सड़क के दर्द की गवाही देते हैं. गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाना किसी युद्ध से कम नहीं होता था. बारिश में यह सफर और भी जानलेवा बन जाता था. एंबुलेंस आधे रास्ते में फंस जाती और लोग मजबूरन किसी तरह संघर्ष करते औरमरीज को अस्पताल पहुंचाते. इलाज मिलने तक कई जिंदगियां चुपचाप बुझ गईं. गांववालों के लिए सड़क सिर्फ रास्ता नहीं थी, यह उनकी सांसों से जुड़ा सवाल बन गई थी.

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शिक्षा और रोजगार भी रहा प्रभावित

जर्जर सड़क ने बच्चों की शिक्षा पर भी गहरा असर डाला. स्कूल-कॉलेज तक पहुंचने में घंटों लग जाते. बरसात में तो बच्चों का पढ़ाई के लिए घर से निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता. किसान अपनी फसल मंडियों तक ले जाने में पिछड़ जाते और दाम घट जाते. रोजगार की तलाश में बाहर जाने वालों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता. विकास की रफ्तार मानो इस सड़क के गड्ढों में फंसकर रह गई थी.

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लंबे संघर्ष और आंदोलनों के बाद मिली मंजूरी

गांववालों का आक्रोश कई बार सड़कों पर उतर चुका है. बुंदेलखंड समिति ने सड़क निर्माण को लेकर धरना-प्रदर्शन और अनशन तक किया. ग्रामीणों की मांग दशकों से चली आ रही थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई. आखिरकार फरवरी 2024 में सरकार ने 90 करोड़ का बजट स्वीकृत किया और लोकनिर्माण मंत्री जितिन प्रसाद ने इसकी घोषणा की. तीन मार्च से काम शुरू हुआ और अब यह अपने अंतिम चरण में है.

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उम्मीदों की खुलेगी नई राह 

33.75 किमी लंबी यह सड़क सदर, अयाह शाह और खागा विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ेगी. 98 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और सिर्फ कटरी से कौंडर तक तीन किमी हिस्से पर डामरीकरण शेष है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीडब्ल्यूडी एक्सईएन एके शील ने कहा कि 30 सितंबर तक सड़क पूरी तरह तैयार होगी.

इसके बन जाने से इटोलीपुर, मोगरीबाग, लोधौरा, बरौली, नरैनी, काशीपुर, रायपुर भसरौल, सरकंड़ी, कौंडर, असोथर, रमशोलेपुर, कटरा, बेरुई, लक्ष्मणपुर सहित 100 से अधिक गांव सीधे लाभान्वित होंगे. ग्रामीण अब बिना डर-डर के सफर कर पाएंगे और विकास की नई राह खुलेगी.

26 Sep 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

Fatehpur News: फतेहपुर में तीन दशक का संघर्ष खत्म ! गाजीपुर-विजयीपुर मार्ग पर फर्राटा भरेंगे वाहन, 90 करोड़ हुए खर्च

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कई जिंदगियां समय से इलाज न मिलने पर बुझ गईं. ग्रामीण बच्चे शिक्षा से वंचित रहे और किसानों की उपज बाजार तक पहुंचने से पहले खराब हो जाती थी. अब आखिरकार यह दर्द खत्म होने वाला है क्योंकि सड़क का 98 फीसदी काम पूरा हो चुका है और 30 सितंबर तक यह पूरी तरह तैयार हो जाएगी.

तीन दशक की पीड़ा: सड़क के नाम पर दलदल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गाजीपुर-विजयीपुर मार्ग को यमुना कटरी क्षेत्र की रीढ़ माना जाता है, लेकिन इस सड़क ने तीन दशक तक ग्रामीणों को केवल दर्द ही दिया. बारिश आते ही यह दलदल बन जाता था. बीमार पड़ने पर लोग मरीज को खाट पर डालकर कई किलोमीटर तक पैदल लाने पर मजबूर होते थे. कई बार एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती और मरीजों को देर हो जाती थी. गांववालों की मानें तो सड़क की खस्ता हालत ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को बोझिल बना दिया था.

मरीजों की सांसों से जुड़ा रहा संघर्ष

गांव की महिलाएं और बुजुर्ग इस सड़क के दर्द की गवाही देते हैं. गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाना किसी युद्ध से कम नहीं होता था. बारिश में यह सफर और भी जानलेवा बन जाता था. एंबुलेंस आधे रास्ते में फंस जाती और लोग मजबूरन किसी तरह संघर्ष करते औरमरीज को अस्पताल पहुंचाते. इलाज मिलने तक कई जिंदगियां चुपचाप बुझ गईं. गांववालों के लिए सड़क सिर्फ रास्ता नहीं थी, यह उनकी सांसों से जुड़ा सवाल बन गई थी.

शिक्षा और रोजगार भी रहा प्रभावित

जर्जर सड़क ने बच्चों की शिक्षा पर भी गहरा असर डाला. स्कूल-कॉलेज तक पहुंचने में घंटों लग जाते. बरसात में तो बच्चों का पढ़ाई के लिए घर से निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता. किसान अपनी फसल मंडियों तक ले जाने में पिछड़ जाते और दाम घट जाते. रोजगार की तलाश में बाहर जाने वालों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता. विकास की रफ्तार मानो इस सड़क के गड्ढों में फंसकर रह गई थी.

लंबे संघर्ष और आंदोलनों के बाद मिली मंजूरी

गांववालों का आक्रोश कई बार सड़कों पर उतर चुका है. बुंदेलखंड समिति ने सड़क निर्माण को लेकर धरना-प्रदर्शन और अनशन तक किया. ग्रामीणों की मांग दशकों से चली आ रही थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई. आखिरकार फरवरी 2024 में सरकार ने 90 करोड़ का बजट स्वीकृत किया और लोकनिर्माण मंत्री जितिन प्रसाद ने इसकी घोषणा की. तीन मार्च से काम शुरू हुआ और अब यह अपने अंतिम चरण में है.

उम्मीदों की खुलेगी नई राह 

33.75 किमी लंबी यह सड़क सदर, अयाह शाह और खागा विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ेगी. 98 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और सिर्फ कटरी से कौंडर तक तीन किमी हिस्से पर डामरीकरण शेष है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीडब्ल्यूडी एक्सईएन एके शील ने कहा कि 30 सितंबर तक सड़क पूरी तरह तैयार होगी.

इसके बन जाने से इटोलीपुर, मोगरीबाग, लोधौरा, बरौली, नरैनी, काशीपुर, रायपुर भसरौल, सरकंड़ी, कौंडर, असोथर, रमशोलेपुर, कटरा, बेरुई, लक्ष्मणपुर सहित 100 से अधिक गांव सीधे लाभान्वित होंगे. ग्रामीण अब बिना डर-डर के सफर कर पाएंगे और विकास की नई राह खुलेगी.

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