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Ayodhya Pran Pratistha News: भाव-विभोर हुए पीएम ! सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे 'राम' आ गए, इस तारीख का सूरज अद्भुत आभा लेकर आया, आग नहीं राम 'ऊर्जा' हैं

Ayodhya Pran Pratistha News: भाव-विभोर हुए पीएम ! सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे 'राम' आ गए, इस तारीख का सूरज अद्भुत आभा लेकर आया, आग नहीं राम 'ऊर्जा' हैं
अयोध्या से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सम्बोधन, फोटो साभार सोशल मीडिया

अयोध्या में सदियों की तपस्या आज फलीभूत हुई है. राघव स्वरूप में हम सबके प्यारे राम (Ram) आ गए हैं. आज का यह पावन दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. रामनगरी में शुरू हुआ उत्सव पूरे रामोत्सव (Ramotsav) के रूप में मनाया जा रहा है. मुख्य यजमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने गर्भगृह (Sanctum Sanctorum) में प्रवेश किया और विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान का संकल्प लिया, फिर प्रभू की प्राण-प्रतिष्ठा की गई और आरती कर प्रभू का स्वागत किया गया. मंच पर पीएम मोदी भावविभोर दिखाई दिए. कहा सदियों की प्रतीक्षा बाद हमारे राम आ गए हैं.

आज की तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज

अयोध्या नगरी में आज की तारीख इतिहास के पन्नों (History In Pages) दर्ज हो गयी. आज एक अलग ही माहौल दिखाई दिया. 500 वर्षों तक लोगों ने इस संघर्ष में जो अपना त्याग और बलिदान दिया यह सब उन्हीं की प्रेरणा का नतीजा है. इस अयोध्या में फिर से त्रेतायुग की झलक दिखाई दी है. सोमवार को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा (Pran-Pratistha) सम्पन्न हुई. देश भर में रामोत्सव (Ramotsav) मनाया जा रहा है.

रामलला अब टेंट में नहीं, अब दिव्य महल में रहेंगे

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अपने सम्बोधन (Speech) की शुरुआत सियावर राम चन्द्र की जय के साथ की. प्रधानमंत्री बोले आज हमारे राम आ गए, सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे राम आ गए हैं. सदियों का धैर्य, अनगिनत बलिदान और त्याग, तपस्या के बाद राम आ गए है. उन्होंने समस्त देशवासियों को बधाई भी दी. इस दौरान पीएम मोदी भावुक (Emotions) भी दिखाई दिए उन्होंने कहा कि बहुत कुछ कहने को है लेकिन कण्ठ अवरुद्ध है, चित्त उस पल में अभी भी लीन है, हमारे राम लला अब टेंट में नहीं रहेंगे. राम लला दिव्य मन्दिर में रहैगे, विश्व के कोने-कोने में रामभक्तो को ऐसी ही अनुभूति हो रही होगी. यह क्षण अलौकिक है, माहौल, वातावरण, ऊर्जा, घड़ी प्रभू श्रीराम का हमसब पर आशीर्वाद (Blessings) है.

ये नए कालचक्र का उद्गम, हज़ार साल बाद भी इस तारीख की चर्चा होगी

22 जनवरी 2024 का यह सूरज (Sun) एक अद्भुत आभा लेकर आया है, ये तारीख नहीं ये एक नए काल चक्र का उद्गम है, पूजन के बाद से पूरे देश मे उत्साह बढ़ता जा रहा है, आज हमें सदियों के उस धैर्य की धरोहर मिली है, आज हमें श्रीराम का मन्दिर मिला है. हज़ार साल बाद भी इस तारीख और पल की चर्चा करेंगे. यह राम कृपा ही है एक साथ हम सभी इस पल को जी रहे है. यह समय सामान्य समय नही है. ये काल के चक्र पर सर्वकालिक स्याही (Ink) से अंकित हो रही अमिट रेखाएं है, राम का नाम जहां होता है वहां पवन पुत्र हनुमान अवश्य विराजमान होते हैं, माता जानकी, लक्ष्मण, समस्त रामनगरी और सरयू नदी को नमन करता हूँ, दिव्य आत्माएं, वे दैवीय विभूतियों भी आसपास उपस्थित है, इन्हें भी नमन करता हूँ. आज प्रभु श्रीराम से क्षमा याचना भी करता हूँ.

