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शेख़ हसीना को सजा-ए-मौत की सजा: बांग्लादेश में खुशी की लहर! भारत से ‘तुरंत हैंडओवर’ की मांग, ढाका में मचा सियासी तूफान

शेख़ हसीना को सजा-ए-मौत की सजा: बांग्लादेश में खुशी की लहर! भारत से ‘तुरंत हैंडओवर’ की मांग, ढाका में मचा सियासी तूफान
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को मौत की सजा (फाइल फोटो): Image Credit Original Source

बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध में मौत की सजा सुनाई है. फैसले के बाद ढाका में जश्न देखने को मिला. बांग्लादेश ने भारत को पत्र भेजकर हसीना और पूर्व गृहमंत्री कमाल के ‘तुरंत हैंडओवर’ की मांग की है. हसीना भारत में निर्वासन में रह रही हैं.

Sheikh Hasina Verdict: पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सजा-ए-मौत सुनाए जाने के साथ ही बांग्लादेश में खुशी की लहर दौड़ गई और अदालत से लेकर सड़कों तक जश्न मनने लगा. फैसले के तुरंत बाद बांग्लादेश ने भारत से हसीना को ‘तुरंत हैंडओवर’ की औपचारिक मांग कर दी है. भारत में शरण लेकर रह रहीं हसीना को अदालत पहले ही भगोड़ा घोषित कर चुकी है. यह फैसला बांग्लादेश और भारत के बीच कूटनीतिक समीकरणों को झकझोर सकता है.

अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, दो मामलों में मौत की सजा

जस्टिस मोहम्मद गुलाम मुर्तज़ा मजूमदार की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-1 ने यह बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि पिछले वर्ष जुलाई-अगस्त में हुए घातक विद्रोह में शेख हसीना की भूमिका मानवता के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में आती है.

हसीना पर दर्ज पांच में से दो मामलों में अदालत ने सजा-ए-मौत और एक में उम्रकैद का फैसला सुनाया. अदालत परिसर में फैसले के बाद माहौल उत्साहित था और भारी भीड़ फैसले को "न्याय की जीत" बताते हुए जश्न मना रही थी. यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति में वर्षों बाद आया सबसे कठोर निर्णय माना जा रहा है.

भारत में रह रहीं हसीना के खिलाफ अनुपस्थिति में चला मुकदमा

पांच अगस्त को सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना भारत में शरण लेकर रह रही हैं. उनके देश छोड़ते ही बांग्लादेश की अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया था. इसके बाद न्यायाधिकरण ने उनकी अनुपस्थिति में ही पूरा केस चलाया.

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अभियोजन पक्ष ने वीडियो फुटेज, गवाहों के बयानों और घटनास्थल से मिले फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर हसीना की भूमिका को निर्णायक बताते हुए अदालत को संतुष्ट किया. अनुपस्थिति में सुनवाई पर हसीना समर्थक भले सवाल उठा रहे हों, लेकिन अदालत ने कहा कि गंभीर अपराधों में ऐसी प्रक्रिया पूरी तरह वैध है.

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पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां कमाल को भी मौत की सजा, पूर्व आईजी को राहत

सिर्फ हसीना ही नहीं, बल्कि पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी इन मामलों में सजा-ए-मौत सुनाई गई है. उन पर आरोप था कि उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के निर्देश दिए थे. वहीं पूर्व आईजी पुलिस अब्दुल्ला अल मनून को सरकारी गवाह बनाए जाने के बाद पांच साल की सजा दी गई. अदालत ने कहा कि मनून के बयान जांच की रीढ़ साबित हुए. इन सजाओं ने बांग्लादेश में राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है.

फैसले के तुरंत बाद भारत को भेजा गया पत्र, प्रत्यर्पण की कड़ी मांग

सजा सुनाए जाने के कुछ मिनट बाद ही बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत को औपचारिक पत्र भेजकर शेख हसीना और पूर्व गृहमंत्री कमाल के ‘तुरंत हैंडओवर’ की मांग की. बांग्लादेश ने कहा कि द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए.

बांग्लादेश के कानूनी सलाहकार आसिफ नजरुल ने कहा कि अगर भारत इस "अपराधी" को शरण देना जारी रखता है, तो यह बांग्लादेश के प्रति गैरदोस्ताना रवैया माना जाएगा और इसका गंभीर कूटनीतिक असर होगा. उनका बयान मामले को और संवेदनशील बनाता है.

ढाका में जश्न, लेकिन राजनीति में गहरी हलचल

अदालत में फैसला सुनते ही ढाका की सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ी. लोग मिठाइयां बांटते दिखे और कई जगह ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया गया. समर्थन और विरोध की राजनीति अपने चरम पर है—जहां विरोधी दल इसे “न्याय का दिन” बता रहे हैं, वहीं हसीना समर्थक इसे साजिश करार दे रहे हैं.

विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला बांग्लादेश की सत्ता संरचना को झकझोर देगा और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर गहरा असर पड़ेगा. भारत की मुश्किल ये है कि हसीना उसके सबसे करीबी रणनीतिक साझेदारों में रही हैं, और अब उनका प्रत्यर्पण एक बड़ा कूटनीतिक संतुलन परीक्षण बन सकता है.

17 Nov 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

शेख़ हसीना को सजा-ए-मौत की सजा: बांग्लादेश में खुशी की लहर! भारत से ‘तुरंत हैंडओवर’ की मांग, ढाका में मचा सियासी तूफान

Sheikh Hasina Verdict: पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सजा-ए-मौत सुनाए जाने के साथ ही बांग्लादेश में खुशी की लहर दौड़ गई और अदालत से लेकर सड़कों तक जश्न मनने लगा. फैसले के तुरंत बाद बांग्लादेश ने भारत से हसीना को ‘तुरंत हैंडओवर’ की औपचारिक मांग कर दी है. भारत में शरण लेकर रह रहीं हसीना को अदालत पहले ही भगोड़ा घोषित कर चुकी है. यह फैसला बांग्लादेश और भारत के बीच कूटनीतिक समीकरणों को झकझोर सकता है.

अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, दो मामलों में मौत की सजा

जस्टिस मोहम्मद गुलाम मुर्तज़ा मजूमदार की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-1 ने यह बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि पिछले वर्ष जुलाई-अगस्त में हुए घातक विद्रोह में शेख हसीना की भूमिका मानवता के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में आती है.

हसीना पर दर्ज पांच में से दो मामलों में अदालत ने सजा-ए-मौत और एक में उम्रकैद का फैसला सुनाया. अदालत परिसर में फैसले के बाद माहौल उत्साहित था और भारी भीड़ फैसले को "न्याय की जीत" बताते हुए जश्न मना रही थी. यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति में वर्षों बाद आया सबसे कठोर निर्णय माना जा रहा है.

भारत में रह रहीं हसीना के खिलाफ अनुपस्थिति में चला मुकदमा

पांच अगस्त को सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना भारत में शरण लेकर रह रही हैं. उनके देश छोड़ते ही बांग्लादेश की अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया था. इसके बाद न्यायाधिकरण ने उनकी अनुपस्थिति में ही पूरा केस चलाया.

अभियोजन पक्ष ने वीडियो फुटेज, गवाहों के बयानों और घटनास्थल से मिले फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर हसीना की भूमिका को निर्णायक बताते हुए अदालत को संतुष्ट किया. अनुपस्थिति में सुनवाई पर हसीना समर्थक भले सवाल उठा रहे हों, लेकिन अदालत ने कहा कि गंभीर अपराधों में ऐसी प्रक्रिया पूरी तरह वैध है.

पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां कमाल को भी मौत की सजा, पूर्व आईजी को राहत

सिर्फ हसीना ही नहीं, बल्कि पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी इन मामलों में सजा-ए-मौत सुनाई गई है. उन पर आरोप था कि उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के निर्देश दिए थे. वहीं पूर्व आईजी पुलिस अब्दुल्ला अल मनून को सरकारी गवाह बनाए जाने के बाद पांच साल की सजा दी गई. अदालत ने कहा कि मनून के बयान जांच की रीढ़ साबित हुए. इन सजाओं ने बांग्लादेश में राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है.

फैसले के तुरंत बाद भारत को भेजा गया पत्र, प्रत्यर्पण की कड़ी मांग

सजा सुनाए जाने के कुछ मिनट बाद ही बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत को औपचारिक पत्र भेजकर शेख हसीना और पूर्व गृहमंत्री कमाल के ‘तुरंत हैंडओवर’ की मांग की. बांग्लादेश ने कहा कि द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए.

बांग्लादेश के कानूनी सलाहकार आसिफ नजरुल ने कहा कि अगर भारत इस "अपराधी" को शरण देना जारी रखता है, तो यह बांग्लादेश के प्रति गैरदोस्ताना रवैया माना जाएगा और इसका गंभीर कूटनीतिक असर होगा. उनका बयान मामले को और संवेदनशील बनाता है.

ढाका में जश्न, लेकिन राजनीति में गहरी हलचल

अदालत में फैसला सुनते ही ढाका की सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ी. लोग मिठाइयां बांटते दिखे और कई जगह ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया गया. समर्थन और विरोध की राजनीति अपने चरम पर है—जहां विरोधी दल इसे “न्याय का दिन” बता रहे हैं, वहीं हसीना समर्थक इसे साजिश करार दे रहे हैं.

विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला बांग्लादेश की सत्ता संरचना को झकझोर देगा और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर गहरा असर पड़ेगा. भारत की मुश्किल ये है कि हसीना उसके सबसे करीबी रणनीतिक साझेदारों में रही हैं, और अब उनका प्रत्यर्पण एक बड़ा कूटनीतिक संतुलन परीक्षण बन सकता है.

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