Sonam Wangchuk Hunger Strike: संसद मार्च से पहले सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान, अनशन खत्म करने के लिए रखीं तीन शर्तें
संसद मार्च और मानसून सत्र से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने अनशन को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि वह 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए सरकार और राजनीतिक दलों के सामने तीन स्पष्ट शर्तें रखी हैं. वांगचुक का कहना है कि उनकी लड़ाई शिक्षा सुधार, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर है.
Sonam Wangchuk Hunger Strike: शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने संसद मार्च से पहले बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि उनका अनशन तभी समाप्त होगा जब उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन मिलेगा. इसके लिए उन्होंने सरकार और सभी राजनीतिक दलों के सामने तीन अहम शर्तें रखी हैं.
संसद मार्च से पहले सोनम वांगचुक का बड़ा बयान
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उनकी तबीयत चाहे जैसी भी हो, उनका आंदोलन संसद मार्च और शिक्षा सुधार की मांगों से जुड़ा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अनशन केवल औपचारिक आश्वासन पर नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई के भरोसे पर ही समाप्त होगा.

अनशन समाप्त करने के लिए रखीं तीन शर्तें
वांगचुक ने कहा कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था में हाल के वर्षों में सामने आई नाकामियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए. उनका मानना है कि जवाबदेही तय किए बिना शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है.
दूसरी शर्त
उन्होंने कहा कि यदि उन्हें और उनके आंदोलन के नेतृत्व को संसद तक शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचने दिया जाता है तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता यह भरोसा दिलाते हैं कि वे शिक्षा सुधार और पेपर लीक के मुद्दे को संसद में मजबूती से उठाएंगे, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे.
तीसरी शर्त
वांगचुक ने कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों या किसी अन्य वजह से वह संसद तक नहीं पहुंच पाते हैं, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात करें और शिक्षा सुधार के मुद्दे को संसद में उठाने का स्पष्ट आश्वासन दें.
सफदरजंग अस्पताल में लगाए गंभीर आरोप
सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में गैर-कानूनी तरीके से रोका गया है. उन्होंने कहा कि उनकी आवाजाही, बातचीत और लोगों से मिलने की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई है. उनके अनुसार यह लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है.
पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने भी दोहराई मांग
इससे पहले शनिवार देर रात वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने भी कहा था कि यदि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सोमवार को सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर यह भरोसा दिलाते हैं कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा में जवाबदेही और शिक्षा सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे, तभी सोनम वांगचुक अपना अनशन समाप्त करेंगे.
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत मांग के लिए नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है.
शिक्षा सुधार और युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित है आंदोलन
सोनम वांगचुक का कहना है कि उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए है. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर संसद में गंभीरता से उठाएं.
Sonam Wangchuk Hunger Strike: संसद मार्च से पहले सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान, अनशन खत्म करने के लिए रखीं तीन शर्तें
Sonam Wangchuk Hunger Strike: शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने संसद मार्च से पहले बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि उनका अनशन तभी समाप्त होगा जब उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन मिलेगा. इसके लिए उन्होंने सरकार और सभी राजनीतिक दलों के सामने तीन अहम शर्तें रखी हैं.
संसद मार्च से पहले सोनम वांगचुक का बड़ा बयान
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उनकी तबीयत चाहे जैसी भी हो, उनका आंदोलन संसद मार्च और शिक्षा सुधार की मांगों से जुड़ा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अनशन केवल औपचारिक आश्वासन पर नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई के भरोसे पर ही समाप्त होगा.
वांगचुक ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए है.
अनशन समाप्त करने के लिए रखीं तीन शर्तें
पहली शर्त
वांगचुक ने कहा कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था में हाल के वर्षों में सामने आई नाकामियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए. उनका मानना है कि जवाबदेही तय किए बिना शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है.
दूसरी शर्त
उन्होंने कहा कि यदि उन्हें और उनके आंदोलन के नेतृत्व को संसद तक शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचने दिया जाता है तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता यह भरोसा दिलाते हैं कि वे शिक्षा सुधार और पेपर लीक के मुद्दे को संसद में मजबूती से उठाएंगे, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे.
तीसरी शर्त
वांगचुक ने कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों या किसी अन्य वजह से वह संसद तक नहीं पहुंच पाते हैं, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात करें और शिक्षा सुधार के मुद्दे को संसद में उठाने का स्पष्ट आश्वासन दें.
सफदरजंग अस्पताल में लगाए गंभीर आरोप
सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में गैर-कानूनी तरीके से रोका गया है. उन्होंने कहा कि उनकी आवाजाही, बातचीत और लोगों से मिलने की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई है. उनके अनुसार यह लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है.
पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने भी दोहराई मांग
इससे पहले शनिवार देर रात वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने भी कहा था कि यदि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सोमवार को सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर यह भरोसा दिलाते हैं कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा में जवाबदेही और शिक्षा सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे, तभी सोनम वांगचुक अपना अनशन समाप्त करेंगे.
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत मांग के लिए नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है.
शिक्षा सुधार और युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित है आंदोलन
सोनम वांगचुक का कहना है कि उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए है. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर संसद में गंभीरता से उठाएं.