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जालसाजों का शिकार हुए जेल अधीक्षक: नीट में बेटी का दाखिला कराने के नाम पर 23 लाख की ठगी, ऐसे मिला था नंबर

जालसाजों का शिकार हुए जेल अधीक्षक: नीट में बेटी का दाखिला कराने के नाम पर 23 लाख की ठगी, ऐसे मिला था नंबर
उन्नाव जेल अधीक्षक से 23 लाख की ठगी (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

उन्नाव के जेल अधीक्षक पंकज कुमार सिंह से नीट में बेटी का दाखिला कराने के नाम पर 23 लाख रुपये की ठगी हो गई. जस्ट डायल के जरिए संपर्क में आए आरोपितों ने बैंक ड्राफ्ट और आरटीजीएस से रकम ली. पुलिस ने दो आरोपितों समेत जस्ट डायल प्रबंधक पर मुकदमा दर्ज किया.

Unnao News: उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां जेल अधीक्षक पंकज कुमार सिंह को नीट के जरिए बेटी का मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने का झांसा देकर 23 लाख रुपये की ठगी कर ली गई. जालसाजों ने खुद को कंसलटेंसी संचालक बताकर रकम वसूली और बाद में संपर्क तोड़ दिया. पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

नीट एडमिशन के नाम पर रची गई ठगी की पूरी कहानी

जेल अधीक्षक पंकज कुमार सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनकी बेटी को नीट काउंसिलिंग के माध्यम से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाना था. इसी उद्देश्य से उन्होंने जस्ट डायल के जरिए लखनऊ गोमतीनगर स्थित स्टडी पाथवे कंसलटेंसी के प्रोपराइटर अभिनव शर्मा से संपर्क किया. अभिनव शर्मा ने हिंद इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस सफेदाबाद बाराबंकी में दाखिला सुरक्षित कराने का भरोसा दिलाया. इसके बाद उसने 19 जुलाई 2025 को कॉलेज के नाम पर 10-10 लाख रुपये के दो बैंक ड्राफ्ट ले लिए. शुरुआत में सब कुछ वैध दिखाया गया जिससे जेल अधीक्षक को कोई संदेह नहीं हुआ.

बैंक ड्राफ्ट के बाद खाते में डलवाए गए तीन लाख रुपये

ठगी का सिलसिला यहीं नहीं रुका. आरोपित अभिनव शर्मा ने 24 अगस्त 2025 को जेल अधीक्षक से कहा कि तीन लाख रुपये उसके कोटक महिंद्रा बैंक गोमतीनगर लखनऊ स्थित खाते में जमा करने होंगे. जेल अधीक्षक ने अपनी पत्नी के खाते से आरटीजीएस के जरिए तीन लाख रुपये भेज दिए. इस तरह कुल 23 लाख रुपये आरोपितों तक पहुंच गए. कुछ समय बाद जब जेल अधीक्षक ने अभिनव शर्मा से संपर्क करने की कोशिश की तो मोबाइल नंबर बंद मिलने लगा. इससे उन्हें शक हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है.

कार्यालय पहुंचने पर खुली साजिश की परतें

जब फोन लगातार बंद मिला तो जेल अधीक्षक खुद विजयपंत खंड गोमतीनगर लखनऊ स्थित बताए गए कार्यालय पहुंचे. वहां कार्यालय भी बंद मिला. इसके बाद उन्होंने आसपास जानकारी जुटाई तो पता चला कि अभिनव शर्मा और संतोष कुमार समेत अन्य लोग एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे हैं. यह गिरोह पहले भी कई लोगों को मेडिकल एडमिशन के नाम पर ठग चुका है. इस खुलासे के बाद मामला और गंभीर हो गया क्योंकि यह सिर्फ एक व्यक्ति की ठगी नहीं बल्कि बड़े नेटवर्क का हिस्सा था.

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पहले भी कई लोगों से हो चुकी है करोड़ों की ठगी

जेल अधीक्षक के अनुसार आरोपित पहले भी छह से सात लोगों से तीन से चार करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं. लखनऊ साइबर थाने में पीड़ितों की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था. इसी केस में डेढ़ माह पहले लखनऊ पुलिस ने अभिनव शर्मा और संतोष कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इसके बावजूद यह मामला सामने आना बताता है कि ठगी का नेटवर्क कितना बड़ा और संगठित है. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं.

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फर्जी खाते और नकली कार्यालय बनाकर किया गया अपराध

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपितों ने हिंद इंस्टीट्यूट के नाम पर बैंकों में फर्जी खाते खुलवा रखे थे. साथ ही नकली कार्यालय भी बनाए गए थे ताकि लोगों को भरोसा दिलाया जा सके. ठगी के बाद आरोपितों ने जस्ट डायल से भी अपनी सारी जानकारी हटा ली. जेल अधीक्षक ने इस पूरे मामले में जस्ट डायल की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया क्योंकि उसी प्लेटफॉर्म के जरिए उन्हें नंबर मिला था.

