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फतेहपुर:पत्रकारों ने क्यों कहा इस साल 30 मई 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' को 'काला दिवस' के रूप में मनाएंगे..!

फतेहपुर:पत्रकारों ने क्यों कहा इस साल 30 मई 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' को 'काला दिवस' के रूप में मनाएंगे..!

शनिवार को ज़िले के पत्रकारों के एक प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल को सम्बोधित माँग पत्र देते हुए कहा है कि उनकी समस्याओं को समय रहते हल नहीं किया गया तो वह आगामी 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस को पत्रकारिता का काला दिवस के रूप में मनाएंगे..क्या है पूरा मामला पढ़े युगान्तर प्रवाह की ये रिपोर्ट।

फतेहपुर:किसी भी लोकतांत्रिक देश में पत्रकारों की भूमिका काफ़ी अहम होती है।लेक़िन मौजूदा हालातों में पत्रकारों के ऊपर कस  रहे सरकारी सिंकजे से कंही न कंही निष्पक्ष पत्रकारिता को गहरा आघात लगा है।जहाँ तक यूपी का सवाल है वहाँ भी पत्रकारों के ऊपर स्थानीय प्रशासन द्वारा फ़र्जी मुकदमा दर्ज कर आवाज़ दबाने की कोशिश के कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं।मिर्जापुर का नून रोटी प्रकरण तो आपको याद ही होगा जहां एक स्थानीय पत्रकार को मिड डे मील की सच्चाई उजागर करना महंगा पड़ गया था।वहाँ के डीएम ने पत्रकार से ही खिन्न होकर उसपर मुकदमें की कार्यवाही कर दी थी।

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ऐसा ही एक मामला यूपी के फतेहपुर ज़िले का सामने आया है।जहाँ एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के जिला संवाददाता व वरिष्ठ पत्रकार के ऊपर एक ट्वीट को लेकर मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।मुकदमें के विरोध में शनिवार को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ज़िले के पत्रकारों के एक प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल को सम्बोधित मांग पत्र जिला प्रशासन के एक आला अधिकारी के माध्यम से दिया है।

शनिवार को जिला पत्रकार एसोसिएशन/संघ फतेहपुर के बैनर तले इकठ्ठा हुए पत्रकारों ने अध्यक्ष अजय सिंह भदौरिया के नेतृत्व में कलक्ट्रेट पहुँच राज्यपाल को सम्बोधित अपना मांग पत्र वहाँ मौजूद एसडीएम के माध्यम से दिया।

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मांग पत्र के माध्यम से पत्रकारों ने ज़िले में तैनात वर्तमान जिलाधिकारी संजीव सिंह पर पत्रकारों का उत्पीड़न करने व फ़र्जी मुकदमें दर्ज कराने का आरोप लगाया है।

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6 बिंदुओं वाले इस मांग पत्र में ज़िले के वरिष्ठ पत्रकार व जिला पत्रकार एसो/संघ के अध्यक्ष अजय सिंह भदौरिया पर दर्ज किए गए फ़र्जी मुकदमें को तत्काल प्रभाव से स्पंज(समाप्त) करने व पूरे मामले की जाँच करा कर दोषी जनों के विरुद्ध कठोर क़ानूनी कार्यवाही किए जाने की मांग की गई है।इसके अलावा इस मांग पत्र में यह भी लिखा गया है कि वर्तमान जिलाधिकारी संजीव सिंह द्वारा पत्रकारों की खबरों से खिन्न होकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए लगातार पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज कर उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है।जो कि न्यायोचित नहीं है।

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पत्रकारों ने मांग पत्र के माध्यम से राज्यपाल से मांग की है कि यदि 15 दिनों के अंदर पत्रकारों पर दर्ज फ़र्जी मुकदमों को समाप्त कर वर्तमान जिलाधिकारी संजीव कुमार सिंह का जनपद से स्थान्तरण व इनके कार्यकाल की वित्तीय व पद दुरुपयोग की उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई जाती है तो आगामी 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर पत्रकार पत्रकारिता का काला दिवस मनाने को मजबूर होंगे।

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इस मामले पर युगान्तर प्रवाह से बातचीत करते हुए जिला पत्रकार एसो/संघ के अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार अजय सिंह भदौरिया ने कहा कि बीते 12 मई को उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल से जनपद के विजयीपुर विकास खण्ड रामपुर गाँव में रहने वाले एक नेत्रहीन दंपति के वायरल वीडियो को ट्वीट कर जिला प्रशासन को जानकारी देने का प्रयास किया था।लेक़िन उक्त ट्वीट से सच्चाई शासन स्तर पर जाने से खिन्न हुए जिलाधिकारी संजीव सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मेरे खिलाफ सदर तहसील कम्युनिटी किचन बन्द करने के ट्वीट करने का फर्जी आरोप लगाते हुए सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करवाया है।अजय भदौरिया ने कहा कि यह मुकदमा डीएम की साजिश और दबाव में लिखा गया है।

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इस मामले पर जिलाधिकारी पर लगे आरोपों औऱ वरिष्ठ पत्रकार पर दर्ज हुए मुकदमे के सम्बन्ध में जिलाधिकारी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेक़िन उनसे संपर्क नहीं हो सका।और न ही अब तक इस मामले को लेकर उनका कोई बयान सामने आया है।यदि जिलाधिकारी संजीव कुमार सिंह अपना कोई बयान इस मामले में देते हैं तो उसको भी ख़बर में जोड़ दिया जाएगा।

16 May 2020 By Shubham Mishra

फतेहपुर:पत्रकारों ने क्यों कहा इस साल 30 मई 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' को 'काला दिवस' के रूप में मनाएंगे..!

