Lucknow News: पशुधन भर्ती घोटाले में पूर्व IAS योगेश कुमार गिरफ्तार, तत्कालीन मंत्री पर भी लटक रही कार्रवाई की तलवार
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2014 के पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है. तत्कालीन प्रमुख सचिव और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी योगेश कुमार को लखनऊ के गोमती नगर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया है. 1198 पदों पर हुई इस भर्ती में नियमों की अनदेखी के आरोप लगे थे. तत्कालीन पशुधन मंत्री राजकिशोर सिंह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की फाइल भी शासन में लंबित है.
Lucknow News: उत्तर प्रदेश में करीब 12 साल पुराने पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में जांच एजेंसी ने कार्रवाई तेज कर दी है. आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) की टीम ने तत्कालीन प्रमुख सचिव और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसी के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान उनकी भूमिका से जुड़े साक्ष्य सामने आए हैं. वहीं, तत्कालीन पशुधन मंत्री राजकिशोर सिंह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी का मामला अभी शासन में लंबित है.
गोमती नगर स्थित आवास से हुई गिरफ्तारी
पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में EOW ने बुधवार को लखनऊ के गोमती नगर में कार्रवाई करते हुए पूर्व IAS अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार किया. वह भर्ती प्रक्रिया के दौरान शासन में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे. सेवानिवृत्ति के बाद अब इस पुराने मामले में जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है.

2014 में 1198 पदों पर हुई थी भर्ती
यह मामला वर्ष 2014 का है, जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी. उस दौरान प्रदेश के 17 मंडलों में पशुधन प्रसार अधिकारी के कुल 1198 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी.
इन पदों के लिए 2 फरवरी 2014 को परीक्षा कराई गई थी. भर्ती पूरी होने के बाद प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप सामने आए. मामला गंभीर होने के बाद इसकी जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन को सौंपी गई.
जांच के दौरान भर्ती प्रक्रिया में नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे. आरोप है कि निर्धारित व्यवस्था से अलग तरीके अपनाकर चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया. अब जांच एजेंसी इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और फैसलों की कड़ियों को जोड़ रही है.
भर्ती नियमों की अनदेखी के आरोप
पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती मामले की जांच में चयन प्रक्रिया से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर सवाल उठाए गए. इनमें ओएमआर शीट का मूल्यांकन केंद्रीकृत तरीके से कराए जाने और मंडलीय चयन समितियों के अधिकार समाप्त किए जाने जैसे तथ्य शामिल बताए गए हैं.
आरोपों के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और चयन व्यवस्था में बदलाव किए गए थे. इसी वजह से भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए. जांच एजेंसी इन फैसलों के पीछे की भूमिका और उनके आधार की पड़ताल कर रही है.
तत्कालीन पशुधन मंत्री राजकिशोर सिंह पर भी नजर
वर्ष 2014 में जब पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती प्रक्रिया चल रही थी, उस समय राजकिशोर सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में पशुधन मंत्री थे. भर्ती से जुड़े मामले में उनके खिलाफ भी कार्रवाई का सवाल बना हुआ है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति से संबंधित फाइल फिलहाल शासन में लंबित है. ऐसे में इस फाइल पर आगे होने वाला फैसला मामले की जांच और संभावित अभियोजन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
