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Kidney Failure Symptoms: पैरों की सूजन और सांस फूलना किडनी फेलियर का संकेत ! जानें शुरुआती लक्षण और बचाव

Kidney Failure Symptoms: पैरों की सूजन और सांस फूलना किडनी फेलियर का संकेत ! जानें शुरुआती लक्षण और बचाव
किडनी खराब होने से पहले मिलते हैं कई संकेत हल्के में ना लें (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

Kidney Failure Symptoms

किडनी शरीर को जहर से बचाने का काम करती है. लेकिन जब ये काम करना बंद कर देती है, तो शरीर में खतरनाक बदलाव दिखने लगते हैं. पैरों की सूजन, थकान, पेशाब में बदलाव और सांस फूलना इसके गंभीर लक्षण हैं. इन्हें नजरअंदाज करना आपकी जिंदगी को खतरे में डाल सकता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि समय रहते जांच और जीवनशैली में सुधार से किडनी फेलियर से बचा जा सकता है.

Kidney Failure Symptoms: क्या आपके पैरों में अक्सर सूजन रहती है या चलते समय सांस फूल जाती है? अगर हां, तो इसे हल्के में न लें. ये गुर्दे यानी किडनी फेलियर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. किडनी हमारे शरीर की सबसे अहम मशीन है, जो खून को साफ करती है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है. लेकिन जब ये फेल होने लगती है, तो धीरे-धीरे पूरा शरीर जहर से भर जाता है. यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं – किडनी खराब होने का पहला संकेत पैरों और टखनों में सूजन होना है.

पैरों और टखनों में सूजन: किडनी खराब होने का पहला संकेत

जब किडनी अपना काम सही से नहीं करती, तो शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक बाहर नहीं निकल पाता. यही पानी पैरों और टखनों में जमा होकर सूजन पैदा करता है. शुरुआत में यह सूजन हल्की लगती है, लेकिन धीरे-धीरे पैरों में दर्द, भारीपन और चलने में तकलीफ देने लगती है. यही वजह है कि डॉक्टर इसे किडनी खराब होने का पहला संकेत मानते हैं और इस पर तुरंत ध्यान देने की सलाह देते हैं.

बार-बार थकान और कमजोरी रहना

किडनी के खराब होने का एक बड़ा लक्षण है लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना. दरअसल, खराब किडनी एरीथ्रोपोइटिन नामक हार्मोन बनाना बंद कर देती है, जो लाल रक्त कोशिकाओं के लिए जरूरी है. इसकी कमी से एनीमिया हो जाता है और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती. यही वजह है कि मरीज हमेशा थका हुआ और कमजोर महसूस करता है, चाहे उसने आराम ही क्यों न किया हो.

पेशाब की आदतों में अचानक बदलाव

अगर आपकी पेशाब की आदतें अचानक बदल जाएं, तो इसे इग्नोर न करें. किडनी फेलियर में पेशाब बार-बार आना, पेशाब की मात्रा कम होना, झाग आना या पेशाब का रंग गहरा होना आम लक्षण हैं. कई बार इसमें खून भी आ सकता है. यह साफ संकेत है कि किडनी खून को सही तरीके से फिल्टर नहीं कर पा रही है और तुरंत मेडिकल जांच की जरूरत है. अगर आप घर पर खुद टेस्ट करना चाहते हैं तो शुरुआती लेवल पर डिपस्टिक यूरिन टेस्ट किट का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे प्रोटीन और शुगर जैसी समस्याओं की जांच होती है. हालांकि, सही रिपोर्ट के लिए ब्लड और यूरिन टेस्ट ही जरूरी है.

त्वचा पर खुजली और रंग में बदलाव

खराब किडनी शरीर से टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकाल पाती, जिसकी वजह से ये खून में जमा हो जाते हैं. यही टॉक्सिन्स धीरे-धीरे त्वचा पर असर डालते हैं. मरीज को लगातार खुजली, रूखापन और रंग में बदलाव दिखने लगता है. अक्सर त्वचा पीली या भूरी नजर आती है. यह लक्षण हल्के में लेने लायक नहीं है, बल्कि यह किडनी के बिगड़ते स्वास्थ्य का बड़ा संकेत है.

सांस फूलना और सीने में भारीपन

किडनी जब अतिरिक्त पानी बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह फेफड़ों में जमा हो जाता है. इसके कारण मरीज को सांस लेने में दिक्कत और सीने में भारीपन महसूस होता है. वहीं, एनीमिया की वजह से भी शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे थोड़ी सी मेहनत पर भी सांस फूलने लगती है. यह स्थिति जानलेवा हो सकती है और तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.

