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Kanpur News: कानपुर में साल 2016 में माथे पर तिलक और कलावा देख प्रिंसिपल की हुई थी हत्या, NIA कोर्ट ने आतंकी आतिफ़ और फैसल को सुनाई फांसी की सज़ा

Kanpur News: कानपुर में साल 2016 में माथे पर तिलक और कलावा देख प्रिंसिपल की हुई थी हत्या, NIA कोर्ट ने आतंकी आतिफ़ और फैसल को सुनाई फांसी की सज़ा
प्रिंसिपल हत्याकांड में एनआईए कोर्ट का फैसला

Kanpur News: साल 2016 में कानपुर के चकेरी क्षेत्र के जाजमऊ इलाके में आईएस के दो आतंकियों ने जेहादी विचारधारा के साथ रिटायर्ड प्रिंसिपल रमेश बाबू शुक्ला की गोलियों से भून कर हत्या की थी. इन दोनों ने यह हत्या जेहादी विचारधारा लेकर माथे पर तिलक और हाथ मे कलावा देखकर की थी, इस मामले में आखिरकार एनआईए कोर्ट ने दोनों को दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई है.


हाईलाइट्स

  • रिटायर्ड प्रिंसिपल हत्याकांड मामले में एनआईए कोर्ट ने सुनाई दोनों आतंकियों को फांसी की सजा
  • 2016 में चकेरी क्षेत्र स्थित स्कूल से लौट रहे थे प्रिंसिपल, दो लड़कों ने जेहादी सोच रखते हुए मार दी थ
  • आतंकी सैफुल्लाह एनकाउंटर के बाद दोनों की हुई पकड़ तब पता चला था दोनों आतंकी थे

NIA court  awarded death sentence to both the terrorist : कानपुर में वर्ष 2016 में स्कूल से लौट रहे रिटायर्ड प्रिंसिपल की दो आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. जिसके बाद इस मामले में एनआईए कोर्ट की ओर से फैसला आना था. 7 वर्ष बाद आख़िर जब एनआईए कोर्ट ने जो फैसला सुनाया तो निर्दोष प्रिंसिपल के परिजनों को लगा कि अब न्याय हुआ. चलिए बताते है आखिर उस दिन क्या हुआ था और इन दोनों आतंकियों ने प्रिंसिपल की हत्या किस मक़सद से की थी.

आईएसआईएस के दो आतंकियों ने की थी प्रिंसिपल की हत्या

दरअसल कानपुर में यह घटना 24 अक्टूबर 2016 को घटी थी. आईएसआईएस के जिहादी सोच वाले दो आतंकी आतिफ़ और फैसल जिन्होंने चकेरी थाना क्षेत्र के जाजमऊ में जेहादी सोच के साथ विष्णुपुरी निवासी रिटायर्ड प्रिंसिपल रमेश बाबू शुक्ला की गोली मारकर हत्या की थी. बाद में यह बात सामने आई थी कि इन दोनों ने यह हत्या पिस्टल की टेस्टिंग के लिए की. साथ ही उन्होंने इसके लिए हिन्दू पहचान वाले व्यक्ति को अपना निशाना बनाया.

माथे पर देखा तिलक और गोलियों से भून डाला

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इसके लिए दोनों लड़को ने खड़े होकर किसी का इंतजार किया. उस वक्त रमेश बाबू वहां से निकल रहे थे जो माथे पर तिलक लगाए और हाथ में कलावा बांधे हुए थे, जिसे देखकर दोनों ने उन्हें गोली मार दी थी. इस मामले में मृतक के बेटे अक्षय ने चकेरी थाने में अज्ञात के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था. गृह मंत्रालय ने 14 मार्च 2017 को इसकी जांच एनआईए को सौंपी.

Read More: UP News: फतेहपुर की भाजपा जिला उपाध्यक्ष और पति पर ठगी का आरोप, बालू ठेका दिलाने के नाम पर 2.34 करोड़ हड़पे

जिसमें पकड़े जाने के बाद दोनों आतंकियो ने कबूल किया था कि उन्होंने यह हत्या जेहादी सोच के मकसद से और आतंकी संगठन में दबदबा कायम करने के लिए की थी. यह दोनों आतंकी आतिफ़ और फैसल, 2017 में लखनऊ में एटीएस के हाथों एनकाउंटर में मारे गए आतंकी सैफुल्लाह के साथी थे. ये सभी जाजमऊ क्षेत्र में रहते थे. इन सभी के मन मे जेहादी विचारधारा कूट कूट कर भरी थी.

