Please enable JavaScript to support our website by allowing ads.

खाड़ी संकट से कांपा मोरबी का टाइल हब: गैस आपूर्ति रुकी, 100 से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद, 4 लाख नौकरियों पर खतरा

खाड़ी संकट से कांपा मोरबी का टाइल हब: गैस आपूर्ति रुकी, 100 से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद, 4 लाख नौकरियों पर खतरा
भारत की अरबों का टाइल्स उद्योग संकट में, 4 लाख मजदूरों की नौकरी खरते में (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

ईरान-इज़राइल युद्ध का असर अब भारत के औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच गया है. गुजरात के मोरबी में गैस आपूर्ति बाधित होने से 100 से अधिक सिरेमिक टाइल फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं, जबकि 400 से ज्यादा इकाइयां बंद होने की कगार पर हैं. इससे करीब 4 लाख मजदूरों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ गई है.

Morbi Ceramic Tile Industry: मध्य पूर्व में बढ़ते ईरान-इज़राइल संघर्ष ने भारत के सबसे बड़े सिरेमिक टाइल हब मोरबी को भी संकट में डाल दिया है. खाड़ी देशों से आने वाली प्रोपेन और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बाधित होने के कारण टाइल उद्योग का उत्पादन प्रभावित हो रहा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि 100 से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं और सैकड़ों अन्य इकाइयां बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं.

दुनिया के सबसे बड़े सिरेमिक टाइल हब में गहराया संकट

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुजरात का मोरबी शहर सिरेमिक टाइल उद्योग का वैश्विक केंद्र माना जाता है. यहां करीब 600 से अधिक औद्योगिक इकाइयां टाइलों का निर्माण करती हैं और इनका निर्यात दुनिया के कई देशों में होता है. भारत के निर्माण क्षेत्र में उपयोग होने वाली टाइलों का बड़ा हिस्सा भी यहीं से सप्लाई होता है.

इन उद्योगों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 4 लाख लोग काम करते हैं. लेकिन खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए संकट ने इस पूरे औद्योगिक नेटवर्क को हिला दिया है. गैस आपूर्ति में आई बाधा के कारण कई फैक्ट्रियों को उत्पादन रोकना पड़ा है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो यह संकट मोरबी की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ देश के निर्माण क्षेत्र को भी प्रभावित कर सकता है.

गैस की कमी से उत्पादन पर ब्रेक, तीन दिन का ही बचा प्रोपेन स्टॉक

सिरेमिक टाइलों के निर्माण में अत्यधिक तापमान वाली भट्टियों का उपयोग किया जाता है, जिसके लिए प्रोपेन गैस और प्राकृतिक गैस जरूरी होती है. लेकिन युद्ध के कारण इन ईंधनों की आपूर्ति बाधित हो गई है.

Read More: IMD Weather Alert: उत्तर प्रदेश सहित 11 राज्यों में बदलेगा मौसम, आंधी-बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी

सिरेमिक टाइल्स निर्माताओं के संघ के अध्यक्ष हरीशभाई बोपलिया ने बताया कि कई इकाइयों के पास प्रोपेन गैस का स्टॉक सिर्फ तीन दिन का ही बचा है, जबकि प्राकृतिक गैस का भंडार अधिकतम एक सप्ताह तक ही चल सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो सैकड़ों इकाइयों को उत्पादन पूरी तरह बंद करना पड़ेगा. उद्योग जगत के अनुसार यह स्थिति पिछले कई वर्षों में सबसे गंभीर संकटों में से एक है.

Read More: पंकज चौधरी को प्रदेश और नितिन नबीन को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी ! जानिए दोनों नेताओं की कुल संपत्ति कितनी है

सऊदी बंदरगाह की समस्या के बाद युद्ध ने बढ़ाई परेशानी

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि गैस आपूर्ति में व्यवधान की शुरुआत पिछले महीने ही हो गई थी. सऊदी अरब के एक प्रमुख बंदरगाह पर तकनीकी समस्याओं के कारण गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई थी.

