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DSP Tripurari Pandey Biography: यूपी पुलिस के सुपर कॉप 'त्रिपुरारी पांडे' की कहानी ! जानिए कांस्टेबल से डीएसपी तक का सफर

DSP Tripurari Pandey Biography: यूपी पुलिस के सुपर कॉप 'त्रिपुरारी पांडे' की कहानी ! जानिए कांस्टेबल से डीएसपी तक का सफर
जांबाज-नेकदिल अफसर डीएसपी त्रिपुरारी पांडे अब यादों में, फोटो साभार सोशल मीडिया

DSP Tripurari Pandey Biography: यूपी के 'सुपर कॉप' तेज तर्रार डीएसपी त्रिपुरारी पांडे आज हमारे बीच नहीं हैं.बीते दिनों लखनऊ में लंबी बीमारी के चलते मल्टी आर्गन फेल्योर होने के कारण उनका निधन हो गया था. उनके नेक और समाजहित में किये गए कार्य हमेशा सभी को याद आएंगे. कांस्टेबल से डीएसपी तक का सफर तय करने वाले त्रिपुरारी पांडे इन दिनों जालौन जिले के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में तैनात थे. लंबे समय तक कानपुर से उनका गहरा नाता रहा. बावरिया गिरोह हो या संजय ओझा गिरोह सबका खात्मा करने में इनका अहम योगदान था.ज


हाईलाइट्स

  • डीएसपी त्रिपुरारी पांडे के निधन पर पुलिस विभाग में शोक की लहर
  • कांस्टेबल से लेकर डीएसपी तक का ऐसा था सफर, जरायम की दुनिया वाले खाते थे इनसे खौफ
  • यूपी के सुपर कॉप कहे जाते थे त्रिपुरारी पांडे, गरीबो के मसीहा, घटना का खुलासा जल्द से जल्द करने में

DSP Tripurari Pandey is now in memories : डीएसपी त्रिपुरारी पांडे एक तेज तर्रार पुलिस अधिकारी थे. जबसे पुलिस सेवा में आये तबसे ही उनके मन में हर तबके की बढ़ चढ़कर मदद करने का अंदर से जज़्बा था.अपराधियों की क्राइम कुंडली जल्द से जल्द खंगाल लेते थे. बड़े से बड़ा अपराधी इस पुलिस अधिकारी के कार्य से हमेशा खौफजदा रहता था. एक कांस्टेबल से डीएसपी (पुलिस अधिकारी) तक का सफर उन्होंने किस तरह से कड़े संघर्षों के बीच पूरा किया. इस जांबाज अधिकारी की पूरी जीवनी के बारे में आपको बताएंगे.

 

डीएसपी त्रिपुरारी पांडे यूपी के सुपरकॉप

उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में बहुत से ऐसे पुलिसकर्मी और अफसर रहे जिनके कार्यों से जनता अपने आप को सुरक्षित महसूस करती रही और उनके नाम से अपराधियो की बोलती बंद हो जाया करती थी. ऐसे ही एक पुलिस अधिकारी त्रिपुरारी पांडे जिन्हें यूपी का सुपर कॉप कहे तो गलत नहीं होगा. बीते सोमवार को उनका लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया था.उनके निधन की खबर से पुलिस महकमा भी स्तब्ध है. 

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कौन थे डीएसपी त्रिपुरारी पांडे

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आजमगढ़ में जन्मे त्रिपुरारी पांडे लंबे समय तक पुलिस की सेवा कानपुर में की. 1988 में बतौर सिपाही पुलिस में भर्ती हुए. हमेशा अपने अधिकारियों की नजर में रहने वाले त्रिपुरारी पांडे का सेंस गजब का था. सिपाही रहते हुए भी एक अफसर की तरह ही क्राइम कुंडली अपराधियो की खंगाल लेते थे. उनके क्षेत्र में कोई भी घटना होती जिसका खुलासा वे शीघ्र कर देते थे. जरायम करने वाले उनके नाम से भाग खड़े होते थे. उनके नाम की दहशत ही कुछ ऐसी थी. उनके लगातार बेहतर कार्य को देखते हुए 10 वर्ष बाद उन्हें प्रमोशन कर हेड कांस्टेबल नियुक्त कर दिया गया. फिर उन्होंने सब इंस्पेक्टर की परीक्षा दी. जिसमें वे सफल हुए और वह सब इंस्पेक्टर बन गए.

