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Upsc Pawan Kumar Success Story: आर्थिक स्थिति से लड़ते हुए छप्पर में रहने वाले किसान के बेटे पवन कुमार ने UPSC में मारी बाजी ! परिवार में छाई खुशी

Upsc Pawan Kumar Success Story: आर्थिक स्थिति से लड़ते हुए छप्पर में रहने वाले किसान के बेटे पवन कुमार ने UPSC में मारी बाजी ! परिवार में छाई खुशी
पवन कुमार, image credit original source

Pawan Kumar Success Story

यूपीएससी परीक्षा (Upsc Exam) का रिजल्ट घोषित कर दिया गया है. कोई फर्स्ट आया तो कोई सेकंड, लेकिन क्या आप जानते हैं परीक्षार्थियों की इस भीड़ में बुलंदशहर (Bulandshahr) के रहने वाले पवन कुमार (Pawan Kumar) भी है जिन्होंने अपने जिले का नाम रोशन किया है उनका फैमिली बैकग्राउंड काफी गरीब है उनके घर में छत नहीं बल्कि पॉलिथीन के छप्पर के नीचे पूरा परिवार रहता है संपत्ति के रूप में उनके पिता के पास चार बीघा जमीन है जिसमें वह खेती करते हैं पवन कुमार (Pawan Kumar) ने तीसरे अटेम्प्ट (Third Attempt) में यूपीएससी क्लियर (Upsc Clear) किया है.

यूपीएससी परीक्षा में पवन कुमार की कहानी

हर साल यूपीएससी की परीक्षा (Upsc Exam) में हजारों की संख्या में कैंडिडेट पार्टिसिपेट करते हैं कोई पहले ही अटेम्प्ट में क्वालीफाई (Qualify) कर लेता है तो कई लोगों को लंबे समय तक का इंतजार करना पड़ता है. बहुत से कैंडिडेट घर-परिवार से आर्थिक रूप से मजबूत होते हैं तो कुछ मध्यवर्गीय होते हैं लेकिन इनमें से कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके पास रहने को घर भी नहीं होता इन्हीं में से उत्तर प्रदेश (Uttar pradesh) बुलंदशहर (Bulandshahr के रहने वाले पवन कुमार (Pawan Kumar) जिनके घर की छप्पर भी प्लास्टिक की है. आईये विस्तार से जानते हैं कि आखिरकार यूपीएससी में 239 रैंक पाने वाले कौन है पवन कुमार..

upsc_pawan_kumar_house_bulandshar
पवन का छप्परनुमा घर, image credit original source

छप्परनुमा घर में रहने वाले किसान के बेटे ने मारी बाजी

बुलंदशहर (Bulandshahr) के ऊंचा गांव विकासखंड क्षेत्र के गांव रघुनाथपुर (Raghunathpur) के रहने वाले पवन कुमार (Pawan Kumar) उनके पिता मुकेश कुमार किसानी करते हैं तो वही उनकी मां सुमन देवी साधारण सी गृहिणी है. पवन का परिवार शुरू से ही संघर्ष (Struggle) करता रहा है. उनकी चार बहने और एक भाई है.

उनकी सबसे बड़ी बहन ने पढ़ाई पूरी करने के बाद प्राइवेट स्कूल में अध्यापक बन गई तो दूसरी बहन अभी ग्रेजुएशन कर रही है. जबकि सबसे छोटी बहन 12वीं कक्षा में पढ़ रही है. पवन ने नवोदय स्कूल से बारहवीं की परीक्षा पास करने के बाद प्रयागराज से ग्रेजुएशन कंप्लीट किया इसके बाद वह राजधानी दिल्ली पहुंच गए जहां कोचिंग सेंटर में पहुंचकर सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गए.

दो अटेम्प्ट में नहीं मिली सफलता तीसरी बार में मारी बाजी

पिछले दो बार से वह लगातार यूपीएससी (Upsc) का एग्जाम दे रहे थे, लेकिन जब उन्हें सफलता नहीं मिली तो उन्होंने कोचिंग जाने के बजाय ऑनलाइन पढ़ना शुरू किया तीसरे और अंतिम अटेम्प्ट में उन्होंने सेल्फ स्टडी के जरिए एक बड़ा रिस्क लिया इस दौरान उन्होंने यूट्यूब (YouTube) और ऑनलाइन क्लासेस वेबसाइट (Online Classes Websites) के जरिए यूपीएससी की तैयारी में जुड़ गए.

Read More: 25 दिनों तक सपनों में आदेश देते रहे खाटू श्याम: खुदाई में निकली मूर्ति, गांव में चमत्कार से उमड़ा जनसैलाब

हालांकि इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और रिजल्ट देखकर एक बार तो उनको भी विश्वास नहीं हुआ उन्होंने यूपीएससी के एग्जाम में 239वीं रैंक हासिल की है. वहीं तीसरे अटेम्प्ट में पास होने के बाद उनके परिवार में खुशी का ठिकाना नहीं रहा उनके घर वालों का कहना है कि अब उनका समय बदलने वाला है. घर में बधाईयों का तांता लगा हुआ है.

