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Ips Prashant Kumar Biography: कौन हैं IPS प्रशांत कुमार?, जिनके तेजतर्रार एक्शन की बदौलत यूपी के ख़तरनाक अपराधियों व माफियाओं की हिल गईं चूल्हें, अब कार्यवाहक DGP की जिम्मेदारी

Ips Prashant Kumar Biography: कौन हैं IPS प्रशांत कुमार?, जिनके तेजतर्रार एक्शन की बदौलत यूपी के ख़तरनाक अपराधियों व माफियाओं की हिल गईं चूल्हें, अब कार्यवाहक DGP की जिम्मेदारी
आईपीएस प्रशांत कुमार, फोटो साभार सोशल मीडिया

आईपीएस प्रशांत कुमार जीवन परिचय

यूपी के स्पेशल डीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार (Prashant Kumar) को प्रदेश का कार्यवाहक डीजीपी (Dgp) बनाया गया है. आईपीएस प्रशांत कुमार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी और भरोसेमंद आईपीएस अधिकारी माने जाते हैं. हालांकि उनका कार्यकाल 2025 में समाप्त हो जाएगा. डीजी लॉ एंड ऑर्डर यूपी रहते हुए खतरनाक अपराधियों (Dangerous Criminals) के खात्मे और हिस्ट्रीशीटर्स पर सख्त एक्शन के लिए जाना जाता है.

रियल लाइफ हीरो आईपीएस प्रशान्त कुमार

अभी तक आप सभी ने बॉलीवुड की कई ऐसी फिल्में देखी होंगी जिनमें आईपीएस (Ips) के पावर के सामने बड़े से बड़ा अपराधी थर-थर कांपने लगता है. हालांकि यह तो फिल्मों की बात है लेकिन वास्तविकता में 300 से ज्यादा एनकाउंटर (Encounters) व सैकड़ो अपराधियो को सलाखों के पीछे पहुंचाने वाले तेजतर्रार आईपीएस प्रशांत कुमार (Ips Prashant Kumar) जिनकी काबिलियत के चलते उन्हें डीजीपी (Dgp) कार्यवाहक का पद दिया गया है. यदि बात की जाए यूपी आईपीएस सीनियरिटी लिस्ट की तो वह 19 नंबर पर आते हैं. 1990 बैच के तेजतर्रार आईपीएस की तरह बनने का हर युवा आईपीएस का सपना होता है. सभी उन्हें अपना रोल मॉडल भी मानते है यही कारण है कि उन्हें रियल लाइफ सिंघम भी कहा जाता है.

कौन हैं ये जाबांज आईपीएस?

आईपीएस प्रशांत कुमार (Ips Prashant Kumar) का जन्म 16 मई 1965 को बिहार राज्य के सिवान (Sivan) में हुआ है. यदि बात की जाए उनकी शिक्षा की तो वह आईपीएस बनने के पहले उन्होंने MSC, MPHIL के साथ साथ MBA भी किया सर्वप्रथम बतौर आईपीएस उन्हें पहली बार तमिलनाडु कैडर (Tamilnadu Cadre) प्राप्त हुआ था. साल 1994 में उन्होंने यूपी कैडर की Ias डिंपल वर्मा से शादी की. निजी कारणों से कैडर यूपी में करवा लिया. बड़ी मूंछों से मशहूर हुए इस आईपीएस का एक्शन लेने का तरीका बेहद अलग है. उनकी कार्यशैली लोगों को बेहद पसन्द आती है. यूपी में बतौर एडीजी लॉ एंड ऑर्डर काफी समय बिताया इस बीच यूपी के अपराधियों की क्राइम कुंडली के खात्मे में अहम भूमिका निभाई. 

300 से ज्यादा एनकाउंटर, 1 जनवरी को स्पेशल डीजी बने

आईपीएस प्रशांत कुमार (Ips Prashant Kumar) पर जब-जब सरकार ने भरोसा जताते हुए उन्हें अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए चुना गया तब-तब उन्होंने खुद को साबित कर दिखाया. यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में अपराधी प्रशांत कुमार के नाम से कांपने लगे. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अब तक 300 से ज्यादा एनकाउंटर किए हैं इसलिए बार-बार उनका प्रमोशन भी होता रहा है इस बार तो उन्हें उत्तर प्रदेश डीजीपी कार्यवाहक भी बना दिया गया है. एडीजी लॉ एंड ऑर्डर रहते हुए उनके एक्शन यूपी में दिखाई देने लगे थे. हाल ही में उन्हें 1 जनवरी 2024 को स्पेशल डीजी बनाया गया था. वर्तमान डीजीपी विजय कुमार का कार्यकाल 31 जनवरी को खत्म हो गया. अब 1 फरवरी से कार्यवाहक डीजीपी का पद प्रशांत कुमार को दिया गया है.