प्रभू राम हमें अवश्य क्षमा करेंगे

हमारे पुरुषार्थ, त्याग, तपस्या में कुछ तो कमी रह गयी होगी, इतनी सदियों तक यह कार्य कर नहीं पाए, आज वह कमी पूरी हुई है. मुझे विश्वास है प्रभू राम हमे अवश्य क्षमा करेंगे. प्रभु का आगमन देखकर ही हर्ष से भर गए. लंबे वियोग से जो विपत्ति आयी उसका अंत हुआ. इस युग मे अयोध्या और देशवासियों ने सैकड़ो वर्षो का वियोग सहा. भारत के संविधान में पहली प्रति में भगवान राम विराजमान है. प्रभु राम को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई चली, मैं आभार व्यक्त करता हूँ न्यायपालिका का जिसने न्याय की लाज रख ली.

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आज गांव-गांव में कीर्तन संकीर्तन हो रहे है, मंदिरों में उत्सव हो रहे है पूरा देश आज दीपावली मना रहा है. घर-घर राम ज्योति प्रज्वलित की जाएगी. काल चक्र अब शुभ दिशा में बढ़ेगा. 11 दिनों के अनुष्ठान में पीएम ने उन जगहों के दर्शन किये जहां प्रभु के चरण पड़े थे. मेरा सौभाग्य है इसी भाव के साथ सागर से सरयू तक यात्रा का अवसर मिला. भारतवासियों के अंतर्मन में राम विराजे हुए हैं. देश को समायोजित करने वाला सूत्र और क्या हो सकता. देश के कोने-कोने में रामायण सुनने का मौका मिला.

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कुछ लोग कहते थे आग लग जायेगी, यह आग नहीं ऊर्जा है

जो ह्रदय में रम जाए वही राम है, राम भारत की अन्तरात्मा से जुड़े हुए हैं. ये राम रस जीवन प्रवाह की तरह है. जब कुछ लोग कहते थे कि आग लग जायेगी. ऐसे लोग सामाजिक भाव को नहीं जान सके, आपसी सद्भाव, और समन्वय का भी प्रतीक है, यह निर्माण किसी आग को नहीं बल्कि उर्जा को जन्म दे रहा है. राम वर्तमान नहीं, राम अनन्तकाल है. राम विवाद नहीं राम समाधान है. विग्रह रूप की नहीं ये श्रीराम उसी संकल्प को साक्षात आकार मिला है ये मन्दिर मात्र एक देव मन्दिर नही है, भारत की दृष्टि का राम भारत की चेतना है, प्रतिष्ठा है, राम नित्यता भी है राम निरंतरता भी है, राम नीति, प्रवाह भी है.

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राम व्यापक है, राम भारत के आधार हैं, विचार हैं, राम विश्व हैं. जब त्रेतायुग में राम आये थे हज़ारो वर्षो तक राम विश्व पथ प्रदर्शन करते रहे. हमे आज से इस पवित्र समय से अगले 1 हज़ार साल के भारत की नींव रखनी है. यही समय है सही समय है. राम व्यापक राम आस्था है. हनुमान जी की भक्ति, सेवा को बाहर नहीं खोजना पड़ता. दिव्य भारत का आधार बनेंगे. माता शबरी तो कबसे कहती रहीं राम आएंगे. यही तो देव से देश और राम से राष्ट्रीय चेतना का विस्तार है. आज देश में निराशा के लिए रत्ती भर स्थान नहीं है.

गिलहरी का स्मरण ही हमारी हिचक को दूर करेगा. लंकापति ज्ञानी थे, लेकिन जटायु जी की निष्ठा देखे वे रावण से भिड़ गए. फिर भी उन्होंने चुनौती दी. यही तो है देव आज संकल्प ले राष्ट्र निर्माण के लिये कि अपने समय का पल-पल लगा देंगे. प्रभु राम की पूजा विशेष होनी चाहिए. ये भारत के विकास का अमृत काल है, भारत ऊर्जा से भरा है. हमे अब बैठना नहीं है. युवाओं से कहा कि हज़ारो वर्षो की प्रेरणा है. आने वाला समय अब सिद्धि का है. यह मंदिर भारत के उदय का, विकसित भारत का, भारत आगे बढ़ने वाला है. अब हम रुकेंगे नहीं आगे बढ़ेंगे, अंत में उन्होंने सभी को बहुत शुभकामनाएं दी, तीन बार सियावर राम चन्द्र की जय बोलकर अपना सम्बोधन समाप्त किया.

