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Who Is IPS Prabhakar Choudhary : जीरो टॉलरेंस नीति पर काम करने वाले इस तेजतर्रार आईपीएस अफसर का 13 साल की नौकरी में 21 बार हो चुका है ट्रांसफर

Who Is IPS Prabhakar Choudhary : जीरो टॉलरेंस नीति पर काम करने वाले इस तेजतर्रार आईपीएस अफसर का 13 साल की नौकरी में 21 बार हो चुका है ट्रांसफर
Ips अफ़सर प्रभाकर चौधरी

2010 के तेज तर्रार आईपीएस प्रभाकर चौधरी अपने अनुशासन और सख्त कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं. यही वजह है कि पिछले 13 साल की नौकरी में उनके 21 बार तबादले हुए. रविवार को जारी हुई 14 आईपीएस अफसरों के तबादलों की सूची में उनका नाम भी शामिल था.माना जा रहा है कि बरेली में कावंड़ियों पर हल्का बल प्रयोग करने का उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा.उनका तबादला भी घटना के 4 घण्टे बाद ही हो गया.


हाईलाइट्स

  • तेजतर्रार आईपीएस प्रभाकर चौधरी का 13 साल की नौकरी में 21 बार हुआ तबादला
  • जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने में माहिर आईपीएस प्रभाकर,सख्त अनुशासन और ईमानदार छवि के लिए जाने जा
  • माना जा रहा है बरेली में कावड़ियों पर हल्का बल प्रयोग किया गया,घटना के 4 घण्टे बाद हो गया तबादला

Firebrand UP cadre IPS officer Prabhakar Chowdhary : फिल्म गंगाजल तो आपने देखी होगी.उसमें अजय देवगन ने आईपीएस अमित कुमार का रोल प्ले किया था. आईपीएस अफसर अपनी ईमानदारी, सादगी अंदाज और कड़े अनुशासन के चलते उसका तबादला कर दिया जाता है.ऐसी ही कुछ मिलती-जुलती स्टोरी यूपी कैडर 2010 बैच के तेजतर्रार आईपीएस प्रभाकर चौधरी की भी है.जिनका पिछले 13 साल की नौकरी में कुल 21 बार तबादला हुआ है.बतौर एसएसपी बरेली रहे, प्रभाकर चौधरी महज 4 महीनों में ही उनका तबादला सेनानायक 32 वीं वाहिनी में कर दिया गया.आइए जानते हैं कौन हैं आईपीएस अफसर प्रभाकर चौधरी ,जिनकी सक्रिय कार्यशैली के चलते भी तबादले छोटे-छोटे कार्यकाल में होते रहे..

आईपीएस प्रभाकर चौधरी की तेजतर्रार अफसरों में होती है गिनती

आईपीएस प्रभाकर चौधरी की गिनती तेज तर्रार अफसरों में की जाती है. कुशल नेतृत्व ,सादगी , ईमानदार छवि ,कड़ा अनुशासन और आरोपितों पर तत्काल कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं.फिर भी उनका तबादला छोटे-छोटे कार्यकाल में होता रहा.पिछले 4 महीनों से वे बरेली जिले की कमान संभाल रहे थे.रविवार को बरेली में पुलिस प्रशासन ने कावड़ियों को परम्परागत रूट पर निकलने के लिए कहा.उनमें से कुछ लोग दूसरे रास्ते से जाने लगे.

4 महीने रह पाए बरेली जिले में, हल्का बल प्रयोग करने का भुगतना पड़ा खामियाजा

Read More: यूपी में प्रापर्टी नियमों में बड़ा बदलाव: परिवार में संपत्ति देने पर सरकार का नया निर्णय, इतने का लगेगा स्टांप शुल्क

एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने कावड़ियों को उस रूट पर रोकने के लिए हल्का बल प्रयोग करने को कहा.जिसके कुछ ही देर बाद माहौल शांत हो गया.अभी ये चल ही रहा था कि देर रात शासन की  ओर से 14 आईपीएस अफसरों के तबादलो की लिस्ट जारी कर दी गई.उस लिस्ट में आईपीएस प्रभाकर चौधरी का नाम भी शामिल था.उनका तबादला सेनानायक 32 वीं वाहिनी पीएसी लखनऊ में कर दिया गया.माना जा रहा है कि कावड़ियों पर हल्का बल प्रयोग करने के आरोप में उनका तबादला कर दिया गया.उनके तबादले को लेकर लोगों के साथ-साथ पिता ने भी नाराजगी जताई.

