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UP News: फतेहपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में सुस्त है अभ्युदय विद्यालयों की रफ्तार ! कुशीनगर पहले पायदान पर

UP News: फतेहपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में सुस्त है अभ्युदय विद्यालयों की रफ्तार ! कुशीनगर पहले पायदान पर
फतेहपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में सुस्त है अभ्युदय विद्यालयों की रफ्तार (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल और अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय निर्माण कार्य की नवंबर समीक्षा रिपोर्ट में कई जिलों की प्रगति बेहद धीमी पाई गई है. फतेहपुर में स्थिति चिंताजनक है. जबकि कुशीनगर और बदायूं जैसे जिलों ने समय से तेज काम करते हुए शीर्ष पर स्थान बनाया है.

Uttar Pradesh News: समग्र शिक्षा अभियान के तहत यूपी में शिक्षा के सरकारी ढांचे को आधुनिक और हाईटेक बनाने की प्रक्रिया जारी है. मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल और अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय इसी महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा हैं. लेकिन नवंबर के पहले पखवाड़े तक की प्रगति रिपोर्ट में साफ हुआ है कि फतेहपुर समेत कई जिलों में निर्माण की रफ्तार बेहद सुस्त है. सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए चेतावनी जारी कर दी है कि देरी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी.

अभ्युदय विद्यालयों में कुशीनगर अव्वल, फतेहपुर पिछड़ा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभ्युदय विद्यालयों की प्रगति रिपोर्ट में कुशीनगर ने सबसे तेज काम किया है जहां 90 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है. प्रतापगढ़ और खीरी में 60 प्रतिशत से अधिक प्रगति दर्ज की गई है, जबकि इटावा भी इसी गति वाले जिलों में शामिल है. इन जिलों को देखकर साफ महसूस होता है कि जहां जिला प्रशासन की सख्त पकड़ है, वहां परियोजना तेजी से जमीन पर उतर रही है. वहीं दूसरी तरफ फतेहपुर की बात करें तो यहां स्थिति बिल्कुल उलट दिखाई देती है. फतेहपुर में अभ्युदय विद्यालयों का निर्माण मात्र 9.55 प्रतिशत पर अटका हुआ है. यह धीमी रफ्तार जिले के बच्चों के भविष्य के सामने चिंता की लकीर खींचती है, क्योंकि इन विद्यालयों की वजह से ही ग्रामीण क्षेत्रों में हाईटेक शिक्षण संसाधनों की उपलब्धता बढ़नी थी.

कुछ जिलों में शुरुआत तक नहीं, फतेहपुर की रफ्तार धीमी

चौंकाने वाली बात यह है कि प्रयागराज और फिरोजाबाद जैसे जिलों में अभ्युदय विद्यालयों का काम अब तक शुरू तक नहीं हो सका है और यहां शून्य प्रगति दर्ज है. बांदा जैसे जिले में केवल 2.70 प्रतिशत प्रगति देखने को मिली है. यह हालात बताते हैं कि यूपी में शिक्षा सुधार की दिशा में उठाए गए कदम जमीन पर कई जगह ठिठक गए हैं. फतेहपुर भले इन जिलों जितना पीछे नहीं है, लेकिन इसकी गति इतनी धीमी है कि अगर प्रशासन ने फौरन रणनीति नहीं बदली तो यह भी सबसे निचले जिलों की गिनती में शामिल हो सकता है.

मॉडल स्कूलों की रिपोर्ट ने बढ़ाई टेंशन

मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल परियोजना में बदायूं नवंबर समीक्षा में 30.05 प्रतिशत प्रगति के साथ नंबर वन पर रहा है. उसके बाद हमीरपुर 29.47 प्रतिशत, हाथरस 29.45 प्रतिशत, बलिया 29.30 प्रतिशत और कौशांबी 25.01 प्रतिशत प्रगति के साथ शीर्ष जिलों में शामिल हुए हैं. रामपुर 24.76 प्रतिशत और अमरोहा 23.20 प्रतिशत पर हैं. वहीं सुलतानपुर, ललितपुर और यूपी सिडको के अंतर्गत एक अन्य जिला 21 प्रतिशत के आसपास काम कर चुके हैं. दूसरी तरफ इटावा 5.40 प्रतिशत और चित्रकूट 6.03 प्रतिशत के साथ सबसे निचले जिलों की सूची में शामिल हैं. और इससे भी खराब स्थिति कासगंज, गौतमबुद्धनगर और शाहजहांपुर की है जहां काम की शुरुआत तक नहीं हो सकी है. यह पूरी तस्वीर साफ संकेत देती है कि कुछ जिलों में प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत है, जबकि कई जिलों में फाइलें तो बढ़ रही हैं लेकिन निर्माण कार्य नहीं.

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मॉडल स्कूल की प्रगति संतोष जनक नहीं

फतेहपुर में मॉडल स्कूलों की प्रगति भी उम्मीद के विपरीत काफी पीछे चल रही है. धीमी रफ्तार की वजह से शासन ने जिले को विशेष निगरानी में रख लिया है. सरकार ने स्पष्ट कहा है कि अब प्रगति को हर महीने ट्रैक किया जाएगा और समयसीमा का पालन न करने पर जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई तय है. जिले के अधिकारियों को अलर्ट मोड में आकर इस योजना को प्राथमिकता देनी होगी ताकि फतेहपुर पिछड़े जिलों की श्रेणी में न आ जाए.