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कई बड़े गिरोह का किया खात्मा

इस दौरान उस समय बावडिया गिरोह और संजय ओझा गिरोह के आतंक के खात्मे में त्रिपुरारी पांडे ने अहम योगदान निभाया. जिसके बाद उन्हें 2005 में आउट ऑफ टर्न मिलते ही प्रमोशन कर दिया गया. अब उनके कंधे पर तीन स्टार लग गए और वह इंस्पेक्टर बन गए. कानपुर में सबसे ज्यादा समय बिताया.करीब 25 वर्षो जैसे लंबे समय तक कानपुर के सर्कल व थाना क्षेत्रों में तैनात रहे. यही नहीं कानपुर जीआरपी में बतौर इंस्पेक्टर तैनात रहे. उनके कार्यों को पुलिस के अधिकारी भी बेहद पसंद करते थे. 2016 में उन्हें डिपार्टमेंटल प्रमोशन मिल गया और वे डीएसपी बना दिये गए. 35 साल की नौकरी में से 25 साल करीब कानपुर में रहे. वाराणसी, लखनऊ, चंदौली, मुगलसराय जीआरपी में भी तैनाती रही. कानपुर जीआरपी में भी उनका लंबा समय गुजरा. उनकी पहुंच अधिकारियों से लेकर नेताओं तक थी.

नेक कार्यो और मदद के लिए हमेशा रहे आगे

त्रिपुरारी पांडे एक सक्षम पुलिस अधिकारी के अलावा नेक दिल इंसान भी थे. किसी को मदद की जरूरत होती तो बेहिचक उसकी मदद को आगे आ जाते. 2018 में चंदौली में एक वाक्या को याद करते हुए बताया गया कि दो मासूम बच्ची दुर्घटना का शिकार हो गयी थी.गरीब पिता अस्पताल ले गए.दवाएं इतनी महंगी थी कि उसके बस की नहीं थी. एक बेटी के अमाशय में गम्भीर चोट लगी थी.

फिर इस घटना की सूचना पर पुलिस अफसर त्रिपुरारी पांडे अस्पताल पहुंचे जो उस वक्त सकलडीहा में तैनात थे. रोते-बिलखते पिता को देख वे भी भावुक हो गए उन्होंने उसे अपना एटीएम निकालकर दिया और कहा कि जितनी जरूरत हो आप पैसा निकाल लें. उस बच्ची के इलाज में लाखों रुपये खर्च हुए थे. ये पैसे उसी पुलिस अफसर त्रिपुरारी पांडे ने ही दिए थे. आजतक वह व्यक्ति उनका एहसान नहीं भुला है.

गरीबों के थे मसीहा

ऐसे और भी नेक कार्य समाज हित के लिए उन्होंने किये. जिसमें गरीब बेटियों की शादी का खर्च उठाया. इसके साथ ही कानपुर के चर्चित संजीत हत्याकांड मामले में संजीत की बहन की पढ़ाई और हर साल राखी बंधवाने आते थे. लोग उनमें एक पिता और भाई की नजर से देखते थे. गरीब बेटियों का कन्यादान किया.पिछले वर्ष एक केस की विवेचना में फंसने के बाद उनका तबादला जालौन कर दिया गया. कानपुर हिंसा मामले के मुख्य विवेचक थे. इन दिनों वे बतौर डीएसपी पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में तैनात थे. उनके नेक काम तब भी जारी रहे.

55 वर्ष की उम्र में निधन

कुछ दिनों से उनकी तबियत खराब रह रही थी. लखनऊ में इलाज चल रहा था. तभी शरीर के मल्टी ऑर्गन फेल्योर हो गए और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया. आखिरकार ये जांबाज पुलिस अफसर 55 वर्ष की उम्र में जिंदगी की जंग हार गया. त्रिपुरारी अपने पीछे पत्नी और दो पुत्र छोड़ गए. एक बेटे का विवाह कानपुर में ही हुआ है. उनके निधन की सूचना पर समस्त पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियो ने गहरा शोक व्यक्त किया है. केंद्रीय मंत्री महेंद्र पांडे ने भी दुख जताया है.

