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UPPCL News: फतेहपुर के अधिशासी अभियंता निलंबित, बरेली के अफसर को प्रतिकूल प्रविष्टि, बिजली कनेक्शन में देरी पर बड़ी कार्रवाई

UPPCL News: फतेहपुर के अधिशासी अभियंता निलंबित, बरेली के अफसर को प्रतिकूल प्रविष्टि, बिजली कनेक्शन में देरी पर बड़ी कार्रवाई
बिजली कनेक्शन में लापरवाही बरतने पर फतेहपुर के अधिशाषी अभियंता संस्पेंड, लखनऊ में बैठक करते आशीष गोयल: Image Credit Original Source

उत्तर प्रदेश में नए बिजली कनेक्शन देने में लापरवाही और अनावश्यक देरी पर UPPCL ने सख्त रुख अपनाया है. फतेहपुर के अधिशासी अभियंता को निलंबित कर दिया गया, जबकि बरेली के अधिशासी अभियंता को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है. कई अन्य अभियंताओं को भी चेतावनी मिली है. ऊर्जा विभाग ने साफ किया कि कनेक्शन के आवेदन लंबित रखने पर अब जिम्मेदारी तय होगी.

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में बिजली कनेक्शन से जुड़े मामलों में लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर अब कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया है. लखनऊ स्थित शक्ति भवन में हुई समीक्षा बैठक के दौरान फतेहपुर के अधिशासी अभियंता पर निलंबन की कार्रवाई की गई, जबकि बरेली के अधिशासी अभियंता को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई. लगातार मिल रही शिकायतों के बाद ऊर्जा विभाग ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि नए कनेक्शन के मामलों को बेवजह रोकना भारी पड़ सकता है.

फतेहपुर के अधिशासी अभियंता पर गिरी गाज

लखनऊ के शक्ति भवन में मंगलवार को नए बिजली कनेक्शन देने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई. इस दौरान सामने आए मामलों और शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए फतेहपुर के अधिशासी अभियंता को निलंबित करने की कार्रवाई की गई.

वहीं, बरेली के अधिशासी अभियंता के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि की गई है. बिजली कनेक्शन देने में देरी और अनावश्यक आपत्तियां लगाकर मामलों को लंबा खींचने की शिकायतों को कार्रवाई की मुख्य वजह बताया गया है.

इसके अलावा आधा दर्जन से अधिक अन्य अभियंताओं को भी चेतावनी दी गई है. अधिकारियों को साफ तौर पर कहा गया है कि उपभोक्ताओं और कारोबारियों से जुड़े कनेक्शन के आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखे जाएं.

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निवेश मित्र और झटपट पोर्टल के आवेदनों पर खास नजर

ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि निवेश मित्र और झटपट पोर्टल के माध्यम से आने वाले बिजली कनेक्शन के आवेदनों का समय से निस्तारण किया जाए.

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उन्होंने कहा कि उद्योग और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया आसान और तेज होनी चाहिए. खासतौर पर उद्योगों से जुड़े कनेक्शन के आवेदन किसी भी स्तर पर बेवजह नहीं रोके जाने चाहिए.

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यदि किसी मामले में अनावश्यक देरी की शिकायत सामने आती है तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी.

कनेक्शन में आनाकानी हुई तो विजिलेंस जांच

समीक्षा बैठक में अधिकारियों को यह भी चेतावनी दी गई कि बिजली कनेक्शन देने में जानबूझकर आनाकानी या देरी की शिकायत मिलने पर सिर्फ विभागीय कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रहेगा.

जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ विजिलेंस जांच भी कराई जा सकती है. वहीं, बिजली व्यवस्था से जुड़ी किसी दुर्घटना में अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी.

ऊर्जा विभाग का फोकस सिर्फ नए कनेक्शन जारी करने तक सीमित नहीं है. राजस्व बढ़ाने, लाइन लॉस कम करने, बिलिंग व्यवस्था बेहतर करने, स्मार्ट मीटर की निगरानी और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार के लिए भी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए हैं.

3.73 लाख नए बिजली कनेक्शन का मामला भी अहम

इस पूरी कार्रवाई के बीच प्रदेश में जारी किए गए नए बिजली कनेक्शनों से जुड़ा एक बड़ा मामला भी सामने है.

जानकारी के मुताबिक, 10 सितंबर से 31 दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश में कुल 3,73,509 नए बिजली कनेक्शन जारी किए गए. इन सभी कनेक्शनों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने का दावा किया गया है.

स्मार्ट मीटर की दर को लेकर राज्य विद्युत नियामक आयोग ने निर्धारित दर से अधिक वसूली होने पर अतिरिक्त रकम उपभोक्ताओं को वापस करने का निर्देश दिया है. लेकिन इस मामले में अब तक बिजली कंपनियां आयोग के सामने सिर्फ 93,138 कनेक्शनों का ही पूरा आंकड़ा पेश कर पाई हैं.

