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Kanpur Tala Wali Devi: शहर की तंग गलियों में 300 वर्ष पुराना माता काली का है यह अनूठा मंदिर, 'ताला वाली देवी' के नाम से है प्रसिद्ध

Kanpur Tala Wali Devi: शहर की तंग गलियों में 300 वर्ष पुराना माता काली का है यह अनूठा मंदिर, 'ताला वाली देवी' के नाम से है प्रसिद्ध
कानपुर के बंगाली मोहाल में प्रसिद्ध काली माता मंदिर, फोटो साभार सोशल मीडिया

Kanpur Tala Wali Devi: कानपुर के बंगाली मोहाल की तंग गलियों में माँ काली का सैकड़ों वर्ष प्राचीन मंदिर है, भक्तों में इस मंदिर के दर्शन को लेकर विशेष गहरी आस्था है, यहां मान्यता है कि मन्नत के लिए भक्त मन्दिर प्रांगण में ताला लगाते हैं, यहां भारी संख्या में भक्तों की मन्नत वाले ताले लगे हुए हैं, उसकी चाभी भक्तों के पास रहती है,जब मुराद पूरी हो जाती है तो भक्त वही ताला खोलने आते हैं और मां से आशीर्वाद लेते हैं.तबसे यहां ताला लगाने की परंपरा बनी हुई है. इस देवी मन्दिर को ताला वाली देवी भी कहा जाता


हाईलाइट्स

  • कानपुर की तंग गलियों में बना है देवी काली का प्रसिद्ध मंदिर अद्भुत है मान्यता
  • नवरात्रि में भक्तों का उमड़ता है हुजूम, मन्दिर प्रांगण में ताला लगाने की चली आ रही परंपरा
  • मुराद पूरी होने पर भक्त ताला खोलने आते है, इस मंदिर को ताला वाली देवी भी कहा जाता है

Ancient Kali Mata templein Kanpur : शारदीय नवरात्रि के पावन दिन चल रहे हैं, कानपुर में एक ऐसा अनोखा और चमत्कारी देवी मन्दिर जहां भक्तों की किस्मत तालों में बंद रहती है, और यह ताले तभी खुलते है जब माता की कृपा आप पर होगी, चलिए शहर की तंग गलियों में बने इस काली मंदिर का इतिहास और तालों के इस महत्व के बारे में आप सभी भक्तों को विस्तारपूर्वक बताएंगे.

तंग गलियों में माँ काली का यह अनूठा मन्दिर

कानपुर शहर की तंग गलियों में कई देवी मंदिर स्थित हैं, शारदीय नवरात्रि के दिन चल रहे हैं, आदिशक्ति के हर स्वरूप की आराधना की जा रही है, यहां बंगाली मोहाल की तंग गलियों में बना काली माता का यह मंदिर बेहद अद्भुत, रहस्यमयी और अपने आप में अनूठा है, इस देवी मंदिर में भक्तो की अटूट आस्था है, शुरुआत से ही मन्दिर की देखभाल बंगाली परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी से करता आ रहा है,यहां कई जिलों, राज्यों से भक्तों का आना लगा रहता है.  

मन्दिर की ऐसी है मान्यता

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तंग गलियो में बना ये देवी मन्दिर की अद्भुत मान्यता है, यहां माता काली की सच्चे मन से पूजा कर भक्त मन्नत के लिए एक ताला प्रांगण में लगाते हैं, और जब उनकी मनोकामना पूर्ण होती है तो उस ताले को खोलने आते हैं, और मां का श्रृंगार कराते हैं. ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में भक्तों की किस्मत के ताले लगे हुए हैं और जिसकी चाबी मां के

 पास है.

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ताले लगाने की ऐसे चली आ रही परम्परा

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यहां बताया जाता है कि सदियों पहले एक महिला भक्त बहुत ही परेशान रहा करती थी, वह महिला इस मंदिर में हर दिन नियमानुसार पूजन करने आया करती थी,एक दिन महिला इस मंदिर के प्रांगण में लगे पेड़ में ताला लगाने लगी, तभी मौजूद पुरोहित ने उससे कहा कि यह ताला क्यों लग रही हो,तो महिला ने कहा कि माता ने रात में सपने में कहा था कि मंदिर में ताला लगा देना तुम्हारी मनोकामना पूर्ण हो जाएगी.

तबसे नाम पड़ा ताला वाली देवी

कुछ ही दिन बाद वह ताला गायब हो गया और महिला का भी आना बंद हो गया, बाद में देखा गया की दीवार पर लिखा मिला कि मेरी मनोकामना पूर्ण हो गई है इसलिए ताले को खोल रही हूं, तब से ताले लगाने वाली परम्परा चली आ रही है.हालांकि कभी-कभी इतनी ज्यादा संख्या में लगे तालों के बीच भक्तों को अपने लगाए हुए तालों को खोजना मुश्किल हो जाता है, तो भक्त चाबी माता को अर्पित कर देते हैं. तभी से इस मंदिर का ताला वाली देवी भी कहा जाने लगा.

300 वर्ष पुराना है मन्दिर का इतिहास

ताला वाली देवी काली मंदिर में भक्तों की विशेष गहरी अटूट आस्था है, आम दिनों में यहां पर देवी दर्शन के लिए भक्त पहुंचते है, नवरात्रि में तो यहां पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है, मंदिर के सेवादार बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण कब हुआ, किसने कराया यह तो अब तक जानकारी इसकी नहीं है. लेकिन यह मंदिर करीब 300 साल पुराना बताया जाता है. पीढ़ी दर पीढ़ी यहां पर भक्त मन्नत के लिए ताले लगाने आते हैं और जब उनकी मन्नत पूरी हो जाती है तो ताला खोलकर मां का आशीर्वाद लेते हैं पीढ़ी दर पीढ़ी ये परंपरा ताले लगाने वाली चली आ रही है.

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