
Ayodhya Pran Pratistha News: भाव-विभोर हुए पीएम ! सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे 'राम' आ गए, इस तारीख का सूरज अद्भुत आभा लेकर आया, आग नहीं राम 'ऊर्जा' हैं
अयोध्या में सदियों की तपस्या आज फलीभूत हुई है. राघव स्वरूप में हम सबके प्यारे राम (Ram) आ गए हैं. आज का यह पावन दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. रामनगरी में शुरू हुआ उत्सव पूरे रामोत्सव (Ramotsav) के रूप में मनाया जा रहा है. मुख्य यजमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने गर्भगृह (Sanctum Sanctorum) में प्रवेश किया और विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान का संकल्प लिया, फिर प्रभू की प्राण-प्रतिष्ठा की गई और आरती कर प्रभू का स्वागत किया गया. मंच पर पीएम मोदी भावविभोर दिखाई दिए. कहा सदियों की प्रतीक्षा बाद हमारे राम आ गए हैं.
आज की तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज
अयोध्या नगरी में आज की तारीख इतिहास के पन्नों (History In Pages) दर्ज हो गयी. आज एक अलग ही माहौल दिखाई दिया. 500 वर्षों तक लोगों ने इस संघर्ष में जो अपना त्याग और बलिदान दिया यह सब उन्हीं की प्रेरणा का नतीजा है. इस अयोध्या में फिर से त्रेतायुग की झलक दिखाई दी है. सोमवार को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा (Pran-Pratistha) सम्पन्न हुई. देश भर में रामोत्सव (Ramotsav) मनाया जा रहा है.
रामलला अब टेंट में नहीं, अब दिव्य महल में रहेंगे

ये नए कालचक्र का उद्गम, हज़ार साल बाद भी इस तारीख की चर्चा होगी
22 जनवरी 2024 का यह सूरज (Sun) एक अद्भुत आभा लेकर आया है, ये तारीख नहीं ये एक नए काल चक्र का उद्गम है, पूजन के बाद से पूरे देश मे उत्साह बढ़ता जा रहा है, आज हमें सदियों के उस धैर्य की धरोहर मिली है, आज हमें श्रीराम का मन्दिर मिला है. हज़ार साल बाद भी इस तारीख और पल की चर्चा करेंगे. यह राम कृपा ही है एक साथ हम सभी इस पल को जी रहे है. यह समय सामान्य समय नही है. ये काल के चक्र पर सर्वकालिक स्याही (Ink) से अंकित हो रही अमिट रेखाएं है, राम का नाम जहां होता है वहां पवन पुत्र हनुमान अवश्य विराजमान होते हैं, माता जानकी, लक्ष्मण, समस्त रामनगरी और सरयू नदी को नमन करता हूँ, दिव्य आत्माएं, वे दैवीय विभूतियों भी आसपास उपस्थित है, इन्हें भी नमन करता हूँ. आज प्रभु श्रीराम से क्षमा याचना भी करता हूँ.
प्रभू राम हमें अवश्य क्षमा करेंगे

कुछ लोग कहते थे आग लग जायेगी, यह आग नहीं ऊर्जा है


गिलहरी का स्मरण ही हमारी हिचक को दूर करेगा. लंकापति ज्ञानी थे, लेकिन जटायु जी की निष्ठा देखे वे रावण से भिड़ गए. फिर भी उन्होंने चुनौती दी. यही तो है देव आज संकल्प ले राष्ट्र निर्माण के लिये कि अपने समय का पल-पल लगा देंगे. प्रभु राम की पूजा विशेष होनी चाहिए. ये भारत के विकास का अमृत काल है, भारत ऊर्जा से भरा है. हमे अब बैठना नहीं है. युवाओं से कहा कि हज़ारो वर्षो की प्रेरणा है. आने वाला समय अब सिद्धि का है. यह मंदिर भारत के उदय का, विकसित भारत का, भारत आगे बढ़ने वाला है. अब हम रुकेंगे नहीं आगे बढ़ेंगे, अंत में उन्होंने सभी को बहुत शुभकामनाएं दी, तीन बार सियावर राम चन्द्र की जय बोलकर अपना सम्बोधन समाप्त किया.
