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Justice Yashwant Varma: इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की मांग ! अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी 

Justice Yashwant Varma: इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की मांग ! अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी 
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ उतारा इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (फाइल फोटो): Image Credit Original Source

Prayagraj News In Hindi

Prayagraj News: इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस यशवंत वर्मा के ट्रांसफर का विरोध किया करते हुए उनके खिलाफ महाभियोग की मांग की है साथ ही अनिश्चितकालीन हड़ताल चेतावनी दे डाली. बताया जा रहा है कि बीते 14 मार्च को उनके आवास से नकदी मिलने के बाद विवाद लगातार बढ़ रहा है.

Prayagraj News: इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा जस्टिस यशवंत वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) में करने के फैसले का कड़ा विरोध किया है.

एसोसिएशन का कहना है कि यह न्यायपालिका की निष्पक्षता और पारदर्शिता के लिए खतरा है. वकीलों ने इस मुद्दे पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है और जस्टिस वर्मा (Justice Yashwant Varma) के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग की है.

बार एसोसिएशन के 11 बड़े फैसले

इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की आम सभा की बैठक में 11 प्रस्ताव पारित किए गए. जिनमें प्रमुख रूप से ये प्रस्ताव हैं:

  • जस्टिस यशवंत वर्मा का इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.
  • सरकार से उनके खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने की अपील की गई है ताकि जांच प्रभावित न हो.
  • सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी जाए.
  • कॉलेजियम प्रणाली में सुधार की मांग की गई है क्योंकि यह केवल प्रभावशाली परिवारों के लोगों को न्यायाधीश बनने का अवसर देती है.
  • दिल्ली हाई कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस वर्मा द्वारा दिए गए फैसलों की पुनः जांच की मांग की गई है.

क्या है पूरा मामला?

14 मार्च को होली के दिन जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास में अचानक आग लग गई थी. जब दमकल कर्मी और पुलिस मौके पर पहुंचे तो वहां भारी मात्रा में नकदी मिली. इस घटना के बाद न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे.

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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इस घटना के बाद जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट में करने की सिफारिश की, लेकिन बार एसोसिएशन ने इस फैसले को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया और कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

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कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा (Who Is Justice Yashwant Varma)?

जस्टिस यशवंत वर्मा इलाहाबाद में जन्मे एक वरिष्ठ न्यायाधीश हैं, जिन्होंने कानूनी क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव रखा है. वह संवैधानिक, कॉर्पोरेट और टैक्सेशन कानून के विशेषज्ञ माने जाते हैं. उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी वकील के रूप में भी सेवाएं दी हैं. 

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  • जन्म: 6 जनवरी 1969, इलाहाबाद
  • शिक्षा: हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय (बी.कॉम ऑनर्स), रीवा विश्वविद्यालय (एलएलबी)
  • 1992 में वकालत शुरू की
  • 2012-2013: उत्तर प्रदेश के मुख्य स्थायी वकील
  • 2014: एडिशनल जज बने
  • 2016: परमानेंट जज बने
  • 2021: दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रांसफर
न्यायपालिका पर बढ़ता दबाव

बार एसोसिएशन का कहना है कि किसी न्यायाधीश के घर से इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलना न्यायपालिका की साख पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. कुछ न्यायाधीशों का मानना है कि सिर्फ ट्रांसफर से मामला खत्म नहीं होगा. जस्टिस वर्मा को इस्तीफा देना चाहिए, और अगर उन्होंने इनकार किया, तो संसद को उनके खिलाफ महाभियोग चलाना चाहिए.

इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकीलों की चेतावनी

अगर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं करता है, तो इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकील अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. अब देखने वाली बात यह होगी कि सुप्रीम कोर्ट इस विरोध प्रदर्शन और महाभियोग की मांग पर क्या फैसला लेता है.

24 Mar 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

Justice Yashwant Varma: इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की मांग ! अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी 

Prayagraj News In Hindi

Prayagraj News: इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा जस्टिस यशवंत वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) में करने के फैसले का कड़ा विरोध किया है.

एसोसिएशन का कहना है कि यह न्यायपालिका की निष्पक्षता और पारदर्शिता के लिए खतरा है. वकीलों ने इस मुद्दे पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है और जस्टिस वर्मा (Justice Yashwant Varma) के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग की है.

बार एसोसिएशन के 11 बड़े फैसले

इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की आम सभा की बैठक में 11 प्रस्ताव पारित किए गए. जिनमें प्रमुख रूप से ये प्रस्ताव हैं:

  • जस्टिस यशवंत वर्मा का इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.
  • सरकार से उनके खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने की अपील की गई है ताकि जांच प्रभावित न हो.
  • सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी जाए.
  • कॉलेजियम प्रणाली में सुधार की मांग की गई है क्योंकि यह केवल प्रभावशाली परिवारों के लोगों को न्यायाधीश बनने का अवसर देती है.
  • दिल्ली हाई कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस वर्मा द्वारा दिए गए फैसलों की पुनः जांच की मांग की गई है.

क्या है पूरा मामला?

14 मार्च को होली के दिन जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास में अचानक आग लग गई थी. जब दमकल कर्मी और पुलिस मौके पर पहुंचे तो वहां भारी मात्रा में नकदी मिली. इस घटना के बाद न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे.

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इस घटना के बाद जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट में करने की सिफारिश की, लेकिन बार एसोसिएशन ने इस फैसले को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया और कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा (Who Is Justice Yashwant Varma)?

जस्टिस यशवंत वर्मा इलाहाबाद में जन्मे एक वरिष्ठ न्यायाधीश हैं, जिन्होंने कानूनी क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव रखा है. वह संवैधानिक, कॉर्पोरेट और टैक्सेशन कानून के विशेषज्ञ माने जाते हैं. उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी वकील के रूप में भी सेवाएं दी हैं. 

  • जन्म: 6 जनवरी 1969, इलाहाबाद
  • शिक्षा: हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय (बी.कॉम ऑनर्स), रीवा विश्वविद्यालय (एलएलबी)
  • 1992 में वकालत शुरू की
  • 2012-2013: उत्तर प्रदेश के मुख्य स्थायी वकील
  • 2014: एडिशनल जज बने
  • 2016: परमानेंट जज बने
  • 2021: दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रांसफर
न्यायपालिका पर बढ़ता दबाव

बार एसोसिएशन का कहना है कि किसी न्यायाधीश के घर से इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलना न्यायपालिका की साख पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. कुछ न्यायाधीशों का मानना है कि सिर्फ ट्रांसफर से मामला खत्म नहीं होगा. जस्टिस वर्मा को इस्तीफा देना चाहिए, और अगर उन्होंने इनकार किया, तो संसद को उनके खिलाफ महाभियोग चलाना चाहिए.

इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकीलों की चेतावनी

अगर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं करता है, तो इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकील अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. अब देखने वाली बात यह होगी कि सुप्रीम कोर्ट इस विरोध प्रदर्शन और महाभियोग की मांग पर क्या फैसला लेता है.

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