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UP Fatehpur News: फतेहपुर में 24 साल बाद इंसाफ की दस्तक ! पांच दोषियों को उम्रकैद, जानिए क्या था मामला

UP Fatehpur News: फतेहपुर में 24 साल बाद इंसाफ की दस्तक ! पांच दोषियों को उम्रकैद, जानिए क्या था मामला
फतेहपुर में 24 साल बाद कोर्ट का फैसला, 5 को उम्रकैद (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

Fatehpur News In Hindi

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर (Fatehpur) में 24 साल पुराने हत्या और डकैती के मामले में विशेष गैंगस्टर कोर्ट ने शुक्रवार को पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. साल 2000 में मड़ौली गांव में हुए हमले में एक व्यक्ति की हत्या हुई थी.

UP Fatehpur News: कभी-कभी इंसाफ की राह बहुत लंबी होती है, लेकिन जब वह दस्तक देता है, तो टूटे दिलों में भी उम्मीद की लौ फिर से जल उठती है. फतेहपुर (Fatehpur) के मड़ौली गांव में 24 साल पहले हुई एक जघन्य वारदात में आज आखिरकार न्याय मिला. विशेष गैंगस्टर कोर्ट ने शुक्रवार को पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए यह साबित कर दिया कि न्याय भले ही देर से मिले, लेकिन अंधा नहीं होता. 

वो रात जो आज भी कांपती है यादों में

किशनपुर थाने (Kishanpur Thana) के म्योखर मजरे मड़ौली गांव में 3 अक्टूबर 2000 की रात सामान्य नहीं थी रात करीब साढ़े 11 बजे जब गांव गहरी नींद में डूबा था, तब छेद्दू कहार के घर में मौत का साया मंडराया. हथियारों से लैस बदमाशों ने घर में घुसकर महिलाओं के साथ मारपीट की, सामान लूटा और चीख-पुकार मच गई.

पड़ोस में रहने वाले कृष्णपाल सिंह ने जब आवाज़ें सुनीं, तो दिलेरी दिखाते हुए बाहर निकले और बदमाशों को ललकारा. जवाब में उन्हें गोलियों से भून दिया गया. इस हादसे में उनका बेटा सुमेर सिंह भी गोली लगने से घायल हुआ था.

एक बेटे ने उठाया न्याय का झंडा, दर्ज हुई एफआईआर 

सुमेर सिंह उस रात घायल ज़रूर हुए, लेकिन टूटे नहीं. उन्होंने होश में आते ही घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई और तब से इस लड़ाई में डटे रहे. पुलिस ने गहन जांच के बाद छह आरोपियों के नाम सामने लाए—गुरुप्रसाद उर्फ गुरुवा, कृष्णपाल, विजयपाल, रामस्वरूप, ननकवा और स्वामीशरण. जांच के दौरान गुरुप्रसाद की मौत हो गई, लेकिन बाकी पांचों के खिलाफ मुकदमा चलता रहा. वर्षों की अदालती सुनवाई, गवाहियों और बहस के बाद आखिरकार सच की जीत हुई. 

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कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, टूटे चेहरे पर लौटी रौशनी

अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट की अदालत में शुक्रवार को जैसे ही फैसला सुनाया गया, कोर्ट का कमरा कुछ पल के लिए सन्नाटे में डूब गया. पांचों आरोपियों को हत्या के मामले में आजीवन कारावास और दस हजार का जुर्माना, डकैती में दस साल की सजा और गैंगस्टर एक्ट में पांच साल की सजा सुनाई गई. साथ ही अलग-अलग आर्थिक दंड भी लगाया गया. बताया जा रहा है कि पुलिस विवेचना दौरान गुरुप्रसाद उर्फ गुरुवा की मौत हो चुकी थी.

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भावनाओं का विस्फोट: कोर्ट में छलका सुमेर का दर्द

सजा सुनते ही जहां आरोपी मायूस नजर आए, वहीं सुमेर सिंह और उनके परिवार की आंखों से आंसुओं की धारा बहने लगी. उन्होंने कहा, “मेरे पिता ने एक घर बचाने की कीमत जान देकर चुकाई थी आज उन्हें इंसाफ मिला है” गांववालों ने भी इस फैसले का स्वागत किया और इसे कानून के प्रति विश्वास की जीत बताया.

