क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? पाकिस्तान में 335 रुपये लीटर पहुंचा पेट्रोल, LPG महंगी होने पर बढ़ी चिंता
मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखने लगा है. पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 335 रुपये लीटर तक पहुंच गई है. भारत में भी एलपीजी सिलेंडर 60 रुपये महंगा होने के बाद लोगों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका बढ़ गई है. हालांकि सरकार ने फिलहाल कीमतें बढ़ाने से इनकार किया है.
Petrol Diesel Price India: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध तनाव ने दुनिया भर के तेल बाजार में हलचल मचा दी है. पाकिस्तान में पेट्रोल 335 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जबकि भारत में एलपीजी सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ने के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका तेज हो गई है. कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर भीड़ दिखाई दी. हालांकि सरकार ने साफ कहा है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है.
खाड़ी क्षेत्र में तनाव से वैश्विक तेल बाजार में उछाल
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है. ईरान पर हमले और उसके बाद पैदा हुई स्थिति के कारण तेल आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है. विशेषज्ञों के अनुसार खाड़ी क्षेत्र से दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा निर्यात होता है.
इस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नामक समुद्री मार्ग से गुजरता है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है. जब भी इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं.
पाकिस्तान में पेट्रोल 335 रुपये लीटर, आम जनता पर बढ़ा बोझ
मध्य पूर्व के तनाव का सबसे बड़ा असर पाकिस्तान में देखने को मिला है. वहां सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है. इस फैसले के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 335 रुपये प्रति लीटर (पाकिस्तानी रुपए) तक पहुंच गई है.
पाकिस्तान पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. ऐसे में ईंधन की कीमतों में यह भारी बढ़ोतरी आम जनता के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. परिवहन, बिजली उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है.
केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप और इजरायल सहित कई देशों में भी तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर धीरे-धीरे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
भारत में पेट्रोल पंपों पर लगी लाइनें, लोगों में बढ़ी चिंता
भारत में भी अंतरराष्ट्रीय बाजार की खबरों के बीच लोगों में ईंधन की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दी. उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ देखने को मिली.
कई जगहों पर बाइक और कारों की लंबी कतारें लग गईं. बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों का टैंक फुल करवा रहे थे. लोगों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो भारत में भी जल्द पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं.
हालांकि प्रशासन और पेट्रोलियम कंपनियों का कहना है कि फिलहाल ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी तरह की कमी की स्थिति नहीं है. अधिकारियों के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है और पेट्रोल पंप पर भीड़ ना लगाएं.
BBC रिपोर्ट में खुलासा, भारत की ऊर्जा सप्लाई पर भी असर
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ खाड़ी देशों ने भारत को भेजे जाने वाले कच्चे तेल की सप्लाई में अस्थायी कमी की है.
बीबीसी के अनुसार भारत ने वर्ष 2025 में करीब 25 मिलियन टन एलएनजी आयात की थी, जिसमें लगभग 14 मिलियन टन गैस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से आई थी. यह मार्ग एशिया के कई बड़े देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य रास्ता है.
भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश दुनिया में सबसे अधिक एलएनजी आयात करने वाले देशों में शामिल हैं. ऐसे में इस समुद्री मार्ग में किसी भी प्रकार का व्यवधान इन देशों की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है.
सरकार का दावा, पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी
एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि क्या जल्द पेट्रोल और डीजल भी महंगे हो सकते हैं. हालांकि सरकार से जुड़े सूत्रों ने इस आशंका को खारिज किया है.
रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अलावा अन्य स्रोतों से कच्चे तेल के आयात को लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ा लिया है. इससे आपूर्ति में किसी बड़े संकट की संभावना कम हो गई है.
सरकार ऊर्जा भंडार की स्थिति पर भी लगातार नजर बनाए हुए है. हालांकि एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति को लेकर कुछ चिंता जरूर जताई जा रही है. कतर ने भारत को आश्वासन दिया है कि जैसे ही समुद्री मार्ग पूरी तरह सामान्य होगा, गैस की सप्लाई फिर से सुचारु कर दी जाएगी.
