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UPPCL News: उत्तर प्रदेश में अब ट्रांसफार्मर जला तो अभियंताओं की जेब से भरना होगा नुकसान, जानिए क्या है आदेश?

UPPCL News: उत्तर प्रदेश में अब ट्रांसफार्मर जला तो अभियंताओं की जेब से भरना होगा नुकसान, जानिए क्या है आदेश?
उत्तर प्रदेश में अब ट्रांसफार्मर जला तो अभियंताओं की जेब से कटेंगे पैसे (प्रतीकात्मक फोटो)

उत्तर प्रदेश में ट्रांसफार्मर जलने पर अब सीधे अभियंताओं की जिम्मेदारी तय कर दी गई है. UPPCL ने आदेश जारी कर साफ किया है कि लापरवाही से ट्रांसफार्मर खराब होने पर मरम्मत का खर्च संबंधित अधिकारियों से वसूला जाएगा. इससे बिजली व्यवस्था सुधारने और लापरवाही रोकने की कोशिश की जा रही है.

UPPCL News: उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए UPPCL ने सख्त रुख अपनाया है. अब ट्रांसफार्मर जलने या खराब होने की स्थिति में जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित अभियंताओं से ही मरम्मत का खर्च वसूला जाएगा. पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने सभी डिस्कॉम को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे विभाग में जवाबदेही बढ़ेगी.

ट्रांसफार्मर जलने पर अब सीधे तय होगी जवाबदेही

UPPCL के नए आदेश के बाद ट्रांसफार्मर खराब होना अब एक सामान्य तकनीकी समस्या नहीं माना जाएगा. यदि जांच में यह सामने आता है कि ट्रांसफार्मर लापरवाही, ओवरलोडिंग या समय पर देखभाल न होने के कारण जला है, तो संबंधित अभियंताओं को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा.

यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पहले ऐसे मामलों में स्पष्ट जिम्मेदारी तय नहीं हो पाती थी. अब हर स्तर के अधिकारी को अपने कार्यक्षेत्र में ट्रांसफार्मर की स्थिति पर नजर रखनी होगी. इससे न सिर्फ विभागीय अनुशासन मजबूत होगा बल्कि उपभोक्ताओं को भी बार-बार बिजली कटौती की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है.

क्षमता के अनुसार तय की गई रिकवरी की पूरी व्यवस्था

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिजली विभाग ने ट्रांसफार्मर की क्षमता के हिसाब से रिकवरी का स्पष्ट फार्मूला तय किया है. 10 kVA से 63 kVA तक के ट्रांसफार्मर जलने पर जूनियर इंजीनियर से 50 प्रतिशत, एसडीओ से 30 प्रतिशत और एक्सईएन से 20 प्रतिशत राशि वसूली जाएगी.

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100 kVA से 250 kVA तक के ट्रांसफार्मर के मामले में जेई और एसडीओ से 40-40 प्रतिशत तथा एक्सईएन से 20 प्रतिशत रिकवरी होगी. वहीं 400 kVA से 1000 kVA तक के बड़े ट्रांसफार्मर के लिए जेई, एसडीओ और एक्सईएन से 30-30 प्रतिशत और एसई से 10 प्रतिशत वसूली का प्रावधान किया गया है. इस स्पष्ट व्यवस्था से जिम्मेदारी तय करना आसान होगा.

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नोटिस और जांच के बाद ही होगी सख्त कार्रवाई

विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसी भी अभियंता पर सीधे कार्रवाई न हो. नियम-10 के तहत पहले संबंधित अधिकारी को नोटिस जारी किया जाएगा, जिसमें उसे अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा. इसके बाद विस्तृत जांच की जाएगी और दोष तय होने पर ही रिकवरी की प्रक्रिया शुरू होगी. यदि अभियंता दोषी पाया जाता है, तो मरम्मत की राशि उसकी सैलरी से काटी जा सकती है या अन्य माध्यम से वसूली की जाएगी. यह प्रक्रिया पारदर्शिता बनाए रखने के साथ-साथ विभागीय न्याय सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई है.

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तकनीकी सुधार पर जोर, फ्यूज सेट लगाना अनिवार्य

सिर्फ दंडात्मक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा के लिए तकनीकी सुधार पर भी जोर दिया गया है. सभी डिस्कॉम को निर्देश दिया गया है कि हर ट्रांसफार्मर पर 100 प्रतिशत फ्यूज सेट या टेललेस यूनिट अनिवार्य रूप से लगाए जाएं.

ये उपकरण ओवरलोडिंग और शॉर्ट सर्किट से ट्रांसफार्मर को बचाने में मदद करते हैं. इसके अलावा नियमित निरीक्षण, तेल की जांच और लोड मैनेजमेंट को भी सख्ती से लागू करने को कहा गया है. इन उपायों से ट्रांसफार्मर के खराब होने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है.

जीरो टॉलरेंस नीति से उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा फायदा

पिछले कुछ समय से ट्रांसफार्मर जलने की घटनाओं के कारण उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से जनजीवन प्रभावित होता था. इसी को ध्यान में रखते हुए UPPCL ने अब जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है. इस फैसले से अभियंताओं में सतर्कता बढ़ेगी और वे समय रहते जरूरी मेंटेनेंस करेंगे. इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा, जिन्हें अब बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सकेगी. साथ ही सरकारी खर्च में भी कमी आएगी.

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