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Basant Panchami 2024: जानिए देश के इन राज्यों में कैसे मनायी जाती है बसंत पंचमी ! हर जगह का अलग ही महत्व

Basant Panchami 2024: जानिए देश के इन राज्यों में कैसे मनायी जाती है बसंत पंचमी ! हर जगह का अलग ही महत्व
बसन्त पँचमी 2024, Image Credit Original Source

Basant Panchami Celebration

हिन्दू धर्म में बसन्त पँचमी पर्व (Basant Panchami) धूमधाम से मनाए जाने की परम्परा है. 14 फरवरी को बसन्त पंचमी पड़ रही है. इस दिन ज्ञान की आराध्य देवी मां सरस्वती (Maa Saraswati) की उपासना का महत्व है. देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग तरह से बसंत पंचमी मनाए जाने की परंपरा है.

कैसे इन राज्यों में मनाई जाती है बसंत पंचमी

कहते हैं बसन्त पंचमी (Basant Panchami) का पर्व आते ही मौसम बदलने लगता है. ठंड का असर कम होने लगता है बसंत ऋतु का आगमन हो जाता है. खेतों की फसलें लहलहाने लगती हैं. बसंत पंचमी के ठीक 40 दिन बाद होली पर्व (Festival Holi) आ जाता है. ऐसे में बसन्त पंचमी विभिन्न राज्यों में किस तरह से मनाएं जाने की परंपरा है यह इस आर्टिकल में आपको बताएंगे. पहले तो आपको यह बता दें कि बसन्त पँचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ती है. इस बार 14 फरवरी 2024 को बसन्त पँचमी पड़ रही है. अब आते हैं कि देश के कौन-कौन से राज्यों में बसन्त पँचमी पर्व को किस तरह से मनाया जाता है.

बिहार और उत्तर प्रदेश में बसन्त पँचमी पर्व का महत्व

बिहार राज्य (Bihar) की बात करते हैं, यहां बसन्त पँचमी का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. सुबह स्नान के बाद लोग पीले वस्त्र पहनकर माथे पर हल्दी वाला टीका लगाते हैं. फिर माता सरस्वती को मालपुए का भोग या सादी बेसन की पकौड़ी का भोग लगाया जाता है. लोक गीत गाकर लोग नृत्य करते हैं.

उत्तर प्रदेश में तो यह पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. भक्त सरस्वती माता को पीले पुष्प, पीले रंग की मिठाई या पीले चावल अर्पित किए जाते हैं. किताबो की पूजा होती है. माता सरस्वती को संगीत की देवी कहा जाता है. इस दिन वाद्य यंत्रों को मां के चरणों मे अर्पित किया जाता है.

उत्तराखंड में इस तरह से मनाते है बसन्त पँचमी

उत्तराखंड (Uttarakhand) की बात करें तो यह राज्य तो देवभूमि कहलाता है. यहां बसंत पंचमी का विशेष महत्व है, इस दिन लोग फूल, पत्ते और पलाश की लकड़ी चढ़ाकर देवी सरस्वती की पूजा (Worship Devi Saraswati) करते हैं. माता के साथ ही भगवान शिव और मां पार्वती की भी उपासना करते हैं. पीले वस्त्र पहनते हैं इसके अलावा वे पीले रुमाल का इस्तेमाल भी करते हैं यहां पारंपरिक केसर हलवा बनाया जाता है और पतंग उड़ाई जाती है.

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basant_panchami_2024_celebrate_news
बसन्त पँचमी पर लोक गीत व नृत्य, Image Credit Original Source
पश्चिम बंगाल और हरियाणा व पंजाब में

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में बड़े ही धूमधाम से बसंत पँचमी मनाई (Celebrate Basant Panchami) जाती है. यहां दुर्गा पूजा का विशेष महत्व है उसी तरह यहां पर बसंत पंचमी का महत्व भी है, उसी तरह बड़े पंडाल सजाए जाते है. माता सरस्वती को पलाश के फूल, पीले चावल और बूंदी के लड्डू अर्पित करने की मान्यता है. इस दिन बंगाल में हाथेखोड़ी समारोह का आयोजन किया जाता है. जिसमें छोटे बच्‍चों को पहली बार चॉक या पेंसिल पकड़ाते हैं और उन्हें कैसे लिखते हैं यह सिखाया जाता है.