फतेहपुर:किसी भी लोकतांत्रिक देश में पत्रकारों की भूमिका काफ़ी अहम होती है।लेक़िन मौजूदा हालातों में पत्रकारों के ऊपर कस  रहे सरकारी सिंकजे से कंही न कंही निष्पक्ष पत्रकारिता को गहरा आघात लगा है।जहाँ तक यूपी का सवाल है वहाँ भी पत्रकारों के ऊपर स्थानीय प्रशासन द्वारा फ़र्जी मुकदमा दर्ज कर आवाज़ दबाने की कोशिश के कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं।मिर्जापुर का नून रोटी प्रकरण तो आपको याद ही होगा जहां एक स्थानीय पत्रकार को मिड डे मील की सच्चाई उजागर करना महंगा पड़ गया था।वहाँ के डीएम ने पत्रकार से ही खिन्न होकर उसपर मुकदमें की कार्यवाही कर दी थी।

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ऐसा ही एक मामला यूपी के फतेहपुर ज़िले का सामने आया है।जहाँ एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के जिला संवाददाता व वरिष्ठ पत्रकार के ऊपर एक ट्वीट को लेकर मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।मुकदमें के विरोध में शनिवार को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ज़िले के पत्रकारों के एक प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल को सम्बोधित मांग पत्र जिला प्रशासन के एक आला अधिकारी के माध्यम से दिया है।

शनिवार को जिला पत्रकार एसोसिएशन/संघ फतेहपुर के बैनर तले इकठ्ठा हुए पत्रकारों ने अध्यक्ष अजय सिंह भदौरिया के नेतृत्व में कलक्ट्रेट पहुँच राज्यपाल को सम्बोधित अपना मांग पत्र वहाँ मौजूद एसडीएम के माध्यम से दिया।

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मांग पत्र के माध्यम से पत्रकारों ने ज़िले में तैनात वर्तमान जिलाधिकारी संजीव सिंह पर पत्रकारों का उत्पीड़न करने व फ़र्जी मुकदमें दर्ज कराने का आरोप लगाया है।

6 बिंदुओं वाले इस मांग पत्र में ज़िले के वरिष्ठ पत्रकार व जिला पत्रकार एसो/संघ के अध्यक्ष अजय सिंह भदौरिया पर दर्ज किए गए फ़र्जी मुकदमें को तत्काल प्रभाव से स्पंज(समाप्त) करने व पूरे मामले की जाँच करा कर दोषी जनों के विरुद्ध कठोर क़ानूनी कार्यवाही किए जाने की मांग की गई है।इसके अलावा इस मांग पत्र में यह भी लिखा गया है कि वर्तमान जिलाधिकारी संजीव सिंह द्वारा पत्रकारों की खबरों से खिन्न होकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए लगातार पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज कर उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है।जो कि न्यायोचित नहीं है।

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पत्रकारों ने मांग पत्र के माध्यम से राज्यपाल से मांग की है कि यदि 15 दिनों के अंदर पत्रकारों पर दर्ज फ़र्जी मुकदमों को समाप्त कर वर्तमान जिलाधिकारी संजीव कुमार सिंह का जनपद से स्थान्तरण व इनके कार्यकाल की वित्तीय व पद दुरुपयोग की उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई जाती है तो आगामी 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर पत्रकार पत्रकारिता का काला दिवस मनाने को मजबूर होंगे।

ये भी पढ़े-लॉकडाउन:यूपी में भीषण सड़क हादसा.24 प्रवासी मजदूरों की दर्दनाक मौत.22की हालत अति गम्भीर..!

इस मामले पर युगान्तर प्रवाह से बातचीत करते हुए जिला पत्रकार एसो/संघ के अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार अजय सिंह भदौरिया ने कहा कि बीते 12 मई को उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल से जनपद के विजयीपुर विकास खण्ड रामपुर गाँव में रहने वाले एक नेत्रहीन दंपति के वायरल वीडियो को ट्वीट कर जिला प्रशासन को जानकारी देने का प्रयास किया था।लेक़िन उक्त ट्वीट से सच्चाई शासन स्तर पर जाने से खिन्न हुए जिलाधिकारी संजीव सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मेरे खिलाफ सदर तहसील कम्युनिटी किचन बन्द करने के ट्वीट करने का फर्जी आरोप लगाते हुए सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करवाया है।अजय भदौरिया ने कहा कि यह मुकदमा डीएम की साजिश और दबाव में लिखा गया है।

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इस मामले पर जिलाधिकारी पर लगे आरोपों औऱ वरिष्ठ पत्रकार पर दर्ज हुए मुकदमे के सम्बन्ध में जिलाधिकारी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेक़िन उनसे संपर्क नहीं हो सका।और न ही अब तक इस मामले को लेकर उनका कोई बयान सामने आया है।यदि जिलाधिकारी संजीव कुमार सिंह अपना कोई बयान इस मामले में देते हैं तो उसको भी ख़बर में जोड़ दिया जाएगा।

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