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UPPCL News: स्मार्ट मीटर पर बड़ा यू-टर्न, अब प्रीपेड की अनिवार्यता पर नया आदेश ! क्या उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

UPPCL News: स्मार्ट मीटर पर बड़ा यू-टर्न, अब प्रीपेड की अनिवार्यता पर नया आदेश ! क्या उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर नया फैसला, क्या उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर बड़ा बदलाव हो सकता है. अब प्रीपेड मोड की अनिवार्यता खत्म कर दी जाएगी और उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड चुनने का विकल्प मिलेगा. केंद्र की नई अधिसूचना के बाद पावर कॉरपोरेशन भी अपने पुराने आदेश में बदलाव कर सकता है.

UPPCL News: उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. लंबे समय से विवादों में घिरे स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर अब केंद्र ने बड़ा फैसला लिया है. नई अधिसूचना के अनुसार प्रीपेड मोड की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है, जिससे उपभोक्ताओं को अपनी सुविधा के अनुसार भुगतान प्रणाली चुनने का अधिकार मिलेगा.

स्मार्ट मीटर रहेगा, लेकिन प्रीपेड की बाध्यता खत्म

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने अपने पुराने नियमों में संशोधन करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि स्मार्ट मीटर तो लगाए जाएंगे, लेकिन उन्हें केवल प्रीपेड मोड में ही संचालित करना जरूरी नहीं होगा. पहले जारी दिशा-निर्देशों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर को अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही गई थी, जिसके चलते उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही थी.

अब इस संशोधन के बाद उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि वे अपनी जरूरत के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड मोड चुन सकेंगे. यह बदलाव बिजली अधिनियम 2003 की मूल भावना के अनुरूप बताया जा रहा है.

1 अप्रैल से लागू हुई नई व्यवस्था

नई अधिसूचना 1 अप्रैल से लागू कर दी गई है. इसके तहत उन सभी क्षेत्रों में जहां संचार नेटवर्क उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली आपूर्ति की जाएगी. हालांकि अब इन मीटरों को केवल प्रीपेड मोड में ही सीमित नहीं रखा जाएगा.

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इसका मतलब यह है कि तकनीकी रूप से स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम जारी रहेगा, लेकिन भुगतान व्यवस्था अधिक लचीली होगी. इससे उपभोक्ताओं को राहत के साथ-साथ बिजली विभाग को भी पारदर्शिता और निगरानी में सुविधा मिलेगी.

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यूपी पावर कॉरपोरेशन पर टिकी सबकी नजर

नई अधिसूचना जारी होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड इस पर क्या कदम उठाता है. राज्य में पहले से लागू आदेश के तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटर को अनिवार्य किया गया था. लेकिन अब केंद्र के संशोधित नियमों के बाद यह माना जा रहा है कि पावर कॉरपोरेशन अपने पुराने आदेश को वापस ले सकता है या उसमें संशोधन कर सकता है. यदि ऐसा होता है तो यह लाखों उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत साबित होगा.

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उपभोक्ता परिषद की मांग ने बदली तस्वीर

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर संघर्ष कर रही थी. परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बार-बार यह मुद्दा उठाया कि उपभोक्ताओं को बिना सहमति प्रीपेड मीटर में बांधना कानून के खिलाफ है.

उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और ऊर्जा सचिव को भी इस संबंध में अवगत कराया था. अब जब संशोधित अधिसूचना जारी हो चुकी है, तो परिषद ने मांग की है कि पहले से लगाए गए प्रीपेड मीटर को भी पोस्टपेड विकल्प में बदला जाए, ताकि उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत मिल सके.

उपभोक्ताओं को मिलेगा विकल्प, खत्म होगी मजबूरी

नई व्यवस्था का सबसे अहम पहलू यह है कि अब उपभोक्ताओं को अपनी सुविधा के अनुसार भुगतान प्रणाली चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी. पहले जहां उपभोक्ताओं को बिजली इस्तेमाल करने से पहले रिचार्ज कराना पड़ता था, वहीं अब वे पारंपरिक बिलिंग सिस्टम का भी विकल्प चुन सकेंगे. इससे खासकर मध्यम वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जो प्रीपेड सिस्टम को लेकर असहज महसूस कर रहे थे.

क्या जमीन पर दिखेगा इस फैसले का असर

हालांकि यह फैसला कागजों पर उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा नजर आ रहा है, लेकिन असली चुनौती इसके प्रभावी क्रियान्वयन की होगी. अगर राज्य स्तर पर समय रहते आदेशों में बदलाव नहीं हुआ, तो भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी रह सकती है. वहीं बिजली कंपनियों के लिए भी यह बदलाव नई चुनौतियां लेकर आएगा, क्योंकि उन्हें अब दो अलग-अलग भुगतान प्रणालियों को संभालना होगा. ऐसे में आने वाले दिनों में इस फैसले का वास्तविक असर साफ हो पाएगा.

