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Milkha Singh Biography: मिल्खा सिंह का वो फार्मूला जिसने बना दिया फ्लाइंग सिख

Milkha Singh Biography: मिल्खा सिंह का वो फार्मूला जिसने बना दिया फ्लाइंग सिख
Milkha Singh फ़ाइल फ़ोटो

एथलीट मिल्खा सिंह का शुक्रवार रात कोरोना संक्रमण के चलते निधन हो गया।उनकी पत्नी निर्मल कौर का भी कोरोना की वजह से पांच दिन पहले निधन हो गया था।मिल्खा सिंह के फ्लाइंग सिख बनने तक का सफ़र कैसा रहा है।आइए जानतें हैं. Milkha singh Death News In Hindi Milkha singh Biography in hindi

Milkha Singh Biography Hindi : विश्व के महान एथलीटों में से एक भारत के मिल्खा सिंह के जिंदगी की रफ़्तार शुक्रवार रात थम गई।करीब एक महीने तक कोरोना से जंग लड़ने के बाद आखिरकार मौत जिंदगी पर भारी पड़ी औऱ एक महान धावक 91 साल (Milkha Singh Age) की उम्र में हमेशा के लिए ख़ामोश हो गया।बता दें कि अभी पांच दिनों पहले ही मिल्खा सिंह की पत्नी (Milkha Singh Wife ) औऱ भारतीय वॉलीबॉल टीम की पूर्व कप्तान निर्मल कौर ने भी कोरोना संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया था।Milkha Singh Latest News Hindi

'फ्लाइंग सिख' के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह का जन्म साल 1929 में अविभाजित भारत (वर्तमान में पाकिस्तान के मुजफरगढ़ के गोविंदपुरा में हुआ था।)उन्होंने अपने जीवन में कई कठिनाईयों का सामना किया।भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त उनको भारत आना पड़ा लेकिन उस दौरान उनके 14 में से आठ भाई बहन और माता-पिता दंगो की भेंट चढ़ चुके थे। Milkha Singh ka  nam Flying Sikh kaise pda

ऐसे जख्मों के साथ वो भारत आए और फ़िर सेना में शामिल हो गए।सेना में भर्ती होना मिल्खा सिंह के जीवन का एक महत्वपूर्ण फैसला साबित हुआ।इस फैसले ने ही उनकी पूरी जिंदगी बदल दी और एक क्रॉस-कंट्री रेस ने उनके प्रभावशाली करियर की नींव रखी।इस दौड़ में 400 से अधिक सैनिक शामिल थे और इसमें उन्हें छठा स्थान हासिल किया था। Milkha Singh Carrier

ऐसे मिली थी फ्लाइंग सिख की उपाधि..

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साल 1960 में मिल्खा सिंह ने पाकिस्तान में इंटरनेशनल एथलीट कंपीटशन में भाग लेने से इनकार कर दिया था। असल में वो दोनों देशों के बीच के बंटवारे की घटना को नहीं भुला पाए थे। इसलिए पाकिस्तान के न्योते को ठुकरा दिया था। हालांकि, बाद में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें समझाया कि पड़ोसी देशों के साथ मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखना जरूरी है। Milkha Singh Biography In Hindi

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इसके बाद उन्होंने अपना मन बदल लिया। पाकिस्तान में इंटरनेशनल एथलीट में मिल्खा सिंह का मुकाबला अब्दुल खालिक से हुआ। यहां मिल्खा ने अब्दुल को हराकर इतिहास रच दिया। इस जीत के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने उन्हें 'फ्लाइंग सिख' की उपाधि से नवाजा।Milkha Singh Flying Sinkh Kaise Bne

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अब्दुल खालिक को हराने के बाद उस समय के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान मिल्खा सिंह से कहा था, 'आज तुम दौड़े नहीं उड़े हो। इसलिए हम तुम्हे फ्लाइंग सिख के खिताब से नवाजते हैं।' इसके बाद से मिल्खा सिंह को पूरी दुनिया में 'फ्लाइंग सिख' के नाम से जाना जाने लगा।

मिल्खा सिंह का करियर.. Milkha Singh Career

मिल्खा सिंह ने तीन ओलंपिक 1956 मेलबर्न, 1960 रोम और 1964 टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लिया। रोम के 1960 और टोक्यो के 1964 ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व भी किया था इसके साथ ही उन्होंने 1958 और 1962 के एशियाई खेलो में भी स्वर्ण पदक जीता था। 1960 के रोम ओलंपिक खेलों में उन्होंने पूर्व ओलंपिक कीर्तिमान तोड़ा, लेकिन पदक से वंचित रह गए।इस दौरान उन्होंने ऐसा नेशनल कीर्तिमान बनाया, जो लगभग 40 साल बाद जाकर टूटा।इन्हें खेल के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए भारत में पद्मश्री भी प्रदान किया गया था

