Fatehpur News: विदाई में भी शिक्षा की महक ! फतेहपुर में गुरु जय प्रकाश सिंह को नम आंखों से दी गई विदाई
फतेहपुर के श्री ब्रह्म संस्कृत महाविद्यालय, विजयीपुर में सहायक अध्यापक जय प्रकाश सिंह के सेवानिवृत्त होने पर भावभीना विदाई समारोह आयोजित हुआ. शिक्षकों, छात्रों और क्षेत्रीय लोगों ने उनके योगदान को याद करते हुए नम आंखों से विदाई दी.
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के स्वामीबाग गनही, विजयीपुर स्थित श्री ब्रह्म संस्कृत महाविद्यालय में सोमवार का दिन भावनाओं से भरा रहा. वर्षों तक शिक्षा की अलख जगाने वाले सहायक अध्यापक जय प्रकाश सिंह के सेवानिवृत्त होने पर आयोजित विदाई समारोह में सम्मान, स्नेह और यादों का अनोखा संगम देखने को मिला.
मां सरस्वती के पूजन के साथ शुरू हुआ गरिमामय आयोजन
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से किया गया. इस दौरान पूरे परिसर में आध्यात्मिक और गरिमामय वातावरण बना रहा. शिक्षक, छात्र-छात्राएं और उपस्थित अतिथि इस विशेष क्षण के साक्षी बने. यह आयोजन न केवल एक विदाई समारोह था, बल्कि एक ऐसे शिक्षक के सम्मान का अवसर भी था जिन्होंने वर्षों तक ज्ञान की ज्योति जलाए रखी.
प्राचार्य डॉ दिलीप पांडेय ने योगदान को किया याद
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ दिलीप पांडेय ने अपने संबोधन में जय प्रकाश सिंह के सेवाकाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और समर्पण भाव से संस्थान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने छात्रों के जीवन को दिशा देने का कार्य किया, जो किसी भी शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है. प्राचार्य ने कहा कि उनका योगदान हमेशा महाविद्यालय के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा.
वक्ताओं ने बताया सरल स्वभाव और छात्रों के प्रति समर्पण
विदाई भाषण में छलकी वर्षों की यादें
अपने विदाई भाषण में जय प्रकाश सिंह ने महाविद्यालय परिवार, सहकर्मियों और छात्रों के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि यह संस्थान उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है और यहां बिताए गए वर्षों की स्मृतियां हमेशा उनके साथ रहेंगी. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा अपने कर्तव्यों को सेवा भावना के साथ निभाया और यही उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है. उनके शब्दों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया.
स्मृति चिन्ह और सम्मान के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में जय प्रकाश सिंह को स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया. इस दौरान पूरा माहौल भावनात्मक हो गया और कई लोगों की आंखें नम दिखाई दीं. सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य और स्वस्थ जीवन की कामना की. यह समारोह एक शिक्षक के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता का जीवंत उदाहरण बन गया, जिसने हर किसी के दिल में एक गहरी छाप छोड़ी.
Fatehpur News: विदाई में भी शिक्षा की महक ! फतेहपुर में गुरु जय प्रकाश सिंह को नम आंखों से दी गई विदाई
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के स्वामीबाग गनही, विजयीपुर स्थित श्री ब्रह्म संस्कृत महाविद्यालय में सोमवार का दिन भावनाओं से भरा रहा. वर्षों तक शिक्षा की अलख जगाने वाले सहायक अध्यापक जय प्रकाश सिंह के सेवानिवृत्त होने पर आयोजित विदाई समारोह में सम्मान, स्नेह और यादों का अनोखा संगम देखने को मिला.
मां सरस्वती के पूजन के साथ शुरू हुआ गरिमामय आयोजन
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से किया गया. इस दौरान पूरे परिसर में आध्यात्मिक और गरिमामय वातावरण बना रहा. शिक्षक, छात्र-छात्राएं और उपस्थित अतिथि इस विशेष क्षण के साक्षी बने. यह आयोजन न केवल एक विदाई समारोह था, बल्कि एक ऐसे शिक्षक के सम्मान का अवसर भी था जिन्होंने वर्षों तक ज्ञान की ज्योति जलाए रखी.
प्राचार्य डॉ दिलीप पांडेय ने योगदान को किया याद
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ दिलीप पांडेय ने अपने संबोधन में जय प्रकाश सिंह के सेवाकाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और समर्पण भाव से संस्थान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने छात्रों के जीवन को दिशा देने का कार्य किया, जो किसी भी शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है. प्राचार्य ने कहा कि उनका योगदान हमेशा महाविद्यालय के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा.
वक्ताओं ने बताया सरल स्वभाव और छात्रों के प्रति समर्पण
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार साझा करते हुए जय प्रकाश सिंह के व्यक्तित्व की सराहना की. उन्होंने कहा कि उनका सरल और सहज स्वभाव हर किसी को प्रभावित करता था. छात्रों के प्रति उनका स्नेह और शिक्षण के प्रति उनकी लगन उन्हें एक आदर्श शिक्षक बनाती थी. कई वक्ताओं ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने किस तरह छात्रों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया.
विदाई भाषण में छलकी वर्षों की यादें
अपने विदाई भाषण में जय प्रकाश सिंह ने महाविद्यालय परिवार, सहकर्मियों और छात्रों के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि यह संस्थान उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है और यहां बिताए गए वर्षों की स्मृतियां हमेशा उनके साथ रहेंगी. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा अपने कर्तव्यों को सेवा भावना के साथ निभाया और यही उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है. उनके शब्दों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया.
स्मृति चिन्ह और सम्मान के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में जय प्रकाश सिंह को स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया. इस दौरान पूरा माहौल भावनात्मक हो गया और कई लोगों की आंखें नम दिखाई दीं. सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य और स्वस्थ जीवन की कामना की. यह समारोह एक शिक्षक के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता का जीवंत उदाहरण बन गया, जिसने हर किसी के दिल में एक गहरी छाप छोड़ी.