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8 सालों में 15 जिलों की कमान और 21 बार तबादला

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खैर आईपीएस प्रभाकर चौधरी मेरठ जिले को छोड़कर किसी जिले में महीने 1 साल तो नहीं टिक पाए.शायद उनके सख्त कानून और अनुशासन के साथ काम करने का तरीका राजनीतिक दलों को पसंद नहीं आता था.क्योंकि आम जन में उनकी जितनी लोकप्रियता थी उतनी राजनीतिक दलों से नहीं. कारण साफ है कि वे ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाकर कार्य करते रहे.जिसका खामियाजा शायद उन्हें हर बार भुगतना पड़ा.अबतक 8 सालों में 15 जिलों की कमान संभालने वाले आईपीएस प्रभाकर चौधरी के 21 बार तबादले हुए है.

 

कौन हैं आईपीएस प्रभाकर चौधरी 

आईपीएस प्रभाकर चौधरी उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले से आते हैं. शैक्षणिक स्तर उनका बीएससी और एलएलबी रहा है.पहले ही अटेम्प्ट में प्रभाकर चौधरी ने यूपीएससी की परीक्षा क्लियर कर ली थी. साल 2010 में बतौर आईपीएस अंडरट्रेनिंग एएसपी नोएडा उन्हें नियुक्त किया गया.जिसके बाद वह बतौर एएसपी आगरा, वाराणसी और जौनपुर में तैनात रहे.कानपुर नगर में कुछ दिन एसपी सिटी भी रहे.साल 2015 में उन्हें सबसे पहला बतौर कप्तान ललितपुर मिला.यहां 11 महीने रहने के बाद उन्हें इंटेलीजेंस मुख्यालय भेज दिया गया. इसके बाद साल 2016 में देवरिया के कप्तान बनाये गए.जहां वे 8 महीने ही रह पाए.यहाँ से बलिया के कप्तान बने. वहां भी 2 महीने ही रह पाए.

कानपुर देहात एसपी बने प्रभाकर चौधरी आये इस वजह से चर्चा में

2017 में कानपुर देहात का एसपी बनाया गया.यहां 5 महीने रहने के बाद उनके काम करने के अंदाज को लेकर उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ी. दरअसल जब इन्हें कानपुर देहात का एसपी बनाकर भेजा गया था.उनके इस रूप से भी पुलिसकर्मी अंजान थे.वे सादगी भरे अंदाज में पीठ पर पिट्ठू बैग टांगकर सरकारी बस से कानपुर देहात पहुंचे और ऑटो लेकर आवास पहुंचे.पहले उन्हें गेट पर खड़े गार्ड ने रोक लिया बाद में उन्होंने कहा कि मैं एसपी प्रभाकर चौधरी हूँ तब भी यकीन नहीं हुआ तो आईकार्ड दिखाया.गार्ड यह देख हैरान रह गया.तत्काल उसने गेट खोलकर उन्हें प्रवेश दिया.

मथुरा में लोकल नेताओं से नहीं बनी

कानपुर देहात से उनका ट्रांसफर एटीएस में कर दिया गया.वहां कुछ दिन रहने के बाद उन्हें बिजनौर की जिम्मेदारी दी गई.यहां 6 माह का कार्यकाल रहा.मथुरा में बतौर कप्तान वे 3 महीने ही रह पाए ,यहां लोकल नेताओं से उनकी कभी नहीं बनी.यहां से उनका तबादला सीतापुर हुआ.वहां भी करीब साढ़े 5 माह का कार्यकाल रहा,बुलंदशहर पहुंचे तो वहाँ 2 महीने ही रुक पाए.2019 में एसपी रेलवे झांसी बनाया गया.यहां के बाद सोनभद्र,वाराणसी और मुरादाबाद जिले की कमान संभाली. वहां भी 6 महीनों से ज्यादा नहीं रह पाए और उनका तबादला मेरठ दिया गया.

