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Uttar Pradesh: फतेहपुर में सिस्टम की सड़ांध ! बंद PHC के बाहर तड़पती रही महिला, सड़क पर दिया बच्चे को जन्म, कांग्रेस ने योगी सरकार को घेरा

Uttar Pradesh: फतेहपुर में सिस्टम की सड़ांध ! बंद PHC के बाहर तड़पती रही महिला, सड़क पर दिया बच्चे को जन्म, कांग्रेस ने योगी सरकार को घेरा
फतेहपुर में अस्पताल में बंद था ताला, सड़क पर प्रसूता ने दिया बच्चे को जन्म: Image Credit Original Source

Fatehpur News In Hindi

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर (Fatehpur) में एक गर्भवती महिला को अस्पताल बंद होने के कारण सड़क पर बच्चे को जन्म देना पड़ा. बकेवर PHC पर रातभर ताला लटका रहा और कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था. इस घटना को लेकर कांग्रेस ने योगी सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है.

Fatehpur Uttar Pradesh: यूपी के फतेहपुर जिले में एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई जब एक गर्भवती महिला को अस्पताल के बाहर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा. बकेवर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रातभर ताला लटका रहा, न 112 पहुंची और न ही 108 एंबुलेंस से संपर्क हो पाया. कांग्रेस ने इस घटना को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है.

तड़पती रही महिला, बंद अस्पताल बना मूकदर्शक 

देवमई गांव निवासी संजय पासवान की पत्नी अनुराधा देवी (30) पिछले कई महीनों से बकेवर कस्बे में किराए के मकान में रह रही थीं. उनके पति किसी अन्य राज्य में प्राइवेट नौकरी करते हैं.

बीते सोमवार रात करीब तीन बजे अनुराधा को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई. डर और दर्द के बीच वह अपने दोनों छोटे बच्चों को साथ लेकर खुद पैदल ही बकेवर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं, लेकिन वहां का नज़ारा दिल दहला देने वाला था. अस्पताल पर ताला लटका हुआ था और कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था.

भोर में सड़क पर हुआ प्रसव, मानवता हुई शर्मसार

आसपास किसी तरह की मदद न मिलने और हेल्पलाइन नंबर 108 व 112 से संपर्क न हो पाने की स्थिति में अनुराधा देवी पूरी रात दर्द से कराहती रहीं. आखिरकार सुबह करीब पांच बजे, अस्पताल के परिसर में सड़क के बीच खुले आसमान के नीचे उन्होंने एक नवजात को जन्म दिया. यह घटना न सिर्फ मानवता को शर्मसार करती है बल्कि सरकारी तंत्र की नाकामी का आईना भी दिखाती है.

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सुबह 8 बजे पहुंचा स्टाफ, तब जाकर मिली मदद

जब अस्पताल का स्टाफ सुबह आठ बजे पहुंचा, तब जाकर महिला को अस्पताल के अंदर ले जाकर प्राथमिक उपचार दिया गया. अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों ने महिला को तुरंत भर्ती किया और जच्चा-बच्चा की हालत स्थिर बताई. देवमई PHC प्रभारी डॉ. विमलेश कुमार ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "रात के समय अस्पताल में कोई स्टाफ मौजूद नहीं रहता", मानो यह कोई सामान्य प्रक्रिया हो.

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कांग्रेस का हमला, भाजपा की विदाई ही इस बीमारी की दवाई

इस अमानवीय घटना को लेकर यूपी कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. पार्टी ने अपने आधिकारिक X हैंडल से लिखा, “योगी आदित्यनाथ, बृजेश पाठक शर्म करिए! फतेहपुर के बकेवर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने एक महिला ने नवजात को जन्म दिया क्योंकि अस्पताल पर ताला लटक रहा था.

महिला घंटों सड़क पर प्रसव पीड़ा से तड़पती रही लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था. भाजपा की विदाई ही इस बीमारी की एकमात्र दवाई है” यह बयान सरकारी मशीनरी की लापरवाही और स्वास्थ्य व्यवस्था की गिरती हालत पर एक तीखा कटाक्ष है.

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग, लापरवाही पर कौन जिम्मेदार?