ips_prashant_kumar_biography_story
कार्यवाहक डीजीपी, आईपीएएस प्रशांत कुमार
खतरनाक अपराधियों का आतंक किया समाप्त

एक समय था जब प्रदेश में बेखौफ अपराधियों की तूती बोलती थी जिसमें 2020 में यूपी के कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे के घर पर सख्त एक्शन, फिर जेल के अंदर बैठा अतीक अहमद ने सुरेश पाल की हत्या करवाई जिसके बाद सख्त लॉ एंड ऑर्डर के जरिये शूटर्स को एनकाउंटर में मार गिराया. अतीक का कुनबा ही समाप्त हो चुका है. यही नहीं पश्चिमी यूपी से अपराध और अपराधियो के सफाये का श्रेय भी जाता है. कुख्यात संजीव जीवा, मुकीम काला, विक्की त्यागी, अनिल दुजाना, कग्गा गैंग, व सुनील मूंछ जैसे अपराधी घटनाओं को अंजाम दे रहे थे.

Read More: Kanpur News: सामूहिक दुष्कर्म मामले में दरोगा की तलाश जारी ! वायरल चिट्ठी में क्या है लिखा?

लेकिन साल 2017 में अपराधियों का सफाया करने के उद्देश्य से आईपीएस प्रशांत कुमार की मेरठ में पोस्टिंग की गई जिसके फल स्वरुप आज इन अपराधियों का नामो निशान तक मिट चुका है. यही नहीं राजधानी दिल्ली के प्रीत विहार के हार्ट हॉस्पिटल के डॉक्टर श्रीकांत गॉड को बदमाशों ने किडनैप कर लिया था और उन्हें छोड़ने के लिए 5 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गयी थी जिसके बाद ऑपरेशन के लिए प्रशांत कुमार का चुनाव किया गया था जिन्होंने अपने तरीके से डॉक्टर को सही सलामत बचाते हुए सभी किडनैपर्स को ढेर कर दिया था.

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पोस्टिंग्स और अवार्ड्स

आईपीएस प्रशांत कुमार की पोस्टिंग मेरठ, अयोध्या, सहारनपुर रेंज में एडीजी जोन, भदोही, पौड़ी, गढ़वाल, जौनपुर, सोनभद्र गाजियाबाद, बाराबंकी और सहारनपुर में बतौर कप्तान पोस्टेड रहे हैं. यही नही उन्होंने अपने कार्यकाल में बड़े से बड़े अपराधियों को ढेर करते हुए आज यह मुकाम हासिल किया है इसीलिए उन्हें चार बार गैलेंट्री अवार्ड, राष्ट्रपति पुलिस पदक, उत्कर्ष सेवा पुलिस पदक, कुंभ मेला पदक, पराक्रम पदक, वीरता के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक, गृहमंत्री भारत सरकार का उत्कर्ष सेवा पदक से नवाजा गया है. राम लला मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा में सुरक्षा व्यवस्था का श्रेय भी उन्हें जाता है. माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव भी उनके डीजीपी रहते हुए सम्पन्न कराया जाएगा.

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01 Feb 2024 By Vishal Shukla

Ips Prashant Kumar Biography: कौन हैं IPS प्रशांत कुमार?, जिनके तेजतर्रार एक्शन की बदौलत यूपी के ख़तरनाक अपराधियों व माफियाओं की हिल गईं चूल्हें, अब कार्यवाहक DGP की जिम्मेदारी

आईपीएस प्रशांत कुमार जीवन परिचय

रियल लाइफ हीरो आईपीएस प्रशान्त कुमार

अभी तक आप सभी ने बॉलीवुड की कई ऐसी फिल्में देखी होंगी जिनमें आईपीएस (Ips) के पावर के सामने बड़े से बड़ा अपराधी थर-थर कांपने लगता है. हालांकि यह तो फिल्मों की बात है लेकिन वास्तविकता में 300 से ज्यादा एनकाउंटर (Encounters) व सैकड़ो अपराधियो को सलाखों के पीछे पहुंचाने वाले तेजतर्रार आईपीएस प्रशांत कुमार (Ips Prashant Kumar) जिनकी काबिलियत के चलते उन्हें डीजीपी (Dgp) कार्यवाहक का पद दिया गया है. यदि बात की जाए यूपी आईपीएस सीनियरिटी लिस्ट की तो वह 19 नंबर पर आते हैं. 1990 बैच के तेजतर्रार आईपीएस की तरह बनने का हर युवा आईपीएस का सपना होता है. सभी उन्हें अपना रोल मॉडल भी मानते है यही कारण है कि उन्हें रियल लाइफ सिंघम भी कहा जाता है.

कौन हैं ये जाबांज आईपीएस?