मेरठ में सबसे ज्यादा 1 साल तक रहे बतौर एसएसपी

मेरठ एक ऐसा जिला रहा, जहाँ उन्होंने 1 साल का कार्यकाल किया.मेरठ में तैनाती के दौरान उन्होंने शुरुआत में ही शहर की आबोहवा जानने के लिए 2 दिन का अवकाश लिया.पुलिस महकमे ने समझा कि कप्तान साहब छुट्टी पर हैं. इस दौरान वह एक आम आदमी बनकर दो दिनों तक पूरे शहर की मॉनिटरिंग करते रहे. जब जानकारी हुई तो पुलिस महकमे के हाथ-पांव फूल गए. जनता के बीच उनकी कार्यशैली को खूब पसंद किया जाता है.यहां वह एक साल तक रहे.

4 महीने रह पाए बरेली में अब सेनानायक 32वीं वाहिनी पीएसी में तबादला

फिर आगरा,पीएसी सीतापुर और फिर 12 मार्च 2023 को उन्हें बरेली एसएसपी बनाया गया.यहां भी वह 4 महीने ही रह पाए.अब उन्हें 32 वी वाहिनी पीएसी लखनऊ का सेनानायक बनाकर भेज दिया गया है.यानि उनका कद कम कर दिया गया है.माना जा रहा है कि बरेली से तबादला करने की वजह कावड़ियों पर हल्का बल प्रयोग करना था.फिलहाल आईपीएस प्रभाकर के तबादले के बाद आम लोगों में निराशा है.उनके पिता ने भी कड़ी नाराजगी जताई है.

पिता पारसनाथ चौधरी ने तबादले पर जताई नाराजगी

आईपीएस प्रभाकर चौधरी के तबादले को लेकर जहां लोगों में निराशा है, पिता पारसनाथ चौधरी ने भी कड़ी नाराजगी जताई है.प्रभाकर चौधरी के पिता पारसनाथ चौधरी ने कहा कि मेरे बेटे ने इमानदारी का खामियाजा भुगता है, क्योंकि वह अपने काम में ईमानदार है. नेताओं से ज्यादा मतलब नहीं रखता है. जिसकी वजह से उसका तबादला कर दिया जाता है.यह उसके लिए नई बात नहीं है. उन्होंने कहा कि आज से मैं भी बीजेपी के खिलाफ हूं. बरेली में जो एक अधिकारी को आदेश देना चाहिए वह उन्होंने किया.कावड़ियों को रोकने के लिए कुछ न कुछ तो एक्शन लेना ही पड़ता. अन्यथा बड़ी घटना घट सकती थी. उसके बावजूद भी शासन ने उनका तबादला कर दिया इसको लेकर बेहद निराश हूँ.

03 Aug 2023 By Vishal Shukla

Who Is IPS Prabhakar Choudhary : जीरो टॉलरेंस नीति पर काम करने वाले इस तेजतर्रार आईपीएस अफसर का 13 साल की नौकरी में 21 बार हो चुका है ट्रांसफर


हाईलाइट्स

  • तेजतर्रार आईपीएस प्रभाकर चौधरी का 13 साल की नौकरी में 21 बार हुआ तबादला
  • जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने में माहिर आईपीएस प्रभाकर,सख्त अनुशासन और ईमानदार छवि के लिए जाने जा
  • माना जा रहा है बरेली में कावड़ियों पर हल्का बल प्रयोग किया गया,घटना के 4 घण्टे बाद हो गया तबादला

Firebrand UP cadre IPS officer Prabhakar Chowdhary : फिल्म गंगाजल तो आपने देखी होगी.उसमें अजय देवगन ने आईपीएस अमित कुमार का रोल प्ले किया था. आईपीएस अफसर अपनी ईमानदारी, सादगी अंदाज और कड़े अनुशासन के चलते उसका तबादला कर दिया जाता है.ऐसी ही कुछ मिलती-जुलती स्टोरी यूपी कैडर 2010 बैच के तेजतर्रार आईपीएस प्रभाकर चौधरी की भी है.जिनका पिछले 13 साल की नौकरी में कुल 21 बार तबादला हुआ है.बतौर एसएसपी बरेली रहे, प्रभाकर चौधरी महज 4 महीनों में ही उनका तबादला सेनानायक 32 वीं वाहिनी में कर दिया गया.आइए जानते हैं कौन हैं आईपीएस अफसर प्रभाकर चौधरी ,जिनकी सक्रिय कार्यशैली के चलते भी तबादले छोटे-छोटे कार्यकाल में होते रहे..

