
Fatehpur News: लोहे में ढली बावनी इमली की ऐतिहासिक विरासत को लखनऊ की ODOP गैलरी में मिलेगी जगह
फतेहपुर के खजुहा स्थित ऐतिहासिक बावनी इमली की लोहे से बनी प्रतिकृति को व्यापारी नेता और ज्वेलरी क्राफ्टमैन बृजेश सोनी ने उपायुक्त उद्योग अजय कुमार गुप्ता को सौंपा है. प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में 52 क्रांतिकारियों की शहादत की याद दिलाने वाली इस ऐतिहासिक धरोहर की प्रतिकृति को लखनऊ की ODOP गैलरी में प्रदर्शित किया जाएगा. इससे फतेहपुर के गौरवशाली इतिहास के साथ जिले के लौह फैब्रिकेशन उद्योग को भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है.
Fatehpur News: फतेहपुर जिले की ऐतिहासिक पहचान और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की प्रतीक बावनी इमली अब लोहे की कलाकृति के रूप में भी अपनी कहानी बयां करेगी. खजुहा स्थित इस ऐतिहासिक स्थल के वृक्ष की प्रतिकृति फतेहपुर के शिल्पकार बृजेश सोनी ने तैयार की है. इसे उपायुक्त उद्योग अजय कुमार गुप्ता को सौंपा गया है. अब लखनऊ की ODOP गैलरी में इसका प्रदर्शन किया जाएगा, जिससे दूसरे जिलों से आने वाले लोगों को भी फतेहपुर के इतिहास और यहां की कारीगरी को जानने का मौका मिलेगा.
लोहे में ढली बावनी इमली की ऐतिहासिक विरासत
जिले के खजुहा में स्थित बावनी इमली का पेड़ आजादी की लड़ाई के इतिहास में खास महत्व रखता है. यह स्थान उन स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी. इसी ऐतिहासिक विरासत को लोगों तक पहुंचाने के मकसद से बावनी इमली के वृक्ष की लोहे से प्रतिकृति तैयार की गई है.
इस कलाकृति को तैयार करने वाले बृजेश सोनी जिले के व्यापारी नेता होने के साथ ज्वेलरी क्राफ्टमैन भी हैं. उन्हें IIT कानपुर से मेटलर्जी और मेटल क्राफ्ट के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त है. धातु की बारीकियों और शिल्पकला की समझ के जरिए उन्होंने ऐतिहासिक वृक्ष को एक अलग रूप देने की कोशिश की है.
उपायुक्त उद्योग अजय कुमार गुप्ता को सौंपी गई प्रतिकृति
बावनी इमली की लोहे से तैयार प्रतिकृति को फतेहपुर के उपायुक्त उद्योग अजय कुमार गुप्ता को औपचारिक रूप से सौंपा गया. इस पहल का उद्देश्य जिले की ऐतिहासिक धरोहर को ODOP के माध्यम से व्यापक पहचान दिलाना और स्थानीय उद्योग की संभावनाओं को सामने लाना है.
इस प्रतिकृति को लखनऊ स्थित ODOP गैलरी में प्रदर्शित किया जाएगा. यहां आने वाले लोगों को इस कलाकृति के जरिए फतेहपुर की ऐतिहासिक विरासत और जिले में लोहे से जुड़ी निर्माण कला के बारे में जानने का अवसर मिलेगा.
28 अप्रैल 1858 को 52 स्वतंत्रता सेनानियों को दी गई थी फांसी
खजुहा की बावनी इमली का इतिहास 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है. प्रचलित ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक, 28 अप्रैल 1858 को अंग्रेजों ने इस पेड़ पर 52 स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी पर लटका दिया था. इसी घटना की वजह से यह स्थान शहादत और बलिदान के प्रतीक के रूप में जाना जाता है.
बावनी इमली आज भी उन वीरों की याद दिलाती है, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया. यह ऐतिहासिक स्थल फतेहपुर की पहचान का अहम हिस्सा है. इसकी प्रतिकृति को लखनऊ की ODOP गैलरी में प्रदर्शित करने से जिले के बाहर के लोगों को भी इस गौरवशाली इतिहास के बारे में जानने का अवसर मिलेगा.
ODOP गैलरी में दिखेगी फतेहपुर के कारीगरों की कला
उत्तर प्रदेश सरकार की एक जनपद एक उत्पाद योजना का मकसद जिलों के खास उत्पादों और पारंपरिक हुनर को पहचान दिलाना है. फतेहपुर के लौह फैब्रिकेशन उद्योग को बढ़ावा देने के लिहाज से बावनी इमली की यह प्रतिकृति एक अहम पहल है.
लखनऊ की ODOP गैलरी में इस कलाकृति के प्रदर्शन से फतेहपुर के लौह शिल्प को नए दर्शक मिल सकते हैं. प्रदर्शनी में आने वाले उद्यमियों, विद्यार्थियों और दूसरे आगंतुकों को यह समझने का मौका मिलेगा कि लोहे जैसे औद्योगिक पदार्थ से ऐतिहासिक धरोहरों को कलात्मक रूप भी दिया जा सकता है.
बृजेश सोनी ने बताया जिले के लिए गौरव का विषय
बृजेश सोनी के मुताबिक, उनकी बनाई प्रतिकृति का चयन होना सिर्फ उनके व्यक्तिगत काम की उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे जिले के लिए गौरव और सम्मान की बात है. इस पहल के जरिए वह बावनी इमली से जुड़ी शहादत की कहानी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं.
इस कलाकृति का महत्व केवल इसकी बनावट तक सीमित नहीं है. यह जिले के इतिहास, शहीदों के बलिदान और स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा को एक साथ सामने लाती है. इससे युवाओं को अपने क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत के बारे में जानने और स्थानीय हुनर की अहमियत समझने का अवसर भी मिल सकता है.