22 Jan 2024 By Vishal Shukla

Ayodhya Pran Pratistha News: भाव-विभोर हुए पीएम ! सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे 'राम' आ गए, इस तारीख का सूरज अद्भुत आभा लेकर आया, आग नहीं राम 'ऊर्जा' हैं

आज की तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज

अयोध्या नगरी में आज की तारीख इतिहास के पन्नों (History In Pages) दर्ज हो गयी. आज एक अलग ही माहौल दिखाई दिया. 500 वर्षों तक लोगों ने इस संघर्ष में जो अपना त्याग और बलिदान दिया यह सब उन्हीं की प्रेरणा का नतीजा है. इस अयोध्या में फिर से त्रेतायुग की झलक दिखाई दी है. सोमवार को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा (Pran-Pratistha) सम्पन्न हुई. देश भर में रामोत्सव (Ramotsav) मनाया जा रहा है.

रामलला अब टेंट में नहीं, अब दिव्य महल में रहेंगे

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अपने सम्बोधन (Speech) की शुरुआत सियावर राम चन्द्र की जय के साथ की. प्रधानमंत्री बोले आज हमारे राम आ गए, सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे राम आ गए हैं. सदियों का धैर्य, अनगिनत बलिदान और त्याग, तपस्या के बाद राम आ गए है. उन्होंने समस्त देशवासियों को बधाई भी दी. इस दौरान पीएम मोदी भावुक (Emotions) भी दिखाई दिए उन्होंने कहा कि बहुत कुछ कहने को है लेकिन कण्ठ अवरुद्ध है, चित्त उस पल में अभी भी लीन है, हमारे राम लला अब टेंट में नहीं रहेंगे. राम लला दिव्य मन्दिर में रहैगे, विश्व के कोने-कोने में रामभक्तो को ऐसी ही अनुभूति हो रही होगी. यह क्षण अलौकिक है, माहौल, वातावरण, ऊर्जा, घड़ी प्रभू श्रीराम का हमसब पर आशीर्वाद (Blessings) है.

ये नए कालचक्र का उद्गम, हज़ार साल बाद भी इस तारीख की चर्चा होगी

22 जनवरी 2024 का यह सूरज (Sun) एक अद्भुत आभा लेकर आया है, ये तारीख नहीं ये एक नए काल चक्र का उद्गम है, पूजन के बाद से पूरे देश मे उत्साह बढ़ता जा रहा है, आज हमें सदियों के उस धैर्य की धरोहर मिली है, आज हमें श्रीराम का मन्दिर मिला है. हज़ार साल बाद भी इस तारीख और पल की चर्चा करेंगे. यह राम कृपा ही है एक साथ हम सभी इस पल को जी रहे है. यह समय सामान्य समय नही है. ये काल के चक्र पर सर्वकालिक स्याही (Ink) से अंकित हो रही अमिट रेखाएं है, राम का नाम जहां होता है वहां पवन पुत्र हनुमान अवश्य विराजमान होते हैं, माता जानकी, लक्ष्मण, समस्त रामनगरी और सरयू नदी को नमन करता हूँ, दिव्य आत्माएं, वे दैवीय विभूतियों भी आसपास उपस्थित है, इन्हें भी नमन करता हूँ. आज प्रभु श्रीराम से क्षमा याचना भी करता हूँ.