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न्याय की उम्मीद को फिर मिली संजीवनी

यह मामला साबित करता है कि अगर हौसला और सच्चाई साथ हो, तो कानून का पहिया कितना भी धीरे क्यों न चले, मगर वह दोषियों तक जरूर पहुंचता है. इस फैसले ने न सिर्फ पीड़ित परिवार को राहत दी, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि अपराध चाहे कितना भी पुराना हो, उसकी सजा जरूर मिलती है.

16 May 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

UP Fatehpur News: फतेहपुर में 24 साल बाद इंसाफ की दस्तक ! पांच दोषियों को उम्रकैद, जानिए क्या था मामला

Fatehpur News In Hindi

UP Fatehpur News: कभी-कभी इंसाफ की राह बहुत लंबी होती है, लेकिन जब वह दस्तक देता है, तो टूटे दिलों में भी उम्मीद की लौ फिर से जल उठती है. फतेहपुर (Fatehpur) के मड़ौली गांव में 24 साल पहले हुई एक जघन्य वारदात में आज आखिरकार न्याय मिला. विशेष गैंगस्टर कोर्ट ने शुक्रवार को पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए यह साबित कर दिया कि न्याय भले ही देर से मिले, लेकिन अंधा नहीं होता. 

वो रात जो आज भी कांपती है यादों में

किशनपुर थाने (Kishanpur Thana) के म्योखर मजरे मड़ौली गांव में 3 अक्टूबर 2000 की रात सामान्य नहीं थी रात करीब साढ़े 11 बजे जब गांव गहरी नींद में डूबा था, तब छेद्दू कहार के घर में मौत का साया मंडराया. हथियारों से लैस बदमाशों ने घर में घुसकर महिलाओं के साथ मारपीट की, सामान लूटा और चीख-पुकार मच गई.

पड़ोस में रहने वाले कृष्णपाल सिंह ने जब आवाज़ें सुनीं, तो दिलेरी दिखाते हुए बाहर निकले और बदमाशों को ललकारा. जवाब में उन्हें गोलियों से भून दिया गया. इस हादसे में उनका बेटा सुमेर सिंह भी गोली लगने से घायल हुआ था.

एक बेटे ने उठाया न्याय का झंडा, दर्ज हुई एफआईआर 

सुमेर सिंह उस रात घायल ज़रूर हुए, लेकिन टूटे नहीं. उन्होंने होश में आते ही घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई और तब से इस लड़ाई में डटे रहे. पुलिस ने गहन जांच के बाद छह आरोपियों के नाम सामने लाए—गुरुप्रसाद उर्फ गुरुवा, कृष्णपाल, विजयपाल, रामस्वरूप, ननकवा और स्वामीशरण. जांच के दौरान गुरुप्रसाद की मौत हो गई, लेकिन बाकी पांचों के खिलाफ मुकदमा चलता रहा. वर्षों की अदालती सुनवाई, गवाहियों और बहस के बाद आखिरकार सच की जीत हुई. 

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अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट की अदालत में शुक्रवार को जैसे ही फैसला सुनाया गया, कोर्ट का कमरा कुछ पल के लिए सन्नाटे में डूब गया. पांचों आरोपियों को हत्या के मामले में आजीवन कारावास और दस हजार का जुर्माना, डकैती में दस साल की सजा और गैंगस्टर एक्ट में पांच साल की सजा सुनाई गई. साथ ही अलग-अलग आर्थिक दंड भी लगाया गया. बताया जा रहा है कि पुलिस विवेचना दौरान गुरुप्रसाद उर्फ गुरुवा की मौत हो चुकी थी.

भावनाओं का विस्फोट: कोर्ट में छलका सुमेर का दर्द

सजा सुनते ही जहां आरोपी मायूस नजर आए, वहीं सुमेर सिंह और उनके परिवार की आंखों से आंसुओं की धारा बहने लगी. उन्होंने कहा, “मेरे पिता ने एक घर बचाने की कीमत जान देकर चुकाई थी आज उन्हें इंसाफ मिला है” गांववालों ने भी इस फैसले का स्वागत किया और इसे कानून के प्रति विश्वास की जीत बताया.

न्याय की उम्मीद को फिर मिली संजीवनी

यह मामला साबित करता है कि अगर हौसला और सच्चाई साथ हो, तो कानून का पहिया कितना भी धीरे क्यों न चले, मगर वह दोषियों तक जरूर पहुंचता है. इस फैसले ने न सिर्फ पीड़ित परिवार को राहत दी, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि अपराध चाहे कितना भी पुराना हो, उसकी सजा जरूर मिलती है.

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