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Parenting Tips In Hindi: अपने बच्चों को हर क्षेत्र में बनाना चाहते हैं एक्टिव ! कुछ बातों का रखना होगा ध्यान, अपनाएं ये टिप्स

Parenting Tips In Hindi: अपने बच्चों को हर क्षेत्र में बनाना चाहते हैं एक्टिव ! कुछ बातों का रखना होगा ध्यान, अपनाएं ये टिप्स
पैरेंटिंग टिप्स, फोटो साभार सोशल मीडिया

कैसे रखें बच्चों का खयाल

वर्तमान समय में बढ़ती टेक्नोलॉजी (Technology) सुख सुविधाओं के बीच बच्चों की परवरिश और उनकी देखभाल करना पेरेंट्स के लिए बड़ी चुनौती है, क्योंकि घर का जैसा माहौल होता है बच्चे वही सीखते है. ऐसे में इस जटिल समस्या से निपटने और बच्चों को अच्छी चीज़ें सिखाने के लिए कुछ टिप्स (Some Tips) के जरिये उन्हें हर क्षेत्र में एक्टिव और अच्छी बातें सिखा सकते है. जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल (Bright Future) हो सके.

बच्चों को बार-बार डांट न लगाएं, बनायें आत्मनिर्भर

अमूमन ऐसा देखा जाता है कि, बच्चे बचपन मे काफी शैतानी करते है, जिस वजह से पैरेंट्स (Parents) काफी परेशान रहते है. ऐसे में माता पिता उन्हें डांट फटकार लगाते है, कुछ बच्चे स्टडी करते समय मे आनाकानी करते है, ऐसे में उन्हें डांटने (Scold) से उनकी आदत (Habit) बिगड़ जाती है, जिसके बाद आप उन्हें कुछ भी कहे लेकिन उन पर कोई असर नही होता है माता पिता को चाहिए ऐसे में बच्चों को डांटने की बजाय प्यार से समझाएं. एक रिसर्च के मुताबिक बच्चों को आप जितना दबाव (Pressure) में रखेंगे बच्चों का मानसिक विकास उतना ही कम होगा. जब आप उन्हें एक्टिविटी करने और अपनी समस्याओं को खुद से ही सुलझाने के लिए फ्री कर देते हैं तो बच्चे काफी हद तक अपने फैसले लेने में खुद सक्षम होते हैं.

बच्चों द्वारा गलती करने पर उन्हें जिम्मेदार न ठहराये, कम्पेयर न करें

अधिकांश ऐसा होता है कि बच्चे कोई गलती करते हैं तो माता-पिता उन्हें काफी बुरा-भला बोल देते हैं. जिससे बच्चे मानसिक रूप से परेशान रहने लगते हैं मसलन यदि बच्चों से किसी तरह की कोई गलती हो जाए तो उन्हें समझा बुझा कर मामले को रफा दफा करें. अमूमन ऐसा देखा जाता है कि पढ़ाई-लिखाई या बच्चों द्वारा की जाने वाली शैतानी को लेकर माता-पिता दूसरों के बच्चों से खुद के बच्चों की तुलना करते हैं.

ऐसा करने से भी बच्चे खुद को काफी हारा हुआ समझते हैं ऐसा करने से उनका मनोबल भी गिरता है, क्योंकि हर एक बच्चा स्पेशल होता है माता-पिता द्वारा ऐसा करने पर इसका परिणाम कुछ समय बाद ही दिखने लगेगा. अक्सर बच्चों द्वारा किसी तरह की कोई जिद करने पर उनकी मांग पूरा करना भी उन्हें बिगाड़ सकता है ऐसे में बच्चे आपसे बार-बार किसी चीज को पाने के लिए मांग करते हैं. तो उनकी इस जिद से बचे, क्योंकि ऐसा करने से बच्चे बिगड़ सकते हैं. बार-बार बच्चों द्वारा की जाने वाली जिद को पूरा करने से बच्चों को यह एहसास हो जाता है कि ऐसा करने से उनकी हर मांग पूरी की जाती है इसलिए उनकी इस मांग को पूरी न करें जब बच्चे इस तरह की कोई मांग कर तो उन्हें प्यार से समझाएं.

बच्चों को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट से बचाए शांत रहना सिखाएं

वर्तमान समय में बच्चे अपने दिन का ज्यादा से ज्यादा समय गैजेट्स जैसे मोबाइल और इंटरनेट में समय व्यतीत करते हैं. ज्यादा गैजेट्स यूज करने से बच्चों की आंखों और मस्तिष्क में काफी असर पड़ता है ऐसे में जितना हो सके बच्चों को इंडोर गेम्स, पजल गेम्स या आउटडोर गेम्स में भी कई ऑप्शन है उन्हें चुनने का मौका दें. बच्चों के सामने जितना हो सके उतना खुद को शांत रखें, क्योंकि घर का जैसा माहौल होगा बच्चे खुद को इस माहौल में ढालेंगे यदि बचपन से ही बच्चों को इस तरह से ध्यान रखना सिखाएंगे तो आगे जाकर यह उनके लिए काफी मददगार साबित होगा.

Read More: UPSC Topper Anuj Agnihotri: कौन हैं अनुज अग्निहोत्री जिन्होंने डॉक्टरी के पेशे को छोड़ अपनाई यूपीएससी की राह

जीत और हार है जीवन के दो पहलू

जीतने की इच्छा सभी में होती है, बच्चों में भी बचपन से इस तरह से आदत डालें कि किसी भी कंपटीशन में वह खुद का हंड्रेड परसेंट देते हुए जीत हासिल कर सके. फिर चाहे वह खेलकूद का क्षेत्र हो या पढ़ाई का क्षेत्र हो या जिंदगी से जुड़ी कैसी भी परिस्थिति हो लेकिन दूसरी तरफ उन्हें यह भी बताएं कि यदि जीवन में कभी हार का भी मुंह देखना पड़ता है. ऐसे में हार होने पर खुद को डिमॉनेटाइज ना होने दे हार का मतलब यह है कि आपने अपना हंड्रेड परसेंट नहीं दिया है अगली बार कड़ी मेहनत करेंगे तो जरूर जीत हासिल होगी.

