Fatehpur News: हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हटा कब्जा ! प्रशासनिक मिलीभगत के चलते नहीं हुई 67 की कार्रवाई, दाखिल है PIL
फतेहपुर के नौगांव गांव में ग्रामसभा की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश और तहसीलदार के अंतिम फैसले के बावजूद महीनों बाद भी कब्जा नहीं हटाया गया है. इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक मिलीभगत और राजस्व विभाग की निष्क्रियता के आरोप लग रहे हैं. उमेश कुमार ने SDM सदर से तत्काल कार्रवाई और क्षतिपूर्ति वसूली की मांग की है.
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सरकारी जमीनों पर कब्जा हटाने की कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है. ग्राम नौगांव की ग्रामसभा भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1 माह के भीतर कार्रवाई का आदेश दिया था, लेकिन आदेश के महीनों बाद भी जमीन कब्जामुक्त नहीं हो सकी. यह मामला अब प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि मिलीभगत की आशंका को और मजबूत कर रहा है.
PIL दाखिल होने के बाद हाईकोर्ट ने दिए थे स्पष्ट निर्देश

तहसीलदार का अंतिम आदेश, फिर भी कार्रवाई शून्य
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में तहसीलदार और सहायक कलेक्टर सदर फतेहपुर ने वाद संख्या 12170/2023 के तहत सुनवाई की. इसके बाद 28 मार्च 2024 को अंतिम आदेश पारित किया गया. आदेश में ग्राम नौगांव स्थित ग्रामसभा भूमि गाटा संख्या 632 क्षेत्रफल 0.0080 हेक्टेयर नवीन परती से प्रतिवादी शिवम पाण्डेय और नवनीत पाण्डेय को अवैध कब्जे से बेदखल करने के निर्देश दिए गए. साथ ही 16,000 रुपये की क्षतिपूर्ति भी आरोपित की गई. लेकिन आदेश पारित होने के बावजूद जमीन पर कब्जा आज भी बना हुआ है.
महीनों बाद भी कब्जा बरकरार, राजस्व विभाग पर उठे सवाल
ग्रामसभा की जमीन पर कब्जा, गांव में आक्रोश
ग्रामसभा की जमीन गांव की सार्वजनिक संपत्ति होती है, जिसका उपयोग विकास और सामूहिक जरूरतों के लिए होना चाहिए. जब ऐसी जमीन पर कब्जा होता है तो गांव के हित प्रभावित होते हैं. नौगांव गांव में इस मामले को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं बल्कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और प्रशासन की निष्क्रियता का बड़ा उदाहरण बन गया है. लोग मांग कर रहे हैं कि कब्जाधारियों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो.
उमेश कुमार ने SDM से की तत्काल कार्रवाई की मांग
PIL कर्ता उमेश कुमार ने उप जिलाधिकारी सदर तहसील फतेहपुर को पत्र सौंपकर मांग की है कि हाईकोर्ट के आदेश दिनांक 13 फरवरी 2023 के अनुरूप तत्काल कार्रवाई की जाए. उन्होंने आग्रह किया है कि तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को निर्देशित कर ग्रामसभा भूमि से तुरंत अवैध कब्जा हटवाया जाए. साथ ही 16,000 रुपये की क्षतिपूर्ति की वसूली कराई जाए और आदेश अनुपालन की रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजी जाए.
हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना, प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप
सबसे गंभीर सवाल यही है कि जब हाईकोर्ट और तहसीलदार दोनों के आदेश मौजूद हैं, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही. ग्रामीणों का कहना है कि यह प्रशासनिक सिस्टम की विफलता है. यदि सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराने में ही अधिकारी असफल हैं तो आम जनता न्याय के लिए कहां जाए. इस मामले ने प्रशासनिक मिलीभगत और भ्रष्टाचार की आशंका को और गहरा कर दिया है.