हमेशा दिलों में रहेंगे

डीएसपी त्रिपुरारी पांडे का निधन बहुत भी अपूर्णीय क्षति है. आज वे हमारे बीच नहीं है. उनके दिलेरी और नेक दिल इंसान वाला स्वाभाव और किये गए समाज हित के लिए कार्यो को हमेशा याद किया जाएगा. आज हम सबके बीच वे नहीं है लेकिन उनकी यादें हम सबके दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी.

 

01 Nov 2023 By Vishal Shukla

DSP Tripurari Pandey Biography: यूपी पुलिस के सुपर कॉप 'त्रिपुरारी पांडे' की कहानी ! जानिए कांस्टेबल से डीएसपी तक का सफर


हाईलाइट्स

  • डीएसपी त्रिपुरारी पांडे के निधन पर पुलिस विभाग में शोक की लहर
  • कांस्टेबल से लेकर डीएसपी तक का ऐसा था सफर, जरायम की दुनिया वाले खाते थे इनसे खौफ
  • यूपी के सुपर कॉप कहे जाते थे त्रिपुरारी पांडे, गरीबो के मसीहा, घटना का खुलासा जल्द से जल्द करने में

DSP Tripurari Pandey is now in memories : डीएसपी त्रिपुरारी पांडे एक तेज तर्रार पुलिस अधिकारी थे. जबसे पुलिस सेवा में आये तबसे ही उनके मन में हर तबके की बढ़ चढ़कर मदद करने का अंदर से जज़्बा था.अपराधियों की क्राइम कुंडली जल्द से जल्द खंगाल लेते थे. बड़े से बड़ा अपराधी इस पुलिस अधिकारी के कार्य से हमेशा खौफजदा रहता था. एक कांस्टेबल से डीएसपी (पुलिस अधिकारी) तक का सफर उन्होंने किस तरह से कड़े संघर्षों के बीच पूरा किया. इस जांबाज अधिकारी की पूरी जीवनी के बारे में आपको बताएंगे.

 

डीएसपी त्रिपुरारी पांडे यूपी के सुपरकॉप

उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में बहुत से ऐसे पुलिसकर्मी और अफसर रहे जिनके कार्यों से जनता अपने आप को सुरक्षित महसूस करती रही और उनके नाम से अपराधियो की बोलती बंद हो जाया करती थी. ऐसे ही एक पुलिस अधिकारी त्रिपुरारी पांडे जिन्हें यूपी का सुपर कॉप कहे तो गलत नहीं होगा. बीते सोमवार को उनका लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया था.उनके निधन की खबर से पुलिस महकमा भी स्तब्ध है. 

कौन थे डीएसपी त्रिपुरारी पांडे

आजमगढ़ में जन्मे त्रिपुरारी पांडे लंबे समय तक पुलिस की सेवा कानपुर में की. 1988 में बतौर सिपाही पुलिस में भर्ती हुए. हमेशा अपने अधिकारियों की नजर में रहने वाले त्रिपुरारी पांडे का सेंस गजब का था. सिपाही रहते हुए भी एक अफसर की तरह ही क्राइम कुंडली अपराधियो की खंगाल लेते थे. उनके क्षेत्र में कोई भी घटना होती जिसका खुलासा वे शीघ्र कर देते थे. जरायम करने वाले उनके नाम से भाग खड़े होते थे. उनके नाम की दहशत ही कुछ ऐसी थी. उनके लगातार बेहतर कार्य को देखते हुए 10 वर्ष बाद उन्हें प्रमोशन कर हेड कांस्टेबल नियुक्त कर दिया गया. फिर उन्होंने सब इंस्पेक्टर की परीक्षा दी. जिसमें वे सफल हुए और वह सब इंस्पेक्टर बन गए.