आईपीएस प्रभाकर चौधरी की तेजतर्रार अफसरों में होती है गिनती

आईपीएस प्रभाकर चौधरी की गिनती तेज तर्रार अफसरों में की जाती है. कुशल नेतृत्व ,सादगी , ईमानदार छवि ,कड़ा अनुशासन और आरोपितों पर तत्काल कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं.फिर भी उनका तबादला छोटे-छोटे कार्यकाल में होता रहा.पिछले 4 महीनों से वे बरेली जिले की कमान संभाल रहे थे.रविवार को बरेली में पुलिस प्रशासन ने कावड़ियों को परम्परागत रूट पर निकलने के लिए कहा.उनमें से कुछ लोग दूसरे रास्ते से जाने लगे.

4 महीने रह पाए बरेली जिले में, हल्का बल प्रयोग करने का भुगतना पड़ा खामियाजा

एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने कावड़ियों को उस रूट पर रोकने के लिए हल्का बल प्रयोग करने को कहा.जिसके कुछ ही देर बाद माहौल शांत हो गया.अभी ये चल ही रहा था कि देर रात शासन की  ओर से 14 आईपीएस अफसरों के तबादलो की लिस्ट जारी कर दी गई.उस लिस्ट में आईपीएस प्रभाकर चौधरी का नाम भी शामिल था.उनका तबादला सेनानायक 32 वीं वाहिनी पीएसी लखनऊ में कर दिया गया.माना जा रहा है कि कावड़ियों पर हल्का बल प्रयोग करने के आरोप में उनका तबादला कर दिया गया.उनके तबादले को लेकर लोगों के साथ-साथ पिता ने भी नाराजगी जताई.

8 सालों में 15 जिलों की कमान और 21 बार तबादला

खैर आईपीएस प्रभाकर चौधरी मेरठ जिले को छोड़कर किसी जिले में महीने 1 साल तो नहीं टिक पाए.शायद उनके सख्त कानून और अनुशासन के साथ काम करने का तरीका राजनीतिक दलों को पसंद नहीं आता था.क्योंकि आम जन में उनकी जितनी लोकप्रियता थी उतनी राजनीतिक दलों से नहीं. कारण साफ है कि वे ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाकर कार्य करते रहे.जिसका खामियाजा शायद उन्हें हर बार भुगतना पड़ा.अबतक 8 सालों में 15 जिलों की कमान संभालने वाले आईपीएस प्रभाकर चौधरी के 21 बार तबादले हुए है.

 

कौन हैं आईपीएस प्रभाकर चौधरी 

आईपीएस प्रभाकर चौधरी उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले से आते हैं. शैक्षणिक स्तर उनका बीएससी और एलएलबी रहा है.पहले ही अटेम्प्ट में प्रभाकर चौधरी ने यूपीएससी की परीक्षा क्लियर कर ली थी. साल 2010 में बतौर आईपीएस अंडरट्रेनिंग एएसपी नोएडा उन्हें नियुक्त किया गया.जिसके बाद वह बतौर एएसपी आगरा, वाराणसी और जौनपुर में तैनात रहे.कानपुर नगर में कुछ दिन एसपी सिटी भी रहे.साल 2015 में उन्हें सबसे पहला बतौर कप्तान ललितपुर मिला.यहां 11 महीने रहने के बाद उन्हें इंटेलीजेंस मुख्यालय भेज दिया गया. इसके बाद साल 2016 में देवरिया के कप्तान बनाये गए.जहां वे 8 महीने ही रह पाए.यहाँ से बलिया के कप्तान बने. वहां भी 2 महीने ही रह पाए.

