Please enable JavaScript to support our website by allowing ads.

Gudiya Kab Hai 2026: नाग पंचमी पर उत्तर प्रदेश में क्यों पीटी जाती है गुड़िया? जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त

Gudiya Kab Hai 2026: नाग पंचमी पर उत्तर प्रदेश में क्यों पीटी जाती है गुड़िया? जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त
गुड़िया और नाग पंचमी 2026 में कब है (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

Gudiya Kab Hai 2026: नाग पंचमी का पर्व इस वर्ष 17 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा. उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इसी दिन गुड़िया पीटने की अनोखी परंपरा निभाई जाती है. आखिर इसकी शुरुआत कैसे हुई, इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है और नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त क्या है, आइए विस्तार से जानते हैं.

Naag Panchami Kab Hai 2026: श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला नाग पंचमी का पर्व सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है. इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है. उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में नाग पंचमी के अवसर पर गुड़िया पीटने की वर्षों पुरानी परंपरा भी निभाई जाती है. यह परंपरा एक प्राचीन लोककथा से जुड़ी मानी जाती है. ऐसे में जानते हैं कि वर्ष 2026 में नाग पंचमी और गुड़िया कब है, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और गुड़िया पीटने की परंपरा के पीछे क्या मान्यता है.

नाग पंचमी और गुड़िया कब है 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण (सावन) मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 16 अगस्त 2026 को शाम 04:52 बजे प्रारंभ होगी और 17 अगस्त 2026 को शाम 05:00 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर नाग पंचमी और गुड़िया का पर्व 17 अगस्त 2026, सोमवार को मनाया जाएगा.

नाग पंचमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

  • पंचमी तिथि प्रारंभ: 16 अगस्त 2026, शाम 04:52 बजे.
  • पंचमी तिथि समाप्त: 17 अगस्त 2026, शाम 05:00 बजे.
  • नाग पंचमी: 17 अगस्त 2026, सोमवार.
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:04 बजे से सुबह 08:39 बजे तक
नाग पंचमी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन भगवान शिव और नाग देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं. इस दिन पूजा-अर्चना करने से सुख, समृद्धि और परिवार की रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है. कई ज्योतिषाचार्य यह भी मानते हैं कि नाग पंचमी पर विधि-विधान से पूजा करने से कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है.

नाग पंचमी की पूजा कैसे करें?

नाग पंचमी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद घर के मुख्य द्वार या पूजा स्थान पर गोबर या मिट्टी से नाग देवता का प्रतीक बनाएं. नाग देवता को फूल, दूध, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें. धूप-दीप जलाकर विधिवत पूजा करें और नाग पंचमी की कथा का श्रवण करें.

Read More: जब आसमान उगलेगा आग, तब बरसेगा अमृत! इस तारीख़ से शुरू होंगे नौतपा, जानिए क्या होता है अच्छी बारिश का संकेत

इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करना भी अत्यंत शुभ माना गया है. शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करें. मान्यता है कि इससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और भय तथा नकारात्मकता दूर होती है.

Read More: सावन में सोमवार ही नहीं, संपत शनिवार भी हैं बेहद खास ! जानिए महत्व, पूजा विधि और शनि कृपा पाने के आसान उपाय

उत्तर प्रदेश में क्यों पीटी जाती है गुड़िया?

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में नाग पंचमी के दिन गुड़िया पीटने की परंपरा आज भी निभाई जाती है. इस परंपरा के तहत घर की महिलाएं कपड़े की गुड़िया बनाती हैं. बाद में उसे किसी मंदिर, तालाब या निर्धारित स्थान पर रखा जाता है, जहां लड़के प्रतीकात्मक रूप से डंडों से उसे पीटते हैं. यह परंपरा एक प्राचीन लोककथा से जुड़ी हुई मानी जाती है.

Read More: Baidyanath Dham Jyotirlinga: रोगों से मुक्ति दिलाने वाले बाबा बैद्यनाथ धाम का क्या है रावण से संबंध? जानिए ज्योतिर्लिंग की महिमा

क्या है गुड़िया पीटने की प्रचलित कथा?

