मुस्लिम विरोध करे तो पाकिस्तानी, हिंदू करें तो देशद्रोही: जानिए भाजपा पर कैसे कटाक्ष कर रहे हैं संतोष द्विवेदी
सोनम वांगचुक के आंदोलन और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संतोष द्विवेदी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध करने वालों के साथ अलग-अलग पैमाने अपनाती है. उनके बयान के बाद लोकतंत्र, असहमति और विरोध के अधिकार पर नई बहस छिड़ गई है.
Santosh Dwivedi: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन ने देश की राजनीति को फिर गर्मा दिया है. इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संतोष द्विवेदी का बयान सुर्खियों में है. उन्होंने सरकार पर विरोध की आवाजों के प्रति अलग रवैया अपनाने का आरोप लगाया.
अनशन और विरोध की लोकतांत्रिक परंपरा
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में अनशन और शांतिपूर्ण आंदोलन लंबे समय से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का माध्यम रहे हैं. महात्मा गांधी ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ कई बार उपवास किया. भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त और जतींद्रनाथ दास ने जेल सुधारों के लिए भूख हड़ताल की. स्वतंत्र भारत में पी. श्रीरामुलु, इरोम शर्मिला और अन्ना हजारे जैसे आंदोलनों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा पैदा की.
सोनम वांगचुक के आंदोलन पर बढ़ी सियासी गर्मी

भाजपा पर संतोष द्विवेदी का कटाक्ष
द्विवेदी ने कहा, "अगर कोई मुस्लिम विरोध करता है तो उसे पाकिस्तानी कहा जाता है, हिंदू विरोध करता है तो देशद्रोही कहा जाता है. अब सोनम वांगचुक को चीन का एजेंट बताया जा रहा है."
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. उन्होंने कहा कि, अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से उठाने वाले छात्रों के साथ सख्ती बरती गई. द्विवेदी ने यह भी कहा कि जब विपक्ष सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करता है तो उसके नेताओं को हिरासत में ले लिया जाता है. अब ये सोनम वांगचुक को चाइना का एजेंट बता रहे हैं जो हमारे बच्चों के लिए लड़ाई लड़ रहा है.
मुस्लिम विरोध करे तो पाकिस्तानी, हिंदू करें तो देशद्रोही: जानिए भाजपा पर कैसे कटाक्ष कर रहे हैं संतोष द्विवेदी
Santosh Dwivedi: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन ने देश की राजनीति को फिर गर्मा दिया है. इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संतोष द्विवेदी का बयान सुर्खियों में है. उन्होंने सरकार पर विरोध की आवाजों के प्रति अलग रवैया अपनाने का आरोप लगाया.
अनशन और विरोध की लोकतांत्रिक परंपरा
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में अनशन और शांतिपूर्ण आंदोलन लंबे समय से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का माध्यम रहे हैं. महात्मा गांधी ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ कई बार उपवास किया. भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त और जतींद्रनाथ दास ने जेल सुधारों के लिए भूख हड़ताल की. स्वतंत्र भारत में पी. श्रीरामुलु, इरोम शर्मिला और अन्ना हजारे जैसे आंदोलनों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा पैदा की.
सोनम वांगचुक के आंदोलन पर बढ़ी सियासी गर्मी
लद्दाख से जुड़े संवैधानिक और पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक के समर्थन और विरोध में लगातार राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. हालिया घटनाक्रम के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति का विषय बन गया है और विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहा है.
भाजपा पर संतोष द्विवेदी का कटाक्ष
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संतोष द्विवेदी ने भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सोनम वांगचुक पहले व्यक्ति नहीं हैं जिन्होंने आंदोलन या भूख हड़ताल का रास्ता अपनाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध करने वालों को अलग-अलग नजरिए से देखती है.
द्विवेदी ने कहा, "अगर कोई मुस्लिम विरोध करता है तो उसे पाकिस्तानी कहा जाता है, हिंदू विरोध करता है तो देशद्रोही कहा जाता है. अब सोनम वांगचुक को चीन का एजेंट बताया जा रहा है."
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. उन्होंने कहा कि, अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से उठाने वाले छात्रों के साथ सख्ती बरती गई. द्विवेदी ने यह भी कहा कि जब विपक्ष सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करता है तो उसके नेताओं को हिरासत में ले लिया जाता है. अब ये सोनम वांगचुक को चाइना का एजेंट बता रहे हैं जो हमारे बच्चों के लिए लड़ाई लड़ रहा है.