07 Apr 2026 By Vishwa Deepak Awasthi

UPPCL News: स्मार्ट मीटर पर बड़ा यू-टर्न, अब प्रीपेड की अनिवार्यता पर नया आदेश ! क्या उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

UPPCL News: उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. लंबे समय से विवादों में घिरे स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर अब केंद्र ने बड़ा फैसला लिया है. नई अधिसूचना के अनुसार प्रीपेड मोड की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है, जिससे उपभोक्ताओं को अपनी सुविधा के अनुसार भुगतान प्रणाली चुनने का अधिकार मिलेगा.

स्मार्ट मीटर रहेगा, लेकिन प्रीपेड की बाध्यता खत्म

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने अपने पुराने नियमों में संशोधन करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि स्मार्ट मीटर तो लगाए जाएंगे, लेकिन उन्हें केवल प्रीपेड मोड में ही संचालित करना जरूरी नहीं होगा. पहले जारी दिशा-निर्देशों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर को अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही गई थी, जिसके चलते उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही थी.

अब इस संशोधन के बाद उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि वे अपनी जरूरत के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड मोड चुन सकेंगे. यह बदलाव बिजली अधिनियम 2003 की मूल भावना के अनुरूप बताया जा रहा है.

1 अप्रैल से लागू हुई नई व्यवस्था

नई अधिसूचना 1 अप्रैल से लागू कर दी गई है. इसके तहत उन सभी क्षेत्रों में जहां संचार नेटवर्क उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली आपूर्ति की जाएगी. हालांकि अब इन मीटरों को केवल प्रीपेड मोड में ही सीमित नहीं रखा जाएगा.

इसका मतलब यह है कि तकनीकी रूप से स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम जारी रहेगा, लेकिन भुगतान व्यवस्था अधिक लचीली होगी. इससे उपभोक्ताओं को राहत के साथ-साथ बिजली विभाग को भी पारदर्शिता और निगरानी में सुविधा मिलेगी.

यूपी पावर कॉरपोरेशन पर टिकी सबकी नजर

नई अधिसूचना जारी होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड इस पर क्या कदम उठाता है. राज्य में पहले से लागू आदेश के तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटर को अनिवार्य किया गया था. लेकिन अब केंद्र के संशोधित नियमों के बाद यह माना जा रहा है कि पावर कॉरपोरेशन अपने पुराने आदेश को वापस ले सकता है या उसमें संशोधन कर सकता है. यदि ऐसा होता है तो यह लाखों उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत साबित होगा.

उपभोक्ता परिषद की मांग ने बदली तस्वीर

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर संघर्ष कर रही थी. परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बार-बार यह मुद्दा उठाया कि उपभोक्ताओं को बिना सहमति प्रीपेड मीटर में बांधना कानून के खिलाफ है.

उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और ऊर्जा सचिव को भी इस संबंध में अवगत कराया था. अब जब संशोधित अधिसूचना जारी हो चुकी है, तो परिषद ने मांग की है कि पहले से लगाए गए प्रीपेड मीटर को भी पोस्टपेड विकल्प में बदला जाए, ताकि उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत मिल सके.

उपभोक्ताओं को मिलेगा विकल्प, खत्म होगी मजबूरी

नई व्यवस्था का सबसे अहम पहलू यह है कि अब उपभोक्ताओं को अपनी सुविधा के अनुसार भुगतान प्रणाली चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी. पहले जहां उपभोक्ताओं को बिजली इस्तेमाल करने से पहले रिचार्ज कराना पड़ता था, वहीं अब वे पारंपरिक बिलिंग सिस्टम का भी विकल्प चुन सकेंगे. इससे खासकर मध्यम वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जो प्रीपेड सिस्टम को लेकर असहज महसूस कर रहे थे.

क्या जमीन पर दिखेगा इस फैसले का असर

हालांकि यह फैसला कागजों पर उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा नजर आ रहा है, लेकिन असली चुनौती इसके प्रभावी क्रियान्वयन की होगी. अगर राज्य स्तर पर समय रहते आदेशों में बदलाव नहीं हुआ, तो भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी रह सकती है. वहीं बिजली कंपनियों के लिए भी यह बदलाव नई चुनौतियां लेकर आएगा, क्योंकि उन्हें अब दो अलग-अलग भुगतान प्रणालियों को संभालना होगा. ऐसे में आने वाले दिनों में इस फैसले का वास्तविक असर साफ हो पाएगा.

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