20 अगस्त को निगमों के एमडी से मांगा जाएगा हिसाब

नियामक आयोग ने अब सभी विद्युत निगमों के प्रबंध निदेशकों को 20 अगस्त को तलब किया है. उन्हें पूरे मामले में हलफनामा भी देना होगा.

कुल 3,73,509 नए कनेक्शनों में से 2,80,371 कनेक्शनों का हिसाब अभी सामने आना बाकी है. इसी वजह से बिजली निगमों में नए कनेक्शनों और स्मार्ट मीटर से जुड़ी जानकारी जुटाने को लेकर तेजी बढ़ गई है.

सभी निगम अपने-अपने स्तर पर रिकॉर्ड तैयार करने में जुटे हैं, ताकि आयोग के सामने कनेक्शन और स्मार्ट मीटर से जुड़ा पूरा विवरण रखा जा सके.

उपभोक्ता परिषद ने भी उठाए सवाल

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि हर नए कनेक्शन पर लगाए गए स्मार्ट मीटर का हिसाब लिया जाएगा.

उन्होंने सवाल उठाया कि जब कुल 3,73,509 नए कनेक्शन जारी हुए हैं तो अभी तक सिर्फ 93,138 कनेक्शनों का ही हिसाब क्यों सामने आया है. बाकी 2,80,371 कनेक्शनों का अलग हिसाब क्यों देना पड़ रहा है, यह भी बड़ा सवाल है.

उपभोक्ता परिषद का कहना है कि आयोग में आपत्ति के बाद ही इस मामले की सुनवाई हुई थी. अब बाकी कनेक्शनों का विवरण सामने आने के बाद स्मार्ट मीटर की दर, वसूली और उपभोक्ताओं को वापस की जाने वाली रकम की स्थिति और साफ हो सकती है.

अधिकारियों की जवाबदेही पर सरकार का जोर

फतेहपुर के अधिशासी अभियंता का निलंबन और बरेली के अधिशासी अभियंता को प्रतिकूल प्रविष्टि दिए जाने की कार्रवाई से साफ है कि बिजली कनेक्शन से जुड़े मामलों में विभाग अब लापरवाही को हल्के में लेने के मूड में नहीं है.

खासकर उद्योगों, व्यापारियों और नए उपभोक्ताओं से जुड़े बिजली कनेक्शन के आवेदनों को समय पर निपटाने पर जोर दिया जा रहा है. विभाग ने संकेत दिया है कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ जरूरत पड़ने पर विजिलेंस कार्रवाई भी की जा सकती है.

आने वाले दिनों में 20 अगस्त को नियामक आयोग के सामने विद्युत निगमों के प्रबंध निदेशकों द्वारा दिए जाने वाले हलफनामे से स्मार्ट मीटर और नए बिजली कनेक्शनों के इस पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है.

19 Aug 2026 By Vishwa Deepak Awasthi

UPPCL News: फतेहपुर के अधिशासी अभियंता निलंबित, बरेली के अफसर को प्रतिकूल प्रविष्टि, बिजली कनेक्शन में देरी पर बड़ी कार्रवाई

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में बिजली कनेक्शन से जुड़े मामलों में लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर अब कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया है. लखनऊ स्थित शक्ति भवन में हुई समीक्षा बैठक के दौरान फतेहपुर के अधिशासी अभियंता पर निलंबन की कार्रवाई की गई, जबकि बरेली के अधिशासी अभियंता को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई. लगातार मिल रही शिकायतों के बाद ऊर्जा विभाग ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि नए कनेक्शन के मामलों को बेवजह रोकना भारी पड़ सकता है.

फतेहपुर के अधिशासी अभियंता पर गिरी गाज

लखनऊ के शक्ति भवन में मंगलवार को नए बिजली कनेक्शन देने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई. इस दौरान सामने आए मामलों और शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए फतेहपुर के अधिशासी अभियंता को निलंबित करने की कार्रवाई की गई.

वहीं, बरेली के अधिशासी अभियंता के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि की गई है. बिजली कनेक्शन देने में देरी और अनावश्यक आपत्तियां लगाकर मामलों को लंबा खींचने की शिकायतों को कार्रवाई की मुख्य वजह बताया गया है.

इसके अलावा आधा दर्जन से अधिक अन्य अभियंताओं को भी चेतावनी दी गई है. अधिकारियों को साफ तौर पर कहा गया है कि उपभोक्ताओं और कारोबारियों से जुड़े कनेक्शन के आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखे जाएं.

निवेश मित्र और झटपट पोर्टल के आवेदनों पर खास नजर

ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि निवेश मित्र और झटपट पोर्टल के माध्यम से आने वाले बिजली कनेक्शन के आवेदनों का समय से निस्तारण किया जाए.

