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UP:फतेहपुर पत्रकार उत्पीड़न मामला गर्माया..प्रियंका गाँधी समेत विपक्षी दलों ने सरकार व प्रशासन पर साधा निशाना.!

UP:फतेहपुर पत्रकार उत्पीड़न मामला गर्माया..प्रियंका गाँधी समेत विपक्षी दलों ने सरकार व प्रशासन पर साधा निशाना.!
प्रियंका गाँधी।फ़ाइल फ़ोटो गूगल।

रविवार को यूपी के फतेहपुर में पत्रकारों द्वारा किया गया जल सत्याग्रह मामला इस वक़्त देशव्यापी मुद्दा बन गया है..राज्य की योगी सरकार व फतेहपुर का जिला प्रशासन इस वक़्त विपक्षी दलों के निशाने पर है..पढ़े पूरी खबर युगान्तर प्रवाह पर।

लखनऊ:यूपी के फतेहपुर में पत्रकारों पर दर्ज किए गए मुकदमों के विरोध में रविवार को पत्रकारों ने गंगा और यमुना नदियों में खड़े होकर जल सत्याग्रह किया।पत्रकारों का जल सत्याग्रह मामला अब राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन गया है।देश के कई बड़े व प्रतिष्ठित पत्रकारों ने फतेहपुर पत्रकार उत्पीड़न मामले को जोर शोर से उठाया है।साथ ही कांग्रेस, सपा समेत विपक्षी दलों ने भी जिला प्रशासन द्वारा पत्रकारो पर दर्ज किए गए मुकदमों की निंदा की है।

ये भी पढ़े-फतेहपुर:जल सत्याग्रह को क्यों मजबूर हुए पत्रकार..कौन रच रहा है साज़िश..!

प्रियंका गाँधी ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि-

"पत्रकार साथियों ने आपदा के दौर में कोरोना से जुड़ी अव्यवस्थाओं को उजागर कर सकारात्मक हस्तक्षेप किया। हैरानी की बात है कि यूपी सरकार के प्रशासन ने फतेहपुर में पत्रकारों पर उनका कर्म करने के लिए मुकदमा कर दिया। पत्रकार सत्याग्रह कर रहे हैं।सरकार सच्चाई से डर क्यों रही है"?

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समाजवादी पार्टी ने भी ट्वीट करते हुए कहा कि- "सच से डरती है बीजेपी, क्योंकि हर मोर्चे पर झूठ की राजनीति करती है बीजेपी!फतेहपुर में कोरोना को लेकर सरकारी अव्यवस्था दिखाने पर कई पत्रकार साथियों पर मुकदमा निंदनीय!वापिस हों सभी के मुकदमे,दोषी अधिकारियों पर हो कड़ी कार्रवाई"।इसके पहले यूपी कांग्रेस की तरफ़ से भी इस मामले में ट्वीट कर सरकार व जिला प्रशासन की आलोचना की गई है।

Read More: फर्जी मार्कशीट के सहारे 10 साल तक बनी रहीं टीचर, STF जांच में खुला खेल, फतेहपुर BSA ने किया सस्पेंड

जिला प्रशासन की गलती सरकार को पड़ रही भारी.?

जिस तरह से फतेहपुर का पत्रकार उत्पीड़न मामला राष्ट्रीय स्तर पर छाया हुआ है उससे योगी सरकार की अच्छी खासी फ़जीहत हो रही है।अब तो ऐसा लग रहा है कि जिला प्रशासन की गलतियों का खामियाजा सरकार भुगत रही है!

आपको बता दे कि जल सत्याग्रह कर रहे पत्रकारों का सीधे तौर पर आरोप था कि पत्रकारों पर दर्ज हुए मुकदमें डीएम के आदेश पर हुए हैं।उनकी मांग है कि जिलाधिकारी का जनपद से स्थान्तरण किया जाए साथ ही इनके कार्यकाल की शासन स्तर से उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए।

08 Jun 2020 By Shubham Mishra

UP:फतेहपुर पत्रकार उत्पीड़न मामला गर्माया..प्रियंका गाँधी समेत विपक्षी दलों ने सरकार व प्रशासन पर साधा निशाना.!

लखनऊ:यूपी के फतेहपुर में पत्रकारों पर दर्ज किए गए मुकदमों के विरोध में रविवार को पत्रकारों ने गंगा और यमुना नदियों में खड़े होकर जल सत्याग्रह किया।पत्रकारों का जल सत्याग्रह मामला अब राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन गया है।देश के कई बड़े व प्रतिष्ठित पत्रकारों ने फतेहपुर पत्रकार उत्पीड़न मामले को जोर शोर से उठाया है।साथ ही कांग्रेस, सपा समेत विपक्षी दलों ने भी जिला प्रशासन द्वारा पत्रकारो पर दर्ज किए गए मुकदमों की निंदा की है।

ये भी पढ़े-फतेहपुर:जल सत्याग्रह को क्यों मजबूर हुए पत्रकार..कौन रच रहा है साज़िश..!

प्रियंका गाँधी ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि-

"पत्रकार साथियों ने आपदा के दौर में कोरोना से जुड़ी अव्यवस्थाओं को उजागर कर सकारात्मक हस्तक्षेप किया। हैरानी की बात है कि यूपी सरकार के प्रशासन ने फतेहपुर में पत्रकारों पर उनका कर्म करने के लिए मुकदमा कर दिया। पत्रकार सत्याग्रह कर रहे हैं।सरकार सच्चाई से डर क्यों रही है"?

समाजवादी पार्टी ने भी ट्वीट करते हुए कहा कि- "सच से डरती है बीजेपी, क्योंकि हर मोर्चे पर झूठ की राजनीति करती है बीजेपी!फतेहपुर में कोरोना को लेकर सरकारी अव्यवस्था दिखाने पर कई पत्रकार साथियों पर मुकदमा निंदनीय!वापिस हों सभी के मुकदमे,दोषी अधिकारियों पर हो कड़ी कार्रवाई"।इसके पहले यूपी कांग्रेस की तरफ़ से भी इस मामले में ट्वीट कर सरकार व जिला प्रशासन की आलोचना की गई है।

जिला प्रशासन की गलती सरकार को पड़ रही भारी.?

जिस तरह से फतेहपुर का पत्रकार उत्पीड़न मामला राष्ट्रीय स्तर पर छाया हुआ है उससे योगी सरकार की अच्छी खासी फ़जीहत हो रही है।अब तो ऐसा लग रहा है कि जिला प्रशासन की गलतियों का खामियाजा सरकार भुगत रही है!

आपको बता दे कि जल सत्याग्रह कर रहे पत्रकारों का सीधे तौर पर आरोप था कि पत्रकारों पर दर्ज हुए मुकदमें डीएम के आदेश पर हुए हैं।उनकी मांग है कि जिलाधिकारी का जनपद से स्थान्तरण किया जाए साथ ही इनके कार्यकाल की शासन स्तर से उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए।

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