आईपीएस प्रशांत कुमार (Ips Prashant Kumar) का जन्म 16 मई 1965 को बिहार राज्य के सिवान (Sivan) में हुआ है. यदि बात की जाए उनकी शिक्षा की तो वह आईपीएस बनने के पहले उन्होंने MSC, MPHIL के साथ साथ MBA भी किया सर्वप्रथम बतौर आईपीएस उन्हें पहली बार तमिलनाडु कैडर (Tamilnadu Cadre) प्राप्त हुआ था. साल 1994 में उन्होंने यूपी कैडर की Ias डिंपल वर्मा से शादी की. निजी कारणों से कैडर यूपी में करवा लिया. बड़ी मूंछों से मशहूर हुए इस आईपीएस का एक्शन लेने का तरीका बेहद अलग है. उनकी कार्यशैली लोगों को बेहद पसन्द आती है. यूपी में बतौर एडीजी लॉ एंड ऑर्डर काफी समय बिताया इस बीच यूपी के अपराधियों की क्राइम कुंडली के खात्मे में अहम भूमिका निभाई. 

300 से ज्यादा एनकाउंटर, 1 जनवरी को स्पेशल डीजी बने

आईपीएस प्रशांत कुमार (Ips Prashant Kumar) पर जब-जब सरकार ने भरोसा जताते हुए उन्हें अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए चुना गया तब-तब उन्होंने खुद को साबित कर दिखाया. यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में अपराधी प्रशांत कुमार के नाम से कांपने लगे. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अब तक 300 से ज्यादा एनकाउंटर किए हैं इसलिए बार-बार उनका प्रमोशन भी होता रहा है इस बार तो उन्हें उत्तर प्रदेश डीजीपी कार्यवाहक भी बना दिया गया है. एडीजी लॉ एंड ऑर्डर रहते हुए उनके एक्शन यूपी में दिखाई देने लगे थे. हाल ही में उन्हें 1 जनवरी 2024 को स्पेशल डीजी बनाया गया था. वर्तमान डीजीपी विजय कुमार का कार्यकाल 31 जनवरी को खत्म हो गया. अब 1 फरवरी से कार्यवाहक डीजीपी का पद प्रशांत कुमार को दिया गया है.

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कार्यवाहक डीजीपी, आईपीएएस प्रशांत कुमार
खतरनाक अपराधियों का आतंक किया समाप्त

एक समय था जब प्रदेश में बेखौफ अपराधियों की तूती बोलती थी जिसमें 2020 में यूपी के कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे के घर पर सख्त एक्शन, फिर जेल के अंदर बैठा अतीक अहमद ने सुरेश पाल की हत्या करवाई जिसके बाद सख्त लॉ एंड ऑर्डर के जरिये शूटर्स को एनकाउंटर में मार गिराया. अतीक का कुनबा ही समाप्त हो चुका है. यही नहीं पश्चिमी यूपी से अपराध और अपराधियो के सफाये का श्रेय भी जाता है. कुख्यात संजीव जीवा, मुकीम काला, विक्की त्यागी, अनिल दुजाना, कग्गा गैंग, व सुनील मूंछ जैसे अपराधी घटनाओं को अंजाम दे रहे थे.

लेकिन साल 2017 में अपराधियों का सफाया करने के उद्देश्य से आईपीएस प्रशांत कुमार की मेरठ में पोस्टिंग की गई जिसके फल स्वरुप आज इन अपराधियों का नामो निशान तक मिट चुका है. यही नहीं राजधानी दिल्ली के प्रीत विहार के हार्ट हॉस्पिटल के डॉक्टर श्रीकांत गॉड को बदमाशों ने किडनैप कर लिया था और उन्हें छोड़ने के लिए 5 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गयी थी जिसके बाद ऑपरेशन के लिए प्रशांत कुमार का चुनाव किया गया था जिन्होंने अपने तरीके से डॉक्टर को सही सलामत बचाते हुए सभी किडनैपर्स को ढेर कर दिया था.

पोस्टिंग्स और अवार्ड्स

आईपीएस प्रशांत कुमार की पोस्टिंग मेरठ, अयोध्या, सहारनपुर रेंज में एडीजी जोन, भदोही, पौड़ी, गढ़वाल, जौनपुर, सोनभद्र गाजियाबाद, बाराबंकी और सहारनपुर में बतौर कप्तान पोस्टेड रहे हैं. यही नही उन्होंने अपने कार्यकाल में बड़े से बड़े अपराधियों को ढेर करते हुए आज यह मुकाम हासिल किया है इसीलिए उन्हें चार बार गैलेंट्री अवार्ड, राष्ट्रपति पुलिस पदक, उत्कर्ष सेवा पुलिस पदक, कुंभ मेला पदक, पराक्रम पदक, वीरता के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक, गृहमंत्री भारत सरकार का उत्कर्ष सेवा पदक से नवाजा गया है. राम लला मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा में सुरक्षा व्यवस्था का श्रेय भी उन्हें जाता है. माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव भी उनके डीजीपी रहते हुए सम्पन्न कराया जाएगा.

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