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Suvendu Adhikari CM Oath: ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी बने बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री, जानिए क्यों अब तक नहीं की शादी

Suvendu Adhikari CM Oath: ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी बने बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री, जानिए क्यों अब तक नहीं की शादी
पश्चिम बंगाल के पहले BJP CM बने शुभेंदु अधिकारी, ली शपथ: Image Credit Original Source

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के बीच भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी रहे शुभेंदु ने उन्हीं को हराकर सत्ता तक का सफर तय किया. अविवाहित शुभेंदु अधिकारी का पूरा जीवन राजनीति और जनसेवा को समर्पित रहा है.

Suvendu Adhikari CM Oath: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार राज्य की सत्ता पर कब्जा किया और पार्टी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नया अध्याय शुरू कर दिया. कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के शीर्ष नेताओं और हजारों समर्थकों की मौजूदगी में 57 वर्षीय शुभेंदु अधिकारी ने पद और गोपनीयता की शपथ ली. कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाने वाले शुभेंदु अब उन्हीं को हराकर बंगाल की सत्ता के शिखर तक पहुंच गए हैं.

ममता बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगी से बने BJP के CM

शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक जीवन पश्चिम बंगाल की सबसे दिलचस्प राजनीतिक यात्राओं में से एक माना जाता है. एक समय ऐसा था जब ममता बनर्जी के हर बड़े आंदोलन में शुभेंदु अधिकारी उनकी रणनीति के प्रमुख स्तंभ हुआ करते थे. खासकर नंदीग्राम आंदोलन ने उन्हें राज्य की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया.

लेकिन समय के साथ दोनों नेताओं के बीच दूरी बढ़ती गई और यही दूरी अंततः एक बड़े राजनीतिक संघर्ष में बदल गई. 2020 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने खुद को ममता बनर्जी के सबसे मजबूत चुनौतीकर्ता के रूप में स्थापित किया.

नंदीग्राम आंदोलन ने बनाया जननेता, 2021 की जीत ने दिलाई पहचान

2007 में नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन ने शुभेंदु अधिकारी को एक जननेता के रूप में स्थापित किया. इस आंदोलन में उनकी भूमिका निर्णायक रही और ममता बनर्जी को सत्ता तक पहुंचाने में उन्होंने अहम योगदान दिया. 2009 में वे तामलुक से सांसद बने. इसके बाद 2016 में नंदीग्राम से विधायक चुने गए और राज्य सरकार में मंत्री बने. 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट पर खुद ममता बनर्जी को हराकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. यह जीत उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई.

Read More: Bihar Politics: बिहार की राजनीति से समाप्त हुआ नीतीश युग! 20 साल बाद सत्ता से विदा हुए कुमार, जानिए पूरा राजनीतिक सफर

ममता को हराकर रचा इतिहास, बीजेपी को दिलाई पहली सरकार

2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके परंपरागत गढ़ भवानीपुर में चुनौती दी. इस चुनाव को बंगाल की राजनीति का सबसे प्रतिष्ठित मुकाबला माना जा रहा था. नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शुभेंदु अधिकारी अब राज्य की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो चुके हैं.

Read More: Cockroach Janta Party: 4 दिन में लाखों फॉलोअर्स, BJP को किया पीछे ! X पर हुई बैन, कौन हैं अभिजीत दिपके और क्यों वायरल हुई CJP?

ममता बनर्जी को हराने के साथ ही उन्होंने भाजपा को पश्चिम बंगाल में पहली बार सत्ता तक पहुंचाया. उनके मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बंगाल की राजनीति में तीन दशक बाद सत्ता परिवर्तन का नया अध्याय शुरू हुआ.

Read More: Kal Ka Mausam 15 June: यूपी से बिहार तक मौसम का बड़ा बदलाव, IMD ने जारी किया बारिश-आंधी का अलर्ट, 80 किमी प्रति घंटा तक चल सकती हैं हवाएं

क्यों नहीं की शादी, राजनीति और जनसेवा को बना लिया जीवन

शुभेंदु अधिकारी की निजी जिंदगी भी हमेशा चर्चा का विषय रही है. 57 वर्ष की उम्र में भी वे अविवाहित हैं. उनकी तरह पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी विवाह नहीं किया. शुभेंदु अधिकारी ने अपना पूरा जीवन राजनीति और समाजसेवा को समर्पित कर दिया.

उनका मानना रहा कि सार्वजनिक जीवन में पूरी ऊर्जा और समय देने के लिए निजी जीवन से दूरी जरूरी है. यही वजह है कि उन्होंने शादी नहीं की. सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले शुभेंदु के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास 85.87 लाख रुपये की संपत्ति है, कोई कर्ज नहीं है और उनके नाम पर कोई निजी वाहन भी दर्ज नहीं है.

परिवार, शिक्षा और शुरुआती राजनीतिक सफर

शुभेंदु अधिकारी वरिष्ठ नेता शिशिर कुमार अधिकारी के पुत्र हैं. राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े शुभेंदु ने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने 31 वर्ष की उम्र में अपना पहला चुनाव जीता, जब वे कोंटाई नगर परिषद से कांग्रेस के पार्षद बने.

