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बीएड प्रवेश परीक्षा:यूपी में कोरोना संकट के बीच 4 लाख से अधिक परीक्षार्थी देंगे परीक्षा.!

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यूपी में बीएड प्रवेश परीक्षा 9 अगस्त को ही होगी..इसको लेकर सरकारी अमला तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है..पढ़ें युगान्तर प्रवाह की एक रिपोर्ट..

लखनऊ:पूरे देश भर में कोरोना का संक्रमण बहुत तेज़ी के साथ फैला हुआ है।यूपी में भी हर रोज बड़ी संख्या में कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं।यहाँ मरीज़ो एक्टिव मरीज़ो की कुल संख्या वर्तमान में 40 हज़ार के पार हो गई है।ऐसे मौक़े पर परीक्षा कराने को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

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परीक्षार्थी कोरोना संक्रमण का हवाला देकर परीक्षा को फिलहाल स्थगित करने की मांग कर रहे थे।लेकिन अब तक सरकार की ओर से या परीक्षा का आयोजन करा रहे लखनऊ विश्वविद्यालय की तरफ़ से परीक्षा को निरस्त करने या तिथि को आगे बढ़ाने सम्बन्धी कोई सूचना जारी नहीं की गई है।मौजूदा हालातों को देखते हुए यही लग रहा है कि परीक्षा निर्धारित तिथि यानि 9 अगस्त को ही होगी।एडमिट कार्ड पहले ही जारी हो चुके हैं।जिलेवार बने परीक्षा केंद्रों में जिला स्तर पर प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है।

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यूपी बी.एड. प्रवेश परीक्षा की समन्वयक और लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्यापक प्रोफेसर अमिता बाजपेई कहती हैं कि परीक्षार्थियों को कोविड के समय अधिक दिक्कत ना हो, इसलिए शासन ने इसे 16 जिलों की बजाय अब प्रदेश के 75 में से 73 जिलों में कराने का फैसला लिया है। परीक्षा केंद्रों के सवाल पर उन्होंने कहा कि अधिकतर अभ्यर्थियों को उनका पहली च्वाइस, नहीं हो सका है तो दूसरी या तीसरी च्वाइस देने की कोशिश की गई है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सभी के लिए ऐसा संभव नहीं था, इसलिए कुछ अभ्यर्थी ऐसे हो सकते हैं जिनको उनके च्वाइस का परीक्षा केंद्र ना मिला हो। उन्होंने कहा कि कोविड को देखते हुए संपूर्ण परीक्षा केंद्र को सैनेटाइज किया जाएगा और इसके लिए अलग से प्रत्येक केंद्र को 10 हजार रूपये बजट देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए ही सीट प्लान निर्धारित की जाएंगी, ऐसा उन्होंने कहा। वहीं परीक्षार्थियों को सैनेटाइजर, पानी का बॉटल और रूमाल जैसे मूलभूत चीजें लाने की सलाह दी गई है। उन्होंने सरकार से भी अपील की है कि बी.एड. परीक्षा को देखते हुए इस सप्ताह की शनिवार और रविवार की लॉकडाउन में छूट दिया जाए और ढाबे, होटल, ट्रांसपोर्ट सुविधाओं को चलाया जाए ताकि परीक्षार्थी आसानी से परीक्षा केंद्र पहुंच सकें।

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वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि जब एक तरह से स्वास्थ्य आपातकालीन समय चल रहा है, उस समय शासन द्वारा प्रवेश परीक्षा कराया जाना समझ से परे है। इस परीक्षा के लिए एक साथ 4 लाख से अधिक लोग प्रदेश के एक जिले से दूसरे जिले में और एक हिस्से से दूसरे हिस्से की यात्रा करेंगे, ऐसे में किसी एक के भी संक्रमित होने से सैकड़ों लोग संक्रमण का शिकार हो सकते हैं। इसलिए अभ्यर्थियों की मांग है कि इन परिस्थितियों में यह परीक्षा स्थगित की जाए और हालात थोड़ा और बेहतर होने पर ही परीक्षा की तिथि निर्धारित की जाए।


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