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Pandit Ram Prasad Bismil Birth Anniversary: सरफरोशी की तमन्ना गाते हुए फाँसी पर झूले थे बिस्मिल क्या था काकोरी कांड

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महान क्रांतिकारी स्वतंत्रता ग्राम सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल की आज (11 जून) जयंती है।इस मौक़े पर पूरा देश उन्हें याद कर करते हुए श्रद्धांजलि दे रहा है. Ram prasad bismil birth anniversary bismil biography

Pandit Ram Prasad Bismil Birth Anniversary: अंग्रेजी हुकूमत से भारत को आज़ाद कराने के लिए अनगिनत देश भक्तों ने अपनी कुर्बानी दी थी।ऐसे ही भारत माता के एक सच्चे सपूत राम प्रसाद बिस्मिल थे।जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ़ डटकर मोर्चा संभाला औऱ हंसते हंसते फाँसी के फंदे में झूल गए।Ram prasad bismil biography

बिस्मिल का जन्म 11 जून 1897 में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ था। वह उच्च कोटि के कवि, शायर, अनुवादक और साहित्कार भी थे।उनका स्वरचित गीत सरफरोशी की तमन्ना.. भारत देश की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वालों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गया था।

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इतिहासकार बताते हैं कि बिस्मिल के क्रांतिकारी बनने का श्रेय 1913 में अपने समय के आर्य समाज और वैदिक धर्म के प्रमुख प्रचारकों में से एक भाई परमानंद को सुनाई गई फांसी की सजा है।भाई परमानंद अमेरिका के कैलीफोर्निया में अपने बचपन के मित्र लाला हरदयाल की ऐतिहासिक गदर पार्टी में सक्रिय होने के बाद स्वदेश लौटते ही प्रसिद्ध गदर षड्यंत्र मामले में गिरफ्तार कर लिए गए थे और उन्हें फांसी की सजा सुना दी गई थी।सजा से उद्वेलित बिस्मिल ने ‘मेरा जन्म’ शीर्षक से कविता रची और अंग्रेजी हुकूमत को समूल नाश करने की प्रतिज्ञा कर क्रांतिकारी बन गए।Ram prasad bismil news

हालांकि बाद में परमानंद की फांसी कालापानी की सजा में बदली और बाद में वे छोड़ भी दिए गए, लेकिन 1920 जब तक वे रिहा हुए तब तक बिस्मिल का संसार पूरी तरह बदल चुका था।औऱ वह भारत की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले एक प्रमुख क्रांतिकारी नेता बन गए थे।

क्या है काकोरी कांड..

भारत के स्वाधीनता आंदोलन में काकोरी कांड एक महत्वपूर्ण घटना रही। दरअसल 1922 में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन अपने चरम पर था कि तभी गोरखपुर जिले के चौरा-चौरी में एक घटना हुई।भड़के हुए कुछ आंदोलकारियों ने एक थाने को घेरकर आग लगा दी जिसमें 22-23 पुलिसकर्मी जलकर मर गए थे।इस हिंसक घटना से दुखी होकर महात्मा गांधी ने तुरंत असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।Kakori kand 

असहयोग आंदोलन बंद करने से निराशा का माहौल छा गया था और फिर नौ अगस्त 1925 को क्रांतिकारियों ने काकोरी में एक ट्रेन में डकैती डाली थी।इसी घटना को काकोरी कांड के नाम से जाना जाता है।

काकोरी कांड का मकसद अंग्रेजी सरकार का खजाना लूटकर उन पैसों से हथियार खरीदना था ताकि अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध को मजबूती मिल सके।काकोरी ट्रेन डकैती में खजाना लूटने वाले क्रांतिकारी हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन (एचआरए) के सदस्य थे।

9 अगस्त 1925, रात 2 बजकर 42 मिनट पर साहरण-पुर लखनऊ पैसेंजर ट्रेन को कुछ क्रांतिकारियों ने काकोरी में रोका और ट्रेन को लूटा।काकोरी कांड का नेतृत्व रामप्रसाद बिस्मिल ने किया था।

इस घटना के बाद बड़ी संख्या में अग्रेजी सरकार ने गिरफ्तारियां की।सब पर मुकदमा लगभग 10 महीने तक लखनऊ की अदालत में चला और रामप्रसाद बिस्मिल, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खां को फांसी की सजा सुनाई गई।17 दिसंबर 1927 को सबसे पहले गांडा जेल में राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को फांसी दी गई।

19 दिसंबर, 1927 को पं. रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल में फांसी दी गई।काकोरी कांड के तीसरे शहीद ठाकुर रोशन सिंह को इलाहाबाद में फांसी दी गई।और चौथे शहीद अशफाक उल्ला खां थे।उन्हें फैजाबाद में फांसी दी गई। Ram Prasad Bismil Kakori Kand Biography Of Ram Prasad Bismil Latest News Hindi


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