लोक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन समय में महादेव नाम का एक युवक भगवान शिव और नाग देवता का परम भक्त था. वह प्रतिदिन मंदिर जाकर भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करता था. उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर नाग देवता प्रतिदिन उसे दर्शन देते थे और कई बार उसके शरीर से लिपट जाते थे, लेकिन कभी उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाते थे.

एक दिन महादेव पूजा के बाद ध्यान में बैठा था. उसी समय एक नाग उसके पैरों से लिपट गया. तभी उसकी बहन मंदिर पहुंची. भाई के शरीर पर सांप को देखकर वह घबरा गई और उसे लगा कि नाग उसके भाई को डसने वाला है. डर के कारण उसने डंडे से नाग पर कई प्रहार कर दिए, जिससे उसकी मृत्यु हो गई.

जब महादेव का ध्यान टूटा तो उसने नाग देवता को मृत अवस्था में देखा. बहन से पूरी घटना जानने के बाद वह अत्यंत दुखी और क्रोधित हुआ. लोक मान्यता है कि इसी घटना की स्मृति में नाग पंचमी के दिन प्रतीकात्मक रूप से गुड़िया पीटने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में निभाई जाती है.

क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं?

धार्मिक विद्वानों के अनुसार नाग पंचमी का मूल उद्देश्य प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना है. नाग देवता को भगवान शिव का गण और उनके आभूषण के रूप में पूजा जाता है. इसलिए नागों की पूजा भगवान शिव की आराधना के साथ करने की परंपरा बताई गई है. यह पर्व प्रकृति संरक्षण, जीवों के प्रति करुणा और सनातन परंपराओं के सम्मान का संदेश भी देता है.

20 Jul 2026 By Vishwa Deepak Awasthi

Gudiya Kab Hai 2026: नाग पंचमी पर उत्तर प्रदेश में क्यों पीटी जाती है गुड़िया? जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त

Naag Panchami Kab Hai 2026: श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला नाग पंचमी का पर्व सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है. इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है. उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में नाग पंचमी के अवसर पर गुड़िया पीटने की वर्षों पुरानी परंपरा भी निभाई जाती है. यह परंपरा एक प्राचीन लोककथा से जुड़ी मानी जाती है. ऐसे में जानते हैं कि वर्ष 2026 में नाग पंचमी और गुड़िया कब है, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और गुड़िया पीटने की परंपरा के पीछे क्या मान्यता है.

नाग पंचमी और गुड़िया कब है 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण (सावन) मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 16 अगस्त 2026 को शाम 04:52 बजे प्रारंभ होगी और 17 अगस्त 2026 को शाम 05:00 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर नाग पंचमी और गुड़िया का पर्व 17 अगस्त 2026, सोमवार को मनाया जाएगा.

नाग पंचमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

  • पंचमी तिथि प्रारंभ: 16 अगस्त 2026, शाम 04:52 बजे.
  • पंचमी तिथि समाप्त: 17 अगस्त 2026, शाम 05:00 बजे.
  • नाग पंचमी: 17 अगस्त 2026, सोमवार.
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:04 बजे से सुबह 08:39 बजे तक
नाग पंचमी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन भगवान शिव और नाग देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं. इस दिन पूजा-अर्चना करने से सुख, समृद्धि और परिवार की रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है. कई ज्योतिषाचार्य यह भी मानते हैं कि नाग पंचमी पर विधि-विधान से पूजा करने से कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है.

नाग पंचमी की पूजा कैसे करें?

नाग पंचमी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद घर के मुख्य द्वार या पूजा स्थान पर गोबर या मिट्टी से नाग देवता का प्रतीक बनाएं. नाग देवता को फूल, दूध, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें. धूप-दीप जलाकर विधिवत पूजा करें और नाग पंचमी की कथा का श्रवण करें.

इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करना भी अत्यंत शुभ माना गया है. शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करें. मान्यता है कि इससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और भय तथा नकारात्मकता दूर होती है.

उत्तर प्रदेश में क्यों पीटी जाती है गुड़िया?