बाद में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर 2006 में पहली बार कोंटाई दक्षिण से विधायक चुने गए. इसके बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया और वे बंगाल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हो गए.

पांच मंत्रियों ने भी ली शपथ, नई सरकार पर पूरे देश की नजर

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ पांच अन्य नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली. इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक शामिल हैं. नई सरकार से प्रशासनिक बदलाव, निवेश और कानून व्यवस्था में सुधार की उम्मीदें जताई जा रही हैं. भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए यह क्षण वर्षों की राजनीतिक मेहनत का परिणाम माना जा रहा है. पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब एक नए दौर की शुरुआत हो चुकी है.

09 May 2026 By Vishwa Deepak Awasthi

Suvendu Adhikari CM Oath: ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी बने बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री, जानिए क्यों अब तक नहीं की शादी

Suvendu Adhikari CM Oath: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार राज्य की सत्ता पर कब्जा किया और पार्टी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नया अध्याय शुरू कर दिया. कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के शीर्ष नेताओं और हजारों समर्थकों की मौजूदगी में 57 वर्षीय शुभेंदु अधिकारी ने पद और गोपनीयता की शपथ ली. कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाने वाले शुभेंदु अब उन्हीं को हराकर बंगाल की सत्ता के शिखर तक पहुंच गए हैं.

ममता बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगी से बने BJP के CM

शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक जीवन पश्चिम बंगाल की सबसे दिलचस्प राजनीतिक यात्राओं में से एक माना जाता है. एक समय ऐसा था जब ममता बनर्जी के हर बड़े आंदोलन में शुभेंदु अधिकारी उनकी रणनीति के प्रमुख स्तंभ हुआ करते थे. खासकर नंदीग्राम आंदोलन ने उन्हें राज्य की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया.

लेकिन समय के साथ दोनों नेताओं के बीच दूरी बढ़ती गई और यही दूरी अंततः एक बड़े राजनीतिक संघर्ष में बदल गई. 2020 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने खुद को ममता बनर्जी के सबसे मजबूत चुनौतीकर्ता के रूप में स्थापित किया.

नंदीग्राम आंदोलन ने बनाया जननेता, 2021 की जीत ने दिलाई पहचान

2007 में नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन ने शुभेंदु अधिकारी को एक जननेता के रूप में स्थापित किया. इस आंदोलन में उनकी भूमिका निर्णायक रही और ममता बनर्जी को सत्ता तक पहुंचाने में उन्होंने अहम योगदान दिया. 2009 में वे तामलुक से सांसद बने. इसके बाद 2016 में नंदीग्राम से विधायक चुने गए और राज्य सरकार में मंत्री बने. 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट पर खुद ममता बनर्जी को हराकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. यह जीत उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई.

ममता को हराकर रचा इतिहास, बीजेपी को दिलाई पहली सरकार

2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके परंपरागत गढ़ भवानीपुर में चुनौती दी. इस चुनाव को बंगाल की राजनीति का सबसे प्रतिष्ठित मुकाबला माना जा रहा था. नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शुभेंदु अधिकारी अब राज्य की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो चुके हैं.

ममता बनर्जी को हराने के साथ ही उन्होंने भाजपा को पश्चिम बंगाल में पहली बार सत्ता तक पहुंचाया. उनके मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बंगाल की राजनीति में तीन दशक बाद सत्ता परिवर्तन का नया अध्याय शुरू हुआ.

क्यों नहीं की शादी, राजनीति और जनसेवा को बना लिया जीवन

शुभेंदु अधिकारी की निजी जिंदगी भी हमेशा चर्चा का विषय रही है. 57 वर्ष की उम्र में भी वे अविवाहित हैं. उनकी तरह पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी विवाह नहीं किया. शुभेंदु अधिकारी ने अपना पूरा जीवन राजनीति और समाजसेवा को समर्पित कर दिया.

उनका मानना रहा कि सार्वजनिक जीवन में पूरी ऊर्जा और समय देने के लिए निजी जीवन से दूरी जरूरी है. यही वजह है कि उन्होंने शादी नहीं की. सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले शुभेंदु के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास 85.87 लाख रुपये की संपत्ति है, कोई कर्ज नहीं है और उनके नाम पर कोई निजी वाहन भी दर्ज नहीं है.

परिवार, शिक्षा और शुरुआती राजनीतिक सफर

शुभेंदु अधिकारी वरिष्ठ नेता शिशिर कुमार अधिकारी के पुत्र हैं. राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े शुभेंदु ने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने 31 वर्ष की उम्र में अपना पहला चुनाव जीता, जब वे कोंटाई नगर परिषद से कांग्रेस के पार्षद बने.

बाद में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर 2006 में पहली बार कोंटाई दक्षिण से विधायक चुने गए. इसके बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया और वे बंगाल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हो गए.

पांच मंत्रियों ने भी ली शपथ, नई सरकार पर पूरे देश की नजर

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ पांच अन्य नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली. इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक शामिल हैं. नई सरकार से प्रशासनिक बदलाव, निवेश और कानून व्यवस्था में सुधार की उम्मीदें जताई जा रही हैं. भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए यह क्षण वर्षों की राजनीतिक मेहनत का परिणाम माना जा रहा है. पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब एक नए दौर की शुरुआत हो चुकी है.

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