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UPPCL News: यूपी में बिजली निजीकरण की क्या साजिश हो रही है ! क्यों लग रहे हैं घोटाले के आरोप?

UPPCL News: यूपी में बिजली निजीकरण की क्या साजिश हो रही है ! क्यों लग रहे हैं घोटाले के आरोप?
फतेहपुर में बिजली विभाग के कर्मचारियों का विरोध (बाएं) प्रतीकात्मक फोटो (दाएं): Image Credit Original Source

Fatehpur News In Hindi

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)में बिजली निजीकरण को लेकर विवाद बढ़ गया है. विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति फतेहपुर (Fatehpur) ने आरोप लगाया कि UPPCL प्रबंधन कंसल्टेंट नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचा कर घोटाला करना चाहती है.

Fatehpur UPPCL News: यूपी में बिजली व्यवस्था के निजीकरण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश की शाखा फतेहपुर में कार्यरत कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) प्रबंधन द्वारा कंसल्टेंट की नियुक्ति प्रक्रिया में किए गए बदलावों से निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है. समिति का दावा है कि यह बदलाव निजी घरानों से मिलीभगत का संकेत हैं और इससे एक बड़े घोटाले की आशंका पैदा हो गई है.

फतेहपुर संघर्ष समिति ने जताई घोटाले की आशंका

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों – इं. जितेंद्र कुमार, धीरेंद्र सिंह, निसार खान, दीपक यादव, नवीन कुमार, धीरेंद्र पटेल, सुरेश मौर्य, और लवकुश कुमार ने कहा कि कंसल्टेंट की नियुक्ति प्रक्रिया में "हितों के टकराव" (Conflict of Interest) के प्रावधानों को शिथिल करना गंभीर चिंता का विषय है. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की योजना बना रहा है.

कंसल्टेंट नियुक्ति प्रक्रिया में किए गए बदलाव

संघर्ष समिति के अनुसार, कंसल्टेंट नियुक्ति के लिए जारी टेंडर डॉक्यूमेंट (RFP) में बार-बार बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे साफ जाहिर होता है कि एक पूर्व-निर्धारित कंपनी को फायदा पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है. प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं:

1. वार्षिक टर्नओवर की शर्तों में बदलाव:

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  • पहले आरएफपी में कंसल्टेंट कंपनी के लिए 500 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर की अनिवार्यता थी, जिसे घटाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

2. कर्मचारियों की संख्या में कमी:

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  • पहले कंसल्टेंट कंपनी के लिए 500 कर्मचारियों की अनिवार्यता थी, जिसे घटाकर 200 कर दिया गया है.

3. हितों के टकराव का प्रावधान शिथिल:

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  • इससे यह आशंका बढ़ गई है कि कोई निजी कंपनी, जो पहले से ही पावर सेक्टर में किसी रूप में सक्रिय है, उसे ही कंसल्टेंट नियुक्त कर दिया जाएगा और वह निजीकरण की नीति को अपने पक्ष में बनाएगी.
क्या दोहराया जाएगा आगरा फ्रेंचाइजी मॉडल का घोटाला?

संघर्ष समिति ने आगरा अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी इसी तरह निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए गलत आंकड़े प्रस्तुत किए गए थे. इसके कारण उपभोक्ताओं, पावर कॉरपोरेशन और सरकार को भारी नुकसान हुआ, जिसका खामियाजा आज भी भुगतना पड़ रहा है.

संघर्ष समिति का ऐलान: जनता को जागरूक किया जाएगा

संघर्ष समिति ने साफ किया कि बिजली कर्मी किसी भी हाल में इस निजीकरण को स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने सरकार से इस फैसले को तत्काल रद्द करने की मांग की और कहा कि अगर इस पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे. समिति ने कहा कि वे इस मुद्दे को आम जनता के बीच ले जाकर निजीकरण से जुड़े घोटालों को उजागर करेंगे.

सरकार की पारदर्शिता नीति पर सवाल

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि यूपी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की यह गतिविधियां प्रदेश सरकार की पारदर्शिता नीति के खिलाफ हैं. यदि टेंडर प्रक्रिया में लगातार बदलाव होते रहे तो इससे सरकार की साख को भी नुकसान पहुंचेगा.