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22 Nov 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

UP News: फतेहपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में सुस्त है अभ्युदय विद्यालयों की रफ्तार ! कुशीनगर पहले पायदान पर

Uttar Pradesh News: समग्र शिक्षा अभियान के तहत यूपी में शिक्षा के सरकारी ढांचे को आधुनिक और हाईटेक बनाने की प्रक्रिया जारी है. मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल और अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय इसी महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा हैं. लेकिन नवंबर के पहले पखवाड़े तक की प्रगति रिपोर्ट में साफ हुआ है कि फतेहपुर समेत कई जिलों में निर्माण की रफ्तार बेहद सुस्त है. सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए चेतावनी जारी कर दी है कि देरी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी.

अभ्युदय विद्यालयों में कुशीनगर अव्वल, फतेहपुर पिछड़ा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभ्युदय विद्यालयों की प्रगति रिपोर्ट में कुशीनगर ने सबसे तेज काम किया है जहां 90 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है. प्रतापगढ़ और खीरी में 60 प्रतिशत से अधिक प्रगति दर्ज की गई है, जबकि इटावा भी इसी गति वाले जिलों में शामिल है. इन जिलों को देखकर साफ महसूस होता है कि जहां जिला प्रशासन की सख्त पकड़ है, वहां परियोजना तेजी से जमीन पर उतर रही है. वहीं दूसरी तरफ फतेहपुर की बात करें तो यहां स्थिति बिल्कुल उलट दिखाई देती है. फतेहपुर में अभ्युदय विद्यालयों का निर्माण मात्र 9.55 प्रतिशत पर अटका हुआ है. यह धीमी रफ्तार जिले के बच्चों के भविष्य के सामने चिंता की लकीर खींचती है, क्योंकि इन विद्यालयों की वजह से ही ग्रामीण क्षेत्रों में हाईटेक शिक्षण संसाधनों की उपलब्धता बढ़नी थी.

कुछ जिलों में शुरुआत तक नहीं, फतेहपुर की रफ्तार धीमी

चौंकाने वाली बात यह है कि प्रयागराज और फिरोजाबाद जैसे जिलों में अभ्युदय विद्यालयों का काम अब तक शुरू तक नहीं हो सका है और यहां शून्य प्रगति दर्ज है. बांदा जैसे जिले में केवल 2.70 प्रतिशत प्रगति देखने को मिली है. यह हालात बताते हैं कि यूपी में शिक्षा सुधार की दिशा में उठाए गए कदम जमीन पर कई जगह ठिठक गए हैं. फतेहपुर भले इन जिलों जितना पीछे नहीं है, लेकिन इसकी गति इतनी धीमी है कि अगर प्रशासन ने फौरन रणनीति नहीं बदली तो यह भी सबसे निचले जिलों की गिनती में शामिल हो सकता है.

मॉडल स्कूलों की रिपोर्ट ने बढ़ाई टेंशन

मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल परियोजना में बदायूं नवंबर समीक्षा में 30.05 प्रतिशत प्रगति के साथ नंबर वन पर रहा है. उसके बाद हमीरपुर 29.47 प्रतिशत, हाथरस 29.45 प्रतिशत, बलिया 29.30 प्रतिशत और कौशांबी 25.01 प्रतिशत प्रगति के साथ शीर्ष जिलों में शामिल हुए हैं. रामपुर 24.76 प्रतिशत और अमरोहा 23.20 प्रतिशत पर हैं. वहीं सुलतानपुर, ललितपुर और यूपी सिडको के अंतर्गत एक अन्य जिला 21 प्रतिशत के आसपास काम कर चुके हैं. दूसरी तरफ इटावा 5.40 प्रतिशत और चित्रकूट 6.03 प्रतिशत के साथ सबसे निचले जिलों की सूची में शामिल हैं. और इससे भी खराब स्थिति कासगंज, गौतमबुद्धनगर और शाहजहांपुर की है जहां काम की शुरुआत तक नहीं हो सकी है. यह पूरी तस्वीर साफ संकेत देती है कि कुछ जिलों में प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत है, जबकि कई जिलों में फाइलें तो बढ़ रही हैं लेकिन निर्माण कार्य नहीं.

मॉडल स्कूल की प्रगति संतोष जनक नहीं

फतेहपुर में मॉडल स्कूलों की प्रगति भी उम्मीद के विपरीत काफी पीछे चल रही है. धीमी रफ्तार की वजह से शासन ने जिले को विशेष निगरानी में रख लिया है. सरकार ने स्पष्ट कहा है कि अब प्रगति को हर महीने ट्रैक किया जाएगा और समयसीमा का पालन न करने पर जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई तय है. जिले के अधिकारियों को अलर्ट मोड में आकर इस योजना को प्राथमिकता देनी होगी ताकि फतेहपुर पिछड़े जिलों की श्रेणी में न आ जाए.

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