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Fatehpur News: मजदूर के घर जन्मी सफलता ! आंक्षा ने बदली पेशानी की रेखाएं

Fatehpur News: मजदूर के घर जन्मी सफलता ! आंक्षा ने बदली पेशानी की रेखाएं
फतेहपुर में मज़दूर की बेटी आंक्षा यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट में थर्ड टॉपर : Image Yugantar Pravah

Fatehpur News In Hindi

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर (Fatehpur) की रहने वाली आंक्षा ने यूपी बोर्ड (UP Board) इंटरमीडिएट की परीक्षा में प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल कर अपने पिता का सर गर्व से ऊंचा कर दिया. जानिए अभावों में जन्मी मजदूर की बेटी की कहानी जिसमें हालातों से समझौता नहीं किया

फतेहपुर की मजदूर की बेटी प्रदेश में तीसरे पायदान पर 

घर के हालात ठीक नहीं थे खेती भी इतनी जिससे जीवन तो दूर पेट की आग भी शांत नहीं हो सकती. एक नहीं चार बच्चों की जिम्मेदारी. मजदूरी ही एक सहारा. वो पिता की मजदूरी की मजबूरी को बखूबी समझती थी घर के काम में हांथ बटाते हुए अपने भाई बहनों को पढ़ाती और संभालती. उसे पता था कि उसके भाग्य की रचना के लिए कोई विश्वकर्मा नहीं आएगा. पेशानी की रेखाएं उसे खुद बनानी पड़ेगी. ये कहानी फतेहपुर की उस आंक्षा की है जिसने ये माना है कि विपरीत परिस्थितियों में अपने आपको सही साबित करना ही सफलता है.

फतेहपुर की आंक्षा जिसने अभावों से लिया गुरु मंत्र

फतेहपुर के हुसैनगंज मुस्तफापुर गांव की रहने वाली आंक्षा विश्वकर्मा ने यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है. सुखनंदन सुखरानी इंटर कॉलेज हुसैनगंज की छात्रा का प्रदेश में नाम आने पर स्कूल प्रबंधन सहित आस पास के लोगों ने उसे और उसके मजदूर पिता बसंत कुमार विश्वकर्मा को बधाई दी. चार भाई बहनों में सबसे बड़ी आंक्षा ने कड़ी मेहनत और लगन से सफलता को अपने नाम किया है. 

जब बेटी को सीने से लगाकर फूट-फूट रोने लगे पिता

यूपी बोर्ड का रिजल्ट घोषित होने के बाद जब बसंत कुमार विश्वकर्मा को मालूम हुआ की उनकी बेटी प्रदेश में तीसरे स्थान पर आई है तो वो भावुक हो गए और अपने गर्व को सीने से लगाकर रोने लगे. मां गुड़िया और छोटे भाई बहन जो उसी स्कूल में पढ़ते हैं खुशी से झूम उठे.

बंसत विश्वकर्मा कहते हैं कि उनके पास पुरखों की दी गई एक बीघे खेती है जिससे परिवार चलाना भी मुश्किल है अब मजदूरी ही एक सहारा है. बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठाना ही कठिन है लेकिन फिर भी उनकी पढ़ाई लिखाई के लिए दिन रात मेहनत करता हूं और करता रहूंगा 

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इंजीनियर बनना चाहती है आंक्षा, पहली बार में क्रैक की JEE मेंस परीक्षा

मुस्तफापुर की आंक्षा विश्वकर्मा बड़ी होकर इंजीनियर बनना चाहती है. बिना कोचिंग के ही उसने इंटरमीडिएट अपीयरिंग में ही JEE मेंस की परीक्षा पास कर ली है. एक तरफ जहां छात्र बड़ी-बड़ी कोचिंग में पढ़ने के बाउजूद सफल नहीं हो पाते हैं वहीं आंक्षा के दृढ़ संकल्प ने उसे सफलता दिलाई है. आंक्षा से जब इस सफलता का राज पूछा गया तो उन्होंने रामचरित मानस की चौपाई “अतिशय रगड़ करे जो कोई अनल प्रकट चन्दन से होई” की बात कहते हुए भावार्थ में अपनी पूरी बात कही