उन्होंने कहा कि उद्योग और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया आसान और तेज होनी चाहिए. खासतौर पर उद्योगों से जुड़े कनेक्शन के आवेदन किसी भी स्तर पर बेवजह नहीं रोके जाने चाहिए.

यदि किसी मामले में अनावश्यक देरी की शिकायत सामने आती है तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी.

कनेक्शन में आनाकानी हुई तो विजिलेंस जांच

समीक्षा बैठक में अधिकारियों को यह भी चेतावनी दी गई कि बिजली कनेक्शन देने में जानबूझकर आनाकानी या देरी की शिकायत मिलने पर सिर्फ विभागीय कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रहेगा.

जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ विजिलेंस जांच भी कराई जा सकती है. वहीं, बिजली व्यवस्था से जुड़ी किसी दुर्घटना में अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी.

ऊर्जा विभाग का फोकस सिर्फ नए कनेक्शन जारी करने तक सीमित नहीं है. राजस्व बढ़ाने, लाइन लॉस कम करने, बिलिंग व्यवस्था बेहतर करने, स्मार्ट मीटर की निगरानी और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार के लिए भी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए हैं.

3.73 लाख नए बिजली कनेक्शन का मामला भी अहम

इस पूरी कार्रवाई के बीच प्रदेश में जारी किए गए नए बिजली कनेक्शनों से जुड़ा एक बड़ा मामला भी सामने है.

जानकारी के मुताबिक, 10 सितंबर से 31 दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश में कुल 3,73,509 नए बिजली कनेक्शन जारी किए गए. इन सभी कनेक्शनों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने का दावा किया गया है.

स्मार्ट मीटर की दर को लेकर राज्य विद्युत नियामक आयोग ने निर्धारित दर से अधिक वसूली होने पर अतिरिक्त रकम उपभोक्ताओं को वापस करने का निर्देश दिया है. लेकिन इस मामले में अब तक बिजली कंपनियां आयोग के सामने सिर्फ 93,138 कनेक्शनों का ही पूरा आंकड़ा पेश कर पाई हैं.

20 अगस्त को निगमों के एमडी से मांगा जाएगा हिसाब

नियामक आयोग ने अब सभी विद्युत निगमों के प्रबंध निदेशकों को 20 अगस्त को तलब किया है. उन्हें पूरे मामले में हलफनामा भी देना होगा.

कुल 3,73,509 नए कनेक्शनों में से 2,80,371 कनेक्शनों का हिसाब अभी सामने आना बाकी है. इसी वजह से बिजली निगमों में नए कनेक्शनों और स्मार्ट मीटर से जुड़ी जानकारी जुटाने को लेकर तेजी बढ़ गई है.

सभी निगम अपने-अपने स्तर पर रिकॉर्ड तैयार करने में जुटे हैं, ताकि आयोग के सामने कनेक्शन और स्मार्ट मीटर से जुड़ा पूरा विवरण रखा जा सके.

उपभोक्ता परिषद ने भी उठाए सवाल

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि हर नए कनेक्शन पर लगाए गए स्मार्ट मीटर का हिसाब लिया जाएगा.

उन्होंने सवाल उठाया कि जब कुल 3,73,509 नए कनेक्शन जारी हुए हैं तो अभी तक सिर्फ 93,138 कनेक्शनों का ही हिसाब क्यों सामने आया है. बाकी 2,80,371 कनेक्शनों का अलग हिसाब क्यों देना पड़ रहा है, यह भी बड़ा सवाल है.

उपभोक्ता परिषद का कहना है कि आयोग में आपत्ति के बाद ही इस मामले की सुनवाई हुई थी. अब बाकी कनेक्शनों का विवरण सामने आने के बाद स्मार्ट मीटर की दर, वसूली और उपभोक्ताओं को वापस की जाने वाली रकम की स्थिति और साफ हो सकती है.

अधिकारियों की जवाबदेही पर सरकार का जोर

फतेहपुर के अधिशासी अभियंता का निलंबन और बरेली के अधिशासी अभियंता को प्रतिकूल प्रविष्टि दिए जाने की कार्रवाई से साफ है कि बिजली कनेक्शन से जुड़े मामलों में विभाग अब लापरवाही को हल्के में लेने के मूड में नहीं है.

खासकर उद्योगों, व्यापारियों और नए उपभोक्ताओं से जुड़े बिजली कनेक्शन के आवेदनों को समय पर निपटाने पर जोर दिया जा रहा है. विभाग ने संकेत दिया है कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ जरूरत पड़ने पर विजिलेंस कार्रवाई भी की जा सकती है.

आने वाले दिनों में 20 अगस्त को नियामक आयोग के सामने विद्युत निगमों के प्रबंध निदेशकों द्वारा दिए जाने वाले हलफनामे से स्मार्ट मीटर और नए बिजली कनेक्शनों के इस पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है.

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