आतंकी सैफुल्लाह एनकाउंटर के बाद सच्चाई आयी सामने

2017 में हुए आतंकी सैफुल्लाह एनकाउंटर मामले में एटीएस को अहम सुराग हाथ लगे, वो हथियार पिस्टल बरामद हुई जिससे प्रिंसिपल की हत्या हुई थी. जिसके बाद दोनों आतंकियों को गिरफ़्तार कर लिया था. आखिरकार 7 वर्ष बाद एनआईए कोर्ट का अहम फैसला आया जहां कोर्ट ने दोनों आतंकियों को फांसी की सज़ा सुनाई है. न्यायाधीश दिनेश चंद्र मिश्रा की कोर्ट ने दोनों पर 15-15 लाख का जुर्माना भी लगाया.

एनआईए के विशेष वकील कौशल किशोर शर्मा ने कहा, “मैंने मृत्यु दंड देने की मांग करते हुए कोर्ट में कहा कि इन दोनों ने एक निर्दोष अध्यापक की केवल उनके हाथ में बंधे कलावा और माथे पर तिलक देखकर हत्या की थी. जहां अच्छा इंसान बनने की शिक्षा दी जाती है, वहां जिहाद पर चर्चा का माहौल बनाया. इनका अपराध रेयर व रेयरेसट की श्रेणी मे आता है. इसके आधार पर कोर्ट ने मृत्युदंड दिया.'

क्या हुआ था उस दिन

गौरतलब है कि 24 अक्टूबर 2016 को कानपुर के विष्णुपुरी में रहने वाले रिटायर्ड प्रिंसिपल रमेश बाबू स्कूल सेवानिवृत्त होने के बाद भी बच्चों को शिक्षित करने पहुंच जाते थे. उस दिन छुट्टी के बाद घर लौट रहे थे. 500 मीटर दूर ही पहुंचे होंगे कि दो युवकों ने पिस्टल निकाल कर उनपर गोलियां दाग दीं. सीने में गोली लगने से रमेश जमीन पर लहूलुहान होकर गिर पड़े. जबतक लोग दौड़कर आते तबतक दोनों लड़के फरार हो गए.

इस दौरान रमेश बाबू की मौत हो गयी. इस मामले में बेटे अक्षय ने 24 अक्तूबर 2016 को अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा चकेरी थाने में दर्ज कराया था. आतंकीसैफुल्लाह एनकाउंटर मामले के बाद पता चला हत्या आईएसआईएस आतंकी संगठन के दो आतंकियों ने की थी. जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया. 7 वर्ष बाद एनआईए कोर्ट ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई.

15 Sep 2023 By Vishal Shukla

Kanpur News: कानपुर में साल 2016 में माथे पर तिलक और कलावा देख प्रिंसिपल की हुई थी हत्या, NIA कोर्ट ने आतंकी आतिफ़ और फैसल को सुनाई फांसी की सज़ा


हाईलाइट्स

  • रिटायर्ड प्रिंसिपल हत्याकांड मामले में एनआईए कोर्ट ने सुनाई दोनों आतंकियों को फांसी की सजा
  • 2016 में चकेरी क्षेत्र स्थित स्कूल से लौट रहे थे प्रिंसिपल, दो लड़कों ने जेहादी सोच रखते हुए मार दी थ
  • आतंकी सैफुल्लाह एनकाउंटर के बाद दोनों की हुई पकड़ तब पता चला था दोनों आतंकी थे

NIA court  awarded death sentence to both the terrorist : कानपुर में वर्ष 2016 में स्कूल से लौट रहे रिटायर्ड प्रिंसिपल की दो आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. जिसके बाद इस मामले में एनआईए कोर्ट की ओर से फैसला आना था. 7 वर्ष बाद आख़िर जब एनआईए कोर्ट ने जो फैसला सुनाया तो निर्दोष प्रिंसिपल के परिजनों को लगा कि अब न्याय हुआ. चलिए बताते है आखिर उस दिन क्या हुआ था और इन दोनों आतंकियों ने प्रिंसिपल की हत्या किस मक़सद से की थी.