कानपुर देहात एसपी बने प्रभाकर चौधरी आये इस वजह से चर्चा में

2017 में कानपुर देहात का एसपी बनाया गया.यहां 5 महीने रहने के बाद उनके काम करने के अंदाज को लेकर उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ी. दरअसल जब इन्हें कानपुर देहात का एसपी बनाकर भेजा गया था.उनके इस रूप से भी पुलिसकर्मी अंजान थे.वे सादगी भरे अंदाज में पीठ पर पिट्ठू बैग टांगकर सरकारी बस से कानपुर देहात पहुंचे और ऑटो लेकर आवास पहुंचे.पहले उन्हें गेट पर खड़े गार्ड ने रोक लिया बाद में उन्होंने कहा कि मैं एसपी प्रभाकर चौधरी हूँ तब भी यकीन नहीं हुआ तो आईकार्ड दिखाया.गार्ड यह देख हैरान रह गया.तत्काल उसने गेट खोलकर उन्हें प्रवेश दिया.

मथुरा में लोकल नेताओं से नहीं बनी

कानपुर देहात से उनका ट्रांसफर एटीएस में कर दिया गया.वहां कुछ दिन रहने के बाद उन्हें बिजनौर की जिम्मेदारी दी गई.यहां 6 माह का कार्यकाल रहा.मथुरा में बतौर कप्तान वे 3 महीने ही रह पाए ,यहां लोकल नेताओं से उनकी कभी नहीं बनी.यहां से उनका तबादला सीतापुर हुआ.वहां भी करीब साढ़े 5 माह का कार्यकाल रहा,बुलंदशहर पहुंचे तो वहाँ 2 महीने ही रुक पाए.2019 में एसपी रेलवे झांसी बनाया गया.यहां के बाद सोनभद्र,वाराणसी और मुरादाबाद जिले की कमान संभाली. वहां भी 6 महीनों से ज्यादा नहीं रह पाए और उनका तबादला मेरठ दिया गया.

मेरठ में सबसे ज्यादा 1 साल तक रहे बतौर एसएसपी

मेरठ एक ऐसा जिला रहा, जहाँ उन्होंने 1 साल का कार्यकाल किया.मेरठ में तैनाती के दौरान उन्होंने शुरुआत में ही शहर की आबोहवा जानने के लिए 2 दिन का अवकाश लिया.पुलिस महकमे ने समझा कि कप्तान साहब छुट्टी पर हैं. इस दौरान वह एक आम आदमी बनकर दो दिनों तक पूरे शहर की मॉनिटरिंग करते रहे. जब जानकारी हुई तो पुलिस महकमे के हाथ-पांव फूल गए. जनता के बीच उनकी कार्यशैली को खूब पसंद किया जाता है.यहां वह एक साल तक रहे.

4 महीने रह पाए बरेली में अब सेनानायक 32वीं वाहिनी पीएसी में तबादला

फिर आगरा,पीएसी सीतापुर और फिर 12 मार्च 2023 को उन्हें बरेली एसएसपी बनाया गया.यहां भी वह 4 महीने ही रह पाए.अब उन्हें 32 वी वाहिनी पीएसी लखनऊ का सेनानायक बनाकर भेज दिया गया है.यानि उनका कद कम कर दिया गया है.माना जा रहा है कि बरेली से तबादला करने की वजह कावड़ियों पर हल्का बल प्रयोग करना था.फिलहाल आईपीएस प्रभाकर के तबादले के बाद आम लोगों में निराशा है.उनके पिता ने भी कड़ी नाराजगी जताई है.

पिता पारसनाथ चौधरी ने तबादले पर जताई नाराजगी

आईपीएस प्रभाकर चौधरी के तबादले को लेकर जहां लोगों में निराशा है, पिता पारसनाथ चौधरी ने भी कड़ी नाराजगी जताई है.प्रभाकर चौधरी के पिता पारसनाथ चौधरी ने कहा कि मेरे बेटे ने इमानदारी का खामियाजा भुगता है, क्योंकि वह अपने काम में ईमानदार है. नेताओं से ज्यादा मतलब नहीं रखता है. जिसकी वजह से उसका तबादला कर दिया जाता है.यह उसके लिए नई बात नहीं है. उन्होंने कहा कि आज से मैं भी बीजेपी के खिलाफ हूं. बरेली में जो एक अधिकारी को आदेश देना चाहिए वह उन्होंने किया.कावड़ियों को रोकने के लिए कुछ न कुछ तो एक्शन लेना ही पड़ता. अन्यथा बड़ी घटना घट सकती थी. उसके बावजूद भी शासन ने उनका तबादला कर दिया इसको लेकर बेहद निराश हूँ.

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