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आर्थिक स्थिति देख रो पड़ेंगे आप

पवन कुमार के घर की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि वह अपना पक्का घर भी बनवा सके इसलिए वह सभी लोग छप्पर नुमा मकान में रहते हैं जिसमें बारिश के समय घर में पानी भरता है तो वहीं ठंड में ओस गिरती है, जबकि गर्मी में धूप भी आती है लेकिन पवन कुमार इन सभी परेशानियों से लड़कर लक्ष्य को फोकस करते रहे. पॉजिटिव थिंकिंग के साथ अपने गोल की ओर बढ़ते रहे यही कारण है कि तीसरे अटेम्प्ट में आखिरकार उन्होंने 239 रैंक पाकर अपने परिवार समेत उत्तर प्रदेश का नाम भी रोशन किया है.

17 Apr 2024 By Vishal Shukla

Upsc Pawan Kumar Success Story: आर्थिक स्थिति से लड़ते हुए छप्पर में रहने वाले किसान के बेटे पवन कुमार ने UPSC में मारी बाजी ! परिवार में छाई खुशी

Pawan Kumar Success Story

यूपीएससी परीक्षा में पवन कुमार की कहानी

हर साल यूपीएससी की परीक्षा (Upsc Exam) में हजारों की संख्या में कैंडिडेट पार्टिसिपेट करते हैं कोई पहले ही अटेम्प्ट में क्वालीफाई (Qualify) कर लेता है तो कई लोगों को लंबे समय तक का इंतजार करना पड़ता है. बहुत से कैंडिडेट घर-परिवार से आर्थिक रूप से मजबूत होते हैं तो कुछ मध्यवर्गीय होते हैं लेकिन इनमें से कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके पास रहने को घर भी नहीं होता इन्हीं में से उत्तर प्रदेश (Uttar pradesh) बुलंदशहर (Bulandshahr के रहने वाले पवन कुमार (Pawan Kumar) जिनके घर की छप्पर भी प्लास्टिक की है. आईये विस्तार से जानते हैं कि आखिरकार यूपीएससी में 239 रैंक पाने वाले कौन है पवन कुमार..

upsc_pawan_kumar_house_bulandshar
पवन का छप्परनुमा घर, image credit original source

छप्परनुमा घर में रहने वाले किसान के बेटे ने मारी बाजी

बुलंदशहर (Bulandshahr) के ऊंचा गांव विकासखंड क्षेत्र के गांव रघुनाथपुर (Raghunathpur) के रहने वाले पवन कुमार (Pawan Kumar) उनके पिता मुकेश कुमार किसानी करते हैं तो वही उनकी मां सुमन देवी साधारण सी गृहिणी है. पवन का परिवार शुरू से ही संघर्ष (Struggle) करता रहा है. उनकी चार बहने और एक भाई है.

उनकी सबसे बड़ी बहन ने पढ़ाई पूरी करने के बाद प्राइवेट स्कूल में अध्यापक बन गई तो दूसरी बहन अभी ग्रेजुएशन कर रही है. जबकि सबसे छोटी बहन 12वीं कक्षा में पढ़ रही है. पवन ने नवोदय स्कूल से बारहवीं की परीक्षा पास करने के बाद प्रयागराज से ग्रेजुएशन कंप्लीट किया इसके बाद वह राजधानी दिल्ली पहुंच गए जहां कोचिंग सेंटर में पहुंचकर सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गए.

दो अटेम्प्ट में नहीं मिली सफलता तीसरी बार में मारी बाजी

पिछले दो बार से वह लगातार यूपीएससी (Upsc) का एग्जाम दे रहे थे, लेकिन जब उन्हें सफलता नहीं मिली तो उन्होंने कोचिंग जाने के बजाय ऑनलाइन पढ़ना शुरू किया तीसरे और अंतिम अटेम्प्ट में उन्होंने सेल्फ स्टडी के जरिए एक बड़ा रिस्क लिया इस दौरान उन्होंने यूट्यूब (YouTube) और ऑनलाइन क्लासेस वेबसाइट (Online Classes Websites) के जरिए यूपीएससी की तैयारी में जुड़ गए.

हालांकि इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और रिजल्ट देखकर एक बार तो उनको भी विश्वास नहीं हुआ उन्होंने यूपीएससी के एग्जाम में 239वीं रैंक हासिल की है. वहीं तीसरे अटेम्प्ट में पास होने के बाद उनके परिवार में खुशी का ठिकाना नहीं रहा उनके घर वालों का कहना है कि अब उनका समय बदलने वाला है. घर में बधाईयों का तांता लगा हुआ है.

आर्थिक स्थिति देख रो पड़ेंगे आप

पवन कुमार के घर की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि वह अपना पक्का घर भी बनवा सके इसलिए वह सभी लोग छप्पर नुमा मकान में रहते हैं जिसमें बारिश के समय घर में पानी भरता है तो वहीं ठंड में ओस गिरती है, जबकि गर्मी में धूप भी आती है लेकिन पवन कुमार इन सभी परेशानियों से लड़कर लक्ष्य को फोकस करते रहे. पॉजिटिव थिंकिंग के साथ अपने गोल की ओर बढ़ते रहे यही कारण है कि तीसरे अटेम्प्ट में आखिरकार उन्होंने 239 रैंक पाकर अपने परिवार समेत उत्तर प्रदेश का नाम भी रोशन किया है.

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