आईएसआईएस के दो आतंकियों ने की थी प्रिंसिपल की हत्या

दरअसल कानपुर में यह घटना 24 अक्टूबर 2016 को घटी थी. आईएसआईएस के जिहादी सोच वाले दो आतंकी आतिफ़ और फैसल जिन्होंने चकेरी थाना क्षेत्र के जाजमऊ में जेहादी सोच के साथ विष्णुपुरी निवासी रिटायर्ड प्रिंसिपल रमेश बाबू शुक्ला की गोली मारकर हत्या की थी. बाद में यह बात सामने आई थी कि इन दोनों ने यह हत्या पिस्टल की टेस्टिंग के लिए की. साथ ही उन्होंने इसके लिए हिन्दू पहचान वाले व्यक्ति को अपना निशाना बनाया.

माथे पर देखा तिलक और गोलियों से भून डाला

इसके लिए दोनों लड़को ने खड़े होकर किसी का इंतजार किया. उस वक्त रमेश बाबू वहां से निकल रहे थे जो माथे पर तिलक लगाए और हाथ में कलावा बांधे हुए थे, जिसे देखकर दोनों ने उन्हें गोली मार दी थी. इस मामले में मृतक के बेटे अक्षय ने चकेरी थाने में अज्ञात के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था. गृह मंत्रालय ने 14 मार्च 2017 को इसकी जांच एनआईए को सौंपी.

जिसमें पकड़े जाने के बाद दोनों आतंकियो ने कबूल किया था कि उन्होंने यह हत्या जेहादी सोच के मकसद से और आतंकी संगठन में दबदबा कायम करने के लिए की थी. यह दोनों आतंकी आतिफ़ और फैसल, 2017 में लखनऊ में एटीएस के हाथों एनकाउंटर में मारे गए आतंकी सैफुल्लाह के साथी थे. ये सभी जाजमऊ क्षेत्र में रहते थे. इन सभी के मन मे जेहादी विचारधारा कूट कूट कर भरी थी.

आतंकी सैफुल्लाह एनकाउंटर के बाद सच्चाई आयी सामने

2017 में हुए आतंकी सैफुल्लाह एनकाउंटर मामले में एटीएस को अहम सुराग हाथ लगे, वो हथियार पिस्टल बरामद हुई जिससे प्रिंसिपल की हत्या हुई थी. जिसके बाद दोनों आतंकियों को गिरफ़्तार कर लिया था. आखिरकार 7 वर्ष बाद एनआईए कोर्ट का अहम फैसला आया जहां कोर्ट ने दोनों आतंकियों को फांसी की सज़ा सुनाई है. न्यायाधीश दिनेश चंद्र मिश्रा की कोर्ट ने दोनों पर 15-15 लाख का जुर्माना भी लगाया.

एनआईए के विशेष वकील कौशल किशोर शर्मा ने कहा, “मैंने मृत्यु दंड देने की मांग करते हुए कोर्ट में कहा कि इन दोनों ने एक निर्दोष अध्यापक की केवल उनके हाथ में बंधे कलावा और माथे पर तिलक देखकर हत्या की थी. जहां अच्छा इंसान बनने की शिक्षा दी जाती है, वहां जिहाद पर चर्चा का माहौल बनाया. इनका अपराध रेयर व रेयरेसट की श्रेणी मे आता है. इसके आधार पर कोर्ट ने मृत्युदंड दिया.'

क्या हुआ था उस दिन

गौरतलब है कि 24 अक्टूबर 2016 को कानपुर के विष्णुपुरी में रहने वाले रिटायर्ड प्रिंसिपल रमेश बाबू स्कूल सेवानिवृत्त होने के बाद भी बच्चों को शिक्षित करने पहुंच जाते थे. उस दिन छुट्टी के बाद घर लौट रहे थे. 500 मीटर दूर ही पहुंचे होंगे कि दो युवकों ने पिस्टल निकाल कर उनपर गोलियां दाग दीं. सीने में गोली लगने से रमेश जमीन पर लहूलुहान होकर गिर पड़े. जबतक लोग दौड़कर आते तबतक दोनों लड़के फरार हो गए.

इस दौरान रमेश बाबू की मौत हो गयी. इस मामले में बेटे अक्षय ने 24 अक्तूबर 2016 को अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा चकेरी थाने में दर्ज कराया था. आतंकीसैफुल्लाह एनकाउंटर मामले के बाद पता चला हत्या आईएसआईएस आतंकी संगठन के दो आतंकियों ने की थी. जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया. 7 वर्ष बाद एनआईए कोर्ट ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई.

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