19 Jun 2021 By Shubham Mishra

Milkha Singh Biography: मिल्खा सिंह का वो फार्मूला जिसने बना दिया फ्लाइंग सिख

Milkha Singh Biography Hindi : विश्व के महान एथलीटों में से एक भारत के मिल्खा सिंह के जिंदगी की रफ़्तार शुक्रवार रात थम गई।करीब एक महीने तक कोरोना से जंग लड़ने के बाद आखिरकार मौत जिंदगी पर भारी पड़ी औऱ एक महान धावक 91 साल (Milkha Singh Age) की उम्र में हमेशा के लिए ख़ामोश हो गया।बता दें कि अभी पांच दिनों पहले ही मिल्खा सिंह की पत्नी (Milkha Singh Wife ) औऱ भारतीय वॉलीबॉल टीम की पूर्व कप्तान निर्मल कौर ने भी कोरोना संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया था।Milkha Singh Latest News Hindi

'फ्लाइंग सिख' के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह का जन्म साल 1929 में अविभाजित भारत (वर्तमान में पाकिस्तान के मुजफरगढ़ के गोविंदपुरा में हुआ था।)उन्होंने अपने जीवन में कई कठिनाईयों का सामना किया।भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त उनको भारत आना पड़ा लेकिन उस दौरान उनके 14 में से आठ भाई बहन और माता-पिता दंगो की भेंट चढ़ चुके थे। Milkha Singh ka  nam Flying Sikh kaise pda

ऐसे जख्मों के साथ वो भारत आए और फ़िर सेना में शामिल हो गए।सेना में भर्ती होना मिल्खा सिंह के जीवन का एक महत्वपूर्ण फैसला साबित हुआ।इस फैसले ने ही उनकी पूरी जिंदगी बदल दी और एक क्रॉस-कंट्री रेस ने उनके प्रभावशाली करियर की नींव रखी।इस दौड़ में 400 से अधिक सैनिक शामिल थे और इसमें उन्हें छठा स्थान हासिल किया था। Milkha Singh Carrier

ऐसे मिली थी फ्लाइंग सिख की उपाधि..

साल 1960 में मिल्खा सिंह ने पाकिस्तान में इंटरनेशनल एथलीट कंपीटशन में भाग लेने से इनकार कर दिया था। असल में वो दोनों देशों के बीच के बंटवारे की घटना को नहीं भुला पाए थे। इसलिए पाकिस्तान के न्योते को ठुकरा दिया था। हालांकि, बाद में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें समझाया कि पड़ोसी देशों के साथ मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखना जरूरी है। Milkha Singh Biography In Hindi

इसके बाद उन्होंने अपना मन बदल लिया। पाकिस्तान में इंटरनेशनल एथलीट में मिल्खा सिंह का मुकाबला अब्दुल खालिक से हुआ। यहां मिल्खा ने अब्दुल को हराकर इतिहास रच दिया। इस जीत के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने उन्हें 'फ्लाइंग सिख' की उपाधि से नवाजा।Milkha Singh Flying Sinkh Kaise Bne

अब्दुल खालिक को हराने के बाद उस समय के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान मिल्खा सिंह से कहा था, 'आज तुम दौड़े नहीं उड़े हो। इसलिए हम तुम्हे फ्लाइंग सिख के खिताब से नवाजते हैं।' इसके बाद से मिल्खा सिंह को पूरी दुनिया में 'फ्लाइंग सिख' के नाम से जाना जाने लगा।

मिल्खा सिंह का करियर.. Milkha Singh Career

मिल्खा सिंह ने तीन ओलंपिक 1956 मेलबर्न, 1960 रोम और 1964 टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लिया। रोम के 1960 और टोक्यो के 1964 ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व भी किया था इसके साथ ही उन्होंने 1958 और 1962 के एशियाई खेलो में भी स्वर्ण पदक जीता था। 1960 के रोम ओलंपिक खेलों में उन्होंने पूर्व ओलंपिक कीर्तिमान तोड़ा, लेकिन पदक से वंचित रह गए।इस दौरान उन्होंने ऐसा नेशनल कीर्तिमान बनाया, जो लगभग 40 साल बाद जाकर टूटा।इन्हें खेल के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए भारत में पद्मश्री भी प्रदान किया गया था

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