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पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच जारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोतवाल चंद्रकांत मिश्र ने बताया कि जेल अधीक्षक की तहरीर पर स्टडी पाथवे कंसलटेंसी के प्रोपराइटर अभिनव शर्मा, संतोष कुमार और जस्ट डायल के संचालक व प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. बीएनएस की धारा 318(4) धोखाधड़ी व बेईमानी से संपत्ति हड़पना और धारा 61(2) आपराधिक साजिश के तहत केस दर्ज कर जांच की जा रही है. पुलिस अब पूरे गिरोह और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी की भी पड़ताल कर रही है.

02 Feb 2026 By Vishwa Deepak Awasthi

जालसाजों का शिकार हुए जेल अधीक्षक: नीट में बेटी का दाखिला कराने के नाम पर 23 लाख की ठगी, ऐसे मिला था नंबर

Unnao News: उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां जेल अधीक्षक पंकज कुमार सिंह को नीट के जरिए बेटी का मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने का झांसा देकर 23 लाख रुपये की ठगी कर ली गई. जालसाजों ने खुद को कंसलटेंसी संचालक बताकर रकम वसूली और बाद में संपर्क तोड़ दिया. पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

नीट एडमिशन के नाम पर रची गई ठगी की पूरी कहानी

जेल अधीक्षक पंकज कुमार सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनकी बेटी को नीट काउंसिलिंग के माध्यम से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाना था. इसी उद्देश्य से उन्होंने जस्ट डायल के जरिए लखनऊ गोमतीनगर स्थित स्टडी पाथवे कंसलटेंसी के प्रोपराइटर अभिनव शर्मा से संपर्क किया. अभिनव शर्मा ने हिंद इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस सफेदाबाद बाराबंकी में दाखिला सुरक्षित कराने का भरोसा दिलाया. इसके बाद उसने 19 जुलाई 2025 को कॉलेज के नाम पर 10-10 लाख रुपये के दो बैंक ड्राफ्ट ले लिए. शुरुआत में सब कुछ वैध दिखाया गया जिससे जेल अधीक्षक को कोई संदेह नहीं हुआ.

बैंक ड्राफ्ट के बाद खाते में डलवाए गए तीन लाख रुपये

ठगी का सिलसिला यहीं नहीं रुका. आरोपित अभिनव शर्मा ने 24 अगस्त 2025 को जेल अधीक्षक से कहा कि तीन लाख रुपये उसके कोटक महिंद्रा बैंक गोमतीनगर लखनऊ स्थित खाते में जमा करने होंगे. जेल अधीक्षक ने अपनी पत्नी के खाते से आरटीजीएस के जरिए तीन लाख रुपये भेज दिए. इस तरह कुल 23 लाख रुपये आरोपितों तक पहुंच गए. कुछ समय बाद जब जेल अधीक्षक ने अभिनव शर्मा से संपर्क करने की कोशिश की तो मोबाइल नंबर बंद मिलने लगा. इससे उन्हें शक हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है.

कार्यालय पहुंचने पर खुली साजिश की परतें

जब फोन लगातार बंद मिला तो जेल अधीक्षक खुद विजयपंत खंड गोमतीनगर लखनऊ स्थित बताए गए कार्यालय पहुंचे. वहां कार्यालय भी बंद मिला. इसके बाद उन्होंने आसपास जानकारी जुटाई तो पता चला कि अभिनव शर्मा और संतोष कुमार समेत अन्य लोग एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे हैं. यह गिरोह पहले भी कई लोगों को मेडिकल एडमिशन के नाम पर ठग चुका है. इस खुलासे के बाद मामला और गंभीर हो गया क्योंकि यह सिर्फ एक व्यक्ति की ठगी नहीं बल्कि बड़े नेटवर्क का हिस्सा था.

पहले भी कई लोगों से हो चुकी है करोड़ों की ठगी

जेल अधीक्षक के अनुसार आरोपित पहले भी छह से सात लोगों से तीन से चार करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं. लखनऊ साइबर थाने में पीड़ितों की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था. इसी केस में डेढ़ माह पहले लखनऊ पुलिस ने अभिनव शर्मा और संतोष कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इसके बावजूद यह मामला सामने आना बताता है कि ठगी का नेटवर्क कितना बड़ा और संगठित है. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं.

फर्जी खाते और नकली कार्यालय बनाकर किया गया अपराध

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपितों ने हिंद इंस्टीट्यूट के नाम पर बैंकों में फर्जी खाते खुलवा रखे थे. साथ ही नकली कार्यालय भी बनाए गए थे ताकि लोगों को भरोसा दिलाया जा सके. ठगी के बाद आरोपितों ने जस्ट डायल से भी अपनी सारी जानकारी हटा ली. जेल अधीक्षक ने इस पूरे मामले में जस्ट डायल की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया क्योंकि उसी प्लेटफॉर्म के जरिए उन्हें नंबर मिला था.

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच जारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोतवाल चंद्रकांत मिश्र ने बताया कि जेल अधीक्षक की तहरीर पर स्टडी पाथवे कंसलटेंसी के प्रोपराइटर अभिनव शर्मा, संतोष कुमार और जस्ट डायल के संचालक व प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. बीएनएस की धारा 318(4) धोखाधड़ी व बेईमानी से संपत्ति हड़पना और धारा 61(2) आपराधिक साजिश के तहत केस दर्ज कर जांच की जा रही है. पुलिस अब पूरे गिरोह और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी की भी पड़ताल कर रही है.

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