इस पूरी घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई सरकारी तंत्र जिम्मेदारी लेगा? अगर अस्पतालों में रात के समय कोई स्टाफ नहीं रहता, तो आखिर आपातकाल की स्थिति में जनता क्या करे? क्या सिर्फ सुबह 8 बजे अस्पताल खुलने का इंतजार किया जाए, चाहे कोई ज़िंदा बचे या नहीं? इस तरह की घटनाएं सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं.

10 Jul 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

Uttar Pradesh: फतेहपुर में सिस्टम की सड़ांध ! बंद PHC के बाहर तड़पती रही महिला, सड़क पर दिया बच्चे को जन्म, कांग्रेस ने योगी सरकार को घेरा

Fatehpur News In Hindi

Fatehpur Uttar Pradesh: यूपी के फतेहपुर जिले में एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई जब एक गर्भवती महिला को अस्पताल के बाहर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा. बकेवर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रातभर ताला लटका रहा, न 112 पहुंची और न ही 108 एंबुलेंस से संपर्क हो पाया. कांग्रेस ने इस घटना को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है.

तड़पती रही महिला, बंद अस्पताल बना मूकदर्शक 

देवमई गांव निवासी संजय पासवान की पत्नी अनुराधा देवी (30) पिछले कई महीनों से बकेवर कस्बे में किराए के मकान में रह रही थीं. उनके पति किसी अन्य राज्य में प्राइवेट नौकरी करते हैं.

बीते सोमवार रात करीब तीन बजे अनुराधा को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई. डर और दर्द के बीच वह अपने दोनों छोटे बच्चों को साथ लेकर खुद पैदल ही बकेवर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं, लेकिन वहां का नज़ारा दिल दहला देने वाला था. अस्पताल पर ताला लटका हुआ था और कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था.

भोर में सड़क पर हुआ प्रसव, मानवता हुई शर्मसार

आसपास किसी तरह की मदद न मिलने और हेल्पलाइन नंबर 108 व 112 से संपर्क न हो पाने की स्थिति में अनुराधा देवी पूरी रात दर्द से कराहती रहीं. आखिरकार सुबह करीब पांच बजे, अस्पताल के परिसर में सड़क के बीच खुले आसमान के नीचे उन्होंने एक नवजात को जन्म दिया. यह घटना न सिर्फ मानवता को शर्मसार करती है बल्कि सरकारी तंत्र की नाकामी का आईना भी दिखाती है.

सुबह 8 बजे पहुंचा स्टाफ, तब जाकर मिली मदद

जब अस्पताल का स्टाफ सुबह आठ बजे पहुंचा, तब जाकर महिला को अस्पताल के अंदर ले जाकर प्राथमिक उपचार दिया गया. अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों ने महिला को तुरंत भर्ती किया और जच्चा-बच्चा की हालत स्थिर बताई. देवमई PHC प्रभारी डॉ. विमलेश कुमार ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "रात के समय अस्पताल में कोई स्टाफ मौजूद नहीं रहता", मानो यह कोई सामान्य प्रक्रिया हो.

कांग्रेस का हमला, भाजपा की विदाई ही इस बीमारी की दवाई

इस अमानवीय घटना को लेकर यूपी कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. पार्टी ने अपने आधिकारिक X हैंडल से लिखा, “योगी आदित्यनाथ, बृजेश पाठक शर्म करिए! फतेहपुर के बकेवर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने एक महिला ने नवजात को जन्म दिया क्योंकि अस्पताल पर ताला लटक रहा था.

महिला घंटों सड़क पर प्रसव पीड़ा से तड़पती रही लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था. भाजपा की विदाई ही इस बीमारी की एकमात्र दवाई है” यह बयान सरकारी मशीनरी की लापरवाही और स्वास्थ्य व्यवस्था की गिरती हालत पर एक तीखा कटाक्ष है.

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग, लापरवाही पर कौन जिम्मेदार?

इस पूरी घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई सरकारी तंत्र जिम्मेदारी लेगा? अगर अस्पतालों में रात के समय कोई स्टाफ नहीं रहता, तो आखिर आपातकाल की स्थिति में जनता क्या करे? क्या सिर्फ सुबह 8 बजे अस्पताल खुलने का इंतजार किया जाए, चाहे कोई ज़िंदा बचे या नहीं? इस तरह की घटनाएं सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं.

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