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Fatehpur News: फतेहपुर में सामाजिक सेवा बनाम प्रतिष्ठा की जंग ! रक्तदान शिवरों को लेकर संस्थाओं के बीच टकराव

Fatehpur News: फतेहपुर में सामाजिक सेवा बनाम प्रतिष्ठा की जंग ! रक्तदान शिवरों को लेकर संस्थाओं के बीच टकराव
फतेहपुर में सामाजिक कार्यों में आपसी टकराव (बाएं डीएम को ज्ञापन देने जाते हुए रवि प्रकाश दुबे, दाएं इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी फाइल फोटो): Image Credit Original Source

फतेहपुर में रक्तदान शिविरों को लेकर सामाजिक संस्था सर्वफॉर ह्यूमेनिटी, इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी के बीच गंभीर आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं. यह विवाद अब सामाजिक सेवा से आगे बढ़कर प्रतिष्ठा और प्रभाव की लड़ाई बनता दिख रहा है. पूर्व सांसद और डीएम से शिकायत हुई है.. वहीं डॉ अनुराग श्रीवास्तव ने इसे षड्यंत्र बताया है.

Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सामाजिक सेवा के नाम पर शुरू हुआ रक्तदान अभियान अब टकराव और आरोपों के घेरे में आ गया है. जिला उद्योग व्यापार मंडल (पंजी) के प्रदेश अध्यक्ष रविप्रकाश दुबे द्वारा दिए गए ज्ञापन के बाद यह मामला चर्चा में आया है. इसमें सर्वफॉर ह्यूमेनिटी संस्था, इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी की बात कही गई है.

सामाजिक कार्य या संस्थागत टकराव, कैसे शुरू हुआ विवाद

फतेहपुर में बीते आठ वर्षों से रक्तदान के क्षेत्र में सक्रिय संस्था सर्वफॉर ह्यूमेनिटी के कार्यों को लेकर विवाद तब गहराया जब जिला उद्योग व्यापार मंडल (पंजी) के प्रदेश अध्यक्ष रविप्रकाश दुबे ने पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में उन्होंने कहा कि संस्था के प्रबंधक गुरमीत सिंह लगातार जरूरतमंदों के लिए रक्त की व्यवस्था कराते रहे हैं, लेकिन बीते दो वर्षों से इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी के जनपद पदाधिकारी उनके कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं.

आरोप है कि जानबूझकर एक ही तिथि पर रक्तदान शिविर रखे जाते हैं ताकि सर्वफॉर ह्यूमेनिटी के कार्यक्रम प्रभावित हों. यह स्थिति धीरे-धीरे सहयोग की जगह प्रतिस्पर्धा और टकराव में बदल गई है. वहीं गुरमीत सिंह ने भी उन्हें लगातार टार्गेट करने की बात कही है.

रविप्रकाश दुबे का आरोप, सरकारी प्रभाव से रोके जा रहे शिविर

रविप्रकाश दुबे ने अपने बयान में साफ कहा कि उन्हें किसी भी सामाजिक संस्था के कार्यों से आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि बार-बार एक ही तारीख पर शिविर रखकर दबाव बनाया जाए, कार्यक्रम स्थल बदलवाया जाए या सरकारी प्रभाव दिखाकर आयोजन रोका जाए, तो यह अनुचित है.

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उन्होंने कहा कि रक्तदान जैसे संवेदनशील विषय पर प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि समन्वय होना चाहिए. दुबे का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से समाज में गलत संदेश जाता है और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त मिलने में परेशानी हो सकती है. उनका यह भी कहना है कि सामाजिक सेवा को प्रतिष्ठा का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए.

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इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी की सफाई, आरोपों को बताया निराधार

विवाद पर इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी के पदाधिकारी डॉ अनुराग श्रीवास्तव ने युगान्तर प्रवाह से बातचीत में सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया. उन्होंने कहा कि संस्था लगातार मानव सेवा के कार्यों में लगी है और रक्तदान शिविरों की तिथियों को लेकर किसी तरह का टकराव नहीं है. डॉ अनुराग का आरोप है कि सर्वफॉर ह्यूमेनिटी के प्रबंधक गुरमीत सिंह उन्हें और संस्था को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं.

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उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ पोस्ट की जाती हैं, जिससे संस्था की छवि खराब करने का प्रयास हो रहा है. उनका दावा है कि रेड क्रॉस हमेशा नियमों के तहत और समन्वय बनाकर ही शिविर आयोजित करता है.

ब्लड बैंक कर्मचारियों के आरोप, गुरमीत सिंह पर गंभीर सवाल

मामले की तह तक जाने के लिए जब जिला अस्पताल के ब्लड बैंक कर्मचारियों से बात की गई तो उन्होंने भी सर्वफॉर ह्यूमेनिटी के प्रबंधक गुरमीत सिंह पर गंभीर आरोप लगाए. कर्मचारियों का कहना है कि गुरमीत सिंह अक्सर अपना प्रभाव दिखाने की कोशिश करते हैं और ब्लड बैंक के कामकाज में दखल देते हैं. उनका व्यवहार कई बार कर्मचारियों के प्रति ठीक नहीं रहा और कुछ मौकों पर विवाद की स्थिति भी बनी है.

कर्मचारियों का दावा है कि रक्तदान शिविरों की तिथियों को लेकर कोई टकराव नहीं है, सभी संस्थाओं के लिए अलग-अलग टीमें और समय तय किया गया है. इसके बावजूद गुरमीत सिंह खुद टकराव की स्थिति पैदा करते हैं. एक कर्मी ने बताया कि गुरमीत बिना काम के घंटों ब्लड बैंक में बैठे रहते हैं जिससे उनका काम प्रभावित होता है.

सामाजिक सेवा पर उठते सवाल, जरूरतमंदों पर पड़ रहा असर

इस पूरे विवाद ने जनपद में सामाजिक सेवा की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रक्तदान जैसे मानवीय कार्य का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर जीवनरक्षक रक्त उपलब्ध कराना होता है, लेकिन जब यह कार्य आरोप-प्रत्यारोप और प्रतिष्ठा की लड़ाई में उलझ जाए, तो सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता को होता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस पूरे मामले में हस्तक्षेप कर सभी संस्थाओं के बीच स्पष्ट समन्वय बनाना चाहिए. ताकि सामाजिक सेवा वास्तव में सेवा बनी रहे, न कि व्यक्तिगत प्रभाव और वर्चस्व की जंग.

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