Navratri Paran Kab Hai 2025: शारदीय नवरात्रि व्रत का पारण कब है? जानिए पंडित जी ने क्यों बताया ये शुभ मुहूर्त
Shardiya Navratri Festival 2025
शारदीय नवरात्रि 2025 का समापन इस बार खास संयोग में हो रहा है. तृतीया तिथि दो दिन होने से नवरात्र 10 दिनों का है. ऐसे में भक्तों के मन में सबसे बड़ा प्रश्न है कि व्रत का पारण कब करना शुभ होगा. राजधानी पंचांग और पंडित गोविंद शास्त्री जी की राय के अनुसार जानें सही समय.
Navratri Paran Kab Hai 2025: शारदीय नवरात्रि का पर्व इस बार बेहद खास है क्योंकि यह 10 दिनों तक चल रहा है. मां दुर्गा की आराधना कर रहे भक्तों के मन में व्रत पारण को लेकर अलग-अलग शास्त्रीय मत हैं. नवमी और दशमी की तिथियों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है, लेकिन पंडित गोविंद शास्त्री जी ने इस पर स्पष्ट जानकारी दी है.
नवमी और दशमी की तिथियां
राजधानी पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि 30 सितंबर को शाम 06 बजकर 06 मिनट से शुरू होकर 01 अक्टूबर को रात 07 बजकर 01 मिनट तक रहेगी. इसके बाद दशमी तिथि का प्रारंभ होगा. इस बार तृतीया तिथि दो दिन होने के कारण नवरात्र का पर्व 9 की जगह 10 दिनों का हो रहा है, जो एक दुर्लभ संयोग है.
व्रत पारण का शास्त्रीय महत्व
हिंदू धर्म ग्रंथों में नवरात्र व्रत पारण के कई मत प्रचलित हैं. कुछ विद्वानों का मानना है कि व्रत का पारण नवमी के दिन किया जा सकता है, जबकि कई मतों के अनुसार दशमी पर व्रत खोलना सर्वोत्तम होता है. ऐसे में भक्त अक्सर उलझन में रहते हैं कि सही समय कौन-सा है.
पंडित गोविंद शास्त्री जी का मत
क्यों है दशमी पर पारण शुभ
दशमी तिथि को विजयदशमी भी कहा जाता है और यह दिन मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्ति का माना जाता है. पंडित जी का कहना है कि दशमी के दिन व्रत का पारण करने से व्रती को मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इसलिए भक्तों को धैर्य रखते हुए सूर्योदय के बाद ही व्रत पारण करना चाहिए.
Navratri Paran Kab Hai 2025: शारदीय नवरात्रि व्रत का पारण कब है? जानिए पंडित जी ने क्यों बताया ये शुभ मुहूर्त
Shardiya Navratri Festival 2025
Navratri Paran Kab Hai 2025: शारदीय नवरात्रि का पर्व इस बार बेहद खास है क्योंकि यह 10 दिनों तक चल रहा है. मां दुर्गा की आराधना कर रहे भक्तों के मन में व्रत पारण को लेकर अलग-अलग शास्त्रीय मत हैं. नवमी और दशमी की तिथियों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है, लेकिन पंडित गोविंद शास्त्री जी ने इस पर स्पष्ट जानकारी दी है.
नवमी और दशमी की तिथियां
राजधानी पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि 30 सितंबर को शाम 06 बजकर 06 मिनट से शुरू होकर 01 अक्टूबर को रात 07 बजकर 01 मिनट तक रहेगी. इसके बाद दशमी तिथि का प्रारंभ होगा. इस बार तृतीया तिथि दो दिन होने के कारण नवरात्र का पर्व 9 की जगह 10 दिनों का हो रहा है, जो एक दुर्लभ संयोग है.
व्रत पारण का शास्त्रीय महत्व
हिंदू धर्म ग्रंथों में नवरात्र व्रत पारण के कई मत प्रचलित हैं. कुछ विद्वानों का मानना है कि व्रत का पारण नवमी के दिन किया जा सकता है, जबकि कई मतों के अनुसार दशमी पर व्रत खोलना सर्वोत्तम होता है. ऐसे में भक्त अक्सर उलझन में रहते हैं कि सही समय कौन-सा है.
पंडित गोविंद शास्त्री जी का मत
पंडित गोविंद शास्त्री जी के अनुसार, पूरे नौ दिन व्रत रखने वाले भक्तों को दशमी तिथि के दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करना चाहिए. यह सबसे शुभ और शास्त्र सम्मत समय माना गया है. उन्होंने कहा कि जो भक्त नवमी के दिन ही पारण करना चाहते हैं, वे 01 अक्टूबर को रात 07 बजकर 01 मिनट के बाद व्रत खोल सकते हैं. हालांकि, वास्तविक और अति शुभ समय दशमी के दिन सूर्योदय के बाद ही होगा.
क्यों है दशमी पर पारण शुभ
दशमी तिथि को विजयदशमी भी कहा जाता है और यह दिन मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्ति का माना जाता है. पंडित जी का कहना है कि दशमी के दिन व्रत का पारण करने से व्रती को मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इसलिए भक्तों को धैर्य रखते हुए सूर्योदय के बाद ही व्रत पारण करना चाहिए.