प्रभू राम हमें अवश्य क्षमा करेंगे

हमारे पुरुषार्थ, त्याग, तपस्या में कुछ तो कमी रह गयी होगी, इतनी सदियों तक यह कार्य कर नहीं पाए, आज वह कमी पूरी हुई है. मुझे विश्वास है प्रभू राम हमे अवश्य क्षमा करेंगे. प्रभु का आगमन देखकर ही हर्ष से भर गए. लंबे वियोग से जो विपत्ति आयी उसका अंत हुआ. इस युग मे अयोध्या और देशवासियों ने सैकड़ो वर्षो का वियोग सहा. भारत के संविधान में पहली प्रति में भगवान राम विराजमान है. प्रभु राम को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई चली, मैं आभार व्यक्त करता हूँ न्यायपालिका का जिसने न्याय की लाज रख ली.

आज गांव-गांव में कीर्तन संकीर्तन हो रहे है, मंदिरों में उत्सव हो रहे है पूरा देश आज दीपावली मना रहा है. घर-घर राम ज्योति प्रज्वलित की जाएगी. काल चक्र अब शुभ दिशा में बढ़ेगा. 11 दिनों के अनुष्ठान में पीएम ने उन जगहों के दर्शन किये जहां प्रभु के चरण पड़े थे. मेरा सौभाग्य है इसी भाव के साथ सागर से सरयू तक यात्रा का अवसर मिला. भारतवासियों के अंतर्मन में राम विराजे हुए हैं. देश को समायोजित करने वाला सूत्र और क्या हो सकता. देश के कोने-कोने में रामायण सुनने का मौका मिला.

कुछ लोग कहते थे आग लग जायेगी, यह आग नहीं ऊर्जा है

जो ह्रदय में रम जाए वही राम है, राम भारत की अन्तरात्मा से जुड़े हुए हैं. ये राम रस जीवन प्रवाह की तरह है. जब कुछ लोग कहते थे कि आग लग जायेगी. ऐसे लोग सामाजिक भाव को नहीं जान सके, आपसी सद्भाव, और समन्वय का भी प्रतीक है, यह निर्माण किसी आग को नहीं बल्कि उर्जा को जन्म दे रहा है. राम वर्तमान नहीं, राम अनन्तकाल है. राम विवाद नहीं राम समाधान है. विग्रह रूप की नहीं ये श्रीराम उसी संकल्प को साक्षात आकार मिला है ये मन्दिर मात्र एक देव मन्दिर नही है, भारत की दृष्टि का राम भारत की चेतना है, प्रतिष्ठा है, राम नित्यता भी है राम निरंतरता भी है, राम नीति, प्रवाह भी है.

राम व्यापक है, राम भारत के आधार हैं, विचार हैं, राम विश्व हैं. जब त्रेतायुग में राम आये थे हज़ारो वर्षो तक राम विश्व पथ प्रदर्शन करते रहे. हमे आज से इस पवित्र समय से अगले 1 हज़ार साल के भारत की नींव रखनी है. यही समय है सही समय है. राम व्यापक राम आस्था है. हनुमान जी की भक्ति, सेवा को बाहर नहीं खोजना पड़ता. दिव्य भारत का आधार बनेंगे. माता शबरी तो कबसे कहती रहीं राम आएंगे. यही तो देव से देश और राम से राष्ट्रीय चेतना का विस्तार है. आज देश में निराशा के लिए रत्ती भर स्थान नहीं है.

गिलहरी का स्मरण ही हमारी हिचक को दूर करेगा. लंकापति ज्ञानी थे, लेकिन जटायु जी की निष्ठा देखे वे रावण से भिड़ गए. फिर भी उन्होंने चुनौती दी. यही तो है देव आज संकल्प ले राष्ट्र निर्माण के लिये कि अपने समय का पल-पल लगा देंगे. प्रभु राम की पूजा विशेष होनी चाहिए. ये भारत के विकास का अमृत काल है, भारत ऊर्जा से भरा है. हमे अब बैठना नहीं है. युवाओं से कहा कि हज़ारो वर्षो की प्रेरणा है. आने वाला समय अब सिद्धि का है. यह मंदिर भारत के उदय का, विकसित भारत का, भारत आगे बढ़ने वाला है. अब हम रुकेंगे नहीं आगे बढ़ेंगे, अंत में उन्होंने सभी को बहुत शुभकामनाएं दी, तीन बार सियावर राम चन्द्र की जय बोलकर अपना सम्बोधन समाप्त किया.

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