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21 Apr 2024 By Vishwa Deepak Awasthi

Fatehpur News: मजदूर के घर जन्मी सफलता ! आंक्षा ने बदली पेशानी की रेखाएं

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फतेहपुर की मजदूर की बेटी प्रदेश में तीसरे पायदान पर 

घर के हालात ठीक नहीं थे खेती भी इतनी जिससे जीवन तो दूर पेट की आग भी शांत नहीं हो सकती. एक नहीं चार बच्चों की जिम्मेदारी. मजदूरी ही एक सहारा. वो पिता की मजदूरी की मजबूरी को बखूबी समझती थी घर के काम में हांथ बटाते हुए अपने भाई बहनों को पढ़ाती और संभालती. उसे पता था कि उसके भाग्य की रचना के लिए कोई विश्वकर्मा नहीं आएगा. पेशानी की रेखाएं उसे खुद बनानी पड़ेगी. ये कहानी फतेहपुर की उस आंक्षा की है जिसने ये माना है कि विपरीत परिस्थितियों में अपने आपको सही साबित करना ही सफलता है.

फतेहपुर की आंक्षा जिसने अभावों से लिया गुरु मंत्र

फतेहपुर के हुसैनगंज मुस्तफापुर गांव की रहने वाली आंक्षा विश्वकर्मा ने यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है. सुखनंदन सुखरानी इंटर कॉलेज हुसैनगंज की छात्रा का प्रदेश में नाम आने पर स्कूल प्रबंधन सहित आस पास के लोगों ने उसे और उसके मजदूर पिता बसंत कुमार विश्वकर्मा को बधाई दी. चार भाई बहनों में सबसे बड़ी आंक्षा ने कड़ी मेहनत और लगन से सफलता को अपने नाम किया है. 

जब बेटी को सीने से लगाकर फूट-फूट रोने लगे पिता

यूपी बोर्ड का रिजल्ट घोषित होने के बाद जब बसंत कुमार विश्वकर्मा को मालूम हुआ की उनकी बेटी प्रदेश में तीसरे स्थान पर आई है तो वो भावुक हो गए और अपने गर्व को सीने से लगाकर रोने लगे. मां गुड़िया और छोटे भाई बहन जो उसी स्कूल में पढ़ते हैं खुशी से झूम उठे.

बंसत विश्वकर्मा कहते हैं कि उनके पास पुरखों की दी गई एक बीघे खेती है जिससे परिवार चलाना भी मुश्किल है अब मजदूरी ही एक सहारा है. बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठाना ही कठिन है लेकिन फिर भी उनकी पढ़ाई लिखाई के लिए दिन रात मेहनत करता हूं और करता रहूंगा 

इंजीनियर बनना चाहती है आंक्षा, पहली बार में क्रैक की JEE मेंस परीक्षा

मुस्तफापुर की आंक्षा विश्वकर्मा बड़ी होकर इंजीनियर बनना चाहती है. बिना कोचिंग के ही उसने इंटरमीडिएट अपीयरिंग में ही JEE मेंस की परीक्षा पास कर ली है. एक तरफ जहां छात्र बड़ी-बड़ी कोचिंग में पढ़ने के बाउजूद सफल नहीं हो पाते हैं वहीं आंक्षा के दृढ़ संकल्प ने उसे सफलता दिलाई है. आंक्षा से जब इस सफलता का राज पूछा गया तो उन्होंने रामचरित मानस की चौपाई “अतिशय रगड़ करे जो कोई अनल प्रकट चन्दन से होई” की बात कहते हुए भावार्थ में अपनी पूरी बात कही

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