क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? पाकिस्तान में 335 रुपये लीटर पहुंचा पेट्रोल, LPG महंगी होने पर बढ़ी चिंता
Petrol Diesel Price India: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध तनाव ने दुनिया भर के तेल बाजार में हलचल मचा दी है. पाकिस्तान में पेट्रोल 335 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जबकि भारत में एलपीजी सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ने के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका तेज हो गई है. कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर भीड़ दिखाई दी. हालांकि सरकार ने साफ कहा है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है.
खाड़ी क्षेत्र में तनाव से वैश्विक तेल बाजार में उछाल
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है. ईरान पर हमले और उसके बाद पैदा हुई स्थिति के कारण तेल आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है. विशेषज्ञों के अनुसार खाड़ी क्षेत्र से दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा निर्यात होता है.
इस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नामक समुद्री मार्ग से गुजरता है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है. जब भी इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं.
हालिया घटनाओं के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध जैसी स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है.
पाकिस्तान में पेट्रोल 335 रुपये लीटर, आम जनता पर बढ़ा बोझ
मध्य पूर्व के तनाव का सबसे बड़ा असर पाकिस्तान में देखने को मिला है. वहां सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है. इस फैसले के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 335 रुपये प्रति लीटर (पाकिस्तानी रुपए) तक पहुंच गई है.
पाकिस्तान पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. ऐसे में ईंधन की कीमतों में यह भारी बढ़ोतरी आम जनता के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. परिवहन, बिजली उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है.
केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप और इजरायल सहित कई देशों में भी तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर धीरे-धीरे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
भारत में पेट्रोल पंपों पर लगी लाइनें, लोगों में बढ़ी चिंता
भारत में भी अंतरराष्ट्रीय बाजार की खबरों के बीच लोगों में ईंधन की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दी. उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ देखने को मिली.
कई जगहों पर बाइक और कारों की लंबी कतारें लग गईं. बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों का टैंक फुल करवा रहे थे. लोगों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो भारत में भी जल्द पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं.
हालांकि प्रशासन और पेट्रोलियम कंपनियों का कहना है कि फिलहाल ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी तरह की कमी की स्थिति नहीं है. अधिकारियों के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है और पेट्रोल पंप पर भीड़ ना लगाएं.
BBC रिपोर्ट में खुलासा, भारत की ऊर्जा सप्लाई पर भी असर
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ खाड़ी देशों ने भारत को भेजे जाने वाले कच्चे तेल की सप्लाई में अस्थायी कमी की है.
बीबीसी के अनुसार भारत ने वर्ष 2025 में करीब 25 मिलियन टन एलएनजी आयात की थी, जिसमें लगभग 14 मिलियन टन गैस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से आई थी. यह मार्ग एशिया के कई बड़े देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य रास्ता है.
भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश दुनिया में सबसे अधिक एलएनजी आयात करने वाले देशों में शामिल हैं. ऐसे में इस समुद्री मार्ग में किसी भी प्रकार का व्यवधान इन देशों की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है.
सरकार का दावा, पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी
एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि क्या जल्द पेट्रोल और डीजल भी महंगे हो सकते हैं. हालांकि सरकार से जुड़े सूत्रों ने इस आशंका को खारिज किया है.
रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अलावा अन्य स्रोतों से कच्चे तेल के आयात को लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ा लिया है. इससे आपूर्ति में किसी बड़े संकट की संभावना कम हो गई है.
सरकार ऊर्जा भंडार की स्थिति पर भी लगातार नजर बनाए हुए है. हालांकि एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति को लेकर कुछ चिंता जरूर जताई जा रही है. कतर ने भारत को आश्वासन दिया है कि जैसे ही समुद्री मार्ग पूरी तरह सामान्य होगा, गैस की सप्लाई फिर से सुचारु कर दी जाएगी.