डॉक्टर की सलाह: इन लक्षणों को हल्के में न लें

AIIMS के डॉक्टरों का कहना है कि किडनी फेलियर का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है, जिन्हें डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है. ऐसे मरीजों को हर 6 महीने में किडनी की जांच जरूर करानी चाहिए. अगर शुरुआती स्टेज पर ही बीमारी पकड़ ली जाए, तो दवाओं और सही डाइट से इसे कंट्रोल किया जा सकता है और डायलिसिस तक जाने की नौबत टाली जा सकती है.

बचाव के उपाय: लाइफस्टाइल में बदलाव से बच सकती है किडनी
  •  संतुलित आहार लें – नमक और तैलीय भोजन कम करें, ताजे फल और सब्जियां ज्यादा खाएं.
  • पर्याप्त पानी पिएं – रोजाना 7-8 गिलास पानी जरूर पिएं, ताकि शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलें.
  • ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखें – डायबिटीज और हाई BP किडनी के सबसे बड़े दुश्मन हैं.
  • स्मोकिंग और शराब से दूरी बनाएं – ये किडनी पर सीधा दबाव डालते हैं.
  • नियमित जांच कराएं – अगर फैमिली हिस्ट्री है तो हर 6 महीने में किडनी फंक्शन टेस्ट जरूर कराएं.
FAQ सेक्शन

किडनी खराब होने का पहला संकेत क्या होता है?

Ans: किडनी खराब होने का पहला और सबसे आम संकेत है पैरों और टखनों में सूजन. यह सूजन इसलिए होती है क्योंकि खराब किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक बाहर नहीं निकाल पाती. धीरे-धीरे यह सूजन दर्द और भारीपन का रूप ले लेती है.

मैं घर पर अपनी किडनी का परीक्षण कैसे कर सकता हूं?

Ans: घर पर शुरुआती लेवल पर डिपस्टिक यूरिन टेस्ट किट का इस्तेमाल करके आप पेशाब में प्रोटीन, शुगर और अन्य बदलावों की जांच कर सकते हैं. हालांकि, यह केवल प्राथमिक जानकारी देता है. किडनी की सही जांच के लिए ब्लड टेस्ट (क्रिएटिनिन, यूरिया) और यूरिन टेस्ट ही जरूरी हैं, जो डॉक्टर की देखरेख में कराए जाने चाहिए.

ये ख़बर डॉक्टरों की सलाह और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है किसी समस्या के लिए डॉक्टरों से संपर्क करें. किसी प्रकार के उत्तरदायित्व के लिए युगान्तर प्रवाह जिम्मेदार नहीं है.

18 Aug 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

Kidney Failure Symptoms: पैरों की सूजन और सांस फूलना किडनी फेलियर का संकेत ! जानें शुरुआती लक्षण और बचाव

Kidney Failure Symptoms

Kidney Failure Symptoms: क्या आपके पैरों में अक्सर सूजन रहती है या चलते समय सांस फूल जाती है? अगर हां, तो इसे हल्के में न लें. ये गुर्दे यानी किडनी फेलियर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. किडनी हमारे शरीर की सबसे अहम मशीन है, जो खून को साफ करती है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है. लेकिन जब ये फेल होने लगती है, तो धीरे-धीरे पूरा शरीर जहर से भर जाता है. यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं – किडनी खराब होने का पहला संकेत पैरों और टखनों में सूजन होना है.

पैरों और टखनों में सूजन: किडनी खराब होने का पहला संकेत

जब किडनी अपना काम सही से नहीं करती, तो शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक बाहर नहीं निकल पाता. यही पानी पैरों और टखनों में जमा होकर सूजन पैदा करता है. शुरुआत में यह सूजन हल्की लगती है, लेकिन धीरे-धीरे पैरों में दर्द, भारीपन और चलने में तकलीफ देने लगती है. यही वजह है कि डॉक्टर इसे किडनी खराब होने का पहला संकेत मानते हैं और इस पर तुरंत ध्यान देने की सलाह देते हैं.

बार-बार थकान और कमजोरी रहना

किडनी के खराब होने का एक बड़ा लक्षण है लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना. दरअसल, खराब किडनी एरीथ्रोपोइटिन नामक हार्मोन बनाना बंद कर देती है, जो लाल रक्त कोशिकाओं के लिए जरूरी है. इसकी कमी से एनीमिया हो जाता है और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती. यही वजह है कि मरीज हमेशा थका हुआ और कमजोर महसूस करता है, चाहे उसने आराम ही क्यों न किया हो.

