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Fatehpur News: जब सुनंदा ने कहा था प्रधानमंत्री जी आप भी बूढ़े होंगे ! 65 दिन चले आंदोलन से हिला था प्रशासन

Fatehpur News: जब सुनंदा ने कहा था प्रधानमंत्री जी आप भी बूढ़े होंगे ! 65 दिन चले आंदोलन से हिला था प्रशासन
आंगनबाड़ी संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष सुनंदा तिवारी का निधन (File Photo); Yugantar Pravah

Fatehpur News In Hindi

आंगनबाड़ियों (Anganwadi) सहायिकाओं की बुलंद आवाज़ आज चिर निद्रा में सो गई. संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष और फतेहपुर की जिलाध्यक्ष रहीं सुनंदा तिवारी (Sunanda Tiwari) का हृदय घात (Heart Attack) के चलते निधन हो गया. सुनंदा जीवन भर आंगनबाडियों के हित की लड़ाई लड़तीं रहीं

UP Anganwadi News: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सहित देश भर में आंगनबाड़ी सहायिकाओं के हित की लड़ाई लड़ने वाली 69 वर्षीय सुनंदा तिवारी (Sunanda Tiwari) का बुधवार सुबह तकरीबन साढ़े 6 बजे फतेहपुर (Fatehpur) के खागा (Khaga) स्थित उनके निवास में हृदय घात (Heart Attack) से निधन हो गया.

उनके बेटे मनोज तिवारी ने युगान्तर प्रवाह को जानकारी देते हुए बताया कि वो लंबे से बीपी और अस्थमा की बीमारी से पीड़ित थीं बीते दो माह से उनका स्वास्थ्य अधिक खराब था. प्रदेश अध्यक्ष गिरीश पांडेय कहते हैं कि उनके निधन से पूरे प्रदेश में शोक है सुनंदा तिवारी सबल योद्धा थीं उनकी क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती

कौन थीं सुनंदा तिवारी जिनकी बुलंद आवाज़ ने प्रशासन के छुड़ाए थे पसीने 

फतेहपुर (Fatehpur) के खागा (Khaga) की रहने वाली सुनंदा तिवारी (Sunanda Tiwari) आंगनवाड़ी संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष और फतेहपुर की जिलाध्यक्ष थीं. उनके पति विप्लव कुमार तिवारी और बेटे पंकज, राहुल खागा में वकालत करते हैं जबकि मनोज की मेडिकल शॉप है. दो बेटियों की शादी काफी समय पहले हो गई थी.

बताया जा रहा है कि सुनंदा तिवारी का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव कटोघन में किया जाएगा. आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री के रूप में उनका पूरा जीवन बीता. हक की मांगों को लेकर लगातार शासन और प्रशासन में अपनी बात बुलंद करती रहीं.

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बीते सात साल पहले उनका प्रदेश और देश व्यापी आंदोलन 65 दिनों से अधिक चला. उनकी बुलंद आवाज़ और अपने कार्य के प्रति समझ से अधिकारी भी मौन हो जाते थे. लंबे समय तक चला आंदोलन शासन और प्रशासन के आश्वासन के बाद बंद हुआ था. 

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आंगनबाडियों को मिलता है मजदूरों से कम वेतन, प्रधानमंत्री के लिए कही थी ये बात

सुनंदा तिवारी अपने आंदोलनों में बड़ी ही मुखरता के साथ बोलती थीं. आंगनबाड़ी सहायिकाओं का जीवकोपार्जन हो या उनकी पेंशन बड़ी बेबाकी से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को चेतावनी देती थी.

Read More: UP News: यूपी रोडवेज में बंपर भर्ती ! आठवीं पास बनेंगे बस ड्राइवर, इस तारीख को लग रहा है रोजगार मेला

एक बार युगान्तर प्रवाह को दिए साक्षात्कार में कहा था कि प्रधानमंत्री जी आपकी मां बहन और खुद आप भी जब बूढ़े होंगे तब आपको हमारा दर्द समझ में आएगा. उन्होंने कहा था कि आंगनबाडियों को एक मजदूर से कम वेतन दिया जाता है और उससे अधिक काम लिया जाता है.

बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को भी कई बार उजागर किया था. उनके निधन के बाद संघ सहित पूरे जनपद में शोक की लहर है.

25 Dec 2024 By Vishwa Deepak Awasthi

Fatehpur News: जब सुनंदा ने कहा था प्रधानमंत्री जी आप भी बूढ़े होंगे ! 65 दिन चले आंदोलन से हिला था प्रशासन

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UP Anganwadi News: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सहित देश भर में आंगनबाड़ी सहायिकाओं के हित की लड़ाई लड़ने वाली 69 वर्षीय सुनंदा तिवारी (Sunanda Tiwari) का बुधवार सुबह तकरीबन साढ़े 6 बजे फतेहपुर (Fatehpur) के खागा (Khaga) स्थित उनके निवास में हृदय घात (Heart Attack) से निधन हो गया.

उनके बेटे मनोज तिवारी ने युगान्तर प्रवाह को जानकारी देते हुए बताया कि वो लंबे से बीपी और अस्थमा की बीमारी से पीड़ित थीं बीते दो माह से उनका स्वास्थ्य अधिक खराब था. प्रदेश अध्यक्ष गिरीश पांडेय कहते हैं कि उनके निधन से पूरे प्रदेश में शोक है सुनंदा तिवारी सबल योद्धा थीं उनकी क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती

कौन थीं सुनंदा तिवारी जिनकी बुलंद आवाज़ ने प्रशासन के छुड़ाए थे पसीने 

फतेहपुर (Fatehpur) के खागा (Khaga) की रहने वाली सुनंदा तिवारी (Sunanda Tiwari) आंगनवाड़ी संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष और फतेहपुर की जिलाध्यक्ष थीं. उनके पति विप्लव कुमार तिवारी और बेटे पंकज, राहुल खागा में वकालत करते हैं जबकि मनोज की मेडिकल शॉप है. दो बेटियों की शादी काफी समय पहले हो गई थी.

बताया जा रहा है कि सुनंदा तिवारी का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव कटोघन में किया जाएगा. आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री के रूप में उनका पूरा जीवन बीता. हक की मांगों को लेकर लगातार शासन और प्रशासन में अपनी बात बुलंद करती रहीं.

बीते सात साल पहले उनका प्रदेश और देश व्यापी आंदोलन 65 दिनों से अधिक चला. उनकी बुलंद आवाज़ और अपने कार्य के प्रति समझ से अधिकारी भी मौन हो जाते थे. लंबे समय तक चला आंदोलन शासन और प्रशासन के आश्वासन के बाद बंद हुआ था. 

आंगनबाडियों को मिलता है मजदूरों से कम वेतन, प्रधानमंत्री के लिए कही थी ये बात

सुनंदा तिवारी अपने आंदोलनों में बड़ी ही मुखरता के साथ बोलती थीं. आंगनबाड़ी सहायिकाओं का जीवकोपार्जन हो या उनकी पेंशन बड़ी बेबाकी से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को चेतावनी देती थी.

एक बार युगान्तर प्रवाह को दिए साक्षात्कार में कहा था कि प्रधानमंत्री जी आपकी मां बहन और खुद आप भी जब बूढ़े होंगे तब आपको हमारा दर्द समझ में आएगा. उन्होंने कहा था कि आंगनबाडियों को एक मजदूर से कम वेतन दिया जाता है और उससे अधिक काम लिया जाता है.

बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को भी कई बार उजागर किया था. उनके निधन के बाद संघ सहित पूरे जनपद में शोक की लहर है.

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