CJI सूर्यकांत को कथित अपशब्द, कोर्ट में उछाले कागज ! कौन हैं प्रबल प्रताप? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हुआ हंगामा
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उस समय अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई जब स्वयं अपना पक्ष रख रहे याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने अदालत में कथित तौर पर अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया और कागज हवा में उछाल दिए. सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें कोर्टरूम से बाहर ले जाया. हालांकि, अदालत ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू नहीं करने का फैसला किया.
Prabal Pratap Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने सभी को हैरान कर दिया. स्वयं अपनी पैरवी कर रहे याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने कथित तौर पर अदालत के प्रति आपत्तिजनक व्यवहार किया, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ अपशब्द कहे और कोर्टरूम में कागज उछाल दिए. इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने संयम बरतते हुए उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की.
कौन हैं प्रबल प्रताप (Who Is Prabal Pratap)
सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले व्यक्ति की पहचान प्रबल प्रताप के रूप में हुई है. वह पेशे से वकील बताए जा रहे हैं और अपने ही मामले में स्वयं याचिकाकर्ता के रूप में अदालत के सामने पेश हुए थे. उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और सुनवाई के दौरान खुद अपनी दलीलें रख रहे थे.
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

सुरक्षा कर्मियों ने संभाला मोर्चा
अचानक हुए घटनाक्रम के बाद सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप किया और प्रबल प्रताप को कोर्टरूम से बाहर ले गए. कुछ समय तक उन्हें अदालत परिसर में स्थित डीएसपी कार्यालय में भी रोके जाने की जानकारी सामने आई. घटना के बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या उनके खिलाफ अवमानना या अन्य कानूनी कार्रवाई होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने नहीं की अवमानना की कार्रवाई
कोर्टरूम में हुए व्यवधान और कथित दुर्व्यवहार के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं की. जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा कि अदालत उनके खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करने का प्रस्ताव नहीं रखती. पीठ ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी खारिज कर दी.
अदालत ने जताई सहानुभूति
सुनवाई के दौरान अदालत की एक टिप्पणी भी चर्चा का विषय बनी. जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा कि याचिकाकर्ता काफी परेशान और हताश दिखाई दे रहे थे. अदालत ने कहा कि उसे उनके प्रति केवल सहानुभूति है और इसी कारण उनके व्यवहार के बावजूद अवमानना की कार्रवाई शुरू नहीं की गई.
क्या था पूरा मामला?
प्रबल प्रताप का विवाद लखनऊ के विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के एक आदेश से जुड़ा था. उन्होंने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की थी. हालांकि, मजिस्ट्रेट ने सीधे एफआईआर दर्ज कराने का आदेश देने के बजाय उनके आवेदन को निजी शिकायत के रूप में स्वीकार कर आगे की प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया था.
इसके खिलाफ उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन हाई कोर्ट ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया कि उनके पास प्रभावी वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं दी राहत
इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए प्रबल प्रताप सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. शीर्ष अदालत ने रिकॉर्ड और संबंधित आदेश का अध्ययन करने के बाद कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता.
इसके साथ ही उनकी विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी गई. हालांकि, सुनवाई के दौरान हुए पूरे घटनाक्रम के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने संयम का परिचय देते हुए प्रबल प्रताप के खिलाफ कोई अवमानना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की.
CJI सूर्यकांत को कथित अपशब्द, कोर्ट में उछाले कागज ! कौन हैं प्रबल प्रताप? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हुआ हंगामा
Prabal Pratap Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने सभी को हैरान कर दिया. स्वयं अपनी पैरवी कर रहे याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने कथित तौर पर अदालत के प्रति आपत्तिजनक व्यवहार किया, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ अपशब्द कहे और कोर्टरूम में कागज उछाल दिए. इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने संयम बरतते हुए उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की.
कौन हैं प्रबल प्रताप (Who Is Prabal Pratap)
सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले व्यक्ति की पहचान प्रबल प्रताप के रूप में हुई है. वह पेशे से वकील बताए जा रहे हैं और अपने ही मामले में स्वयं याचिकाकर्ता के रूप में अदालत के सामने पेश हुए थे. उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और सुनवाई के दौरान खुद अपनी दलीलें रख रहे थे.
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप ने न्यायाधीशों को "न्यायिक सेवक" कहकर संबोधित किया. इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर अदालत से कहा कि वह लखनऊ के एक एएसपी के खिलाफ साइबर अपराध से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दे.
उनकी भाषा और व्यवहार पर पीठ में शामिल जस्टिस केवी विश्वनाथन ने आपत्ति जताई और पूछा कि क्या वह अदालत को आदेश दे रहे हैं. इसी दौरान माहौल और तनावपूर्ण हो गया. आरोप है कि प्रबल प्रताप ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ भी आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और हाथ में मौजूद दस्तावेज कोर्टरूम में उछाल दिए.
सुरक्षा कर्मियों ने संभाला मोर्चा
अचानक हुए घटनाक्रम के बाद सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप किया और प्रबल प्रताप को कोर्टरूम से बाहर ले गए. कुछ समय तक उन्हें अदालत परिसर में स्थित डीएसपी कार्यालय में भी रोके जाने की जानकारी सामने आई. घटना के बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या उनके खिलाफ अवमानना या अन्य कानूनी कार्रवाई होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने नहीं की अवमानना की कार्रवाई
कोर्टरूम में हुए व्यवधान और कथित दुर्व्यवहार के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं की. जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा कि अदालत उनके खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करने का प्रस्ताव नहीं रखती. पीठ ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी खारिज कर दी.
अदालत ने जताई सहानुभूति
सुनवाई के दौरान अदालत की एक टिप्पणी भी चर्चा का विषय बनी. जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा कि याचिकाकर्ता काफी परेशान और हताश दिखाई दे रहे थे. अदालत ने कहा कि उसे उनके प्रति केवल सहानुभूति है और इसी कारण उनके व्यवहार के बावजूद अवमानना की कार्रवाई शुरू नहीं की गई.
क्या था पूरा मामला?
प्रबल प्रताप का विवाद लखनऊ के विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के एक आदेश से जुड़ा था. उन्होंने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की थी. हालांकि, मजिस्ट्रेट ने सीधे एफआईआर दर्ज कराने का आदेश देने के बजाय उनके आवेदन को निजी शिकायत के रूप में स्वीकार कर आगे की प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया था.
इसके खिलाफ उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन हाई कोर्ट ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया कि उनके पास प्रभावी वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं दी राहत
इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए प्रबल प्रताप सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. शीर्ष अदालत ने रिकॉर्ड और संबंधित आदेश का अध्ययन करने के बाद कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता.
इसके साथ ही उनकी विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी गई. हालांकि, सुनवाई के दौरान हुए पूरे घटनाक्रम के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने संयम का परिचय देते हुए प्रबल प्रताप के खिलाफ कोई अवमानना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की.