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पंजाब और हरियाणा (Punjab And Haryana) दोनों राज्यों में हर्षोल्लास के साथ बसन्त पंचमी मनाई जाती है. लोग गुरुद्वारे जाते हैं. पतंग उड़ाते हैं, मक्के की रोटी, सरसों का साग, खिचड़ी और मीठे चावल पकाएं जाते है. इसके साथ ही खेतो में लहलहाती फसलों के बीच लोक गीत गाये जाते हैं.

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08 Feb 2024 By Vishal Shukla

Basant Panchami 2024: जानिए देश के इन राज्यों में कैसे मनायी जाती है बसंत पंचमी ! हर जगह का अलग ही महत्व

Basant Panchami Celebration

कैसे इन राज्यों में मनाई जाती है बसंत पंचमी

कहते हैं बसन्त पंचमी (Basant Panchami) का पर्व आते ही मौसम बदलने लगता है. ठंड का असर कम होने लगता है बसंत ऋतु का आगमन हो जाता है. खेतों की फसलें लहलहाने लगती हैं. बसंत पंचमी के ठीक 40 दिन बाद होली पर्व (Festival Holi) आ जाता है. ऐसे में बसन्त पंचमी विभिन्न राज्यों में किस तरह से मनाएं जाने की परंपरा है यह इस आर्टिकल में आपको बताएंगे. पहले तो आपको यह बता दें कि बसन्त पँचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ती है. इस बार 14 फरवरी 2024 को बसन्त पँचमी पड़ रही है. अब आते हैं कि देश के कौन-कौन से राज्यों में बसन्त पँचमी पर्व को किस तरह से मनाया जाता है.

बिहार और उत्तर प्रदेश में बसन्त पँचमी पर्व का महत्व

बिहार राज्य (Bihar) की बात करते हैं, यहां बसन्त पँचमी का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. सुबह स्नान के बाद लोग पीले वस्त्र पहनकर माथे पर हल्दी वाला टीका लगाते हैं. फिर माता सरस्वती को मालपुए का भोग या सादी बेसन की पकौड़ी का भोग लगाया जाता है. लोक गीत गाकर लोग नृत्य करते हैं.

उत्तर प्रदेश में तो यह पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. भक्त सरस्वती माता को पीले पुष्प, पीले रंग की मिठाई या पीले चावल अर्पित किए जाते हैं. किताबो की पूजा होती है. माता सरस्वती को संगीत की देवी कहा जाता है. इस दिन वाद्य यंत्रों को मां के चरणों मे अर्पित किया जाता है.

उत्तराखंड में इस तरह से मनाते है बसन्त पँचमी

उत्तराखंड (Uttarakhand) की बात करें तो यह राज्य तो देवभूमि कहलाता है. यहां बसंत पंचमी का विशेष महत्व है, इस दिन लोग फूल, पत्ते और पलाश की लकड़ी चढ़ाकर देवी सरस्वती की पूजा (Worship Devi Saraswati) करते हैं. माता के साथ ही भगवान शिव और मां पार्वती की भी उपासना करते हैं. पीले वस्त्र पहनते हैं इसके अलावा वे पीले रुमाल का इस्तेमाल भी करते हैं यहां पारंपरिक केसर हलवा बनाया जाता है और पतंग उड़ाई जाती है.

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बसन्त पँचमी पर लोक गीत व नृत्य, Image Credit Original Source
पश्चिम बंगाल और हरियाणा व पंजाब में

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में बड़े ही धूमधाम से बसंत पँचमी मनाई (Celebrate Basant Panchami) जाती है. यहां दुर्गा पूजा का विशेष महत्व है उसी तरह यहां पर बसंत पंचमी का महत्व भी है, उसी तरह बड़े पंडाल सजाए जाते है. माता सरस्वती को पलाश के फूल, पीले चावल और बूंदी के लड्डू अर्पित करने की मान्यता है. इस दिन बंगाल में हाथेखोड़ी समारोह का आयोजन किया जाता है. जिसमें छोटे बच्‍चों को पहली बार चॉक या पेंसिल पकड़ाते हैं और उन्हें कैसे लिखते हैं यह सिखाया जाता है.

पंजाब और हरियाणा (Punjab And Haryana) दोनों राज्यों में हर्षोल्लास के साथ बसन्त पंचमी मनाई जाती है. लोग गुरुद्वारे जाते हैं. पतंग उड़ाते हैं, मक्के की रोटी, सरसों का साग, खिचड़ी और मीठे चावल पकाएं जाते है. इसके साथ ही खेतो में लहलहाती फसलों के बीच लोक गीत गाये जाते हैं.

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