बिजली कर्मियों ने दी चेतावनी

बिजली कर्मियों का कहना है कि प्रबंधन झूठ और डर का माहौल बनाकर निजीकरण को आगे बढ़ाना चाहता है. लेकिन संघर्ष समिति इसे सफल नहीं होने देगी और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी.

08 Feb 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

UPPCL News: यूपी में बिजली निजीकरण की क्या साजिश हो रही है ! क्यों लग रहे हैं घोटाले के आरोप?

Fatehpur News In Hindi

Fatehpur UPPCL News: यूपी में बिजली व्यवस्था के निजीकरण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश की शाखा फतेहपुर में कार्यरत कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) प्रबंधन द्वारा कंसल्टेंट की नियुक्ति प्रक्रिया में किए गए बदलावों से निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है. समिति का दावा है कि यह बदलाव निजी घरानों से मिलीभगत का संकेत हैं और इससे एक बड़े घोटाले की आशंका पैदा हो गई है.

फतेहपुर संघर्ष समिति ने जताई घोटाले की आशंका

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों – इं. जितेंद्र कुमार, धीरेंद्र सिंह, निसार खान, दीपक यादव, नवीन कुमार, धीरेंद्र पटेल, सुरेश मौर्य, और लवकुश कुमार ने कहा कि कंसल्टेंट की नियुक्ति प्रक्रिया में "हितों के टकराव" (Conflict of Interest) के प्रावधानों को शिथिल करना गंभीर चिंता का विषय है. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की योजना बना रहा है.

कंसल्टेंट नियुक्ति प्रक्रिया में किए गए बदलाव

संघर्ष समिति के अनुसार, कंसल्टेंट नियुक्ति के लिए जारी टेंडर डॉक्यूमेंट (RFP) में बार-बार बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे साफ जाहिर होता है कि एक पूर्व-निर्धारित कंपनी को फायदा पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है. प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं:

1. वार्षिक टर्नओवर की शर्तों में बदलाव:

  • पहले आरएफपी में कंसल्टेंट कंपनी के लिए 500 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर की अनिवार्यता थी, जिसे घटाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

2. कर्मचारियों की संख्या में कमी:

  • पहले कंसल्टेंट कंपनी के लिए 500 कर्मचारियों की अनिवार्यता थी, जिसे घटाकर 200 कर दिया गया है.

3. हितों के टकराव का प्रावधान शिथिल:

  • इससे यह आशंका बढ़ गई है कि कोई निजी कंपनी, जो पहले से ही पावर सेक्टर में किसी रूप में सक्रिय है, उसे ही कंसल्टेंट नियुक्त कर दिया जाएगा और वह निजीकरण की नीति को अपने पक्ष में बनाएगी.
क्या दोहराया जाएगा आगरा फ्रेंचाइजी मॉडल का घोटाला?

संघर्ष समिति ने आगरा अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी इसी तरह निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए गलत आंकड़े प्रस्तुत किए गए थे. इसके कारण उपभोक्ताओं, पावर कॉरपोरेशन और सरकार को भारी नुकसान हुआ, जिसका खामियाजा आज भी भुगतना पड़ रहा है.

संघर्ष समिति का ऐलान: जनता को जागरूक किया जाएगा

संघर्ष समिति ने साफ किया कि बिजली कर्मी किसी भी हाल में इस निजीकरण को स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने सरकार से इस फैसले को तत्काल रद्द करने की मांग की और कहा कि अगर इस पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे. समिति ने कहा कि वे इस मुद्दे को आम जनता के बीच ले जाकर निजीकरण से जुड़े घोटालों को उजागर करेंगे.

सरकार की पारदर्शिता नीति पर सवाल

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि यूपी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की यह गतिविधियां प्रदेश सरकार की पारदर्शिता नीति के खिलाफ हैं. यदि टेंडर प्रक्रिया में लगातार बदलाव होते रहे तो इससे सरकार की साख को भी नुकसान पहुंचेगा.

बिजली कर्मियों ने दी चेतावनी

बिजली कर्मियों का कहना है कि प्रबंधन झूठ और डर का माहौल बनाकर निजीकरण को आगे बढ़ाना चाहता है. लेकिन संघर्ष समिति इसे सफल नहीं होने देगी और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी.

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