Please enable JavaScript to support our website by allowing ads.

Ganesh Shankar Vidyarthi:वह पत्रकार जो दंगे के दौरान मार दिया गया

Ganesh Shankar Vidyarthi:वह पत्रकार जो दंगे के दौरान मार दिया गया
गणेश शंकर विद्यार्थी (फ़ाइल फ़ोटो)

समाज सुधारक, ईमानदार पत्रकार औऱ अपनी कलम से अंग्रेजी शासन की नींव हिला देने वाले पत्रकार पुरोधा गणेश शंकर विद्यार्थी की 25 मार्च को पुण्यतिथि है.आइए जानते हैं उनके जीवन के बारे में. Ganesh Shankar Vidyarthi Death Anniversary

Ganesh Shanker Vidyarthi:स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पत्रकार पुरोधा गणेश शंकर विद्यार्थी की 25 मार्च को पुण्यतिथि होती है.दंगो के दौरान कानपुर में 25 मार्च 1931 में उनकी हत्या कर दी गई थी.विद्यार्थी अपनी लेखनी से अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला देते थे.

गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म 26 अक्टूबर 1890 को फतेहपुर ज़िले के हथगाव क़स्बे में हुआ था.विद्यार्थी मूल रूप से फतेहपुर के ही रहने वाले थे.हालांकि उनके जन्मस्थान को लेकर मतभेद है कुछ लोग उनका जन्मस्थान उनके ननिहाल इलाहाबाद को बताते हैं.पिता जयनारायण पेशे से शिक्षक थे.

बताया जाता है कि 16 साल की उम्र में ही गणेश ने अपनी पहली किताब महात्मा गांधी से इंस्पायर होकर लिख डाली थी. किताब का नाम था हमारी आत्मोसर्गता. 1911 में ही उनका एक लेख भी हंस पत्रिका में छप चुका था.लेख का शीर्षक भी आत्मोत्सर्ग था.

प्रताप अखबार की शुरुआत विद्यार्थी जी ने 9 नवंबर, 1913 में की थी. विद्यार्थी जी के जेल जाने के बाद प्रताप का संपादन माखनलाल चतुर्वेदी और बालकृष्ण शर्मा नवीन जैसे बड़े साहित्यकार करते रहे.‘झंडा ऊंचा रहे हमारा’ गीत जो श्याम लाल गुप्त पार्षद ने लिखा था.उसे भी 13 अप्रैल 1924 से जलियांवाला की बरसी पर विद्यार्थी ने गाया जाना शुरू करवाया था.

Read More: IMD Weather Alert: उत्तर प्रदेश सहित 11 राज्यों में बदलेगा मौसम, आंधी-बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी

दंगा रोकते वक़्त खुद मार दिए गए..

Read More: UPSC Topper Anuj Agnihotri: कौन हैं अनुज अग्निहोत्री जिन्होंने डॉक्टरी के पेशे को छोड़ अपनाई यूपीएससी की राह

1931 में सारे कानपुर में दंगे हो रहे थे. मजहब पर लड़ने वालों के खिलाफ जिंदगी भर गणेश शंकर विद्यार्थी लड़ते रहे थे,वही मार-काट उनके आस-पास हो रही थी.लोग मजहब के नाम पर एक-दूसरे को मार रहे थे.ऐसे मौके पर गणेश शंकर विद्यार्थी से रहा न गया और वो निकल पड़े दंगे रोकने.कई जगह पर तो वो कामयाब रहे पर कुछ देर में ही वो दंगाइयों की एक टुकड़ी में फंस गए. Ganesh shankar Vidyarthi Biography

Read More: Bihar Politics: बिहार की राजनीति से समाप्त हुआ नीतीश युग! 20 साल बाद सत्ता से विदा हुए कुमार, जानिए पूरा राजनीतिक सफर

ये दंगाई उन्हें पहचानते नहीं थे. इसके बाद विद्यार्थी जी की बहुत खोज हुई, पर वो मिले नहीं. आखिर में उनकी लाश एक अस्पताल की लाशों के ढेर में पड़ी हुई मिली. लाश इतनी फूल गई थी कि उसको लोग पहचान भी नहीं पा रहे थे. 29 मार्च को उनको अंतिम विदाई दी गई.