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26 Jan 2024 By Vishal Shukla

Parenting Tips In Hindi: अपने बच्चों को हर क्षेत्र में बनाना चाहते हैं एक्टिव ! कुछ बातों का रखना होगा ध्यान, अपनाएं ये टिप्स

कैसे रखें बच्चों का खयाल

बच्चों को बार-बार डांट न लगाएं, बनायें आत्मनिर्भर

अमूमन ऐसा देखा जाता है कि, बच्चे बचपन मे काफी शैतानी करते है, जिस वजह से पैरेंट्स (Parents) काफी परेशान रहते है. ऐसे में माता पिता उन्हें डांट फटकार लगाते है, कुछ बच्चे स्टडी करते समय मे आनाकानी करते है, ऐसे में उन्हें डांटने (Scold) से उनकी आदत (Habit) बिगड़ जाती है, जिसके बाद आप उन्हें कुछ भी कहे लेकिन उन पर कोई असर नही होता है माता पिता को चाहिए ऐसे में बच्चों को डांटने की बजाय प्यार से समझाएं. एक रिसर्च के मुताबिक बच्चों को आप जितना दबाव (Pressure) में रखेंगे बच्चों का मानसिक विकास उतना ही कम होगा. जब आप उन्हें एक्टिविटी करने और अपनी समस्याओं को खुद से ही सुलझाने के लिए फ्री कर देते हैं तो बच्चे काफी हद तक अपने फैसले लेने में खुद सक्षम होते हैं.

बच्चों द्वारा गलती करने पर उन्हें जिम्मेदार न ठहराये, कम्पेयर न करें

अधिकांश ऐसा होता है कि बच्चे कोई गलती करते हैं तो माता-पिता उन्हें काफी बुरा-भला बोल देते हैं. जिससे बच्चे मानसिक रूप से परेशान रहने लगते हैं मसलन यदि बच्चों से किसी तरह की कोई गलती हो जाए तो उन्हें समझा बुझा कर मामले को रफा दफा करें. अमूमन ऐसा देखा जाता है कि पढ़ाई-लिखाई या बच्चों द्वारा की जाने वाली शैतानी को लेकर माता-पिता दूसरों के बच्चों से खुद के बच्चों की तुलना करते हैं.

ऐसा करने से भी बच्चे खुद को काफी हारा हुआ समझते हैं ऐसा करने से उनका मनोबल भी गिरता है, क्योंकि हर एक बच्चा स्पेशल होता है माता-पिता द्वारा ऐसा करने पर इसका परिणाम कुछ समय बाद ही दिखने लगेगा. अक्सर बच्चों द्वारा किसी तरह की कोई जिद करने पर उनकी मांग पूरा करना भी उन्हें बिगाड़ सकता है ऐसे में बच्चे आपसे बार-बार किसी चीज को पाने के लिए मांग करते हैं. तो उनकी इस जिद से बचे, क्योंकि ऐसा करने से बच्चे बिगड़ सकते हैं. बार-बार बच्चों द्वारा की जाने वाली जिद को पूरा करने से बच्चों को यह एहसास हो जाता है कि ऐसा करने से उनकी हर मांग पूरी की जाती है इसलिए उनकी इस मांग को पूरी न करें जब बच्चे इस तरह की कोई मांग कर तो उन्हें प्यार से समझाएं.

बच्चों को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट से बचाए शांत रहना सिखाएं

वर्तमान समय में बच्चे अपने दिन का ज्यादा से ज्यादा समय गैजेट्स जैसे मोबाइल और इंटरनेट में समय व्यतीत करते हैं. ज्यादा गैजेट्स यूज करने से बच्चों की आंखों और मस्तिष्क में काफी असर पड़ता है ऐसे में जितना हो सके बच्चों को इंडोर गेम्स, पजल गेम्स या आउटडोर गेम्स में भी कई ऑप्शन है उन्हें चुनने का मौका दें. बच्चों के सामने जितना हो सके उतना खुद को शांत रखें, क्योंकि घर का जैसा माहौल होगा बच्चे खुद को इस माहौल में ढालेंगे यदि बचपन से ही बच्चों को इस तरह से ध्यान रखना सिखाएंगे तो आगे जाकर यह उनके लिए काफी मददगार साबित होगा.

जीत और हार है जीवन के दो पहलू

जीतने की इच्छा सभी में होती है, बच्चों में भी बचपन से इस तरह से आदत डालें कि किसी भी कंपटीशन में वह खुद का हंड्रेड परसेंट देते हुए जीत हासिल कर सके. फिर चाहे वह खेलकूद का क्षेत्र हो या पढ़ाई का क्षेत्र हो या जिंदगी से जुड़ी कैसी भी परिस्थिति हो लेकिन दूसरी तरफ उन्हें यह भी बताएं कि यदि जीवन में कभी हार का भी मुंह देखना पड़ता है. ऐसे में हार होने पर खुद को डिमॉनेटाइज ना होने दे हार का मतलब यह है कि आपने अपना हंड्रेड परसेंट नहीं दिया है अगली बार कड़ी मेहनत करेंगे तो जरूर जीत हासिल होगी.

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