
Fatehpur News: CMO डॉ. यूबी सिंह के खिलाफ डॉक्टरों ने खोला मोर्चा, सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी ! कम समय में आरोपों से घिरे उदयभान
फतेहपुर में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उदयभान सिंह के खिलाफ चिकित्साधिकारियों में नाराजगी सामने आई है. डॉक्टरों ने प्रशासनिक हस्तक्षेप, बिना नोटिस वेतन रोकने, प्रभारियों के अधिकार सीमित करने और तबादला आदेशों में बदलाव समेत कई आरोप लगाए हैं. आठ सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर सम्मानजनक कार्य माहौल की मांग की गई. मांगें पूरी न होने पर प्रशासनिक प्रभार छोड़ने की चेतावनी दी गई.
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर अब चिकित्साधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के बीच तनातनी खुलकर सामने आ गई है. शुक्रवार को चिकित्साधिकारियों के एक दल ने सीएमओ डॉ. उदयभान सिंह से मुलाकात कर आठ बिंदुओं का ज्ञापन सौंपा. डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक कार्रवाई और लगातार दबाव के चलते अधिकारी मानसिक तनाव में काम कर रहे हैं. वहीं सीएमओ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए खामियों पर कार्रवाई करना जरूरी है.
अधिकारों में हस्तक्षेप और वेतन रोकने पर जताई नाराजगी
चिकित्साधिकारियों ने आरोप लगाया कि उनके प्रशासनिक अधिकारों में लगातार हस्तक्षेप किया जा रहा है. कई मामलों में बिना नोटिस वेतन रोकने और स्थानांतरण आदेशों में बदलाव किए जाने से अधिकारियों में असंतोष है. डॉक्टरों का कहना है कि जिम्मेदारी दिए जाने के बाद यदि प्रभारियों को अपने स्तर पर निर्णय लेने के अधिकार ही नहीं मिलेंगे तो स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था प्रभावित होगी.

वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी का आरोप
डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से वरिष्ठ अधिकारियों को कनिष्ठ के अधीन काम करना पड़ रहा है, जो विभागीय व्यवस्था और वरिष्ठता के लिहाज से उचित नहीं है. उन्होंने प्रभार देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और वरिष्ठता का ध्यान रखने की मांग की.
रात नौ बजे वीडियो कॉल से उपस्थिति जांचने पर सवाल
चिकित्साधिकारियों ने रात करीब नौ बजे वीडियो कॉल के माध्यम से मुख्यालय में अधिकारियों की उपस्थिति जांचने की व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई. डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से अधिकारियों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बन रहा है.
विशेष रूप से महिला चिकित्साधिकारियों को लेकर भी डॉक्टरों ने चिंता जताई. उनका आरोप है कि लगातार निगरानी और प्रशासनिक दबाव से काम का माहौल प्रभावित हो रहा है.
दो महिला चिकित्साधिकारियों के इस्तीफे का भी जिक्र
ज्ञापन में डॉ. अपूर्वा पाल और डॉ. शिवानी बाजपेयी के त्यागपत्र का भी उल्लेख किया गया. चिकित्साधिकारियों ने दावा किया कि प्रशासनिक दबाव और कार्यस्थल के माहौल से जुड़ी परिस्थितियां भी इसके पीछे कारण रही हैं.
हालांकि, इन आरोपों को संबंधित चिकित्साधिकारियों के व्यक्तिगत निर्णय और उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही अंतिम रूप से देखा जाना चाहिए. चिकित्साधिकारियों ने इस मामले को विभाग में बने तनावपूर्ण माहौल से जोड़ते हुए कार्यस्थल पर सम्मानजनक व्यवहार की मांग की.
संविदाकर्मियों और पुराने वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर भी आपत्ति
चिकित्साधिकारियों ने संविदाकर्मियों पर की जा रही कार्रवाई और बार-बार निरीक्षण को लेकर भी नाराजगी जताई. उनका कहना है कि लगातार निरीक्षण और पुराने वित्तीय अभिलेख मांगे जाने से अधिकारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.