Read More: महिला दिवस पर जानिए बेटियों का कानूनी अधिकार: पिता की संपत्ति में कितना होता है बेटी का हिस्सा, क्या कहता है कानून

हालांकि उद्योगपतियों को उम्मीद थी कि कुछ दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी. लेकिन इसी दौरान ईरान और इज़राइल के बीच संघर्ष तेज हो गया. इसके बाद खाड़ी क्षेत्र में शिपिंग गतिविधियां प्रभावित होने लगीं और गैस की आपूर्ति लगभग ठप हो गई. कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों को उस मार्ग से भेजने से परहेज करना शुरू कर दिया है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह प्रभावित हो गई है.

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से वैश्विक गैस बाजार हिला

मध्य पूर्व के इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी अस्थिर कर दिया है. दुनिया की करीब 20 प्रतिशत एलएनजी आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है. लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद वहां जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. ईरान ने चेतावनी दी है कि वह किसी भी ऐसे जहाज पर हमला कर सकता है जो उसके विरोधी देशों के साथ व्यापार कर रहा हो. इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग पर भारी दबाव बन गया है.

इसके अलावा ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के हमलों के जवाब में कुछ पड़ोसी देशों में स्थित गैस संयंत्रों को भी निशाना बनाया है. इनमें कतर जैसे बड़े गैस निर्यातक देश शामिल हैं. इससे वैश्विक गैस बाजार में कीमतों में तेजी से उछाल देखा जा रहा है.

लाखों मजदूरों की रोजी पर खतरा, सरकार से मदद की मांग

मोरबी के उद्योगपतियों का कहना है कि अगर गैस संकट लंबे समय तक बना रहा तो इसका असर लाखों मजदूरों की आजीविका पर पड़ेगा. उद्योगपति मणिभाई बावरवा के अनुसार सिरेमिक उद्योग पूरी तरह खाड़ी देशों से आने वाली गैस पर निर्भर है.

उन्होंने कहा कि अगर गैस की कीमतों में 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होती है तो उत्पादन लागत भी उतनी ही बढ़ जाएगी. ऐसे में टाइलों की कीमतें बढ़ाना मजबूरी बन जाएगा और बाजार पर भी इसका असर पड़ेगा.

उद्योग प्रतिनिधियों ने गुजरात गैस के अधिकारियों से मुलाकात कर स्थिति पर चर्चा की है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द वैकल्पिक ईंधन व्यवस्था और आपूर्ति बहाल करने के लिए कदम उठाए जाएं, ताकि मोरबी के इस विशाल उद्योग और इससे जुड़े लाखों परिवारों को बचाया जा सके.

Latest News

खाड़ी संकट से कांपा मोरबी का टाइल हब: गैस आपूर्ति रुकी, 100 से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद, 4 लाख नौकरियों पर खतरा खाड़ी संकट से कांपा मोरबी का टाइल हब: गैस आपूर्ति रुकी, 100 से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद, 4 लाख नौकरियों पर खतरा
ईरान-इज़राइल युद्ध का असर अब भारत के औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच गया है. गुजरात के मोरबी में गैस आपूर्ति बाधित...
UPPCL News: यूपी में स्मार्ट मीटर के नाम पर 127 करोड़ की वसूली ! अब पैसे लौटाएगा बिजली विभाग
आज का राशिफल 09 मार्च 2026: दर्पण देख कर करें यात्रा बनेंगे बिगड़े काम, जानिए सभी राशियों का दैनिक भाग्यफल
Sheetala Ashtami Kab Hai 2026: क्यों नहीं जलता चूल्हा और क्यों खाया जाता है बासी भोजन? जानिए शीतला अष्टमी की तिथि मुहूर्त
India Won T20 World Cup: फाइनल में शेर बनी टीम इंडिया, न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर तीसरी बार बना वर्ल्ड चैंपियन
सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव: मिडल ईस्ट तनाव का कितना असर ! क्या फिर बढ़ेंगे गोल्ड-सिल्वर के दाम?
T20 World Cup 2026 Final: इंडिया-न्यूजीलैंड मैच के लिए यूपी में नहीं कटेगी बिजली, मंदिरों में रुद्राभिषेक और यज्ञ से गूंजा माहौल

Follow Us