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में नाग पंचमी के दिन गुड़िया पीटने की परंपरा आज भी निभाई जाती है. इस परंपरा के तहत घर की महिलाएं कपड़े की गुड़िया बनाती हैं. बाद में उसे किसी मंदिर, तालाब या निर्धारित स्थान पर रखा जाता है, जहां लड़के प्रतीकात्मक रूप से डंडों से उसे पीटते हैं. यह परंपरा एक प्राचीन लोककथा से जुड़ी हुई मानी जाती है.

क्या है गुड़िया पीटने की प्रचलित कथा?

लोक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन समय में महादेव नाम का एक युवक भगवान शिव और नाग देवता का परम भक्त था. वह प्रतिदिन मंदिर जाकर भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करता था. उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर नाग देवता प्रतिदिन उसे दर्शन देते थे और कई बार उसके शरीर से लिपट जाते थे, लेकिन कभी उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाते थे.

एक दिन महादेव पूजा के बाद ध्यान में बैठा था. उसी समय एक नाग उसके पैरों से लिपट गया. तभी उसकी बहन मंदिर पहुंची. भाई के शरीर पर सांप को देखकर वह घबरा गई और उसे लगा कि नाग उसके भाई को डसने वाला है. डर के कारण उसने डंडे से नाग पर कई प्रहार कर दिए, जिससे उसकी मृत्यु हो गई.

जब महादेव का ध्यान टूटा तो उसने नाग देवता को मृत अवस्था में देखा. बहन से पूरी घटना जानने के बाद वह अत्यंत दुखी और क्रोधित हुआ. लोक मान्यता है कि इसी घटना की स्मृति में नाग पंचमी के दिन प्रतीकात्मक रूप से गुड़िया पीटने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में निभाई जाती है.

क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं?

धार्मिक विद्वानों के अनुसार नाग पंचमी का मूल उद्देश्य प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना है. नाग देवता को भगवान शिव का गण और उनके आभूषण के रूप में पूजा जाता है. इसलिए नागों की पूजा भगवान शिव की आराधना के साथ करने की परंपरा बताई गई है. यह पर्व प्रकृति संरक्षण, जीवों के प्रति करुणा और सनातन परंपराओं के सम्मान का संदेश भी देता है.

Latest News

Fatehpur News: जब फहमीदा ने पूछा- कहां गई योगी सरकार? दबंगों की धमकी से घर छोड़ने को मजबूर दंपति, पुलिस पर संरक्षण देने का आरोप Fatehpur News: जब फहमीदा ने पूछा- कहां गई योगी सरकार? दबंगों की धमकी से घर छोड़ने को मजबूर दंपति, पुलिस पर संरक्षण देने का आरोप
फतेहपुर में फहमीदा बानो ने पड़ोसियों पर मकान की दीवार और छत क्षतिग्रस्त करने, कब्जे की कोशिश, मारपीट और धमकी...
Fatehpur News: फतेहपुर में भाजपा नेता अवधेश मिश्रा पर करोड़ों की धोखाधड़ी के आरोप, डीएम से शिकायत
Uttar Pradesh: फतेहपुर मेडिकल कॉलेज में करोड़ों खर्च, फिर भी MRI और CT Scan नहीं ! असुविधाओं से जूझ रहे मरीज
Fatehpur News: व्यापारी कुंभ में फतेहपुर से जाएंगे 100 व्यापारी, 20 गाड़ियों से लखनऊ कूच की तैयारी, बैठक में बनी रणनीति
आज का राशिफल 09 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों को रहना होगा सावधान, जानें सभी 12 राशियों का दैनिक भाग्यफल
Unnao News: 28 साल पहले जिस बेटे की हो गई थी तेरहवीं, वह अचानक जिंदा घर लौटा, मां से मिल छलक पड़े आंसू
Baidyanath Dham Jyotirlinga: रोगों से मुक्ति दिलाने वाले बाबा बैद्यनाथ धाम का क्या है रावण से संबंध? जानिए ज्योतिर्लिंग की महिमा

Follow Us