24 Mar 2022 By Shubham Mishra

Ganesh Shankar Vidyarthi:वह पत्रकार जो दंगे के दौरान मार दिया गया

Ganesh Shanker Vidyarthi:स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पत्रकार पुरोधा गणेश शंकर विद्यार्थी की 25 मार्च को पुण्यतिथि होती है.दंगो के दौरान कानपुर में 25 मार्च 1931 में उनकी हत्या कर दी गई थी.विद्यार्थी अपनी लेखनी से अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला देते थे.

गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म 26 अक्टूबर 1890 को फतेहपुर ज़िले के हथगाव क़स्बे में हुआ था.विद्यार्थी मूल रूप से फतेहपुर के ही रहने वाले थे.हालांकि उनके जन्मस्थान को लेकर मतभेद है कुछ लोग उनका जन्मस्थान उनके ननिहाल इलाहाबाद को बताते हैं.पिता जयनारायण पेशे से शिक्षक थे.

बताया जाता है कि 16 साल की उम्र में ही गणेश ने अपनी पहली किताब महात्मा गांधी से इंस्पायर होकर लिख डाली थी. किताब का नाम था हमारी आत्मोसर्गता. 1911 में ही उनका एक लेख भी हंस पत्रिका में छप चुका था.लेख का शीर्षक भी आत्मोत्सर्ग था.

प्रताप अखबार की शुरुआत विद्यार्थी जी ने 9 नवंबर, 1913 में की थी. विद्यार्थी जी के जेल जाने के बाद प्रताप का संपादन माखनलाल चतुर्वेदी और बालकृष्ण शर्मा नवीन जैसे बड़े साहित्यकार करते रहे.‘झंडा ऊंचा रहे हमारा’ गीत जो श्याम लाल गुप्त पार्षद ने लिखा था.उसे भी 13 अप्रैल 1924 से जलियांवाला की बरसी पर विद्यार्थी ने गाया जाना शुरू करवाया था.

दंगा रोकते वक़्त खुद मार दिए गए..

1931 में सारे कानपुर में दंगे हो रहे थे. मजहब पर लड़ने वालों के खिलाफ जिंदगी भर गणेश शंकर विद्यार्थी लड़ते रहे थे,वही मार-काट उनके आस-पास हो रही थी.लोग मजहब के नाम पर एक-दूसरे को मार रहे थे.ऐसे मौके पर गणेश शंकर विद्यार्थी से रहा न गया और वो निकल पड़े दंगे रोकने.कई जगह पर तो वो कामयाब रहे पर कुछ देर में ही वो दंगाइयों की एक टुकड़ी में फंस गए. Ganesh shankar Vidyarthi Biography

ये दंगाई उन्हें पहचानते नहीं थे. इसके बाद विद्यार्थी जी की बहुत खोज हुई, पर वो मिले नहीं. आखिर में उनकी लाश एक अस्पताल की लाशों के ढेर में पड़ी हुई मिली. लाश इतनी फूल गई थी कि उसको लोग पहचान भी नहीं पा रहे थे. 29 मार्च को उनको अंतिम विदाई दी गई.

Tags:

Latest News

Aaj Ka Rashifal 15 May 2026: मेष से मीन तक जानिए किस राशि पर रहेगी किस्मत मेहरबान, किसे बरतनी होगी सावधानी Aaj Ka Rashifal 15 May 2026: मेष से मीन तक जानिए किस राशि पर रहेगी किस्मत मेहरबान, किसे बरतनी होगी सावधानी
15 मई 2026, शुक्रवार का दिन कई राशियों के लिए नई संभावनाएं लेकर आया है. कुछ जातकों को करियर और...
Prateek Yadav Live News: पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा प्रतीक का शव, कल होगा अंतिम संस्कार, जानिए पल-पल की अपडेट
Prateek Yadav Death News: किचन में अचानक गिरे प्रतीक यादव, अपर्णा यादव के करीबी ने बताई उस सुबह की पूरी कहानी
फतेहपुर गैंगरेप पीड़िता की मंदिर में हुई शादी, मंगेतर ने थामा हाथ और कहा- हर सुख-दुख में निभाऊंगा साथ
Aaj Ka Rashifal 10 May 2026: मेष से लेकर मीन तक जानें सभी राशियों का दैनिक भविष्यफल, पान खाकर करें यात्रा
UP Cabinet Expansion 2026: योगी मंत्रिमंडल का आज बड़ा विस्तार, फतेहपुर की कृष्णा पासवान समेत कई नए चेहरों की चर्चा
Suvendu Adhikari CM Oath: ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी बने बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री, जानिए क्यों अब तक नहीं की शादी

Follow Us