कई बड़े गिरोह का किया खात्मा

इस दौरान उस समय बावडिया गिरोह और संजय ओझा गिरोह के आतंक के खात्मे में त्रिपुरारी पांडे ने अहम योगदान निभाया. जिसके बाद उन्हें 2005 में आउट ऑफ टर्न मिलते ही प्रमोशन कर दिया गया. अब उनके कंधे पर तीन स्टार लग गए और वह इंस्पेक्टर बन गए. कानपुर में सबसे ज्यादा समय बिताया.करीब 25 वर्षो जैसे लंबे समय तक कानपुर के सर्कल व थाना क्षेत्रों में तैनात रहे. यही नहीं कानपुर जीआरपी में बतौर इंस्पेक्टर तैनात रहे. उनके कार्यों को पुलिस के अधिकारी भी बेहद पसंद करते थे. 2016 में उन्हें डिपार्टमेंटल प्रमोशन मिल गया और वे डीएसपी बना दिये गए. 35 साल की नौकरी में से 25 साल करीब कानपुर में रहे. वाराणसी, लखनऊ, चंदौली, मुगलसराय जीआरपी में भी तैनाती रही. कानपुर जीआरपी में भी उनका लंबा समय गुजरा. उनकी पहुंच अधिकारियों से लेकर नेताओं तक थी.

नेक कार्यो और मदद के लिए हमेशा रहे आगे

त्रिपुरारी पांडे एक सक्षम पुलिस अधिकारी के अलावा नेक दिल इंसान भी थे. किसी को मदद की जरूरत होती तो बेहिचक उसकी मदद को आगे आ जाते. 2018 में चंदौली में एक वाक्या को याद करते हुए बताया गया कि दो मासूम बच्ची दुर्घटना का शिकार हो गयी थी.गरीब पिता अस्पताल ले गए.दवाएं इतनी महंगी थी कि उसके बस की नहीं थी. एक बेटी के अमाशय में गम्भीर चोट लगी थी.

फिर इस घटना की सूचना पर पुलिस अफसर त्रिपुरारी पांडे अस्पताल पहुंचे जो उस वक्त सकलडीहा में तैनात थे. रोते-बिलखते पिता को देख वे भी भावुक हो गए उन्होंने उसे अपना एटीएम निकालकर दिया और कहा कि जितनी जरूरत हो आप पैसा निकाल लें. उस बच्ची के इलाज में लाखों रुपये खर्च हुए थे. ये पैसे उसी पुलिस अफसर त्रिपुरारी पांडे ने ही दिए थे. आजतक वह व्यक्ति उनका एहसान नहीं भुला है.

गरीबों के थे मसीहा

ऐसे और भी नेक कार्य समाज हित के लिए उन्होंने किये. जिसमें गरीब बेटियों की शादी का खर्च उठाया. इसके साथ ही कानपुर के चर्चित संजीत हत्याकांड मामले में संजीत की बहन की पढ़ाई और हर साल राखी बंधवाने आते थे. लोग उनमें एक पिता और भाई की नजर से देखते थे. गरीब बेटियों का कन्यादान किया.पिछले वर्ष एक केस की विवेचना में फंसने के बाद उनका तबादला जालौन कर दिया गया. कानपुर हिंसा मामले के मुख्य विवेचक थे. इन दिनों वे बतौर डीएसपी पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में तैनात थे. उनके नेक काम तब भी जारी रहे.

55 वर्ष की उम्र में निधन

कुछ दिनों से उनकी तबियत खराब रह रही थी. लखनऊ में इलाज चल रहा था. तभी शरीर के मल्टी ऑर्गन फेल्योर हो गए और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया. आखिरकार ये जांबाज पुलिस अफसर 55 वर्ष की उम्र में जिंदगी की जंग हार गया. त्रिपुरारी अपने पीछे पत्नी और दो पुत्र छोड़ गए. एक बेटे का विवाह कानपुर में ही हुआ है. उनके निधन की सूचना पर समस्त पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियो ने गहरा शोक व्यक्त किया है. केंद्रीय मंत्री महेंद्र पांडे ने भी दुख जताया है.

हमेशा दिलों में रहेंगे

डीएसपी त्रिपुरारी पांडे का निधन बहुत भी अपूर्णीय क्षति है. आज वे हमारे बीच नहीं है. उनके दिलेरी और नेक दिल इंसान वाला स्वाभाव और किये गए समाज हित के लिए कार्यो को हमेशा याद किया जाएगा. आज हम सबके बीच वे नहीं है लेकिन उनकी यादें हम सबके दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी.

 

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