AyodhyaJudgment अयोध्या फैसले के बाद सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वक़ील जफ़रयाब जिलानी ने क्या कहा..जानें..!
अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद का ऐतिहासिक फैसला आज आ गया है।फैसले के बाद सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के जफरयाब जिलानी ने फैसले को लेकर संतुष्ट नहीं दिखे..उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस करके क्या कुछ कहा..पढ़े युगान्तर प्रवाह की इस रिपोर्ट में।
नई दिल्ली:अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जफरयाब जिलानी ने कहा, ''हमारी जमीन रामलला को दे दी गई, हमसे इससे सहमत नहीं हैं. हम अपने साथी वकीलों के साथ चर्चा करके तय करेंगे कि रिव्यू पिटीशन दायर करनी है या नहीं।'' उन्होंने कहा कि ''मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड चर्चा करके फैसला करेगा। हम फैसले खुश नहीं हैं, चुनौती के बारे में सोचेंगे।''
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से वकील जफरयाब जिलानी ने कहा है कि ''हम देश की आवाम से अपील करते हैं कि किसी की ओर से कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होना चाहिए।ये किसी की हार या जीत नहीं है।हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं हैं।हम वकील राजीव धवन से बात करके आगे का फैसला लेंगे।हम चुनौती के बारे में सोचेंगे।''
जिलानी ने कहा, ''सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1857 से पहले नमाज का कोई सबूत नहीं है, लेकिन जो सबूत कोर्ट में इस्तेमाल किए हैं वो वहां मस्जिद मौजूद होने का प्रमाण पेश करते हैं. फिर भी अंदर की जमीन सूट 5 को दे दी गई। हमारी शरीयत के मुताबिक हम अपनी मस्जिद किसी को नहीं दे सकते।''
AyodhyaJudgment अयोध्या फैसले के बाद सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वक़ील जफ़रयाब जिलानी ने क्या कहा..जानें..!
नई दिल्ली:अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जफरयाब जिलानी ने कहा, ''हमारी जमीन रामलला को दे दी गई, हमसे इससे सहमत नहीं हैं. हम अपने साथी वकीलों के साथ चर्चा करके तय करेंगे कि रिव्यू पिटीशन दायर करनी है या नहीं।'' उन्होंने कहा कि ''मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड चर्चा करके फैसला करेगा। हम फैसले खुश नहीं हैं, चुनौती के बारे में सोचेंगे।''
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से वकील जफरयाब जिलानी ने कहा है कि ''हम देश की आवाम से अपील करते हैं कि किसी की ओर से कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होना चाहिए।ये किसी की हार या जीत नहीं है।हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं हैं।हम वकील राजीव धवन से बात करके आगे का फैसला लेंगे।हम चुनौती के बारे में सोचेंगे।''
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जिलानी ने कहा, ''सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1857 से पहले नमाज का कोई सबूत नहीं है, लेकिन जो सबूत कोर्ट में इस्तेमाल किए हैं वो वहां मस्जिद मौजूद होने का प्रमाण पेश करते हैं. फिर भी अंदर की जमीन सूट 5 को दे दी गई। हमारी शरीयत के मुताबिक हम अपनी मस्जिद किसी को नहीं दे सकते।''