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राम जेठमलानी का निधन-इंद्रा के हत्यारों से लेकर अंडरवर्ल्ड तक और शाह से लेक़र आसाराम तक हर बड़े केस से जुड़े रहे जेठमलानी!

राम जेठमलानी का निधन-इंद्रा के हत्यारों से लेकर अंडरवर्ल्ड तक और शाह से लेक़र आसाराम तक हर बड़े केस से जुड़े रहे जेठमलानी!
फ़ाइल फ़ोटो

देश के वरिष्ठ अधिवक्ता व राजनेता राम जेठमलानी का 95 वर्ष की आयु में दिल्ली स्थित उनके निजी आवास में निधन हो गया..पढ़े उनके बारे में युगान्तर प्रवाह की एक रिपोर्ट।

डेस्क:सुप्रीम कोर्ट के जजों  की उम्र भी जिस वक़ील के पेशे के अनुभवों से कम थी उसका नाम राम जेठमलानी था।देश के हर बड़े केस में नदी के दूसरे किनारे पर खड़े नज़र आए जेठमलानी का 95 वर्ष की आयु में रविवार सुबह उनके दिल्ली स्थित निजी आवास में निधन हो गया।बताया जा रहा है कि जेठमलानी पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे।

कौन हैं राम जेठमलानी..?

राम जेठमलानी के बिना  आज की कानूनी क़िताब मुकम्मल नहीं हो सकती है।या यूं कहें कि जेठमलानी अपने आप में खुद एक कानूनी किताब हो गए थे जिसके प्रत्येक चैप्टर में वो कहानियां है जिससे यह मामूल पड़ता है कि राम जेठमलानी ने बिना समाज की परवाह किए अपने वकील होने के धर्म को बड़ी ही बेबाकी से निभाया है।सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ वकीलों में शुमार रहे राम जेठमलानी के पास 78 सालों का लंबा वकालत का अनुभव था।

ये भी पढ़े-चन्द्रयान 2 की असफलता पर पाकिस्तान की नापाक हरकतें..प्रतिक्रियाएं पढ़ खौल उठेगा आप का खून!

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अविभाजित भारत में वर्ष 1923 के 14 दिसंबर को सिंध के शिकारपुर में जन्मे राम जेठमलानी ने अपने करियर की शुरुआत सिंध में बतौर प्रोफ़ेसर की थी।
13 साल की उम्र में मैट्रिक पास करने के बाद 17 साल की उम्र में जेठमलानी ने कानून की पढ़ाई पूरी कर ली थी।अविभाजित भारत के कराची शहर के एससी शाहनी लॉ कालेज से क़ानून में ही मास्टर्स की डिग्री ली और जल्द ही उन्होंने अपनी 'लॉ फर्म' भी बना ली।
जब भारत का सन 1947 में बंटवारा हुआ तो दंगे भड़के जिसके बाद जेठमलानी भारत आ गए और फ़िर यही बस गए।

जेठमलानी की पहली शादी 18 साल की उम्र में दुर्गा से हुई और बँटवारे से ठीक पहले उन्होंने अपनी दूसरी शादी पेशे से वकील लड़की रत्ना शाहनी से कर ली।उनकी दोनों पत्नियां और चार बच्चे एक साथ एक ही घर मे रहते हैं।

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राम जेठमलानी के वो बड़े केस जिनकी चर्चा हमेसा होगी..

राम जेठमलानी का हमेसा से विवादों से नाता रहा है चाहे फ़िर ये विवाद उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े रहे हो यां उनके वकालत के पेशे से।लेक़िन जेठमलानी ने कभी भी अपने पेशे के बीच राजनीति को आने नहीं दिया।जेठमलानी ने बड़े-बड़े मामलों में आरोपियों की तरफ़ से पैरवी की और हमेशा कहा कि ऐसा करना बतौर वकील उनका कर्तव्य है।जेठमलानी ने केस तो अनगिनत गिने लेक़िन जिनकी चर्चा हमेसा होगी उनमें से कुछ केसों के नाम इस प्रकार हैं।

-इंद्रा और राजीव गांधी के हत्यारोपियों के वक़ील।
-सोहराबुद्दीन हत्याकांड में अमित शाह के वक़ील।
-रामलीला मैदान मामले में रामदेव के वक़ील।
-अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान के वक़ील।
-सेबी मामले में सहारा समूह के मालिक सुब्रत राय के वक़ील।
-चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव के वक़ील

जेठमलानी का राजनीतिक सफ़र..