पेशाब की आदतों में अचानक बदलाव

अगर आपकी पेशाब की आदतें अचानक बदल जाएं, तो इसे इग्नोर न करें. किडनी फेलियर में पेशाब बार-बार आना, पेशाब की मात्रा कम होना, झाग आना या पेशाब का रंग गहरा होना आम लक्षण हैं. कई बार इसमें खून भी आ सकता है. यह साफ संकेत है कि किडनी खून को सही तरीके से फिल्टर नहीं कर पा रही है और तुरंत मेडिकल जांच की जरूरत है. अगर आप घर पर खुद टेस्ट करना चाहते हैं तो शुरुआती लेवल पर डिपस्टिक यूरिन टेस्ट किट का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे प्रोटीन और शुगर जैसी समस्याओं की जांच होती है. हालांकि, सही रिपोर्ट के लिए ब्लड और यूरिन टेस्ट ही जरूरी है.

त्वचा पर खुजली और रंग में बदलाव

खराब किडनी शरीर से टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकाल पाती, जिसकी वजह से ये खून में जमा हो जाते हैं. यही टॉक्सिन्स धीरे-धीरे त्वचा पर असर डालते हैं. मरीज को लगातार खुजली, रूखापन और रंग में बदलाव दिखने लगता है. अक्सर त्वचा पीली या भूरी नजर आती है. यह लक्षण हल्के में लेने लायक नहीं है, बल्कि यह किडनी के बिगड़ते स्वास्थ्य का बड़ा संकेत है.

सांस फूलना और सीने में भारीपन

किडनी जब अतिरिक्त पानी बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह फेफड़ों में जमा हो जाता है. इसके कारण मरीज को सांस लेने में दिक्कत और सीने में भारीपन महसूस होता है. वहीं, एनीमिया की वजह से भी शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे थोड़ी सी मेहनत पर भी सांस फूलने लगती है. यह स्थिति जानलेवा हो सकती है और तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.

डॉक्टर की सलाह: इन लक्षणों को हल्के में न लें

AIIMS के डॉक्टरों का कहना है कि किडनी फेलियर का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है, जिन्हें डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है. ऐसे मरीजों को हर 6 महीने में किडनी की जांच जरूर करानी चाहिए. अगर शुरुआती स्टेज पर ही बीमारी पकड़ ली जाए, तो दवाओं और सही डाइट से इसे कंट्रोल किया जा सकता है और डायलिसिस तक जाने की नौबत टाली जा सकती है.

बचाव के उपाय: लाइफस्टाइल में बदलाव से बच सकती है किडनी
  •  संतुलित आहार लें – नमक और तैलीय भोजन कम करें, ताजे फल और सब्जियां ज्यादा खाएं.
  • पर्याप्त पानी पिएं – रोजाना 7-8 गिलास पानी जरूर पिएं, ताकि शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलें.
  • ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखें – डायबिटीज और हाई BP किडनी के सबसे बड़े दुश्मन हैं.
  • स्मोकिंग और शराब से दूरी बनाएं – ये किडनी पर सीधा दबाव डालते हैं.
  • नियमित जांच कराएं – अगर फैमिली हिस्ट्री है तो हर 6 महीने में किडनी फंक्शन टेस्ट जरूर कराएं.
FAQ सेक्शन

किडनी खराब होने का पहला संकेत क्या होता है?

Ans: किडनी खराब होने का पहला और सबसे आम संकेत है पैरों और टखनों में सूजन. यह सूजन इसलिए होती है क्योंकि खराब किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक बाहर नहीं निकाल पाती. धीरे-धीरे यह सूजन दर्द और भारीपन का रूप ले लेती है.

मैं घर पर अपनी किडनी का परीक्षण कैसे कर सकता हूं?

Ans: घर पर शुरुआती लेवल पर डिपस्टिक यूरिन टेस्ट किट का इस्तेमाल करके आप पेशाब में प्रोटीन, शुगर और अन्य बदलावों की जांच कर सकते हैं. हालांकि, यह केवल प्राथमिक जानकारी देता है. किडनी की सही जांच के लिए ब्लड टेस्ट (क्रिएटिनिन, यूरिया) और यूरिन टेस्ट ही जरूरी हैं, जो डॉक्टर की देखरेख में कराए जाने चाहिए.

ये ख़बर डॉक्टरों की सलाह और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है किसी समस्या के लिए डॉक्टरों से संपर्क करें. किसी प्रकार के उत्तरदायित्व के लिए युगान्तर प्रवाह जिम्मेदार नहीं है.

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