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पद्मश्री से सम्मानित हुआ यह बुजुर्ग शख़्स ग़रीबी में भी बन गया गरीबों का मसीहा..!

पद्मश्री से सम्मानित हुआ यह बुजुर्ग शख़्स ग़रीबी में भी बन गया गरीबों का मसीहा..!
जगदीश लाल आहुजा।फ़ाइल फ़ोटो साभार गूगल

इस साल पद्मश्री सम्मान के लिए चुने गए एक बुजुर्ग शख़्स की कहानी बेहद भावुक कर देने वाली है...पढ़े पूरी खबर युगान्तर प्रवाह पर।

डेस्क:इस साल पद्मश्री सम्मान से नवाज़े गए समाजसेवी बुजुर्ग जगदीश लाल आहूजा की कहानी बेहड़ भावुक कर देने वाली है।चंडीगढ़ के रहने वाले 87 वर्षीय जगदीश लाल आहूजा और उनका परिवार पद्मश्री मिलने पर बेहद खुश है।

क्या करते हैं जगदीश लाल आहूजा..

समाजसेवी जगदीश लाल आहूजा (jagdish lal ahuja) बेहद ग़रीबी में पले बढ़े हैं।बचपन से ही वह घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए काम करने लगे थे।एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए वह बताते हैं कि भारत पाकिस्तान बंटवारे के समय जब वह भारत आए तो उनकी उम्र उस वक्त मात्र 12 साल थी।उनको सबसे पहले पटियाला और फिर अमृतसर और बाद में मानसा शिविर में भेजा गया।उनके पिता पढ़े-लिखे नहीं थे।उन्होंने परिवार पालने के लिए सड़क पर सामान बेचा।जगदीश भी पढ़े-लिखे नहीं हैं।वह दूसरी कक्षा में फेल हो गए थे और फिर परिवार का पेट पालने के लिए सड़कों पर फेरी लगाकर मूंगफली आदि सामान बेचा।

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जगदीश लाल आहूजा युवा अवस्था से ही गरीबों को मुफ़्त भोजन, कम्बल आदि बांटते रहें हैं।जैसे जैसे उनका व्यापार बढ़ा तो उन्होंने समाजसेवा का काम भी वृहद कर दिया।वह जो भी काम करते हैं उसमें किसी से भी कोई सहयोग नहीं लेते हैं।इस समय आहूजा चंडीगढ़ के दो बड़े अस्पतालों के बाहर रोज मुफ़्त खाना बाँटते हैं। (padam shree award 2020)

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जगदीश ने कहा, 'मुझे जब इस सम्मान से नवाजे जाने के लिए फोन आया तो मेरे पैर से जमीन जैसे खिसकने लगी, यकीन ही नहीं हुआ. पहले तो मैंने फोन उठाया ही नहीं, लेटा रहा. एक घंटे बाद देखा और मैंने वापस फोन मिलाया, तो पता चला मुझे पद्मश्री मिल रहा है।फोन 25 तारीख को आया था और 26 को आने को कह रहे थे, लेकिन मेरी तबीयत ठीक नहीं, तो मैंने कह दिया मैं बीमार हूं, बाद में ही आऊंगा।'

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27 Jan 2020 By Shubham Mishra

पद्मश्री से सम्मानित हुआ यह बुजुर्ग शख़्स ग़रीबी में भी बन गया गरीबों का मसीहा..!

डेस्क:इस साल पद्मश्री सम्मान से नवाज़े गए समाजसेवी बुजुर्ग जगदीश लाल आहूजा की कहानी बेहड़ भावुक कर देने वाली है।चंडीगढ़ के रहने वाले 87 वर्षीय जगदीश लाल आहूजा और उनका परिवार पद्मश्री मिलने पर बेहद खुश है।

क्या करते हैं जगदीश लाल आहूजा..

समाजसेवी जगदीश लाल आहूजा (jagdish lal ahuja) बेहद ग़रीबी में पले बढ़े हैं।बचपन से ही वह घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए काम करने लगे थे।एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए वह बताते हैं कि भारत पाकिस्तान बंटवारे के समय जब वह भारत आए तो उनकी उम्र उस वक्त मात्र 12 साल थी।उनको सबसे पहले पटियाला और फिर अमृतसर और बाद में मानसा शिविर में भेजा गया।उनके पिता पढ़े-लिखे नहीं थे।उन्होंने परिवार पालने के लिए सड़क पर सामान बेचा।जगदीश भी पढ़े-लिखे नहीं हैं।वह दूसरी कक्षा में फेल हो गए थे और फिर परिवार का पेट पालने के लिए सड़कों पर फेरी लगाकर मूंगफली आदि सामान बेचा।

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जगदीश लाल आहूजा युवा अवस्था से ही गरीबों को मुफ़्त भोजन, कम्बल आदि बांटते रहें हैं।जैसे जैसे उनका व्यापार बढ़ा तो उन्होंने समाजसेवा का काम भी वृहद कर दिया।वह जो भी काम करते हैं उसमें किसी से भी कोई सहयोग नहीं लेते हैं।इस समय आहूजा चंडीगढ़ के दो बड़े अस्पतालों के बाहर रोज मुफ़्त खाना बाँटते हैं। (padam shree award 2020)

जगदीश ने कहा, 'मुझे जब इस सम्मान से नवाजे जाने के लिए फोन आया तो मेरे पैर से जमीन जैसे खिसकने लगी, यकीन ही नहीं हुआ. पहले तो मैंने फोन उठाया ही नहीं, लेटा रहा. एक घंटे बाद देखा और मैंने वापस फोन मिलाया, तो पता चला मुझे पद्मश्री मिल रहा है।फोन 25 तारीख को आया था और 26 को आने को कह रहे थे, लेकिन मेरी तबीयत ठीक नहीं, तो मैंने कह दिया मैं बीमार हूं, बाद में ही आऊंगा।'

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