राम जेठमलानी ने राजनीति में खूब बैटिंग की और सफल भी हुए भाजपा से जीतकर कई बार संसद पहुंचे और बाजपेयी सरकारी में कानून मंत्री भी बने।जेठमलानी आरजेडी और जनता दल में रहे।राजनीति में जेठमलानी को हमेसा से अवसर वादी नेता के रूप में जाना जाता रहा है लेक़िन इसकी उन्होंने कभी परवाह नहीं की।

अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव में भी जेठमलानी की यादाश्त,वाकपटुता और वकालत करते हुए आक्रामक अंदाज उसी तरह बरकरार रहा है।

08 Sep 2019 By Shubham Mishra

राम जेठमलानी का निधन-इंद्रा के हत्यारों से लेकर अंडरवर्ल्ड तक और शाह से लेक़र आसाराम तक हर बड़े केस से जुड़े रहे जेठमलानी!

डेस्क:सुप्रीम कोर्ट के जजों  की उम्र भी जिस वक़ील के पेशे के अनुभवों से कम थी उसका नाम राम जेठमलानी था।देश के हर बड़े केस में नदी के दूसरे किनारे पर खड़े नज़र आए जेठमलानी का 95 वर्ष की आयु में रविवार सुबह उनके दिल्ली स्थित निजी आवास में निधन हो गया।बताया जा रहा है कि जेठमलानी पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे।

कौन हैं राम जेठमलानी..?

राम जेठमलानी के बिना  आज की कानूनी क़िताब मुकम्मल नहीं हो सकती है।या यूं कहें कि जेठमलानी अपने आप में खुद एक कानूनी किताब हो गए थे जिसके प्रत्येक चैप्टर में वो कहानियां है जिससे यह मामूल पड़ता है कि राम जेठमलानी ने बिना समाज की परवाह किए अपने वकील होने के धर्म को बड़ी ही बेबाकी से निभाया है।सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ वकीलों में शुमार रहे राम जेठमलानी के पास 78 सालों का लंबा वकालत का अनुभव था।

ये भी पढ़े-चन्द्रयान 2 की असफलता पर पाकिस्तान की नापाक हरकतें..प्रतिक्रियाएं पढ़ खौल उठेगा आप का खून!

अविभाजित भारत में वर्ष 1923 के 14 दिसंबर को सिंध के शिकारपुर में जन्मे राम जेठमलानी ने अपने करियर की शुरुआत सिंध में बतौर प्रोफ़ेसर की थी।
13 साल की उम्र में मैट्रिक पास करने के बाद 17 साल की उम्र में जेठमलानी ने कानून की पढ़ाई पूरी कर ली थी।अविभाजित भारत के कराची शहर के एससी शाहनी लॉ कालेज से क़ानून में ही मास्टर्स की डिग्री ली और जल्द ही उन्होंने अपनी 'लॉ फर्म' भी बना ली।
जब भारत का सन 1947 में बंटवारा हुआ तो दंगे भड़के जिसके बाद जेठमलानी भारत आ गए और फ़िर यही बस गए।

जेठमलानी की पहली शादी 18 साल की उम्र में दुर्गा से हुई और बँटवारे से ठीक पहले उन्होंने अपनी दूसरी शादी पेशे से वकील लड़की रत्ना शाहनी से कर ली।उनकी दोनों पत्नियां और चार बच्चे एक साथ एक ही घर मे रहते हैं।

राम जेठमलानी के वो बड़े केस जिनकी चर्चा हमेसा होगी..

राम जेठमलानी का हमेसा से विवादों से नाता रहा है चाहे फ़िर ये विवाद उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े रहे हो यां उनके वकालत के पेशे से।लेक़िन जेठमलानी ने कभी भी अपने पेशे के बीच राजनीति को आने नहीं दिया।जेठमलानी ने बड़े-बड़े मामलों में आरोपियों की तरफ़ से पैरवी की और हमेशा कहा कि ऐसा करना बतौर वकील उनका कर्तव्य है।जेठमलानी ने केस तो अनगिनत गिने लेक़िन जिनकी चर्चा हमेसा होगी उनमें से कुछ केसों के नाम इस प्रकार हैं।

-इंद्रा और राजीव गांधी के हत्यारोपियों के वक़ील।
-सोहराबुद्दीन हत्याकांड में अमित शाह के वक़ील।
-रामलीला मैदान मामले में रामदेव के वक़ील।
-अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान के वक़ील।
-सेबी मामले में सहारा समूह के मालिक सुब्रत राय के वक़ील।
-चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव के वक़ील

जेठमलानी का राजनीतिक सफ़र..

राम जेठमलानी ने राजनीति में खूब बैटिंग की और सफल भी हुए भाजपा से जीतकर कई बार संसद पहुंचे और बाजपेयी सरकारी में कानून मंत्री भी बने।जेठमलानी आरजेडी और जनता दल में रहे।राजनीति में जेठमलानी को हमेसा से अवसर वादी नेता के रूप में जाना जाता रहा है लेक़िन इसकी उन्होंने कभी परवाह नहीं की।

अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव में भी जेठमलानी की यादाश्त,वाकपटुता और वकालत करते हुए आक्रामक अंदाज उसी तरह बरकरार रहा है।

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