डॉक्टरों ने कहा कि निरीक्षण और रिकॉर्ड की जांच व्यवस्था का हिस्सा हो सकती है, लेकिन इसे पारदर्शी और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए, ताकि अधिकारियों और कर्मचारियों में भय का माहौल न बने.
सम्मान, विश्वास और सहयोग का माहौल बनाने की मांग
चिकित्साधिकारियों ने मांग की कि जिले के स्वास्थ्य विभाग में सम्मान, विश्वास, पारदर्शिता और सहयोग का माहौल बनाया जाए. उनका कहना है कि अधिकारी यदि मानसिक दबाव में काम करेंगे तो उसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है.
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों को पर्याप्त अधिकार और स्वतंत्रता दी जानी चाहिए, जिससे वह अपने स्तर पर समस्याओं का समाधान कर सकें.
मांग पूरी नहीं हुई तो प्रशासनिक प्रभार छोड़ने की चेतावनी
चिकित्साधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वह प्रशासनिक प्रभार छोड़कर केवल चिकित्सकीय दायित्व निभाने का फैसला ले सकते हैं. डॉक्टरों ने इसे सामूहिक रूप से उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना है, लेकिन इसके लिए कार्यस्थल पर सम्मानजनक माहौल भी जरूरी है.
इस चेतावनी के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर स्थिति और संवेदनशील हो गई है. अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं.
सीएमओ बोले- खामियों को दूर करना उत्पीड़न नहीं
मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उदयभान सिंह का कहना है कि चिकित्सीय सेवाओं में सुधार करना केवल सीएमओ की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सभी चिकित्साधिकारियों का भी दायित्व है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में यदि कोई खामी सामने आती है तो उसे दूर करने के लिए कार्रवाई की जाएगी.
सीएमओ के मुताबिक व्यवस्था में सुधार के लिए निरीक्षण, रिकॉर्ड की जांच और आवश्यक कार्रवाई को उत्पीड़न के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उनका कहना है कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती.
Fatehpur News: CMO डॉ. यूबी सिंह के खिलाफ डॉक्टरों ने खोला मोर्चा, सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी ! कम समय में आरोपों से घिरे उदयभान
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर अब चिकित्साधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के बीच तनातनी खुलकर सामने आ गई है. शुक्रवार को चिकित्साधिकारियों के एक दल ने सीएमओ डॉ. उदयभान सिंह से मुलाकात कर आठ बिंदुओं का ज्ञापन सौंपा. डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक कार्रवाई और लगातार दबाव के चलते अधिकारी मानसिक तनाव में काम कर रहे हैं. वहीं सीएमओ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए खामियों पर कार्रवाई करना जरूरी है.
अधिकारों में हस्तक्षेप और वेतन रोकने पर जताई नाराजगी
चिकित्साधिकारियों ने आरोप लगाया कि उनके प्रशासनिक अधिकारों में लगातार हस्तक्षेप किया जा रहा है. कई मामलों में बिना नोटिस वेतन रोकने और स्थानांतरण आदेशों में बदलाव किए जाने से अधिकारियों में असंतोष है. डॉक्टरों का कहना है कि जिम्मेदारी दिए जाने के बाद यदि प्रभारियों को अपने स्तर पर निर्णय लेने के अधिकार ही नहीं मिलेंगे तो स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था प्रभावित होगी.
चिकित्साधिकारियों ने मांग की कि प्रत्येक प्रभारी को उसके पद और जिम्मेदारी के अनुरूप प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं, ताकि वह अपने संस्थान और अधीनस्थ कर्मचारियों की व्यवस्था ठीक तरीके से संभाल सके.
वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी का आरोप
ज्ञापन में चिकित्साधिकारियों ने वरिष्ठता की अनदेखी का भी आरोप लगाया. उनका कहना है कि विभाग में कई वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध होने के बावजूद जिला क्षय रोग अधिकारी का प्रभार लेवल-2 के चिकित्साधिकारी को दिया गया है.
डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से वरिष्ठ अधिकारियों को कनिष्ठ के अधीन काम करना पड़ रहा है, जो विभागीय व्यवस्था और वरिष्ठता के लिहाज से उचित नहीं है. उन्होंने प्रभार देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और वरिष्ठता का ध्यान रखने की मांग की.
रात नौ बजे वीडियो कॉल से उपस्थिति जांचने पर सवाल
चिकित्साधिकारियों ने रात करीब नौ बजे वीडियो कॉल के माध्यम से मुख्यालय में अधिकारियों की उपस्थिति जांचने की व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई. डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से अधिकारियों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बन रहा है.
विशेष रूप से महिला चिकित्साधिकारियों को लेकर भी डॉक्टरों ने चिंता जताई. उनका आरोप है कि लगातार निगरानी और प्रशासनिक दबाव से काम का माहौल प्रभावित हो रहा है.
दो महिला चिकित्साधिकारियों के इस्तीफे का भी जिक्र
ज्ञापन में डॉ. अपूर्वा पाल और डॉ. शिवानी बाजपेयी के त्यागपत्र का भी उल्लेख किया गया. चिकित्साधिकारियों ने दावा किया कि प्रशासनिक दबाव और कार्यस्थल के माहौल से जुड़ी परिस्थितियां भी इसके पीछे कारण रही हैं.
हालांकि, इन आरोपों को संबंधित चिकित्साधिकारियों के व्यक्तिगत निर्णय और उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही अंतिम रूप से देखा जाना चाहिए. चिकित्साधिकारियों ने इस मामले को विभाग में बने तनावपूर्ण माहौल से जोड़ते हुए कार्यस्थल पर सम्मानजनक व्यवहार की मांग की.
संविदाकर्मियों और पुराने वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर भी आपत्ति
चिकित्साधिकारियों ने संविदाकर्मियों पर की जा रही कार्रवाई और बार-बार निरीक्षण को लेकर भी नाराजगी जताई. उनका कहना है कि लगातार निरीक्षण और पुराने वित्तीय अभिलेख मांगे जाने से अधिकारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.
डॉक्टरों ने कहा कि निरीक्षण और रिकॉर्ड की जांच व्यवस्था का हिस्सा हो सकती है, लेकिन इसे पारदर्शी और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए, ताकि अधिकारियों और कर्मचारियों में भय का माहौल न बने.
सम्मान, विश्वास और सहयोग का माहौल बनाने की मांग
चिकित्साधिकारियों ने मांग की कि जिले के स्वास्थ्य विभाग में सम्मान, विश्वास, पारदर्शिता और सहयोग का माहौल बनाया जाए. उनका कहना है कि अधिकारी यदि मानसिक दबाव में काम करेंगे तो उसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है.
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों को पर्याप्त अधिकार और स्वतंत्रता दी जानी चाहिए, जिससे वह अपने स्तर पर समस्याओं का समाधान कर सकें.
मांग पूरी नहीं हुई तो प्रशासनिक प्रभार छोड़ने की चेतावनी
चिकित्साधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वह प्रशासनिक प्रभार छोड़कर केवल चिकित्सकीय दायित्व निभाने का फैसला ले सकते हैं. डॉक्टरों ने इसे सामूहिक रूप से उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना है, लेकिन इसके लिए कार्यस्थल पर सम्मानजनक माहौल भी जरूरी है.
इस चेतावनी के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर स्थिति और संवेदनशील हो गई है. अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं.
सीएमओ बोले- खामियों को दूर करना उत्पीड़न नहीं
मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उदयभान सिंह का कहना है कि चिकित्सीय सेवाओं में सुधार करना केवल सीएमओ की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सभी चिकित्साधिकारियों का भी दायित्व है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में यदि कोई खामी सामने आती है तो उसे दूर करने के लिए कार्रवाई की जाएगी.
सीएमओ के मुताबिक व्यवस्था में सुधार के लिए निरीक्षण, रिकॉर्ड की जांच और आवश्यक कार्रवाई को उत्पीड़न के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उनका कहना है कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती.